section 21
अनुज्ञप्तिधारियों तथा उत्पादक कंपनियों पर निबंधन
The Madhya Pradesh Electricity Reforms Act, 2000(1) कोई भी अनुज्ञप्तिधारी या उत्पादक कम्पनी किसी भी जगह जहां तक विद्युत् के उत्पादन, पारेषण, उप-पारेषण, वितरण या प्रदाय का काम का संबंध है, आयोग की लिखित पूर्व सहमति के बिना, किसी भी अन्य ऐसे अनुज्ञप्तिधारी या व्यक्ति की अनुज्ञप्ति या उपक्रम को जो विद्युत् का उत्पादन, पारेषण, प्रदाय कर रहा है या उत्पादन, पारेषण, उप-पारेषण या विद्युत् प्रदाय करने का आशय रखता हो, क्रय द्वारा या अन्यथा अर्जित नहीं करेगा या उसके साथ सहयुवत नहीं होगा : परन्तु ऐसी सहमति के लिए आवेदन करने से पूर्व अनुज्ञप्तिधारी अपने आवेदन की- (क) आयोग को; और (ख) यदि अनुज्ञप्तिधारी प्रदाय अनुज्ञप्ति धारण करता है, अनुज्ञप्तिधारी के प्रदाय के क्षेत्र में प्रत्येक स्थानीय प्राधिकरण को तथा उस क्षेत्र में भी, यदि कोई हो, जिसमें ऐसा अन्य व्यक्ति विद्युत् प्रदाय करता है या विद्युत् प्रदाय करने का आशय रखता है, के स्थानीय प्राधिकरण को, कम से कम एक मास की सूचना देगा। स्पष्टीकरण.- इस धारा के प्रयोजन के लिए कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के साथ सहयुवत समझा जाएगा यदि वह किसी के स्वामित्व, प्रबंधन के कारण या किसी अन्य रीति से जुड़ा हुआ हो और अन्य व्यक्ति के साथ संयुक्त कारवार का हित रखता हो। (2) अनुज्ञप्तिधारी किसी भी समय, आयोग की लिखित पूर्व सहमति के बिना विक्रय, बन्धक, पट्टा, विनिमय द्वारा या अन्यथा अपनी अनुज्ञप्ति को समनुदेशित नहीं करेगा या अपने उपक्रम या उसके किसी भाग का अंतरण नहीं करेगा। (3) इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के पश्चात् विद्युत् (प्रदाय) अधिनियम, १९४८ (१९४८ का सं. ५४) की धारा ४४ के उपबंध राज्य में निम्नलिखित संशोधनों सहित लागू होंगे :- (क) उक्त धारा में अपेक्षित सहमति, उक्त धारा के अधीन यथाउपबंधि मंडल से अभिप्राप्त की जाने वाली ऐसी सहमति के स्थान पर वह आयोग से ली जाएगी; (ख) उक्त धारा ४४ की उपधारा (१) के परंतु के खण्ड (क), (ख) तथा (ग) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, आयोग को यह अधिकार होगा कि वह सहमति देने से इंकार कर दे, यदि आयोग की यह राय हो कि सहमति देने से राज्य में ऊर्जा प्रणाली के दक्षतापूर्ण रीति से प्रचलन में या विद्युत् उद्योग के निकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा या अन्यथा लोकहित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा; और (ग) उक्त धारा ४४ की उपधारा (३) के उपबंध राज्य में लागू नहीं होंगे। (4) किसी प्रदाय अनुज्ञप्ति का धारक, जब तक कि उसकी अनुज्ञप्ति के निबंधनों द्वारा या आयोग द्वारा पारित किसी सामान्य या विशेष आदेश द्वारा अभिव्यक्त रूप से प्रतिषिद्ध न हो, निम्नलिखित से विद्युत् का क्रय करने के लिए इंतजाम कर सकेगा :- (क) किसी प्रदाय अनुज्ञप्ति के धारक से जो ऐसी अनुज्ञप्ति के धारक को, अन्य अनुज्ञप्तिधारियों को उनके द्वारा वितरण के लिए विद्युत् प्रदाय करने की अनुज्ञा देता है; और (ख) ऊर्जा क्रय उपापन प्रक्रिया को शासित करने वाले आयोग द्वारा विहित विनियमों के अनुसार किसी भी विद्युत् उत्पादक कम्पनी से या अन्य विद्युत् प्रदायकों से। (5) यदि उपधारा (१), (२), (३) या (४) में वर्णित प्रकृति के किसी भी संव्यवहार से संबंधित कोई करार, जब तक वह उक्त उपबंधों में अंतर्विष्ट उपबंध के अनुसार उनके अध्यधीन नहीं किया जाता है, तो वह शून्य होगा।
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