section 170
धारा 165 के उल्लंघन में ककये गये अन्तर का पररवजडन
The MP Land Revenue Code 1959--- (1) जहां ककसी भूहम स्वामी द्वारा कब्जे का अंतरण ककसी ऐसे अंतरण के अनुसरण में ककया गया हो जो कक धारा 165 की उपधारा (6) के उल्लंघन में हो, यहां कोई भी ऐसा व्यहि जो ककसी ऐसे भूहमस्वामी का हजसके कक कोई हनकटतर वाररस न हों उत्तरजीवी होने की दशा में उस खाते को हवरासत में प्राप्त करता – (एक) 1 जुलाई सन् 1976 के पूवड कब्जे के अंतरण के मामले में, 31 कदसभबर सन् 1978 तक; और (दो) पिात्वती मामलों में कब्जे के ऐसे अंतरण के बारह वषड के भीतर उपखंड अहधकारी को आवेदन कर सकेगा कक उसे इस बात के अध्यधीन कब्जा कदलाया जाय कक उसे भू-राजस्व की बकाया या ककन्हीं भी अन्य शोध्यों, जो कक उस खाते पर भार हों, बाबत वे दाहयत्व स्वीकायड होंगें हजन्हें कक उपखंड अहधकारी इस सभबंध में बनाये गये हनयमों के अनुसार अवधाररत करे और उपखंड अहधकारी ऐसे आवेदन का हनपटारा ऐसी प्रकिया के अनुसार करेगा जैसी कक हवहहत की जाय । (2) जहां भूहमस्वामी की कोई भूहम धारा 165 की उपधारा (5) उल्लंघन में बेची जाती है वहां वह न्यायालय हजसके कक द्वारा ऐसे हविय का आदेश कदया जाता है, उस भूहमस्वामी के या ककसी भी ऐसे व्यहि के; जो उस भूहमस्वामी का हजसके कक कोई हनकटतर वाररस न हों उत्तरजीवी होने की दशा में उस खाते को हवरासत में प्राप्त करता, आवेदन पर जो ऐसे हविय को दो वषड के भीतर ककया गया हो; उस हविय को अपास्त कर देगा और आवेदन को उस भूहम का कब्जा इस बात के अध्यधीन कदलाएगा कक उसे भू-राजस्व की बकाया या ककन्हीं भी अन्य शोध्यों; जो कक उस भूहम पर भार हों, सभबंधी दाहयत्व स्वीकायड होंगे ।
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