section 165
अन्तरण के अहधकार
The MP Land Revenue Code 1959(1) इस धारा के अन्य उपबन्धों के तथा धारा 168 के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए भूहमस्वामी अपनी भूहम का कोई भी हहत [………] अन्तररत कर सकेगा। (2) उपधारा (1) में ककसी बात के होते हुए भी— (क) भूहमस्वामी द्वारा ककसी भूहम का कोई भी बन्धक इसके पिात् तब तक हवहधमान्य नहीं होगा जब तक कक कम से कम पाँच एकड हससचत भूहम या दस एकड़ अससहचत भूहम ककसी भी हवल्लंगम या भार से मुि रूप में उसके पास न बच जाय; (ख) खंड (क) के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, भूहमस्वामी द्वारा ककसी भी भूहम का कोई भाग बन्धक इसके पिात् हवहधमान्य नहीं होगा यकद वह छह वषड से अहधक की कालावहध के हलये हो, और जब तक कक उस बन्धक की एक शतड यह न हो कक बन्धक हवलेख में वर्तणत की गई कालावहध का अवसान हो जाने पर उस बन्धक के सभबन्ध में यह समझा जायेगा कक भूहमस्वामी द्वारा ककसी भी प्रकार का कोई भुगतान ककये हबना ही उसका पूणडत: मोचन हो गया है, और बन्धकदार उस बन्धक भूहम का कब्जा भूहमस्वामी को तुरन्त वापस दे देगा ; (ग) यकद बन्धक की गई भूहम का कोई कब्जा बन्धकदार बन्धक की कालावहध का छह वषड का, इनमें से हजसका भी अवसान पहले होता हो, अवसान हो जाने के पिात् भूहम का कब्जा नहीं सौपता है, तो बन्धकदार तहसीलदार के आदेश द्वारा अहतचारी के तौर पर बेदखल ककये जाने का दायी होगा और तहसीलदार द्वारा बन्धककताड को उस भूहम का कब्जा कदया जायेगा : परन्तु इस उपधारा में की कोई भी बात ककसी ऐसी भूहम के बन्धक के मामले में लागू नहीं होगी जो भूहमस्वामी द्वारा कृहष -हभि प्रयोजनों के हलये धाररत हो (3) जहां भूहमस्वामी उपधारा (2) के उपबन्धों के अनुसरण में अपनी भूहम का कोई ऐसा बन्धक करता है जो भोग-बन्धक से हभि हो, वहां बन्धक हवलेख में अन्तर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी, बन्धक के अधीन प्रोद्भूत होने वाले ब्याज की कुल रकम बन्धकदार द्वारा दी गई मूल रकम के आधे से अहधक नही होगी। (4) उपधारा (1) में अंतर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी, ककसी भी भूहमस्वामी को यह अहधकार नहीं होगा कक वह कोई भी भूहम- (क) ककसी ऐसे व्यहि के पि में अंतररत करे जो ऐसे अंतरण के फलस्वरूप उतनी भूहम का हकदार हो जावेगा जो स्वयं उसके द्वारा या उसके कुटुभब द्वारा धाररत भूहम, यकद कोई हो; सहहत खेल हमलाकर ऐसी अहधकतम सीमाओं से, जो कक हवहहत की जाएं, अहधक हो जाये; (ख) x x x]; परन्तु- (एक) इस उपधारा में की कोई भी बात हनम्नहलहखत दशाओं में लागू नहीं होगी- (क) (एक) ककसी सावडजहनक, धार्तमक या पूतड प्रयोजनों के हलये स्थाहपत ककसी संस्था के पि में ककये गये अंतरण या औद्योहगक प्रयोजन के हलये ककये गये अंतरण या बन्धक के रूप में ककये गये अंतरण की दशा में; (दो) ककसी सहकारी सोसाइटी के पि में औधोहगक प्रयोजन के हलये ककये गये अंतरण या बन्धक रूप में ककये गये अंतरण की दशा में; तथाहप इस शतड के अध्यधीन रहते हुए कक कृहष प्रयोजनों के हलये कोई भी बन्धक, ककसी अहग्रम की वसूली के हलये हविय की धारा 147 के खंड (ख) के उल्लंघन में प्राहधकृत नहीं करेगा; (ख) कृहष हभि प्रयोजनों के हलये धाररत भूहम के अंतरण की दशा में :
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