section 20
भू-अहभलेख अधीिक तथा सहायक भू-अहभलेख अधीिकों की हनयुहि
The MP Land Revenue Code 1959(1) जहां कुकड की जाने वाली सभपहत्त कृहष उपज है, वहां कुकी के वारण्ट की एक प्रहत– (क) उस दशा में जब, ऐसी उपज उगती फसल है, उस भूहम पर, हजसमें ऐसी फसल उगी है, या (ख) उस दशा में, जब ऐसी उपज काटी जा चुकी है, या इकठी की जा चुकी है, खहलहान में या अनाज गहाने के स्थान में या तदरूप स्थान में या चारे के ढेर पर, हजस पर या हजसमें वह हनहिप्त की गई है; लगाकर और एक अन्य प्रहत उस गृह के, हजसमें कक बकायादार मामूली तौर से हनवास करता है, बाहरी द्वारा पर या ककसी अन्य सहजदृश्य भाग पर लगाकर या यकद कोई ऐसा गृह न हो, तो उस गृह के, हजसमें कक वह कारबार करता है या अहभलाभ के हलये स्वयं काम करता है या हजसके बारे में यह ज्ञात है कक वहां वह अंहतम बार हनवास करता था या कारबार करता था या अहभलाप के हलये स्वयं काम करता था, बाहरी द्वारा पर या उसके ककसी अन्य सहजदृश्य भाग पर लगाकर कुकी की जायेगी, और तदुपरर यह समिा जायेगा कक न्यायालय के कब्जे में आ गई है । (2) कुकी करने वाला अहधकारी कृहष उपज की अहभरिा के हलये और साथ उपज की रखवाली करने, कटाई करने, इसे इकठा करने और उसे भण्डार में रखने के हलये ऐसी व्यवस्था करेगा जैसा कक वह पयाडप्त समझे और उसे पकड़ने या उसके परररिण के हलये आवश्यक कोई अन्य कायड करेगा । (3) उपहनयम (2) के अधीन उपगत खचे बकायादार द्वारा वहन ककये जायेंगे ।
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