section 15
आयोग द्वारा अनुज्ञप्ति प्रदान किया जाना.
The Madhya Pradesh Electricity Reforms Act, 2000(१) आयोग, विहित प्ररूप में आवेदन किया जाने तथा ऐसी फीस का संदाय करने पर, जो कि आयोग विहित करे, किसी व्यक्ति को,-- (क) पारेषण के किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र में विद्युत् पारेषण करने के लिए; या (ख) विद्युत् या विद्युत् प्रदाय वृहद् रूप (बल्क) में किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र में विद्युत् प्रदाय करने के लिए किसी अन्य अनुज्ञप्तिधारी या व्यक्ति को उसका (विद्युत् का) उप-पारेषण या वितरण या प्रदाय करने हेतु प्राधिकृत करते हुए अनुज्ञप्ति प्रदान कर सकेगा. (२) ऐसी किसी भी अनुज्ञप्ति को प्रदान करने के संबंध में निम्नलिखित उपबंध लागू होंगे,-- (क) अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन करने वाला कोई ऐसा व्यक्ति आवेदन करने के पश्चात् १४ दिन के भीतर ऐसी रीति में तथा ऐसी विशिष्टियों सहित जो कि आयोग द्वारा विहित की जाएं, आवेदन की सूचना का प्रकाशन करेगा; (ख) आयोग तब तक अनुज्ञप्ति प्रदान नहीं करेगा जब तक कि-- (एक) अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन से संबंधित प्राप्त समस्त आक्षेपों पर आयोग द्वारा विचार न कर लिया गया हो : परंतु किसी भी आक्षेप पर आयोग तब तक विचार नहीं कर सकेगा जब तक कि वह खण्ड (क) के अधीन सूचना के प्रथम प्रकाशन की तारीख से ऐसे समय के भीतर जो आयोग द्वारा विहित किए जाएं, जो कि ३० दिन से कम का नहीं होगा, प्राप्त नहीं हो जाए; और (दो) किसी ऐसे क्षेत्र में, जिसमें किसी छावनी, हवाई अड्डे, दुर्ग, आयुधशाला या कैम्प या रक्षा प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार के अधिभोग में के किसी भवन या स्थान का संपूर्ण या कोई भाग सम्मिलित है, प्रदाय या पारेषण की अनुज्ञप्ति के लिए किसी आवेदन-पत्र के मामले में आयोग ने यह अभिनिश्चित न कर लिया हो कि वहां केन्द्र सरकार की ओर से अनुज्ञप्ति दिए जाने में कोई आपत्ति नहीं है. (३) भारतीय विद्युत् अधिनियम, १९१० (१९१० का सं. ९) की धारा ५२ या विद्युत् (प्रदाय) अधिनियम, १९४८ (१९४८ का सं. ५४) की धारा ३ की उपधारा (१) के खण्ड (दो) तथा धारा ७६ में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी इस अधिनियम के अधीन समस्त अनुज्ञप्तियों को प्रदान किए जाने की यह शर्त होगी कि आयोग को इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार विवादों का न्यायनिर्णयन करने या उन्हें तय करने के लिए मध्यस्थ के रूप में कार्य करने या मध्यस्थ को नामनिर्दिष्ट करने की शक्ति होगी. (४) (क)अनुज्ञप्ति में ऐसी अवधि सीमा जिस तक और ऐसे निबंधन तथा शर्तें जिनके अधीन विद्युत् का पारेषण या प्रदाय किया जाना हो, अंतर्विष्ट होंगी और उसमें ऐसी अन्य शर्तें भी अंतर्विष्ट होंगी जिन्हें आयोग इस अधिनियम के प्रयोजनों को प्राप्त करने के लिए समुचित समझे. (ख) खण्ड (क) के उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, अनुज्ञप्तिधारी से यह अपेक्षित होगा कि वह-- (एक) अपने (अनुज्ञप्तिधारी) द्वारा संचालित विद्युत् लाइनें, विद्युत् संयंत्र और सह उपस्कर के उपयोग के लिए किसी अन्य व्यक्ति से विनिर्दिष्ट निबंधनों पर करार करें; (दो) ऐसी जानकारी तथा दस्तावेजें जिनका आयोग अपने प्रयोजन के लिए या केन्द्रीय या राज्य सरकार या केन्द्रीय आयोग या केन्द्रीय विद्युत् प्राधिकारी के प्रयोजनों के लिए अपेक्षा करें, उपलब्ध कराए; (तीन) भारतीय विद्युत् अधिनियम, १९१० (१९१० का सं. ९) तथा विद्युत् (प्रदाय) अधिनियम, १९४८ (१९४८ का सं. ४) के अधीन बोर्ड के ऐसे कृत्यों और बाध्यताओं का, जैसा आयोग विनिर्दिष्ट करे, जिम्मा ले; (चार) ऐसी बातों पर जो अनुज्ञप्ति की शर्तों के अधीन या अपेक्षित हैं या उनसे विचलन के लिए अपेक्षित हैं, आयोग का अनुमोदन अभिप्राप्त करे; (पांच) कोई स्कीम जिसे अनुज्ञप्तिधारी लेना प्रस्तावित कर रहा है, जिसमें इस अधिनियम के उपबंधों और विद्युत् (प्रदाय) अधिनियम, १९४८ (१९४८ का सं. ५४) के लागू उपबंधों के अनुसार स्कीम भी सम्मिलित है, आयोग को अधिसूचित करे; (छह) मितव्ययी रीति में विद्युत् का क्रय करे जिसमें विद्युत् शक्ति की न्यूनतम लागत क्षमता के सिद्धांत का विचार और दर्शायी विद्युत् (शक्ति) क्रय उपशमन प्रक्रिया सम्मिलित है; (सात) विद्युत् प्रदाय के लिये मीटर लगाने के प्लाँइट्स तथा विद्युत् के पारेषण तथा प्रदाय में होने वाले नुकसान को कम करने के उपायों के लिये स्कीम प्रस्तुत करे; (आठ) अन्य अनुज्ञप्तिधारियों या उपभोक्ताओं को विद्युत् वृहद् रूप (बल्क) में प्रदाय करे; (नौ) आयोग द्वारा दिए गए निदेशों का अनुपालन करे; (दस) अनुज्ञप्ति के निबंधन के अनुरूप कार्य करें; (ग्यारह) इस अधिनियम, विनियमों, भारतीय विद्युत् अधिनियम, १९१० (१९१० का सं. ९) तथा विद्युत् (प्रदाय) अधिनियम, १९४८ (१९४८ का सं. ५४) या उनके अधीन विरचित नियमों की अपेक्षाओं जहां तक वे लागू हों, का अनुपालन करे. (५) उपधारा (४) में अंतर्विष्ट उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, आयोग द्वारा प्रदान की गई अनुज्ञप्ति में सम्मिलित शर्तों के अधीन अनुज्ञप्तिधारी से अपेक्षा की जा सकेगी कि वह टैरिफ स्थापित करे और समय-समय पर इस अधिनियम के उपबंधों से संगत अपने प्रभारों की गणना करे. (६) भारतीय विद्युत् अधिनियम, १९१० (१९१० का सं. ९) की अनुसूची में अंतर्विष्ट उपबंध सिवाय जहां तक कि अनुज्ञप्ति द्वारा उसे अभिव्यक्त रूप से परिवर्तित किया हो या उनमें छूट दी गई हो इस भाग के अधीन दी गई प्रत्येक प्रदाय अनुज्ञप्ति के साथ सम्मिलित समझे जाएंगे और उसके भाग बन जाएंगे और इस अधिनियम के प्रयोजनों की पहुंच में रहते हुए ऐसे परिवर्तन या अपवाद के अधीन रहते हुए, जिन्हें आयोग कर सकता है, राज्य में अपने क्रियाकलापों के संबंध में अनुज्ञप्ति द्वारा प्राधिकृत उपक्रम पर लागू होंगे : परंतु जहां आयोग द्वारा अन्य अनुज्ञप्तिधारियों को उनके द्वारा वितरण के लिए विद्युत् का प्रदाय करने के लिये प्रदाय अनुज्ञप्ति दी गई हो, जहां उक्त अनुसूची के खण्ड चार, पांच, छह, सात, आठ तथा बारह के उपबंध, जहां तक ऐसी अनुज्ञप्ति का ऐसे प्रदाय से संबंध हो, प्रदाय अनुज्ञप्ति में सम्मिलित किए गए नहीं समझे जाएंगे. (७) किसी अनुज्ञप्ति में सम्मिलित शर्तों में किसी शर्त के असंगत पर, ऐसी रीति में और ऐसी परिस्थितियों में जैसी कि उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं या शर्तें द्वारा या उनके अधीन अवधारित की जाएं, प्रभावहीन हो जाने या उसे उपार्जित किए जाने की शर्तें द्वारा उपवााप्त किया जा सकेगा. (८) किसी अनुज्ञप्ति में उपधारा (७) के आधार पर सम्मिलित कोई उपबंध इस अधिनियम की धारा १७ तथा धारा १८ की उपधारा (५) के द्वारा किए गए उपबंधों के अतिरिक्त प्रभावी होंगे. (९) जब तक किसी अनुज्ञप्ति के निबंधनों में विनिर्दिष्ट रूप से अन्यथा उपबंधित न हो तब तक किसी व्यक्ति को अनुज्ञप्ति का दिया जाना प्रदाय के उसी क्षेत्र के भीतर किसी अन्य व्यक्ति को समान प्रयोजन के लिए अनुज्ञप्ति प्रदान करने में बाधक नहीं होगा और अनुज्ञप्तिधारी किसी अनन्यता का दावा नहीं करेगा. (१०) इस अधिनियम के अनुसार आयोग द्वारा दी गई अनुज्ञप्ति में यह उपबंध हो सकेगा कि अनुज्ञप्तिधारी को, विद्युत् प्रदाय के मीटरिंग पाइंट, राजस्व वसूली, विद्युत् के असंयोजन, चोरी के लिये अभियोजन, मीटर बिगाड़ने, विद्युत् के अपयोजन और विद्युत् के पारेषण, उप पारेषण, वितरण या प्रदाय को प्रभावित करने वाले समस्त और उसी प्रकार के विषयों पर आयोग जैसा कि विहित करे कार्रवाई करने की शक्ति तथा प्राधिकार होगा. (११) आयोग, अनुज्ञप्तिधारियों तथा अन्य व्यक्तियों को ऐसी शक्ति और प्राधिकार का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करने का हकदार होगा जो कि उन्हें भारतीय विद्युत् अधिनियम, १९१० (१९१० का सं. ९) तथा विद्युत् (प्रदाय) अधिनियम, १९४८ (१९४८ का सं. ५४) के उपबंधों के अधीन दी जा सकती है/दिया जा सकता है.
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