section 14
अनुज्ञापन
The Madhya Pradesh Electricity Reforms Act, 2000(१) कोई व्यक्ति जो ऐसा करने के लिए अनुज्ञप्ति द्वारा या इस अधिनियम के अधीन छूट के कारण प्राधिकृत है या जो भारतीय विद्युत् अधिनियम, १९१० (१९१० का सं. ९) या विद्युत् (प्रदाय) अधिनियम, १९४८ (१९४८ सं. ५४) के अधीन प्राधिकृत किया गया है या जिसे छूट दी गई है, से भिन्न कोई भी व्यक्ति राज्य में, - (क) विद्युत् पारेषण; या (ख) विद्युत् प्रदाय, जिसमें वृहद रूप (बल्क) में प्रदाय उप-पारेषण या वितरण सम्मिलित है, का कारोबार नहीं करेगा : परन्तु समस्त व्यक्ति जो भारतीय विद्युत् अधिनियम, १९१० (१९१० का सं. ९) या विद्युत् (प्रदाय) अधिनियम, १९४८ (१९४८ का सं. ५४) के अधीन प्राधिकृत हो या छूट दी गई है, के संबंध में यह समझा जाएगा कि वे उन निबंधनों तथा शर्तों पर जिन पर उसे पहले ही अनुज्ञप्ति या छूट दी जा चुकी है, इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्तिधारी हैं, और किसी अनुज्ञप्तिधारी को लागू इस अधिनियम के उपबंध यथा आवश्यक परिवर्तनों सहित ऐसे व्यक्ति पर लागू होंगे। (२) जहां कोई प्रश्न उद्भूत होता है कि क्या कोई व्यक्ति, उपधारा (१) में यथावर्णित विद्युत् पारेषण या प्रदाय करने के कारोबार में लगा है या नहीं लगा है, ऐसे प्रश्न पर आयोग का विनिश्चय अंतिम तथा आबद्धकारी होगा। (३) आयोग को किसी ऐसे व्यक्ति जिसे अनुज्ञप्ति नहीं दी गई है या अन्यथा प्राधिकृत नहीं किया गया है, को यह आदेशित करने की शक्ति होगी कि वह राज्य में विद्युत् पारेषण, उप-पारेषण, वितरण या प्रदाय करना बंद कर दे तथा उनसे संबंधित अपने साधित्र को विच्छेदित कर दे। (४) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी और अधिनियम के प्रारंभ होने से छह मास की कालावधि के दौरान, राज्य सरकार को राज्य में विद्युत् पारेषण या प्रदाय करने के कारोबार के लिए किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को बारह मास से अनधिक की अवधि तक ऐसे निबंधन तथा शर्तों पर जो राज्य सरकार इस अधिनियम के उपबंधों से संगत अवधारित करे निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन रहते हुए अंतिम अनुज्ञप्ति प्रदान करने की शक्ति होगी, - (क) राज्य सरकार द्वारा प्रदान की गई प्रत्येक अनंतिम अनुज्ञप्ति तत्काल आयोग के समक्ष रखी जाएगी और उसे इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन आयोग द्वारा अनुज्ञप्ति प्रदान किए जाने के लिए किया गया आवेदन समझा जाएगा; और (ख) इस धारा के अधीन प्रदान की गई प्रत्येक अनंतिम अनुज्ञप्ति उस तारीख से विधिमान्य नहीं रहेगी जो आयोग उपरोक्त खण्ड (क) में वर्णित अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन पर अपने आदेश में विनिर्दिष्ट करे।
Study data processing for this section.
PDF: pending for this language.