section 48
अपराधों का संज्ञान और उनके प्रथम की शक्ति
The Madhya Pradesh Electricity Reforms Act, 2000(1) कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का, आयोग द्वारा इस निमित्त साधारणतया या विशिष्टतया प्राधिकृत किए गए आयोग के किसी अधिकारी द्वारा लिखित में किए गए परिवाद पर ही संज्ञान करेगा अन्यथा नहीं और प्रथम वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय या उससे वरिष्ठ किसी न्यायालय से भिन्न कोई न्यायालय ऐसे अपराध का विचारण नहीं करेगा। (2) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का सं. 2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई मजिस्ट्रेट, यदि उसे ऐसा करने का कारण प्रतीत हो, परिवाद फाइल करने वाले आयोग के अधिकारी को वैयक्तिक हाजरी से अभिमुक्ति प्रदान कर सकेगा। (3) आयोग, लिखित में अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से, आयोग के द्वारा किए गए किसी आदेश के उल्लंघन से संबंधित किसी अपराध का, कार्यवाहियों के संस्थित किए जाने के पूर्व या पश्चात शमन कर सकेगा।
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