section 250
अनुहचत रूप से बे-कब्जा ककये गये भूहमस्वामी का पुन:स्थापन
The MP Land Revenue Code 1959(1) इस धारा और धारा 250-क के प्रयोजन के हलये; भूहम स्वामी के अन्तगडत मौरूसी कृषक और सरकारी पट्टेदार आयेंगे। (1-क) यकद ककसी भूहम स्वामी को भूहम से हवहध के सभयक् अनुिम में बे-कब्जा न करने अन्यथा बेकब्जा कर कदया गया हो, यकद कोई व्यहि भूहम स्वामी की ककसी ऐसी भूहम पर, हजसके कक उपयोग के हलये ऐसा व्यहि इस कोड के ककसी उपबन्ध के अधीन हकदार न रह गया हो, अप्राहधकृत रूप से कब्जा ककये रहे, तो भूहमस्वामी या उसका हहत-उत्तराहधकारी, (क) ककसी ऐसे भूहमस्वामी की दशा में जो ऐसी जनजाहत का हो हजसे धारा 165 की उपधारा (6) के अधीन आकदम जनजाहत घोहषत ककया गया हो – (एक) अप्राहधकृत बे-कब्जा के उन मामलों में जो कक 1 जुलाई सन् 1976 के पूवड के हों; 1 जुलाई सन् 1978 के पूवड; और (दो) ककन्हीं अन्य मामलों में, यथाहस्थहत बे-कब्जा ककये जाने की तारीख से उस तारीख से, हजसको कक ऐसे व्यहि का कब्जा अप्राहधकृत हो जाय, पाँच वषड के भीतर; (ख) खण्ड (क) के अन्तगडत न आने वाले ककसी भूहम स्वामी की दशा में, यथाहस्थहत कब्जा ककये जाने की तारीख से या उस तारीख से, हजसको कक ऐसे व्यहि का कब्जा अप्राहधकृत हो जाय, दो वषड के भीतर, तहसीलदार को यह आवेदन कर सकेगा कक उसे कब्जा वापस कदया जाय। (1-ख) तहसीलदार, यह ज्ञात होने पर कक ककसी भूहम स्वामी को उसकी भूहम से हवहध के सभयक् अनुिम में बे-कब्जा न करके अन्यथा बे-कब्जा कर कदया गया है, इस धारा के अधीन कायडवाहहयाँ स्व-प्रेरणा से आरभभ करेगा] (2) तहसीलदार, पिकारों से सभबहन्धत उनके दावों की जांच करने के पिात्, आवेदन को हवहनहित करेगा और जब वह भूहम स्वामी को कब्जा वापस कदये जाने का आदेश दे देता है, तो कफर वह उसे भूहम को कब्जा कदलायेगा भी । (2-क) इस धारा के अधीन आरभभ की गई कायडवाहहयाँ, दूसरे पिकार से उत्तर प्राप्त हो जाने के पिात् तब तक कदन-प्रहत-कदन चालू रहेंगी जब तक कक दीघडकाहलक स्थगन अहभहलहखत ककये जाने वाले कारणों से आवश्यक न समझा जाये, और उस दशा में उस आदेश – पत्रक (order - sheet) की, हजसमें कक ऐसे स्थगन के हलये कारण अन्तर्तवष्ट हों; एक प्रहत कलेक्टर को भेजी जायेगी। (3) तहसीलदार; जांच के ककसी भी प्रिम पर, यथाहस्थहत, भूहमस्वामी, मौरूसी कृषक या सरकारी पट्टेदार को भूहम का कब्जा कदये जाने के हलये अंतररम आदेश पाररत कर सकेगा, यकद वह इस हनष्कषड पर पहुँचा है कक उसे इस धारा के अधीन आवेदन प्रस्तुत ककये जाने या स्व-प्रेरणा से कायडवाहहयाँ प्रारभभ की जाने के पूवड के छह माह के भीतर उसे हवरोधी पिकार द्वारा बे-कब्जा कर कदया गया था। ऐसे ककसी मामले में हवरोधी पिकार को, यकद आवश्यक हो, तहसीलदार के आदेशों के अधीन बेदखल कर कदया जायेगा । (4) जब उपधारा (3) के अधीन कोई अन्तररम आदेश पाररत कर कदया गया हो, तो तहसीलदार द्वारा हवरोधी पिकार से यह अपेिा की जा सकेगी कक वह तहसीलदार द्वारा अहन्तम आदेश पाररत ककया जाने तक उस भूहम का कब्जा लेने से हवरत रहने के हलये ऐसी राहश का जैसी कक तहसीलदार उहचत समझे, बन्धपत्र हनष्पाकदत करें । (5) यकद यह पाया जाय कक बन्धपत्र हनष्पाकदत करने वाले व्यहि ने बन्धपत्र के उल्लंघन में उस भूहम में प्रवेश ककया है या उसका कब्जा ले हलया है, तो तहसीलदार बन्धपत्र को पूणडत: या भागत: समपह्त कर सकेगा और ऐसी रकम भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूल कर सकेगा । (6) यकद उपधारा (2) के अधीन पाररत ककया गया आदेश आवेदक के पि में हो तो तहसीलदार हवरोधी पिकार द्वारा आवेदक को संदत्त ककया जाने वाला प्रहतकर भी अहधहनणीत करेगा जो उस दर पर होगा जो दो हजार रूपये प्रहत हेक्टर प्रहतवषड के आनुपाहतक हो । (7) इस धारा के अधीन अहधहनणीत ककया गया प्रहतकर भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूली योग्य होगा। (8) जब उपधारा (2) अधीन, भूहमस्वामी को पुन: कब्जा कदलाया जाने के हलये, तो तहसीलदार हवरोधी पिकार को इस बात के हलये अपेहित कर सकेगा कक वह आदेश दे कदया गया हो, आदेश के उल्लंघन में भूहम का कब्जा लेने से हवरत रहने के हलये ऐसी राहश का, जैसी कक तहसीलदार उहचत समझे, बन्धनामा हनष्पाकदत करे। (9) जहां उपधारा (2) के अधीन, भूहमस्वामी को पुन: कब्जा कदलाया जाने के हलये आदेश दे कदया गया हो, वहा हवरोधी पिकार जुमाडने के, जो ऐसी भूहम के बाजार मूल्य का बीस प्रहतशत तक का हो सकेगा के हलये भी दाहयत्वाधीन होगा।
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