section 2
परिभाषाएं
The Madhya Pradesh Electricity Reforms Act, 2000इस अधिनियम में जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,- (क) "पारेषण का क्षेत्र" से ऐसा क्षेत्र अभिप्रेत है जिसके भीतर किसी पारेषण अनुज्ञप्ति का धारक या कोई अन्य व्यक्ति तत्समय विद्युत् पारेषित करने के लिये प्राधिकृत है; (ख) "आयोग" से अभिप्रेत है धारा 3 के अधीन गठित मध्यप्रदेश विद्युत् नियामक आयोग; (ग) "केन्द्रीय आयोग" से अभिप्रेत है विद्युत् नियामक आयोग अधिनियम, 1998 (केन्द्रीय अधिनियम, 1998 का सं. 14) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन गठित केन्द्रीय विद्युत् नियामक आयोग; (घ) "केन्द्रीय अधिनियम" से अभिप्रेत है विद्युत् नियामक आयोग अधिनियम, 1998 (1998 का सं. 14); (ङ) "विद्युत् उद्योग" से ऐसे व्यक्ति या अस्तियां अभिप्रेत हैं जो विद्युत् के कारबार या उसके उत्पादन के क्रियाकलापों, पारेषण, उप-पारेषण, वितरण के या विद्युत् प्रदाय या ऊर्जा प्रणाली के प्रचालन में, ऐसे कारबार और क्रियाकलापों के विनियमन और उससे संसक्त विषयों में संलग्न हों; (च) "उच्च न्यायालय" से अभिप्रेत है मध्यप्रदेश राज्य का उच्च न्यायालय; (छ) "स्थानीय प्राधिकरण" से अभिप्रेत है राज्य में नगरपालिका निगम, नगरपालिका, नगर पंचायत, जनपद पंचायत या जिला पंचायत किन्तु और कोई अन्य प्राधिकरण नहीं; (ज) "अनुज्ञप्ति" से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा 15 के अधीन प्रदान की गई कोई अनुज्ञप्ति और इसमें सम्मिलित है धारा 3 के अधीन प्रदान की गई अनुज्ञप्ति और इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के पूर्व भारतीय विद्युत् अधिनियम, 1910 (1910 का सं. 9) की धारा 28 के अधीन दी गई मंजूरी; (झ) "अनुज्ञप्तिधारी" या "अनुज्ञप्ति धारक" से अभिप्रेत है इस अधिनियम के भाग-पांच के अधीन विद्युत् पारेषित करने या प्रदाय करने के लिये अनुज्ञप्त कोई व्यक्ति और उसके अंतर्गत धारा 3 के अधीन अनुज्ञप्त व्यक्ति या ऐसा व्यक्ति भी है जिसे इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के पूर्व भारतीय विद्युत् अधिनियम, 1910 (1910 का सं. 9) की धारा 28 के अधीन मंजूरी प्रदान की गई है; (ञ) "सदस्य" से अभिप्रेत है आयोग का सदस्य और उसमें आयोग का चेयरपर्सन सम्मिलित होगा; (ट) "विहित" से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों द्वारा विहित; (ठ) "विनियम" से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन आयोग द्वारा बनाए गए विनियम; (ड) "नियम" से अभिप्रेत है राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियम; (ढ) "चयन-समिति" से अभिप्रेत है धारा 4 के अधीन गठित चयन-समिति; (ण) "राज्य" से अभिप्रेत है मध्यप्रदेश राज्य; (त) "राज्य सरकार" से अभिप्रेत है राज्य की सरकार; (थ) "पारेषित करना" से अभिप्रेत है किसी ऐसी प्रणाली द्वारा विद्युत् का परिवहन या पारेषण जो पूर्णतः या मुख्यतः, अतिरिक्त उच्च वोल्टेज और अतिरिक्त उच्च दाब लाइन (हाईटेंशन लाइन) और विद्युत् संयंत्र से मिलकर बनी है और जिसका उपयोग विद्युत् को एक उत्पादन केन्द्र से किसी उप केन्द्र को, किसी उत्पादन केन्द्र से अन्य को, या उप-केन्द्र से अन्य को, या अन्यथा एक स्थान से दूसरे स्थान को परिवर्तित करने के लिए और पहुंचाने के लिये और/या अन्तरित करने के लिये किया जाता है; (द) "प्रदाय" में उप पारेषण और वितरण सम्मिलित होगा; (ध) "उपक्रम" से अभिप्रेत है ऐसी कारबार इकाई जो राज्य में, यथास्थिति, उत्पादन, पारेषण के विनिर्दिष्ट क्षेत्र में विद्युत् के प्रदाय या राज्य में ऊर्जा प्रणाली के प्रचालन से संबद्ध किसी अन्य कार्यकलाप में संलग्न हो; (न) उन शब्दों तथा अभिव्यक्तियों का जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं किन्तु परिभाषित नहीं हैं और भारतीय विद्युत् अधिनियम, 1910 (1910 का सं. 9) या विद्युत् (प्रदाय) अधिनियम, 1948 (1948 का सं. 54) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होगा जो इन अधिनियमों में उनके लिए दिया गया है।
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