section 3
आयोग की स्थापना और गठन
The Madhya Pradesh Electricity Reforms Act, 2000(1) राज्य के लिए एक आयोग होगा जिसे मध्यप्रदेश राज्य विद्युत् नियामक आयोग के नाम से जाना जाएगा जो शाश्वत उत्तराधिकार के साथ एक निगमित निकाय होगा और जिसकी एक सामान्य मुद्रा होगी और उसे जंगम तथा स्थावर दोनों प्रकार की सम्पत्ति अर्जित करने, धारण करने और उनका व्ययन करने तथा संविदा करने की शक्ति होगी और वह उक्त नाम से वाद चलाएगा या उक्त नाम से उसके विरुद्ध वाद चलाया जाएगा। (2) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा आयोग गठित करेगी। आयोग एक अध्यक्ष (चेयरपर्सन) और दो सदस्यों से मिलकर बनेगा जो इस अधिनियम में उपबंधित रीति में चयनित और नियुक्त किए जाएंगे। राज्य सरकार किसी भी सदस्य को अध्यक्ष (चेयरपर्सन) के रूप में पदाभिहित करेगी। दो सदस्यों में पारस्परिक ज्येष्ठता की गणना उनकी अपनी-अपनी नियुक्ति की तारीख से की जाएगी। उस दशा में जब दो या अधिक व्यक्तियों का एक ही समय पर चयन किया जाता है तो राज्य सरकार, नियुक्ति करते समय उनमें ज्येष्ठता का अवधारण करेगी। (3) आयोग का अध्यक्ष (चेयरपर्सन) और उसके सदस्य आयोग के कृत्यों के अनन्यतः निर्वहन के लिए पूर्णकालिक रूप में नियुक्त किए जाएंगे और वे कोई अन्य पद धारण नहीं करेंगे या कोई अन्य कार्य हाथ में नहीं लेंगे। (4) केन्द्रीय अधिनियम की धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना क्रमांक 5726-एफ-3-20-तेरह/98 दिनांक 18-8-1998 द्वारा राज्य सरकार द्वारा गठित किया गया राज्य आयोग और इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तारीख को अस्तित्व में आने वाला आयोग इस अधिनियम के प्रयोजन के लिये प्रथम आयोग होगा और उसके संबंध में यह समझा जाएगा कि उसका गठन नियुक्त किए गए अध्यक्ष (चेयरपर्सन) और सदस्यों की पदावधि की शेष कालावधि के लिये इस अधिनियम के अधीन किया गया है। (5) आयोग का मुख्यालय भोपाल, मध्यप्रदेश में होगा और यह अन्य स्थानों पर अपने कार्यालय स्थापित कर सकेगा। आयोग, अपनी कार्यवाहियां, परामर्श और सुनवाई, राज्य में अन्य स्थानों पर संचालित करने का हकदार होगा।
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