section 29
Orders to ensure final compliance
The Madhya Pradesh Electricity Reforms Act, 2000(१) यदि आयोग अंतिम आदेश करना या अंतरिम आदेश को अंतिम आदेश के रूप में घोषित करना प्रस्तावित करता है, तो आयोग, - (क) यह कथन करते हुए कि वह अंतिम आदेश करना या अंतरिम आदेश को अंतिम आदेश के रूप में घोषित करना प्रस्तावित करता है; (ख) प्रस्तावित अंतिम आदेश के संबंध में धारा २८ की उपधारा (३) के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट जानकारी उपवर्णित करते हुए; और (ग) वह कालावधि विनिर्दिष्ट करते हुए (जो सूचना के प्रकाशन की तारीख से ६० दिन से कम की नहीं होगी) जिसके भीतर प्रस्तावित आदेश के विरुद्ध अभ्यावेदन या आक्षेप किए जा सकेंगे, सूचना देगा और उन अभ्यावेदनों या आक्षेपों पर विचार जो साक्यरूप से किए गए हैं और वापस नहीं लिए गए हैं। आयोग ऐसे अभ्यावेदनों या आक्षेपों की सूचना प्रकाशित करेगा और वह कालावधि (जो सूचना के प्रकाशन की तारीख से ३० दिन से कम की नहीं होगी) विनिर्दिष्ट करेगा, जिसके भीतर और अभ्यावेदन या आक्षेप किए जा सकेंगे। (२) उपधारा (१) के अधीन, - (क) ऐसी रीति में सूचना प्रकाशित करते हुए, जैसी कि मामलों को उन व्यक्तियों की जिनरो सूचना संबंधित हो, और जिनका कि उससे प्रभावित होना संभाव्य हो, जानकारी में लाने के प्रयोजन के लिए आयोग समुचित समझे; और (ख) उस अनुज्ञप्तिधारी को जिससे कि आदेश संबंधित हो, सूचना और प्रस्तावित अंतिम आदेश की एक-एक प्रति तामील कराते हुए, एक सूचना दी जाएगी। (३) आयोग, - (क) उस अनुज्ञप्तिधारी की सहमति के सिवाय जिससे कि प्रस्तावित अंतिम आदेश संबंधित हो; और (ख) उपधारा (४) की अपेक्षाओं का अनुपालन कर लिए जाने के पश्चात् के सिवाय, प्रस्तावित अंतिम आदेश को उपधारा (१) में निर्दिष्ट सूचना के प्रकाशन के अनुसरण में प्राप्त अभ्यावेदनों या आक्षेपों के परिणामस्वरूप उपांतरित नहीं करेगा। (४) आयोग, - (क) उस अनुज्ञप्तिधारी पर, जिससे कि प्रस्तावित अंतिम आदेश संबंधित हो, ऐसी सूचना जैसा कि आयोग को प्रस्तावित अंतिम आदेश को उपांतरित करने के लिए अपेक्षित प्रतीत हो, उपांतरणों के ब्योरे के साथ तामील करेगा; (ख) उस सूचना में वह कालावधि विनिर्दिष्ट करेगा (जो सूचना की तामीली की तारीख से ३० दिन से कम की नहीं होगी) जिसके भीतर प्रस्तावित उपांतरणों के विरुद्ध अभ्यावेदन या आक्षेप किए जा सकेंगे; और (ग) उन अभ्यावेदनों या आक्षेपों पर विचार करेगा जो विनिर्दिष्ट समय के भीतर साक्यरूप से किए गए हैं और वापस नहीं लिए गए हैं। (५) धारा २८ की उपधारा (६) के खण्ड (क) और (ख) के उपबंध अंतिम आदेशों को लागू होंगे। (६) अंतिम आदेश किया जाने के पश्चात्, आयोग, यथासाध्य शीघ्रता से, अंतिम आदेश की बाबत धारा २८ की उपधारा (७) के खण्ड (क) और (ख) में उपवर्णित प्रक्रिया का अनुसरण करेगा। (७) आयोग, अंतिम आदेश को किसी भी समय प्रतिसंहत कर सकेगा किंतु किसी अंतिम आदेश के प्रतिसंहार के पूर्व आयोग, - (क) यह कथित करते हुए कि वह आदेश को प्रतिसंहत करना प्रस्तावित करता है और इसके प्रभावों को उपवर्णित करते हुए; और (ख) वह कालावधि विनिर्दिष्ट करते हुए (जो सूचना का परिदान किए जाने की तारीख से ३० दिन से कम की नहीं होगी) जिसके भीतर प्रस्तावित प्रतिसंहार के विरुद्ध अभ्यावेदन या आक्षेप किए जा सकेंगे, सूचना देगा और उन अभ्यावेदनों या आक्षेपों पर विचार जो विनिर्दिष्ट समय के भीतर सम्यकरूप से किए गए हैं और वापस नहीं लिए गए हैं। (८) यदि उपधारा (७) के अधीन सूचना देने के पश्चात् आयोग, उस अंतिम आदेश को जिससे कि सूचना संबंधित हो, प्रतिसंहत न करने का विनिश्चय करता है तो वह अपने विनिश्चय की संबद्ध व्यक्तियों को सूचना देगा। (९) उपधारा (७) और (८) के अधीन सूचना, धारा २८ की उपधारा (७) के खण्ड (क) और (ख) में उपवर्णित प्रक्रिया के अनुसार दी जाएगी।
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