section 39
आयोग द्वारा माध्यस्थम्
The Madhya Pradesh Electricity Reforms Act, 2000(१) (क) माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, १९९६ (१९९६ का सं. २६) में या माध्यस्थम् से संबंधित, किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, अनुज्ञप्तिधारियों के बीच उद्भूत होने वाला कोई विवाद आयोग को निर्दिष्ट किया जाएगा। (ख) आयोग, माध्यस्थ के रूप में कार्य करने के लिए अग्रसर हो सकेगा और विवाद का न्यायनिर्णयन करने और निपटारा करने के लिए पंचाट कर सकेगा या मध्यस्थों को नामनिर्दिष्ट कर सकेगा। (ग) ऐसे किसी न्यायनिर्णयन और निपटारे के संबंध में अनुसरित की जाने वाली पद्धति और प्रक्रिया ऐसी होगी जैसी कि विनियमों द्वारा विहित की जाए। (२) जहां कि आयोग द्वारा नियुक्त किसी मध्यस्थ द्वारा पंचाट दिया गया हो वहां इसे आयोग के समक्ष फाइल किया जाएगा और आयोग पंचाट पर समुचित आदेश पारित कर सकेगा, जिनमें,-(क) पंचाट की पुष्टि करने और उसे प्रवर्तित करने;(ख) पंचाट को अपास्त या उपांतरित करने; या(ग) मध्यस्थ द्वारा पुनर्विचार किए जाने के लिए पंचाट को विप्रेषित करने, के आदेश भी सम्मिलित होंगे। (३) उपधारा (२) के अधीन आयोग द्वारा दिया गया कोई पंचाट या आयोग द्वारा पारित कोई आदेश, आयोग का विनिश्चय या आदेश होगा तथा इस अधिनियम में यथा उपबंधित के अनुसार अपील करने योग्य होगा। (४) आयोग द्वारा उपधारा (२) के अधीन दिया गया कोई पंचाट, या आयोग द्वारा पारित किया गया कोई आदेश, उसी प्रकार प्रवर्तनीय होगा जैसे कि वह किसी सिविल न्यायालय की डिक्री हो। (५) आयोग, इस भाग के अधीन कार्यवाहियों के प्रारंभ होने के पूर्व किसी भी समय या कार्यवाहियों के लंबित रहने के दौरान, किसी भी समय ऐसे अंतरिम आदेश कर सकेगा जैसे कि आयोग समुचित समझे।
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