Bare Act
The MP Land Revenue Code 1959
0. Preamble
मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहहता, 1959 हवषय-सूची धारा हवषय अध्याय-1 प्रारहभभक
1. संहिप्त नाम, हवस्तार तथा प्रारभभ
(1) इस अहधहनयम का संहिप्त नाम मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहहता है । (2) इसका हवस्तार सभपूणड मध्यप्रदेश पर है ककन्तु इस संहहता में अन्तर्तवष्ट कोई भी बात, भू-राजस्व के भुगतान के हलये भूहम के दाहयत्व, भूहम के उपयोग के प्रहत हनदेश से भू-राजस्व के हनधाडरण, भू-राजस्व की उगाही से सभबहन्धत उपबन्धों को और उनसे आनुषंहगक समस्त उपबन्धों को छोड़कर ऐसे िेत्रों को लागू नहीं होगी हजन्हें भारतीय वन अहधहनयम, 1927 (1927 का सं. 16) के अधीन समय-समय पर, आरहित या संरहित वनों के रूप में गरठत ककया जाये: परन्तु इस संहहता के पूवोि उपबन्ध ऐसे िेत्रों में धारा 59 में हवहनर्ददष्ट प्रयोजनों में से एक या अहधक प्रयोजन के हलये, भूहम के उपयोग के प्रहत हनदेश से लागू होंगे । (3) यह संहहता ऐसी तारीख को प्रवृत्त होगी, हजसे राज्य सरकार अहधसूचना द्वारा हनयत करें ।
2. पररभाषाएँ
(1) इस संहहता में, जब तक हवषय या संदभड से कोई बात हवरूद्ध न हो, -- (क) “आबादी” से अहभप्रेत है – नगरेतर िेत्र के ककसी ग्राम में उसके हनवाहसयों के हनवास के हलये या उससे आनुषंहगक प्रयोजनों के हलये समय-समय पर आरहित िेत्र और इस अहभव्यहि के ककसी अन्य स्थाहनक पयाडय, जैसे “ग्राम स्थल” या “गाँव स्थान” का अथड भी तदनुसार लगाया जायेगा; (ख) “कृहष” के अन्तगडत है – (एक) वार्तषक या हनयतकाहलक फसलों का, हजसमें पान तथा ससघाड़े और उद्यान की उपज सहभमहलत है, उगाया जाना; (दो) उद्यान कृहष; (तीन) फलोद्यान लगाना तथा उनका समारिण; (चार) चारे, चराई या छप्पर छाने की घास के हलये भूहम का आरहित ककया जाना; और (पांच) नगरीय िेत्रों की उपांत सीमा से पांच ककलोमीटर से अहधक की दूरी पर हस्थत ककसी िेत्र में कुक्कुट पालन, मछली पालन या पशु पालन के हलए भूहम का उपयोग करना । (ग) “कृहष वषड” से अहभप्रेत है 1 जुलाई या ऐसी अन्य तारीख को, हजसे राज्य सरकार, अहधसूचना द्वारा, हनयत करें, प्रारभभ होने वाला वषड; (घ) “बोड” (मण्डल) से अहभप्रेत है धारा 3 के अधीन गरठत राजस्व बोड; (ड़) “वास्तहवक कृषक” से अहभप्रेत है कोई ऐसा व्यहि जो भूहम पर स्वयं खेती करता है या हजससे युहियुि रूप से यह प्रत्याशा की जा सकती है कक वह स्वयं खेती करेगा; (च) “सहकारी सोसायटी” से अहभप्रेत है सहकारी सोसायरटयों से सभबहन्धत ककसी हवहध के, जो राज्य के ककसी िेत्र में तत्समय प्रवृत्त है, अधीन उस रूप में रहजस्रीकृत सोसायटी; (छ) “सरकारी वन” से अहभप्रेत है कोई ऐसा वन जो भारतीय वन अहधहनयम, 1927 (1927 का संखयांक 16) के उपबन्धों के अनुसार आरहित वन या संरहित वन के रूप में गरठत ककया गया है; (ज) “सरकारी पट्टेदार” से अहभप्रेत है वह व्यहि जो राज्य सरकार से धारा 181 के अधीन भूहम धारण करता है; (झ) “खाता” से अहभप्रेत है, (एक) ऐसी भूहम-खण्ड हजस पर भू-राजस्व पृथक रूप से हनधाडररत ककया गया है और जो एक भूधृहत के अधीन धाररत है; और (दो) कृषक द्वारा धाररत भूहम के संदभड में कोई ऐसा भूहम-खंड जो भूहम स्वामी से एक ही पट्टे के अधीन या एक ही संवगड की शतों के अधीन धाररत है । (ज्ञ) “सुधार” से ककसी खाते के संदभड में, अहभप्रेत है कोई ऐसा संकमड हजससे खाते के मूल्य में ताहत्वक वृहद्ध होती है, खाते के हलये उपयुि है तथा उस प्रयोजन से संगत है हजसके हलये खाता धाररत है और जो यकद खाते पर हनष्पाकदत न ककया हो, तो या तो प्रत्यित: उसके फायदे के हलये हनष्पाकदत ककया गया है या हनष्पाकदत ककया जाने के पिात् उसके हलये प्रत्यित: फायदाप्रद बना कदया गया है; और पूवडगामी उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, उसके अन्तगडत है – (एक) कृहष प्रयोजनों के हलये जल के संग्रहण, प्रदाय या हवतरण के हलये तालाबों, कुओं, जल सरहणयों, बाँधों तथा अन्य संकमों का सहिमाडण; (दो) भूहम के जल-हनकास के हलये या बाढ़ों से या जल द्वारा कटाव से या जल से होने वाले अन्य नुकसान से भूहम के संरिम के हलये संकमों का सहिमाडण; (तीन) वृिारोपण और भूहम का कृष्यकरण, भूहम की सफाई, उसका घेरा लगाना, उसे समतल करना या उसकी सीढ़ी बन्दी करना; (चार) आबादी या नगरीय िेत्र में न होकर अन्यत्र होने वाले खाते पर या उसके सामीप्य में ऐसे भवनों का पररहनमाडण जो उस खाते के सुहवधाजनक या लाभदायक उपयोग या अहधगम के हलये अपेहित हों; और (पाँच) पूवडगामी संकमों में से ककसी भी संकमड का नवीकरण या पुनसडहिमाडण या उसमें पररवतडन या पररवधडन । ककन्तु उसके अन्तगडत हनम्नहलहखत नहीं है – (क) अस्थायी कुएँ और ऐसी जलसरहणयाँ, बाँध समतलन घेरे या अन्य संकमड या ऐसे संकमों में छोटे-मोटे पररवतडन या उनकी मरभमत जो कक उस स्थान के खेहतहरों द्वारा कृहष के मामूली अनुिम में सामान्यत: की जाती है; या (ख) कोई ऐसा संकमड, हजससे कहीं भी हस्थत ककसी ऐसी भूहम के मूल्य में सारभूत रूप से कमी होती है हजसे कक कोई अन्य व्यहि भूहमस्वामी की हैहसयत में या मौरूसी कृषक की हैहसयत में अहधभोग रखता है । स्पष्टीकरण – ककसी ऐसे संकमड को, हजससे, हवहभि खातों को फायदा पहुँचता है, ऐसे खातों में से प्रत्येक खाते के संबंध में सुधार समझा जा सकेगा । (ट) “भूहम” से अहभप्रेत है धरती की सतह का कोई भाग चाहे वह जल के नीचे हो या न हो; और जहाँ भी इस संहहता के प्रहत हनदेश ककया गया है, वहाँ उसके सभबन्ध में यह समझा जायेगा कक उसके अन्तगडत वे समस्त चीजें हैं, जो ऐसे भूहम से बद्ध हैं, या ऐसी भूहम के बद्ध ककसी चीज से स्थायी रूप से जकड़ी हुई हैं; (ठ) “भूहमहीन व्यहि” से अहभप्रेत है वह व्यहि जो वास्तहवक कृषक है और जो अकेले या अपने कुटुभब के अन्य सदस्यों के संयुि रूप से कोई भूहम धारण नहीं करता है या इतनी भूहम धारण है हजसका िेत्रफल उस िेत्रफल से कम है जो कक इस संबंध में हवहहत ककया जाये; स्पष्टीकरण – इस खण्ड के प्रयोजनों के हलये यह समझा जायेगा कक ककसी व्यहि का कुटुभब उसकी पत्नी या पहत, सन्तहत तथा माता-हपता से हमलकर बना है । (ड) “भूहम अहभलेख” से अहभप्रेत है इस संहहता के उपबन्धों के अधीन रखे गये अहभलेख; (ढ) “हवहध व्यवसायी” से अहभप्रेत है कोई ऐसा व्यहि जो हवहध व्यवसायी अहधहनयम, 1879 (1879 का सं. 18) के अधीन या तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य हवहध के अधीन मध्यप्रदेश के न्यायालयों में ककसी भी न्यायालय में से हवहध-व्यवसाय करने का हकदार है; (ण) “आम्रकुंज” से अहभप्रेत है आम के वृि जो इतनी संखया में लगाये गये हैं कक उनसे उस भूहम का, हजस पर कक वे खड़े हैं, या उसके ककसी बड़े प्रभाग का, मुखयत: ककसी ऐसे प्रयोजन के हलये जो वृिारोपण से हभि हो उपयोग में लाया जाना रूक जाता है या उन आम के वृिों के पूरी तरह बढ़ जाने पर यह संभाव्य है कक उनसे भूहम का या उसके ककसी बड़े प्रभाग का, मुखयत: उि प्रयोजन के हलये उपयोग में लाया जाना रूक जायेगा; (णक) ”बाजार मूल्य” से अहभप्रेत है भारतीय स्टाभप अहधहनयम, 1899 (1899 का 2) के अधीन बनाए गए मध्यप्रदेश बाजार मूल्य मागडदशडक हसद्धांतों का बनाया जाना तथा उनका पुनरीिण हनयम, 2000 के अधीन कलेक्टर द्वारा जारी ककए गए मागडदशडक हसद्धांतों के अनुसार हनधाडररत भूहम का मूल्य; (त) “फलोद्यान” से अहभप्रेत है फल के वृि जो इतनी संखया में लगाये गये हैं कक उनसे उस भूहम का, हजस पर कक वे खड़े हैं, या उसके ककसी बड़े प्रभाग का मुखयत: ककसी ऐसे प्रयोजन के हलये जो वृिारोपण से हभि हो, उपयोग में लाया जाना रूक जाता है या उन फलों के वृिों के पूरी तरह बढ़ जाने पर यह सभभाव्य है कक उससे भूहम का या उसके ककसी बड़े प्रभाग का, मुखयत: उि प्रयोजन के हलये उपयोग में लाया जाना रूक जायेगा; (थ) “भू-खंड संखयांक” से अहभप्रेत है नगरीय िेत्र में की भूहम का वह प्रभाग जो धारा 93 के अधीन भू-खण्ड संखयांक के रूप में हवरहचत ककया गया है या उस रूप में मान्य ककया गया है और हजसकी बाबत िेत्रफल तथा देय-भू-राजस्व की प्रहवहष्ट हवहहत अहभलेखों में सूचक संखयांक के अधीन पृथक-पृथक की गई है तथा उसके अन्तगडत भूहम का कोई ऐसा प्रभाग भी है हजसकी प्रहवहष्ट पूवड के अहभलेखों में खसरा या सवेिण नामक सूचक संखयांक के अधीन की गई है; (द) “मान्यता प्राप्त अहभकताड” से, इस संहहता के अधीन कायडवाही के पिकार के संदभड में अहभप्रेत है – (एक) वह व्यहि हजसे ऐसे पिकार ने, ऐसी कायडवाहहयों में उसकी ओर से उपसंजात होने तथा आवेदन करने एवं अन्य कायड करने के हलये, मुखतारनामे के अधीन प्राहधकृत ककया है; और (दो) वह व्यहि हजसे ऐसे पिकार ने, ऐसी कायडवाहहयों में उसकी ओर से उपसंजात (हाहजर) होने के हलये हलहखत में प्राहधकृत ककया है; (ध) “िेत्र” से अहभप्रेत है यथाहस्थहत महाकौशल िेत्र, मध्य भारत िेत्र, भोपाल िेत्र, हवन्ध्यप्रदेश िेत्र और हसरोंज िेत्र, या इनमें से कोई भी िेत्र; (न) “लगान” से अहभप्रेत है वह कुछ भी जो – (एक) धारा 188 के उपबंधों के अनुसार मौरूसी कृषक द्वारा अपने भूहमस्वामी को, या पट्टेदार द्वारा अपने भूहमस्वामी को, उसके द्वारा ऐसे भूहमस्वामी से धाररत भूहम के उपयोग या अहधभोग के मद्दे;
3. राजस्व मण्डल का गठन
(1) मध्यप्रदेश के हलये एक राजस्व मण्डल होगा जो अध्यि तथा दो या दो से अहधक इतने अन्य सदस्यों से, हजतने कक राज्य सरकार, समय-समय पर, हनयुि करना ठीक समझे, हमल कर करेगा । (2) इस संहहता के प्रवृत्त होने के ठीक पूवड इस राज्य के हवहभि िेत्रों के हलये गरठत तथा कायडरत राजस्व मण्डल को, हजसे इस अध्याय में इसके पिात् हवद्यमान – मण्डल कहा गया है, इस संहहता के प्रवृत्त होने की तारीख से इस धारा के अधीन गरठत मध्यप्रदेश के हलये राजस्व मण्डल समझा जायेगा । (3) हवद्यमान मण्डल के अध्यि तथा सदस्य मध्यप्रदेश राजस्व मण्डल के िमश: प्रथम अध्यि तथा सदस्य होंगे ।
4. राजस्व मण्डल का प्रधान स्थान तथा उसकी बैठकों के अन्य स्थान
(1) मण्डल का प्रधान स्थान ऐसे स्थान पर होगा हजसे राज्य सरकार, अहधसूहचत आदेश द्वारा, हनयत करें । (2) उपधारा (1) में ककसी बात के होते हुए भी, मण्डल का अध्यि तथा उसके सदस्य ऐसे अन्य स्थान या स्थानों पर भी बैठक कर सकेंगे हजन्हें मण्डल का अध्यि, राज्य सरकार के अनुमोदन से, हनयत करे ।
5. मण्डल के सदस्यों की सेवा शतें
(1) जब कोई सदस्य, अनुपहस्थहत के कारण या अन्यथा; अपने पद के कतडव्यों का पालन करने में असमथड है तो राज्य सरकार, अहधसूचना द्वारा, ककसी व्यहि को, तत्समय के हलये मण्डल का सदस्य हनयुि कर सकेगी । (2) इस संहहता द्वारा अहभव्यि रूप से उपबहन्धत के हसवाय, मण्डल के अध्यि तथा सदस्यों की सेवा के हनबन्धन तथा शतें ऐसी होंगे जैसी कक हवहहत की जायें और हवद्यमान मण्डल के अध्यि तथा सदस्यों के हलये राज्य सरकार द्वारा अहधकहथत ककये गये हनबन्धन तथा शतें तब तक प्रवृत्त बनी रहेंगी जब तक कक वे इस धारा के अधीन उपान्तररत या अहतहष्ठत न कर दी जाएँ । (3) कोई व्यहि मण्डल के सदस्य के रूप में हनयुहि के हलये जब तक अर्तहत नहीं होगा, जब तक कक वह – (क) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में हनयुहि के हलये पात्र नहीं है; या (ख) राजस्व अहधकारी न रह चुका हो, और कलेक्टर की पद श्रेणी से अहभि पद श्रेणी का पद कम से कम पाँच वषड तक धारण न कर चुका हो ।
6. वेतन तथा भत्ते
मण्डल के सदस्यों को ऐसे वेतन तथा भत्तों का संदाय ककया जायेगा जैसे कक राज्य सरकार अवधाररत करे और वे वेतन तथा भत्ते राज्य की संहचत हनहध पर पाररत होंगे।
7. मण्डल की अहधकाररता
(1) मण्डल ऐसी शहियों का प्रयोग करेगा जो इस संहहता द्वारा या इस संहहता के अधीन उसे प्रदत्त की गई हैं तथा ऐसे कृत्यों का हनवडहन करेगा जो इस संहहता द्वारा या इस संहहता के अधीन उसे प्रदत्त ककये गये हैं और वह राज्य सरकार के ऐसे कृत्यों का हनवडहन करेगा हजन्हें राज्य सरकार, अहधकार, अहधसूचना द्वारा , उस संबंध में हवहनर्ददष्ट करे तथा वह ऐसे अन्य कृत्यों का हनवडहन करेगा जो ककसी केन्रीय अहधहनयम या ककसी राज्य अहधहनमय द्वारा या उसके अधीन मुखय राजस्व प्राहधकारी या मुखय हनयंत्रक राजस्व प्राहधकारी को प्रदत्त ककये गये हों या प्रदत्त ककये जायें । (2) राज्य सरकार, ऐसी शतों के साथ जैसी कक वह अहधरोहपत करना ठीक समझे, मण्डल को या मण्डल के ककसी सदस्य को अहधसूचना, द्वारा ऐसी अहतररि शहियाँ प्रदान कर सकेगी या ऐसे अहतररि कृत्य सौंप सकेगी जो तत्समय प्रवृत्त ककसी अहधहनयहमत द्वारा या उसके अधीन राज्य सरकार को समनुदेहशत हैं ।
8. मण्डल की अधीिण सभबन्धी शहियाँ
मण्डल को समस्त मामलों के सभबन्ध में, जो उसकी अपील या पुनरीिण सभबन्धी अहधकाररता के अध्यधीन हैं, समस्त प्राहधकाररयों पर उस सीमा तक अधीिण की शहि होगी जहाँ तक कक ऐसे प्राहधकारी ऐसे मामलों के संबंध में कायडवाही करते हैं और वह उनसे हववरहणयाँ माँग सकेगा ।
9. एक सदस्यीय तथा बहुसदस्यीय न्यायपीठों द्वारा अहधकाररता का प्रयोग
मण्डल, अपने एक या एक से अहधक सदस्यों से गरठत न्यायापीठों द्वारा मण्डल की शहियों तथा कृत्यों का प्रयोग ककये जाने हेतु हनयम बना सकेगा, और ऐसे न्यायपीठों द्वारा ऐसी शहियों या कृत्यों का प्रयेाग करते हुए कदये गये समस्त हवहनिय मण्डल के हवहनिय समझे जायेंगे ।
10. संहहता के प्रारभभ होने के समय हवचाराधीन मामले
(1) इस संहहता के प्रवृत्त होने के तुरन्त पूवड हवद्यमान मण्डल के समि हवचाराधीन समस्त अपीलें, पुनरीिण के समस्त आवेदन-पत्र तथा अन्य समस्त कायडवाहहयाँ मण्डल द्वारा सुनी तथा हवहनहित की जायेंगी । (2) (क) ऐसे सभी मामले जो --- (एक) कलेक्टर द्वारा पाररत आदेश चाहे वह बन्दोबस्त चालू रहने की अवहध में बन्दोबस्त अहधकारी की हैहसयत से पाररत हों, के हवरूद्ध प्रथम अपील जो बोड के समि सुने व हवहनिय ककये जाने हेतु लंहबत हो; (दो) कलेक्टर अथवा उप खण्ड अहधकारी द्वारा पाररत आदेश के हवरूद्ध हद्वतीय अपील जो बोड के समि सुने व हवहनिय ककये जाने हेतु लंहबत हो; (तीन) उप खण्ड अहधकारी के पाररत आदेश के हवरूद्ध हद्वतीय अपील जो कलेक्टर के समि सुने व हवहनिय ककये जाने हेतु लंहबत हो; आयुि को अन्तररत माने जाएंगे । (ख) ऐसे समस्त पुनरीिण, पुनर्तवलोकन एवं अन्य कायडवाहहयां जो 23 नवभबर, 2002 के पिात् आयुि कायाडलय से बोड को अन्तररत हो गये थे और बोड के समि लंहबत हैं, अब आयुि को अन्तररत माने जाएंगे व सुने व हवहनिय ककये जाएंगे; (ग) ककसी भी पिकार के आवेदन पर 23 नवभबर, 2002 के पिात् राजस्व मंडल के समि प्रस्तुत व हवहनिय हेतु लंहबत पुनरीिण प्रकरण के संबंध में संबंहधत पिकार द्वारा स्थानांतरण हेतु आवेदन कदये जाने पर ऐसे प्रकरण बोड द्वारा आयुि को हस्तांतररत कर कदये जाएंगें ।
11. राजस्व पदाहधकारी
राजस्व पदाहधकाररयों के हनम्नहलहखत वगड होंगे अथांत् – आयुि (हजनमें अपर आयुि सहभमहलत है), बन्दोबस्त आयुि (हजनमें अपर बन्दोबस्त आयुि सहभमहलत है), कलेक्टर (हजनमें अपर कलेक्टर सहभमहलत है), बन्दोबस्त पदाहधकारी; उपखण्ड पदाहधकारी; अहसस्टेंट कलेक्टर, संयुि कलेक्टर (हजनके अन्तगडत हडप्टी कलेक्टर भी है), उप-बन्दोबस्त अहधकारी, सहायक बन्दोबस्त पदाहधकारी, तहसीलदार (हजनमें अपर तहसीलदार सहभमहलत है), भू-अहभलेख अधीिक, नायब तहसीलदार, सहायक भू-अहभलेख अधीिक ।
12. राजस्व पदाहधकाररयों पर हनयंत्रण
(1) समस्त राजस्व पदाहधकारी राज्य के अधीनस्थ होंगे । (2) खण्ड के समस्त राजस्व पदाहधकारी आयुि के अधीनस्थ होंगे । (3) जब तक राज्य शासन अन्यथा हनदेहशत न करें, हजले के समस्त राजस्व पदाहधकारी कलेक्टर के अधीनस्थ होंगे ।
13. संभागों, हजलों, उपखंडों तथा तहसीलों को पररवर्ततत करने, उनकी रचना करने या उन्हें समाप्त
(1) राज्य शासन संभागों की रचना कर सकेगा हजनमें ऐसे हजले समाहवष्ट होंगे हजन्हें वह उहचत समझे, और ऐसे खंडों को समाप्त कर सकेगा या उनकी सीमाओं में पररवतडन कर सकेगा । (2) राज्य शासन ककसी भी हजले या तहसील की सीमाओं में पररवतडन कर सकेगा और नवीन हजलों या तहसीलों की रचना कर सकेगा या हवद्यमान हजलों या तहसीलों को समाप्त कर सकेगा और ककसी
14. संभागों के आयुिों को हनयुि करने की शहि
(1) राज्य शासन प्रत्येक संभाग में एक आयुि की हनयुहि करेगा, जो उसमें इस संहहता द्वारा या उसके अधीन या तत्समय प्रवृत्त ककसी भी अहधहनयहमत द्वारा या उसके अधीन आयुि को प्रदत्त शहियों को प्रयोग में लायेगा तथा उस पर आरोहपत कतडव्यों का हनवडहन करेगा । (2) राज्य शासन ऐसी शतों के अधीन रहते हुए, हजन्हें आरोहपत करना वह उहचत समझे अहधसूचना द्वारा आयुि को कोई भी ऐसी शहियाँ या कायड सौंप सकेगा, जो तत्समय प्रवृत्त ककसी भी अहधहनयम द्वारा या उसके अधीन राज्य शासन को सौंपे गये हों ।
15. अपर आयुि हनयुि करने की शहि
(1) राज्य शासन ककसी एक संभाग या दो अथवा दो से अहधक संभागों में एक अपर आयुि की हनयुहि कर सकेगा । (2) अपर आयुि ऐसे मामलों या मामलों के वगड में, हजन्हें राज्य शासन सामान्य आदेश द्वारा अहधसूहचत करे या हजन्हें संभागों का आयुि राज्य शासन द्वारा अहधरोहपत सामान्य या हवशेष हनवडन्धनों के अधीन रहते हुए हलहखत आदेश द्वारा हनदेहशत करे, ऐसी शहियों को प्रयोग में लायेगा तथा ऐसे कतडव्यों का हनवडहन करेगा जो इस संहहता द्वारा या उसके अधीन आयुि को प्रदान की गई हों तथा उस पर अहधरोहपत ककये गये हों । (3) यह संहहता तथा तत्समय प्रवृत्त प्रत्येक अन्य अहधहनयहमत और इस संहहता या ककसी अन्य अहधहनयहमत के अधीन बनाया गया कोई भी हनयम उस दशा के अहतररि जहाँ स्पष्ट रूप से अन्यथा हनदेहशत ककया गया हो, अपर आयुि को, जबकक वह उपधारा (2) के अधीन ककन्हीं भी कतडव्यों का हनवडहन कर रहा हो, उसी प्रकार लागू होगा मानों वह संभाग का आयुि हो ।
16. कलेक्टर को हनयुि करने की शहि
(दो) सरकारी पट्टेदार द्वारा सरकार को, उस भूहम के, जो कक सरकार द्वारा उसे पट्टे पर दी गई है, उपयोग या अहधभोग के मद्दे, धन या वस्तु के रूप में संदत्त ककया जाता है या देय है; (प) “राजस्व अहधकारी” इस संहहता के ककसी उपबंध में “राजस्व अहधकारी” से अहभप्रेत है ऐसा राजस्व अहधकारी हजसे राज्य सरकार, अहधसूचना द्वारा, राजस्व अहधकारी के उस उपबंध के अधीन के कृत्यों का हनवडहन करने के हलये हनदेश दे; (फ) “राजस्व वषड” से अहभप्रेत है वह वषड जो ऐसी तारीख से प्रारभभ होता है हजसे राज्य सरकार, अहधसूचना द्वारा, ककसी हवशेष स्थानीय िेत्र के बारे में हनयत करें; (ब) “सवेिण संखयांक का उपखंड” से अहभप्रेत है सवेिण संखयांक का ऐसा प्रभाग हजसकी बाबत िेत्रफल तथा देय – भू-राजस्व की प्रहवहष्ट भू-अहभलेखों में उन सवेिण संखयांकों के, हजनका कक वह प्रभाग है, सूचक संखयांक के अधीनस्थ सूचक संखयांक के अधीन पृथक्-पृथक् की गई है; (भ) “सवेिण संखयांक” से अहभप्रेत है नगरेतर िेत्र में की भूहम का ऐसा प्रभाग जो ठीक पहले के राजस्व-सवेिण के समय सवेिण संखयांक के रूप में हवरहचत ककया गया है या उस रूप में मान्य ककया गया है अथवा कलेक्टर द्वारा उसके पिात् उस रूप में मान्य ककया गया है और हजसकी बाबत िेत्रफल तथा देय भू-राजस्व की प्रहवहष्ट भू-अहभलेखों में, सूचक संखयांक के अधीन पृथक्-पृथक् की गई है; और उसके अंतगडत भूहम का कोई भी ऐसा प्रभाग है हजसकी प्रहवहष्ट भू-अहभलेखों में, खसरा िमांक नामक सूचक संखयांक के अधीन की गई है; और (म) “कृषक” से अहभप्रेत है वह व्यहि जो अध्याय 14 के अधीन भूहमस्वामी से मौरूसी कृषक के रूप में भूहम धारण करता है; (य) “भू-धारी” से अहभप्रेत है वह व्यहि जो राज्य सरकार से भूहम धारण करता है और जो इस संहहता के उपबन्धों के अधीन भूहमस्वामी है या भूहमस्वामी समझा जाता है ; (य-1) “इमारती लकड़ी के वृि” से अहभप्रेत है हनम्नहलहखत जाहत के वृि, अथांत् – (एक) टेक्टोना ग्रेहन्डस (सागवान), (दो) टेकोकारपस मारसुहपयम (बीजा), (तीन) डलबेररया लेटीफोहलया (शीशम), (चार) शोररया रोबस्टा (साल), (पाँच) हतनसा, (छ:) टमोनेहलया टोमन्टोसा (एन या साज), (सात) सन्टालम अलबम (चन्दन); (आठ) एडाइना कॉर्तडफोहलया (हल्दू), (नौ) हमत्रागाइना पारहवफ्लोरा (मुण्डी), (दस) टर्तमनेहलया अजुडना (अजुडन), (ग्यारह) डायोस्पाइरस मेलनोक्जाइलान (तेन्दू), (बारह) मेलाइना आरबोररया (खभहार) (य-2) “स्वयं खेती करना” से अहभप्रेत है – (एक) अपने स्वयं के श्रम द्वारा, या (दो) अपने कुटुभब के ककसी भी सदस्य के श्रम द्वारा, या (तीन) ऐसी मजदूरी पर, जो नगदी या वस्तु के रूप में देय है ककन्तु फसल के अंश के रूप में देय नहीं है, रखे गये सेवकों द्वारा, या (चार) अपने वैयहिक पयडवेिण के अधीन या अपने कुटुभब के ककसी सदस्य के वैयहिक पयडवेिण (Personal supervision) के अधीन – भाड़े के श्रहमकों द्वारा अपने स्वयं के हलये खेती करना; (य-3) “दखलरहहत भूहम” से अहभप्रेत है ककसी ग्राम में की ऐसी भूहम जो आबादी या सेवाभूहम से, या ककसी भूहमस्वामी, कृषक या सरकारी पट्टेदार द्वारा धाररत भूहम से हभि है; (य-4) “नगरीय िेत्र” से अहभप्रेत है वह िेत्र जो नगरपाहलकाओं से संबंहधत तत्समय प्रवृत्त ककसी हवहध के अधीन गरठत ककसी नगरपाहलक हनगम की या ककसी नगरपाहलका या अहधसूहचत िेत्र की या ककसी ऐसे ग्राम या ग्राम समूह की, जो कक राज्य सरकार द्वारा नगरीय िेत्र के रूप में हवहनर्ददष्ट ककया जाय, सीमाओं के भीतर तत्समय सहभमहलत है, और अहभव्यहि” नगरेतर िेत्र” का तद्नुसार अथड लगाया जायेगा । (य-5) “ग्राम” से अहभप्रेत है कोई भू-भाग हजसे इस संहहता के प्रवृत्त होने के पूवड, ककसी ऐसी हवहध के, जो तत्समय प्रवृत्त है, उपबन्धों के अधीन ग्राम के रूप में मान्य ककया गया था या उस रूप में घोहषत ककया गया था, तथा कोई ऐसा अन्य भू-भाग हजसे ककसी राजस्व सवेिण में एतद्पिात् ग्राम के रूप में मान्य ककया जाय या हजसे राज्य सरकार, अहधसूचना द्वारा, ग्राम के रूप में घोहषत करें । (2) इस संहहता के प्रवृत्त होने की तारीख के प्रहत इस संहहता में ककये गये ककसी भी हनदेश का अथड इस प्रकार लगाया जाएगा मानो कक वह धारा 1 की उपधारा (3) के अधीन अहधसूचना द्वारा हनयत की गई तारीख के प्रहत हनदेश है।
17. अपर कलेक्टर को हनयुि करने की शहि
(1) राज्य शासन हजले में एक या एक से अहधक अपर कलेक्टर को हनयुि कर सकेगा । (2) अपर कलेक्टर ऐसे मामलों या मामलों के वगड में, हजन्हें राज्य शासन सामान्य आदेश द्वारा अहधसूहचत करे या हजन्हें कलेक्टर राज्य शासन द्वारा आरोहपत सामान्य या हवशेष हनबडन्धनों के अधीन रहते हुए हलहखत आदेश द्वारा हनदेहशत करे ऐसी शहियों को प्रयोग में लायेगा तथा ऐसे कतडव्यों का हनवडहन करेगा जो इस संहहता द्वारा या उसके अधीन या तत्समय प्रवृत्त ककसी भी अन्य अहधहनयहमहत द्वारा या उसके अधीन कलेक्टर को प्रदान की गई हो तथा उस पर आरोहपत ककये गये हों । (3) यह संहहता तथा तत्समय प्रवृत्त प्रत्येक अन्य अहधहनयहमहत और इस संहहता या ककसी भी ऐसे अन्य अहधहनयहमहत के अधीन बनाया गया कोई भी हनयम उस दशा के अहतररि जहाँ स्पष्ट रूप से अन्यथा हनदेहशत ककया गया हो, अपर कलेक्टर से जबकक वह उपधारा (2) के अधीन ककन्हीं भी शहियों को प्रयोग में ला रहा हो या ककन्हीं भी कतडव्यों का हनवडहन कर रहा हो, उसी प्रकार लागू होंगे, मानो वह हजले का कलेक्टर हो ।
18. सहायक कलेक्टरों, संयुि कलेक्टरों तथा हडप्टी कलेक्टरों की हनयुहि और शहियाँ
राज्य सरकार प्रत्येक हजले के हलये उतने व्यहियों को हजतने यह ठीक समझे – (एक) सहायक कलेक्टसड प्रथम तथा हद्वतीय श्रेणी । (दो) संयुि कलेक्टसड तथा (तीन) हडप्टी कलेक्टसड, हनयुि कर सकेगी जो ऐसी शहियों का प्रयोग करेंगे, जो राज्य सरकार अहधसूचना द्वारा हनदेहशत करे।
19. तहसीलदारों, अपर तहसीलदारों तथा नायब तहसीलदारों की हनयुहि
बकायादार के कब्जे में की ऐसी जंगम सभपहत्त की कुकी जो कृहष उपज के हभि है – (1) जहां बकायादार के कब्जे में की कुकड की जाने वाली सभपहत्त कृहष उपज से हभि जंगम सभपहत्त है वहाँ कुकी वास्तहवक अहभग्रहण के द्वारा की जायेगी और कुकी करने वाला अहधकारी उस सभपहत्त को स्वयं अपनी अहभरिा में या अपने अधीनस्थों में से एक की अहभरिा में रखेगा और उसकी सभयक् अहभरिा के हलये उत्तरदायी होगा: परन्तु जब अहधगृहीत सभपहत्त शीघ्रतया और प्रकृत्या ियशील है या जब उसे अहभरिा में रखने का व्यय उसके मूल्य से ज्यादा होना सभभाव्य है, तब कुकी करने वाला अहधकारी उसका तुरन्त ही हविय कर सकेगा: परन्तु यह और भी कक जब कुकड की गई सभपहत्त पशु-धन, कृहष उपकरण या अन्य ऐसी वस्तुएँ हैं जो सुहवधापूवडक हटाई नहीं जा सकती और कुकी करने वाले अहधकारी इस हनयम के प्रथम परन्तुक के अधीन कायड नहीं करता है, तो वह बकायादार की या ऐसी सभपहत्त में हहतबद्ध होने का दावा करने वाले ककसी व्यहि की प्ररेणा पर उस सभपहत्त को उस ग्राम में या उस स्थान पर, जहां कक वह कुकड की गई है – • बकायादार के, या उस स्थान के कांजी हाउस के रखवाले के यकद कोई हो, भारसाधन में छोड़ सकेगा, या • ऐसी सभपहत्त में हहतबद्ध होने का दावा करने वाले व्यहि या ककसी ऐसे प्रहतहष्ठत व्यहि के भारसाधन में जोड़ सकेगा जो ऐसी सभपहत्त को रखने का हजभमा ऐसी सभपहत्त मूल्य से कम न होने वाली रकम का, एक या अहधक प्रहतभुओं सहहत, इस आशय का बन्धपत्र हलखकर ले ले कक वह ऐसी सभपहत्त की उहचत देखभाल करेगा और मांग की जाने पर उप सभपहत्त को पेश कर देगा । (2) कुकी करने वाला अहधकारी कुकड की गई सभपहत्त की सूची बनायेगा और उस सूची पर उस व्यहि की, हजसकी की अहभरिा में वह सभपहत्त छोड़ी गई है, अहभस्वीकृहत और यकद सभभव है, तो बकायादार की और कम से कम एक प्रहतहष्ठत व्यहि की अहभस्वीकृहत, उस सूची के सही होने के अनुप्रमाणन के तौर पर अहभप्राप्त करेगा । यकद कुकड की गई सभपहत्त में पशुधन तथा अन्य वस्तुएँ दोनेां ही सहभमहलत हैं, पशुधन की एक पृथक् सूची भी उसी प्रकार तैयार की जायेगी और अनुप्रमाहणत की जायेगी ।
20. भू-अहभलेख अधीिक तथा सहायक भू-अहभलेख अधीिकों की हनयुहि
(1) जहां कुकड की जाने वाली सभपहत्त कृहष उपज है, वहां कुकी के वारण्ट की एक प्रहत– (क) उस दशा में जब, ऐसी उपज उगती फसल है, उस भूहम पर, हजसमें ऐसी फसल उगी है, या (ख) उस दशा में, जब ऐसी उपज काटी जा चुकी है, या इकठी की जा चुकी है, खहलहान में या अनाज गहाने के स्थान में या तदरूप स्थान में या चारे के ढेर पर, हजस पर या हजसमें वह हनहिप्त की गई है; लगाकर और एक अन्य प्रहत उस गृह के, हजसमें कक बकायादार मामूली तौर से हनवास करता है, बाहरी द्वारा पर या ककसी अन्य सहजदृश्य भाग पर लगाकर या यकद कोई ऐसा गृह न हो, तो उस गृह के, हजसमें कक वह कारबार करता है या अहभलाभ के हलये स्वयं काम करता है या हजसके बारे में यह ज्ञात है कक वहां वह अंहतम बार हनवास करता था या कारबार करता था या अहभलाप के हलये स्वयं काम करता था, बाहरी द्वारा पर या उसके ककसी अन्य सहजदृश्य भाग पर लगाकर कुकी की जायेगी, और तदुपरर यह समिा जायेगा कक न्यायालय के कब्जे में आ गई है । (2) कुकी करने वाला अहधकारी कृहष उपज की अहभरिा के हलये और साथ उपज की रखवाली करने, कटाई करने, इसे इकठा करने और उसे भण्डार में रखने के हलये ऐसी व्यवस्था करेगा जैसा कक वह पयाडप्त समझे और उसे पकड़ने या उसके परररिण के हलये आवश्यक कोई अन्य कायड करेगा । (3) उपहनयम (2) के अधीन उपगत खचे बकायादार द्वारा वहन ककये जायेंगे ।
21. अन्य पदाहधकारी
(1) जहां कुकड ककया गया पशुधन बकायादार के भार साधन में नहीं छोड़ा गया है, वहां उसे हखलाने-हपलाने के व्यय ऐसी दर से प्रभाररत ककये जायेंगे जो कलेक्टर, साधारण या हवशेष आदेश द्वारा, हनयत करे। (2) जहां कुकड की गई सभपहत्त कोई ऐसी जंगम सभपहत्त है जो कृहष-उपज या पशुधन से हफरी है और वह बकायादार के भारसाधन में नहीं छोड़ी गई है, वहां उसकी सुरहित अहभरिा के हलये व्यय ऐसी दर से प्रभाररत ककया जायेगा जो कलेक्टर, साधारण या हवशेष आदेश द्वारा हनयत करें । (3) उपहनयम (1) या (2) के अधीन उपगत खचे सभपहत्त के हविय आगम पर प्रथम भार होंगे।
22. उपखंड अहधकारी
(1) कलेक्टर एक या अहधक सहायक कलेक्टरों या संयुि कलेक्टरों या हडप्टी कलेक्टरों को हजले के ककसी एक उपखंड या हजले के दो या अहधक उपखंडों का भारसाधक बना सकेगा । (2) ऐसा सहायक कलेक्टर या संयुि कलेक्टर या हडप्टी कलेक्टर उपखंड अहधकारी कहलायेगा और कलेक्टर की ऐसी शहियों को प्रयोग में लायेगा जैसा कक राज्य शासन अहधसूचना द्वारा हनदेहशत करे ।
23. राजस्व अहधकाररयों की अधीनस्थता
(1) जहां कक सभपहत्त स्थावर है, वहां कुकी ऐसे आदेश की जायेगी जो सभपहत्त को ककसी भी प्रकार से अन्तररत या भाररत करने से बकायादार को और ऐसे अन्तरण या भार से कोई भी फायदा उठाने हेतु समस्त व्यहक्त्यों को प्रहतहषद्ध करता है । (2) वह आदेश ऐसी सभपहत्त में के या उसके पार्श्डस्थ ककसी स्थान पर डोंडी हपटवाकर या अन्य रूकढ़गत रीहत से उद्घोहषत ककया जायेगा और ऐसे आदेश की एक प्रहत सभपहत्त के ककसी सहजदृश्य भाग पर और तब राजस्व अहधकारी के कायाडलय के सूचना बोड पर लगाई जायेगी । (3) ऐसा आदेश मूल्य देकर वास्तहवक िेताओं से हवरूद्ध उस तारीख से, हजसको कक आदेश की प्रहत सभपहत्त पर लगाई गई हो तथा बकायादार के अन्य समस्त अन्तररहतयों के हवरूद्ध उस तारीख से; हजसको कक ऐसा आदेश ककया गया हो; प्रभावी होगा ।
24. राज्य शासन द्वारा राजस्व पदाहधकाररयों की शहियों का पदाहधकाररयों तथा अन्य व्यहियों को
(1) यकद उस सभपहत्त के सभबन्ध, जो इस संहहता के उपबन्धों के अधीन कुकड की गई है या हजसके हवरूद्ध इस संहहता के उपबन्धों के अधीन कायडवाही की गई है, ककसी अन्य व्यहि द्वारा कोई दावा खड़ा ककया जाता है, तो राजस्व अहधकारी उस दावे के सभबन्ध में जांच करेगा और उसे स्वीकार या अस्वीकार कर सकेगा । (2) वह व्यहि, हजसके कक हवरूद्ध उपहनयम (1) के अधीन कोई आदेश ककया गया हो, उस अहधकार को स्थाहपत करने के हलये हजसका कक वह उस सभपहत्त के सभबन्ध में, जो कक कुकड की गई हो, दावा करता है, ऐसे आदेश की तारीख से एक वषड के भीतर वाद संहस्थत कर सकेगा; ऐसे वाद के, यकद कोई हो, पररणाम में रखते हुए, वह आदेश हनिायक होगा ।
25. स्थानान्तर होने पर प्रयोगनीय शहियाँ
यदक कोई राजस्व पदाहधकारी हजसमें ककसी तहसील या हजले में इस संहहता के अधीन कोई भी शहियाँ हवहनहहत की गई हों, ककसी अन्य तहसील या हजले में उसी प्रकार के ककसी समान या उच्चतर पद पर स्थानान्तररत ककया जाय तो वह जब तक कक राज्य शासन अन्यथा हनदेश न दे ऐसी अन्य तहसील या हजले में इस संहहता के अधीन उन्हीं शहियों को प्रयोग में लायेगा ।
26. अस्थायी ररहि की दशा में कलेक्टर
(1) राजस्व अहधकारी आशहयत हविय की उद्घोषणा करवायेगा हजसमें हविय का समय तथा स्थान कहथत होगा और उसमें हनम्नहलहखत बातें यथा सभभव ऋजुता और यथाथडता से हवहनर्ददष्ट होंगी – (क) वह सभपहत्त जो बेची जानी है; (ख) जहां वह सभपहत्त, जो बेची जाती है, सरकार को राजस्व देने वाली ककसी भूहम में कोई हहत है, वहां उस भूहम पर हनधाडररत भू-राजस्व; (ग) वह रकम, हजसकी वसूली के हलये हविय आकदष्ट ककया गया है, और (घ) प्रत्येक अन्य बात हजसके बारे में राजस्व अहधकारी का हवचार हो कक सभपहत्त की प्रकृहत और मूल्य का हनणडय करने के हलये उसकी जानकारी िेता के हलये ताहत्वक है। (2) जब उपहनयम (1) के अधीन जारी की गई उद्घोषणा ककसी खाते के हविय के सभबन्ध में है, तो उसकी एक प्रहत उस सरकारी बैंक तथा भू-बन्धक बैंक को भेजी जायेगी जो कक उस िेत्र के भीतर कार्यडरत हो हजसमें वह खाता हस्थत है ।
27. जाचँ करने के हलये स्थान
उन कारणों के हसवाय जो लेखबद्ध ककये जायेंगे, कोई भी राजस्व अहधकारी ककसी मामले की जाँच या सुनवाई अपनी अहधकाररता की स्थानीय सीमाओं के बाहर ककसी स्थान पर नहीं करेगा: परन्तु उपखंड अहधकारी ककसी मामले की जाँच या सुनवाई उस हजले के, हजनमें कक उसे हनयुि ककया गया है, भीतर ककसी स्थान पर कर सकेगा ।
28. भूहम पर प्रवेश करने तथा उसका सवेिण (पररमाप) करने की शहि
समस्त राजस्व अहधकारी, राजस्व हनरीिक, भू-मापक तथा पटवारी और उनके सेवक तथा कमडकार जबकक वे उनके पयडवेिण एंव हनयंत्रण के अधीन हों, उस हस्थहत में जबकक उन्हें ऐसा हनदेश कदया जाय भूहम पर प्रवेश कर सकेंगे तथा उसका सवेिण कर सकेंगे और सीमांकन कर सकेंगे एवं इस संहहता या तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य अहधहनयहमहत के अधीन अपने कतडव्यों से संबंहधत अन्य कायड कर सकेंगे और ऐसा करने में उस नुकसान से अहधक नुकसान पाररत नहीं करेंगे जो कक उनके कतडव्यों के सभयक् पालन के हनहमत्त आवश्यक हो : परन्तु कोई भी व्यहि ककसी भवन में या ककसी हनवास गृह में संलग्न ककसी घेरा लगे हुए प्रांगण या उद्यान में उसके अहधभोगी की सभमहत के हबना तथा ऐसे अहधभोगी को कम से कम चौबीस घंटे की सूचना कदये हबना प्रवेश नहीं करेगा और ऐसे प्रवेश के समय अहधभोगी की सामाहजक तथा धार्तमक भावनाओं का सभयक् ध्यान रखा जायगा ।
29. मामलों को अन्तररत करने की शहि
(1) राजस्व अहधकारी एतद्धीन हविय को कcसी भी हवहनर्ददष्ट कदन और घन्टे तक के हलये स्वहववेकानुसार स्थहगत कर सकेगा और ऐसे कcसी हविय का संचालन करने वाला अहधकारी स्थगन के अपने कारणों को अहभहलहखत करते हुए हविय को स्वहववेकानुसार स्थहगत कर सकेगा: परन्तु जहां राजस्व अहधकारी का आदेश समय पर अहभप्राप्त ककया जा सकता है, वहां कोई भी ऐसा स्थगन ऐसे आदेश के हबन नहीं ककया जायेगा । (2) जहां हविय 15 कदन से अहधक की कालावहध के हलये उपहनयम (1) के अधीन स्थहगत ककया जाता है, वहां तब के हसवाय जब कक बकायादार उसका अहधत्यजन करने के हलये अपनी सभपहत्त दे दे, नई उद्घोषणा की जायेगी । (3) यkd लाट से हलये बोली के समाप्त होने से पहले ही शोध्य रकम और खचे हविय का संचालन करने वाले अहधकारी को हनहवदत्त कर कदये जाते हैं या उस समाधानप्रद रूप में यह सबूत दे कदया जाता है कक शोध्यों की रकम और खचे का उस राजस्व अहधकारी को भुगतान ककया जा चुका है हजसने हविय का आदेश कदया था तो ऐसा प्रत्येक हविय रोक कदया जायेगा ।
30. अधीनस्थों को तथा उनके पास से मामले अन्तररत करने की शहि
(1) कलेक्टर या उपखंड अहधकारी, इस संहहता के या तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य अहधहनयहमहत के उपबंधों के अधीन उद्भूत होने वाले ककसी मामले को या ककसी वगड के मामलों को अपनी फाइल से अपने अधीनस्थ ककसी ऐसे राजस्व अहधकारी को, जो कक ऐसे मामले या ऐसे वगड के मामलों को हवहनहित करने के हलये सिम है, हवहनिय के हलये सौंप सकेगा या ककसी मामले या ककसी वगड के मामलों केा ककसी ऐसे राजस्व अहधकारी के पास से वापस कर सकेगा और ऐसे मामले या ऐसे वगड के मामलों के संबंध में स्वयं कायडवाही कर सकेगा या उन्हें हनपटारे के हलये अपने अधीनस्थ ककसी ऐसे अन्य राजस्व अहधकारी को जो ऐसे मामले या ऐसे वगड के मामलों का हवहनिय करने के हलये सिम है, हनदेहशत कर सकेगा ।
31. मण्डल तथा राजस्व अहधकाररयों की न्यायालयों की प्राहस्थहत का प्रदान ककया जाना
31. मण्डल तथा राजस्व अहधकाररयों की न्यायालयों की प्राहस्थहत का प्रदान ककया जाना – मण्डल या राजस्व अहधकारी जब कक वह राज्य सरकार तथा ककसी व्यहि के बीच या ककन्हीं कायडवाहहयों के पिकारों के बीच अवधारण के हलये उद्भूत होने वाले ककसी प्रश्न की जाँच करने या उसे हवहनहित करने के हलये इस संहहता या तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य अहधहनयहमहत के अधीन शहि का प्रयोग कर रहा हो राजस्व न्यायालय होगा ।
32. राजस्व न्यायालय की अन्तर्तनहहत शहि
(1) जहां बेची जाने वाली सभपहत्त कृहष उपज है, वहां हविय – (क) यkd ऐसा उपज उगती फसल है, तो उस भूहम पर या उसके समीप ककया जायेगा हजसमें कक ऐसी फसल उगी है; या (ख) यkd ऐसी उपज काटी जा चुकी है या इक्ठी की जा चुकी है, तो खहलहान में या अनाज गहाने के स्थान में या तदरूप ककसी स्थान में या चारे के ढेर पर या उसके समीप ककया जायेगा: परन्तु यkd राजस्व अहधकारी की यह राय हो कक वैसा करने से उपज अहधक फायदे पर बेची जा सकती है तो वह यह हनदेश दे सकेगा कक हविय लोक समागम के हनकटतम ककसी स्थान पर ककया जाये । (2) जहां, उपज की हविय के हलये पुरोधृत ककये जाने पर – (क) हविय करने वाले व्यहि के अनुमान से उसके हलये ऋजु मूल्य की बोली नहीं लगाई है; और (ख) उस उपज का स्वामी या उसकी ओर से कायड करने के हलये प्राहधकृत व्यहि हविय को आगामी कदन तक या यkd हविय के स्थान पर कोई मण्डी लगती है, तो अगली मण्डी लगने के कदन के हलये मुल्तवी करने के हलये आवेदन करता है, वहां हविय तदनुसार मुल्तवी कर कदया जायेगा और तत्पिात् उपज के हलये चाहे कोई भी कीमत लगे वह पूरा कर कदया जायेगा ।
33. व्यहियों के हाहजर होने तथा दस्तावेजें पेश ककये जाने की अपेिा करने तथा साक्ष्य लेने की
(1) हसहवल प्रकिया संहहता , 1908 (1908 का संखयांक 5) की धारा 132 तथा 133 के उपबन्धों तथा धारा 41 के अधीन बनाये गये हनयमों के अध्यधीन रहते हुए राजस्व न्यायालय के रूप में कायड करने वाले प्रत्येक राजस्व अहधकारी को यह शहि होगी कक वह इस संहहता या तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य अहधहनयहमहत के अधीन उद्भूत होने वाली ककसी जाँच या मामले के प्रयोजनों के हलये साक्ष्य ले, ककसी ऐसे व्यहि को समन करें हजसकी कक हाहजरी या तो पिकार के रूप में परीिा की जाने के हलये या सािी के रूप में साक्ष्य देने के हलये या कोई दस्तावेज पेश करने के हलये वह आवश्यक समझे । (2) ककसी व्यहि को स्वयं हाहजर होने के हलये तब तक आकदष्ट नहीं ककया जायेगा जब तक कक ऐसा व्यहि – (क) उस दशा में जब कक राजस्व न्यायालय के रूप में कायड करने वाला राजस्व अहधकारी नायब तहसीलदार है । तहसील के सीमाओं के भीतर और उस दशा में जबकक राजस्व न्यायालय के रूप में कायड करने वाला कोई अन्य राजस्व अहधकारी है, उसकी अहधकाररता की स्थानीय सीमाओं के भीतर हनवास नहीं करता है; या (ख) ऐसी सीमाओं के बाहर ककन्तु ऐसे स्थान में हनवास नहीं करता है हजसके तथा उस स्थान के, जहाँ कक हाहजर होने के हलये उसे समन ककया गया है, बीच की दूरी पचास मील से कम है या उस दशा में दो सौ मील से कम है जब कक उस स्थान के , जहाँ से कक वह हनवास करता है तथा उस स्थान के, जहाँ कक हाहजर होने के हलये उसे समन ककया गया है बीच की दूरी के पाँच बटे छ: भाग के हलये रेल संचार या अन्य सुस्थाहपित लोक प्रवहण की व्यवस्था है । (3) कोई भी ऐसा राजस्व अहधकारी उपहस्थत ककसी भी व्यहि से यह अपेिा कर सकेगा कक यह साक्ष्य दे अथवा अपने कब्जे या अहधकार में होने वाली ककसी दस्तावेज को तत्काल यहीं पेश करें। (4) प्रत्येक ऐसे राजस्व अहधकारी को यह शहि होगी कक वह ककसी भी ऐसे व्यहि की, हजसे न्यायालय में हाहजर होने से छूट हमली हुई है या हजसे स्वयं हाहजर होने के हलए आकदष्ट नहीं ककया जा सकता है, या जो रूग्णता या अंग-शैहथल्य के कारण हाहजर होने में असमथड है, परीिा करने के हलये कमीशन जारी करें ।
34. सािी को हाहजर होने के हलये हववश करना
(1) जहां जंगम सभपहत्त लोक नीलाम द्वारा बेची जाती है, वहां प्रत्येक लाट का मूल्य हविय के समय पर संदत्त् ककया जायेगा या उसके पिात् शीघ्र ही ऐसे समय पर संदत्त् ककया जायेगा जो वह अहधकारी या अन्य व्यहिा हनर्ददष्ट करें जो कक हविय कर रहा है और संदाय में व्यहििम होने पर, सभपहत्त तत्िण् ही कफर से बेची जायेगी । (2) ियधन का संदाय कर कदये जाने पर उसके हलये रसीद वह अहधकारी या अन्य व्यहि देगा जो कक हविय कर रहा है और हविय आत्यहन्तक हो जायेगा । (3) जहां बेची जाने वाली जंगम सभपहत्त ऐसे माल में अंश है जो कक बकायादार और ककसी सहस्वामी का है और दो या अहधक व्यहि, हजनमें से एक ऐसा सहस्वामी है; ऐसी सभपहत्त या उसके ककसी लाट के हलये एक ही, राहश को बेाली लगाते हैं, वहां वह बोली उस सहस्वामी की बोली समझी जायेगी ।
35. पिकार की अनुपहस्थहत में सुनवाई
(1) यकद राजस्व अहधकारी ककसी मामले या कायडवाही की सुनवाई के हलये हनयत की गई तारीख को यह पाये कक ककसी पिकार पर समन या सूचना की तामील इसहलए नहीं हुई थी कक हवरोधी पिकार ने ऐसी तामील के हलये अपेहित आदेहशका फीस का भुगतान नहीं ककया था, तो उस मामले या कायडवाही को ऐसी आदेहशका फीस का भुगतान न ककया जाने के कारण खाररज ककया जा सकेगा । (2) यकद राजस्व अहधकारी के समि के मामले या कायडवाही का कोई पिकार; उस पर सूचना या समन की सभयक तामील हो जाने के पिात् उस तारीख को, जो सुनवाई के हलये हनयत की गई है, उपसंजात नहीं होता है तो वह मामला यथाहस्थहत उसकी अनुपहस्थहत में सुना तथा अवधाररत ककया जा सकेगा या अनुपहस्थहत के कारण खाररज ककया जा सकेगा । (3) वह पिकार, हजसके हवरूद्ध उपधारा (1) या (2) के अधीन कोई आदेश पाररत ककया गया है, ऐसे आदेश की तारीख से या उस दशा में जबकक सूचना या समन की सभयक् रूप से तामील न की गयी हो, उस आदेश के जानकारी में आने की तारीख से तीस कदन के भीतर उसे अपास्त करने के हलये [अपने शपथ-पत्र के साथ आवेदन] इस आधार पर कर सकेगा कक वह हवरोधी पिकार का समन या सूचना की तामील के हलये अपेहित आदेहशका फीस का भुगतान करने से या सुनवाई में उपसंजात होने से ककसी पयाडप्त हेतुक से हनवाररत रहा था और राजस्व अहधकारी, उस हवरोधी पिकार को जो उस तारीख को उपहस्थत था हजसको कक ऐसा आदेश पाररत ककया गया था सूचना देने के पिात् तथा ऐसी जाँच करने के पिात् जैसी कक वह आवश्यक समझे, पाररत ककये गये आदेश को अपास्त कर सकेगा । (4) जहाँ उपधारा (3) के अधीन फाइल ककया गया आवेदन नामंजूर कर कदया जाता है, वहाँ व्यहथत पिकार उस प्राहधकारी को अपील फाइल कर सकेगा हजसको कक ऐसे अहधकारी द्वारा पाररत ककये गये मूल आदेश के हवरूद्ध अपील होती है। (5) उपधारा (4) में यथा उपबहन्धत के हसवाय या उस दशा में के हसवाय जब ककसी राजस्व अहधकारी के समि ककसी मामले या कायडवाही का गुणागुण के आधार पर हवहनिय ककया गया है, इस धारा के अधीन पाररत ककये गये ककसी आदेश के हवरूद्ध, कोई अपील नहीं होगी।
36. सुनवाई का स्थगन
(1) राजस्व पदाहधकारी समय – समय पर ऐसे कारणों से, जो अहभहलहखत ककये जायेंगे और खचड हवषयक हनबडन्धनों पर अपने समि ककसी मामले का कायडवाही की सुनवाई को स्थहगत कर सकेगा: परन्तु प्रत्येक पिकार को, प्रकरण की सभपूणड सुनवाई के दौरान तीन से अनहधक स्थगन कदए जा सकेंगे और प्रत्येक स्थगन केवल खचें के साथ प्रदान ककया जाएगा । (2) मामले की कायडवाही की स्थहगत, सुनवाई का कदनांक तथा स्थान स्थगन के समय ऐसे पिकारों और साहियों को जो उपहस्थत हों, प्रज्ञाहपत कर कदया जावेगा ।
37. व्यय कदलाने की शहि
37. व्यय कदलाने की शहि – राजस्व पदाहधकारी इस संहहता के अधीन या तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य अहधहनयहमहत के अधीन चलने वाले ककसी भी मामले या कायडवाही में हुए व्ययों की ऐसी रीहत से तथा ऐसे पररणाम में जो वह उहचत समझे, कदला सकेगा: परन्तु हवहध – व्यवसायी की फीस ऐसे ककसी मामले या कायडवाही में जब तक कक ऐसा पदाहधकारी उन कारणों से, जो उसके द्वारा लेखबद्ध ककये जायेंगे अन्यथा न सोचे, व्यय के रूप में नहीं कदलायी जायेगी ।
38. स्थावर सभपहत्त का कब्जा पररदत्त करने हवषयक आदेश को हनष्पाकदत करने की रीहत
38. स्थावर सभपहत्त का कब्जा पररदत्त करने हवषयक आदेश को हनष्पाकदत करने की रीहत – जहाँ स्थावर सभपहत्त का कब्जा पररदत्त करने का आदेश ककसी व्यहि के हवरूद्ध इस संहहता के अधीन पाररत ककया गया हो, वहाँ ऐसा आदेश हनम्नहलहखत रीहत में हनष्पाकदत ककया जायेगा, अथाडत् – (क) कब्जाधारी व्यहि या व्यहियों पर ऐसी सूचना तामील करके हजसमें उनसे यह अपेिा की जायेगी कक वे उि सूचना प्राप्त होने के पिात् ऐसे समय के भीतर, जो युहियुि प्रतीत हो, भूहम को खाली कर दें; और (ख) यकद ऐसी सूचना का पालन नहीं ककया जाता है तो ककसी ऐसे व्यहि को जो उस भूहम को खाली करने से इंकार करता है, हटाकर या उसे हटाने के हलये ककसी अधीनस्थ को प्रहतहनयुहि करके; और (ग) यकद ककसी ऐसे व्यहि को हटाने वाले अहधकारी का ककसी व्यहि द्वारा प्रहतरोध ककया जाता है या उसे ककसी व्यहि द्वारा बाधा पहुँचाई जाती है तो राजस्व अहधकारी मामले के तथ्यों की संहिप्त जाँच करेगा और यकद उसका यह समाधान हो जाता है कक ऐसे प्रहतरोध या ऐसी बाधा अब भी चालू है तो वह ऐसे प्रहतरोध या ऐसी बाधा के हलये दहण्डत ककये जाने के सभबन्ध में ककन्हीं भी ऐसी कायडवाहहयों पर, हजनके हलये वह तत्समय प्रवृत्त ककसी हवहध के अधीन दायी है, प्रहतकूल प्रभाव डाले हबना ऐसी कायडवाही कर सकेगा या करवा सकेगा या ऐसा बल प्रयोग कर सकेगा या करवा सकेगा जो कक ऐसे अहधकारी की राय में उस आदेश का अनुपालन सुहनहित करने के हलये युहियुि रूप से आवश्यक हो ।
39. वे व्यहि हजनके द्वारा राजस्व अहधकाररयों के समि उपसंजाहत (हाहजरी) की जा सकेगी और
39. वे व्यहि हजनके द्वारा राजस्व अहधकाररयों के समि उपसंजाहत (हाहजरी) की जा सकेगी और आवेदन ककये जा सकेंगे – तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य अहधहनयहमहत के अन्यथा उपबहन्धत के हसवाय इस संहहता या तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य अहधहनयहमहत के अधीन ककसी राजस्व अहधकारी के समि समस्त उपसंजाहतयाँ, (उपहस्थहतयाँ) उसको ककये जाने वाले समस्त आवेदन तथा उसके समि ककये जाने वाले समस्त कायड पिकारों द्वारा स्वयं या उनके मान्यताप्राप्त अहभकताडओं द्वारा ककसी हवहध व्यवसायी द्वारा ककये जा सकेंगे: परन्तु हसहवल प्रकिया संहहता, 1908 (1908 का संखयांक 5) की धारा 132 तथा 133 के उपबन्धों में अध्यधीन रहते हुए, कोई भी ऐसी उपसंजाहत यकद राजस्व अहधकारी ऐसा हनदेश दे, पिकार को स्वयं करनी होगी: परन्तु यह और भी धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (द) की मद (दो) के अन्तगडत आने वाले मान्यताप्राप्त अहभकताड द्वारा केवल उपसंजाहत (उपहस्थहत) ही की जा सकेगी ।
40. अनुसूची 1 में के हनयमों का प्रभाव
(1) जहां स्थावर सभपहत्त इस संहहता के अधीन बेच दी गई है वहां या तो ऐसी सभपहत्त का स्वामी या उसमें ऐसे हक के आधार पर, जो ऐसे हविय के पूवड अर्तजत ककया गया था, हहतबद्ध कोई व्यहि – (क) िेता को कदये जाने के हलये, ियधन के पांच प्रहतशत के बराबर रकम, (ख) बकाया रकम के भुगतान मद्धे, हविय की उद्घोषणा में ऐसी रकम के रूप में हवहनर्ददष्ट रकम हजसकी वसूली के हलये हविय का आदेश ककया गया था और हजसमें से हविय की उद्घोषणा की तारीख के पिात् उस मद्धे चुकाई गई रकम घटा दी गई हो, और (ग) हविय के खचें, उप हविय की तारीख से तीस कदन के भीतर ककसी भी समय हनहिप्त करने पर राजस्व अहधकारी की हविय अपास्त कराने के हलये आवेदन कर सकेगा । (2) यकद ऐसा हनिेप हविय की तारीख से तीस कदन के भीतर कर कदया जाता है; तो राजस्व अहधकारी हविय को अपास्त करने वाला आदेश पाररत करेगा: परन्तु यकद कोई व्यहि ऐसे हविय को अपास्त कराने के हलये हनयम 14 के अधीन आवेदन करता है तो वह इस हनयम के अधीन आवेदन करने का हकदार नहीं होगा ।
41. मण्डल को हनयम बनाने की शहि
(1) मण्डल समय-समय पर, अपनी पद्धहत और प्रकिया को तथा अन्य राजस्व न्यायालयों द्वारा अनुसररत की जाने वाली प्रकिया को हवहनयहमत करते हुए, इस संहहता के उपबन्धों से संगत हनयम बना सकेगा और ऐसे हनयमों द्वारा अनुसूची 1 में से समस्त हनयमों या उनमें से ककसी भी हनयम को बाहतल कर सकेगा, पररवर्ततत कर सकेगा या उसमें पररवधडन कर सकेगा । (2) हवहशष्टतया तथा उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शहियों की व्यापकता पर प्रहतकूल प्रभाव डाले हबना, ऐसे हनयमों में हनम्नहलहखत समस्त हवषयों या उनमें से ककसी भी हवषय के हलये उपबन्ध हो सकेंगे, अथांत्: – (क) साधारणत: या ककन्हीं हवहनर्ददष्ट िेत्रों में समन, सूचनाओं तथा अन्य आदेहशकाओं की डाक द्वारा या ककसी अन्य रीहत में तामील और ऐसी तामील का सबूत; (ख) पिकारों तथा साहियों को समन करने की राजस्व अहधकाररयों की शहि का हवहनयमन तथा साहियों के हलये व्ययों की मंजूरी; (ग) मान्यताप्राप्त अहभकताडओं का इस संहहता के अधीन की कायडवाहहयों में उनके द्वारा की जाने वाली उपसंजाहतयों, ककये जाने वाले आवेदनों तथा ककये जाने वाले कायों के बारे में हवहनयमन; (घ) वह प्रकिया हजसका अनुपालन जंगम तथा स्थावर (Movable and immovable) सभपहत्तयों की कुकी करने में ककया जायेगा; (ड़) हवियों को प्रकाहशत करने, संचाहलत करने, अपास्त करने तथा उनकी पुहष्ट करने के हलये प्रकिया तथा ऐसी कायडवाहहयों से संसि (ancillary) समस्त आनुषंहगक हवषय; (च) पशुधन तथा अन्य जंगम सभपहत्त का, जबकक वह कुकी के अधीन हो अनुरिण तथा उसकी अहभरिा, ऐसे अनुरिण तथा ऐसी अहभरिा के हलये देय फीस, ऐसे पशुधन तथा सभपहत्त का हविय, और ऐसे हविय के आगम; (छ) अपीलों तथा अन्य कायडवाहहयों का समेकन (Consolidation); (ज) ऐसे समस्त प्ररूप, रहजस्टर, पुस्तकें, प्रहवहष्टयाँ तथा लेखे जो राजस्व न्यायालयों के कामकाज के सभपादन के हलये आवश्यक या वांछनीय हों; (झ) वह समय हजसके भीतर ककसी अहभव्यहि उपबन्ध् के अभाव में अपीलें फाइल की जा सकेंगी या पुनरीिण के हलये आवेदन फाइल ककये जा सकेंगे; (ज्ञ) ककन्हीं भी कायडवाहहयों के तथा उनके आनुषंहगक (Incidental) खचें; (ट) कमीशन पर साहियों की परीिा और ऐसी परीिा से आनुषंहगक व्ययों का भुगतान; (ठ) अजी लेखकों का अनुज्ञापन और उनके आचरण का हवहनयमन । (3) ऐसे हनयम पूवड प्रकाशन की शतड के तथा राज्य सरकार के अनुमोदन के अध्यधीन होंगे, और उनके इस प्रकार बनाये जाने तथा अनुमोकदत हो जाने के पिात्, वे राजपत्र में प्रकाहशत ककये जायेंगे और प्रकाशन की तारीख से या ऐसी अन्य तारीख से, जो कक हवहनर्ददष्ट की जाये, उनका वही बल और प्रभाव होगा मानों कक वे अनुसूची 1 में अन्तर्तवष्ट थे।
42. राजस्व पदाहधकारी के आदेश, भूल अथवा अहनयहमतता के कारण कब उल्टे जा सकेंगे
42. राजस्व पदाहधकारी के आदेश, भूल अथवा अहनयहमतता के कारण कब उल्टे जा सकेंगे – राजस्व पदाहधकारी द्वारा कदया गया कोई भी आदेश, सभमन, सूचना, उद्घोषणा, अहधपत्र वारण्ट या आदेश में या जाँच के पूवड या उसके दौरान में अन्य कायडवाहहयों में अथवा इस संहहता के अधीन अन्य कायडवाहहयों में ककसी भी भूल, अकृत या अहनयहमतता के कारण अपील या पुनरीिण में तब तक उलटा या पररवर्ततत नहीं ककया जायेगा जब तक कक ऐसी भूल, अकृत या अहनयहमतता के कारण तथ्यत: अन्याय न हुआ हो । व्याखया – यह अवधाररत करते समय कक इस संहहता के अधीन ककसी कायडवाही में ककसी भूल, कृत या अहनयहमतता के कारण अन्याय हुआ है या नहीं इस तथ्य का ध्यान रखा जायेगा कक कायडवाहहयों की ककसी पूवडवती हस्थहत में आपहत्त उठाई जा सकती थी तथा उठाई जानी चाहहए थी ।
43. इस संहहता में स्पष्ट उपबन्ध न होने की दशा में व्यवहार प्रकिया संहहता का लागू होना
जब तक इस संहहता में स्पष्टत: अन्यथा उपबहन्धत न हो तब तक इस संहहता के अधीन समस्त कायडवाहहयों में यथा सभभव कोड ऑफ हसहवल प्रोसीजर, 1908; व्यवहार प्रकिया संहहता, 1908 (िमांक 5 सन् 1908) में दी गई प्रकिया का अनुसरण ककया जायेगा ।
44. अपील तथा अपीलीय अहधकारी
(1) जहाँ अन्यथा उपबहन्धत ककया गया हो, उसके अहतररि इस संहहता अथवा इसके अधीन बनाये गये हनयमों के अधीन प्रत्येक मूल आदेश की अपील हो सकेगी – (क) यकद ऐसा आदेश उपखण्डीय पदाहधकारी के अधीनस्थ ककसी भी राजस्व पदाहधकारी द्वारा कदया गया हो, चाहे आदेश देने वाला पदाहधकारी में कलेक्टर की शहियाँ हवहनहहत की गई हों उपखण्डीय पदाहधकाररयों को; (ख) यकद ऐसा आदेश उपखण्डीय पदाहधकारी द्वारा कदया गया हो, चाहे उसमें कलेक्टर की शहियाँ हवहनहहत की गयी हों या नहीं, कलेक्टर को; (ग) यकद ऐसा आदेश बन्दोबस्त पदाहधकारी के अधीनस्थ ककसी भी राजस्व पदाहधकारी द्वारा कदया गया हो, बन्दोबस्त पदाहधकाररयों को; (घ) यकद ऐसा आदेश ककसी ऐसे राजस्व पदाहधकारी द्वारा कदया गया हो हजसके सभबन्ध में धारा 12 की उपधारा (3) अथवा धारा 21 की उपधारा (2) के अधीन हनदेश कदया गया हो, ऐसे राजस्व पदाहधकारी को, हजसे राज्य शासन हनदेहशत करे; (ड़) यकद ऐसा आदेश कलेक्टर द्वारा कदया गया हो, चाहे वह बन्दोबस्त के चालू रहने की अवहध में कलेक्टर की शहियों को या पदाहधकारी की शहियों को प्रयोग में ला रहा हो या नहीं आयुि को; (च) यकद ऐसा आदेश बन्दोबस्त प्राहधकारी द्वारा कदया गया हो, चाहे वह ककसी भी बन्दोबस्त कायड के सभबन्ध में बन्दोबस्त पदाहधकारी की शहियों को या कलेक्टर की शहियों को प्रयोग में ला रहा हो या नहीं जब तक कक स्पष्ट रूप से अन्यथा उपबहन्धत न हो, बन्दोबस्त आयुि को; (छ) यकद ऐसा आदेश आयुि अथवा बन्दोबस्त आयुि द्वारा कदया गया हो मण्डल को । (2) अन्यथा उपबहन्धत के हसवाय, इस कोड या उसके अधीन बनाये गये हनयमों के अधीन-प्रथम अपील में – (एक) उपखण्ड अहधकारी या कलेक्टर द्वारा पाररत ककये गये प्रत्येक आदेश के हवरूद्ध हद्वतीय अपील आयुि को होगी; (दो) बन्दोबस्त अहधकारी द्वारा पाररत ककये गये आदेश के हवरूद्ध हद्वतीय अपील बन्दोबस्त आयुि को होगी; (तीन) आयुि द्वारा पाररत ककये गये प्रत्येक आदेश के हवरूद्ध हद्वतीय अपील मण्डल को – (क) उस दशा में होगी जबकक मूल आदेश को प्रथम अपील में खचें के मामले में के अहतररि अन्य मामले में पररवर्ततत ककया गया हेा उलट कदया गया हो; या (ख) हनम्नहलहखत आधारों में से ककसी भी आधार पर होगी, न कक ककसी अन्य आधार पर, अथाडत् – (एक) यह कक आदेश हवहध या हवहध का प्रभाव रखने वाली प्रथा के प्रहतकूल है; या (दो) यह कक आदेश द्वारा हवहध का प्रभाव रखने वाली प्रथा सभबन्धी ककसी सारवान् हववाद्यक का अवधारण नहीं हो सका है; या (तीन) यह कक इस कोड द्वारा यथाहवहहत प्रकिया में ऐसी सारवान् गलती या त्रुरट हुई है हजसके कक गुणागुण के आधार पर मामले के हवहनिय में गलती या त्रुरट उत्पि हो । (3) पुनर्तवलोकन में ककसी भी आदेश को पररवर्ततत करने वाला या उलटने वाला आदेश, मूल आदेश की भाँहत ही अपील योग होगा।
45. कहतपय लहभबत कायडवाहहयों का बन्दोबस्त आयुि को अन्तरण
हवहनहित करती है कक ककसी ऐसे स्थानीय िेत्र में, हजसमें कक राजस्व सवेिण बन्द कर कदया गया है, बन्दोबस्त संकियाओं को जाना चाहहए तो वह उस प्रभाव की अहधसूचना प्रकाहशत करेगी और ऐसा िेत्र ऐसी अहधसूचना की ताररख से लेकर तब तक बन्दोबस्त के अधीन रहेगा जब तक कक स्थानीय िेत्र में की ककसी भूहम की बाबत धारा 82 के अधीन बन्दोबस्त का आखयापन पूणड न हो जाय : परन्तु यकद अहधसूचना, धारा 67 की उपधारा (1) के अधीन राजस्व सवेिण संकियाओं के बन्द करने की घोषणा करने वाली अहधसूचना जारी ककये जाने की तारीख से पाँच वषड की कालावहध का अवसान हो जाने के पिात् जारी की जाती है, तो इसके पूवड की इस भाग में अन्तर्तवष्ट उपबन्धों के अनुसार बन्दोबस्त संकियाएँ की जाये, धारा 108 के अधीन अहधकार अहभलेख तैयार ककये जायेंगे।
46. कहतपय आदेशों के हवरूद्ध कोई अपील नहीं होगी
ककसी भी ऐसे आदेश की – (क) हजसके द्वारा कोई अपील या पुनर्तवलोकन के हलये कोई आवेदन पररसीमा अहधहनयम, 1963 (1963 का 36) की धारा 5 में हवहनर्ददष्ट ककये गये आधारों पर ग्रहण ककया गया है; या (ख) हजसके द्वारा पुनर्तवलोकन के हलये ककये गये ककसी आवेदन को नामंजूर ककया गया है; या (ग) हजनके द्वारा ककसी ऐसे आवेदन को जो रोक (स्टे) के हलये हो, मन्जूर या नामंजूर ककया गया है; या (घ) जो अन्तररम स्वरूप का है; या (ड़) जो धारा 104 की उपधारा (2) या धारा 106 की उपधारा (1) के अधीन की हनयुहि से सभबहन्धत है, इस संहहता के अधीन कोई अपील नहीं होगी ।
47. अपीलों की पररसीमा
(क) उस आदेश की तारीख से हजसके कक सभबन्ध में आपहत्त की जाये, तीस कदन का अवसान हो जाने के पिात् उपखण्ड अहधकारी या कलेक्टर को या बन्दोबस्त अहधकारी या बन्दोबस्त आयुि को कोई अपील नहीं होगी; या (ख) ऐसी तारीख से पैंतालीस कदन का अवसान हो जाने के पिात् आयुि को कोई अपील नहीं होगी; या (ग) ऐसी तारीख से साठ कदन का अवसान हो जाने के पिात् मण्डल को कोई अपील नहीं होगी: परन्तु वह आदेश, हजसके कक हवरूद्ध अपील की जा रही है, मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहहता (संशोधन) अहधहनयम, 2011 के प्रवृत्त होने के पूवड ककया गया हो, वहाँ ऐसे मामले में अपील उि अहधहनयम के पूवड की संहहता में उपबंहधत समय-सीमा के भीतर ग्रहण की जाएगी: परन्तु यह और कक जहाँ ककसी ऐसे पिकार को, जो उस पिकार से हभि हो हजसके कक हवरूद्ध आदेश एकपिीय पाररत ककया गया है, उस तारीख की, हजसको कक आदेश पाररत ककया गया है, कोई पूवड सूचना न रही हो, वहाँ इस धारा के अधीन पररसीमा की संगणना ऐसे आदेश के संसूहचत ककये जाने की तारीख से की जायेगी ।
48. याहचका (अजी) के साथ उस आदेश की प्रहतहलहप होगी हजसके कक सभबन्ध में आपहत्त की गई है
(1) जहां सभपहत्त का कब्जा अहभप्राप्त करने में िेता का ककसी व्यककत् द्वारा प्रहतरोध ककया जाता है या उसे बाधा डाली जाती है, वहां वह ऐसे प्रहतरोध या बाधा का पररवाद करते हुए आवदेन राजस्व अहधकारी को कर सकेगा । (2) राजस्व अहधकारी उस बात के अन्वेषण के हलये तारीख हनयत करेगा और हजस पिकार के हवरूद्ध आवेदन ककया गया है उेस उपसंजात होने तथा उत्त्र देने के हलये समन करेगा ।
49. अपील प्राहधकारी की शहि
(1) अपील प्राहधकारी या तो अपील को ग्रहण कर सकेगा या, अहभलेख माँगने और अपीलाथी को सुनवाई का अवसर देने के पिात् उसे संिेपत: नामन्जूर कर सकेगा: परन्तु अपील प्राहधकारी उस दशा में अहभलेख मँगाने के हलये आबद्ध नहीं होगा जबकक अपील समय-वर्तजत है या अपील नहीं हो सकती है । (2) यकद अपील ग्रहण कर ली जाती है तो सुनवाई के हलये तारीख हनयत की जायेगी और प्रत्यथी पर सूचना तामील की जायेगी । (3) पिकारों को सुनने के पिात्, अपील प्राहधकारी उस आदेश की, हजसके कक हवरूद्ध अपील की गई है, पुहष्ट कर सकेगा, उसमें फेरफार कर सकेगा या उसे उलट सकेगा या ऐसा अहतररि साक्ष्य ले सकेगा जैसा कक आदेश पाररत करने के हलए वह आवश्यक समझे: परन्तु यह कक अपील प्राहधकारी, उसके अधीनस्थ ककसी राजस्व अहधकारी द्वारा मामले को, हनपटाने के हलए प्रहतप्रेहषत नहीं करेगा परन्तु यह और कक मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहहता (संशोधन) अहधहनयम, 2011 के प्रवृत्त होने के पूवड के समस्त ऐसे मामले, जो अपील या पुनरीिण प्राहधकाररयों द्वारा अधीनस्थ राजस्व अहधकाररयों को प्रहतप्रेहषत ककए गए हैं, ऐसे राजस्व अहधकारी द्वारा सुने तथा हवहनहित ककए जाएंगे।
50. पुनरीिण
(1) मण्डल ककसी भी समय स्वप्रेरणा से या ककसी पिकार द्वारा कदए गए आवेदन पर या कलक्टर या बन्दोबस्त अहधकारी ककसी भी समय स्वप्रेरणा से ककसी ऐसे मामले का जो हवहनहित ककया जा चुका हो या ककसी ऐसी कायडवाही का हजसमें उसके अधीनस्थ ककसी राजस्व अहधकारी द्वारा कोई आदेश पाररत ककया जा चुका हो, और हजसमें कोई अपील न होती हो, और यकद यह प्रतीत होता हो कक अधीनस्थ राजस्व अहधकारी – (क) ने ऐसी अहधकाररता का प्रयोग ककया है जो इस संहहता द्वारा उसमें हनहहत न की गई हो, या (ख) इस प्रकार हनहहत की गई अहधकाररता का प्रयोग करने मे असफल रहा है, या (ग) ने अपनी अहधकाररता का प्रयेाग करने में अहवहधपूणड या सारवान अहनयहमतता की है, तो मण्डल या कलक्टर या बन्दोबस्त अहधकारी मामले में ऐसा आदेश कर सकेगा जैसा वह उहचत समझे: परन्तु मण्डल या कलक्टर या बंदोबस्त अहधकारी, इस धारा के अधीन ककए गए ककसी आदेश में या कायडवाही के अनुिम में ककसी हववाद्यक का हवहनिय करने वाले ककसी आदेश में फेरफार नहीं करेगा या उसे नहीं उलटेगा, हसवाय जहां कक – (क) ऐसा आदेश, यकद वह मण्डल को पुनरीिण का आवेदन करने वाले पिकार के पि में ककया गया हो, कायडवाही का अंहतम रूप में हनपटारा करता हो, या (ख) ऐसा आदेश, यकद वह प्रवृत्त रहता है, न्याय की हवफलता या उस पिकार को, हजसके हवरूद्ध यह ककया गया था, अपूरणीय िहत काररत करेगा । (2) मण्डल या कलक्टर या बंदोबस्त अहधकारी इस धारा के अधीन, ककसी ऐसे आदेश में, हजसके हवरूद्ध या तो मण्डल को या उसके अधीनस्थ ककसी राजस्व अहधकारी को अपील होती हो, कोई फेरफार नहीं करेगा या उसे नहीं उलटेगा । (3) राजस्व अहधकारी के समि ककसी पुनरीिण का प्रभाव कायडवाही को स्थहगत करने वाला नहीं होगा, हसवाय जहां कक ऐसी कायडवाही यथाहस्थहत मण्डल या कलक्टर या बंदोबस्त अहधकारी द्वारा स्थहगत की गई हो । (4) पुनरीिण के हलए कोई आवेदन – (क) इस संहहता के अधीन अपीलनीय ककसी आदेश के हवरूद्ध; (ख) धारा 210 के अधीन बंदोबस्त आयुि के ककसी आदेश के हवरूद्ध; (ग) जब तक कक वह मण्डल को साठ कदन के भीतर प्रस्तुत न ककया गया हो, ग्रहण नहीं ककया जाएगा: परन्तु जहां ऐसा आदेश, हजसके हवरूद्ध पुनरीिण का आवेदन प्रस्तुत ककया जा रहा है, मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहहता (संशोधन) अहधहनयम, 2011 के प्रवृत्त होने के पूवड ककया गया हो, वहाँ ऐसे मामले में पुनरीिण आदेश की तारीख से नब्बे कदन के भीतर ग्रहण ककया जाएगा । (5) ककसी भी आदेश को पुनरीिण में तब तक फेरफाररत नहीं ककया जाएगा या उलटा नहीं जाएगा जब तक कक हहतबद्ध पिकार पर सूचना की तामील न कर दी गई हो और उन्हें सुनवाई का अवसर न दे कदया गया हो । (6) उपधारा (1) में, अन्तर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी – (एक) जहां उपधारा (1) के अधीन ककसी मामले के संबंध में कायडवाहहयां मण्डल का प्रारंभ की गई हों, वहाँ उसके संबंध में कलक्टर या बंदोबस्त अहधकारी द्वारा कोई कारडवाई नहीं की जाएगी; (दो) जहां उपधारा (1) के अधीन ककसी मामले के संबंध में कायडवाहहयां कलेक्टर या बंदोबस्त अहधकारी द्वारा प्रारंभ की गई हों, वहां इस धारा के अधीन ऐसे मामले के संबंध् में मण्डल, यथाहस्थहत, कलक्टर या बंदोबस्त अहधकारी द्वारा मामले के अंहतम हनपटारे तक या तो हवरत रहेगा या ऐसी कायडवाहहयां वापस ले सकेगा या ऐसा आदेश पाररत कर सकेगा, जैसा कक वह उहचत समझे । स्पष्टीकरण – इस धारा के प्रयोजन के हलए समस्त राजस्व अहधकारी मण्डल के अधीनस्थ समझे जाएंगे।
51. आदेशों का पुनर्तवलोकन
(1) मण्डल तथा प्रत्येक राजस्व अहधकारी, या तो स्वप्रेरणा से या ककसी हहतबद्ध पिकार के आवेदन पर, ककसी ऐसे आदेश का, जो स्वत: उसके द्वारा या उसके पूवाडहधकाररयों में से ककसी पूवाडहधकारी द्वारा पाररत ककया गया हो, पुनर्तवलोकन कर सकेगा और उसके सभबन्ध में ऐसा आदेश पाररत कर सकेगा जैसा कक वह ठीक समझे: परन्तु – (एक) यकद आयुि, बन्दोबस्त आयुि, कलेक्टर या बन्दोबस्त अहधकारी ककसी ऐसे आदेश का, जो कक उसने स्वयं पाररत न ककया हो, पुनर्तवलोकन करना आवश्यक समझता है, तो वह पहले मंडल की मंजूरी अहभप्राप्त करेगा; और यकद कलेक्टर या बन्दोबस्त अहधकारी के अधीनस्थ कोई अहधकारी ककसी ऐसे आदेश का, जो चाहे स्वयं उसके द्वारा या उसके ककसी
52. आदेशों के हनष्पादन का रोका जाना
(1) राजस्व अहधकारी, हजसने कोई आदेश पाररत ककया हो या उसका पद उत्तरवती अपील या पुनरीिण के हलये हनहहत की गई कालावहध का अवसान होने के पूवड, ककसी भी समय, यह हनदेश दे सकेगा कक ऐसे आदेश का हनष्पदान उतने समय तक के हलये रोक कदया जाये जो अपील या पुनरीिण फाइल करने यथा अपील या पुनरीिण प्राहधकारी से रोक आदेश (स्टे आडर) अहभप्राप्त करने के हलये अपेहित हो । (2) अपील या पुनरीिण प्राहधकारी; ककसी भी समय, यह हनदेश दे सकेगा कक उस आदेश का हजसकी कक अपील की गई है या हजसके कक हवरूद्ध पुनरीिण ककया गया है, हनष्पादन उतने समय तक के हलये रोक कदया जाये हजतना कक वह ठीक समझे: परन्तु आदेश का हनष्पादन, एक बार में, तीन मास से अहधक के हलए या अगली सुनवाई की तारीख तक, जो भी पूवडतर हो, नहीं रोका जाएगा । (3) वह प्राहधकारी, जो धारा 50 या धारा 51 द्वारा प्रदत्त शहियों का प्रयोग कर रहा हो, यह हनदेश दे सकेगा कक उस आदेश का, जो पुनरीिण या पुनर्तवलोकन के अधीन है, हनष्पदान उतने समय तक के हलये रोक कदया जाये हजतना कक वह ठीक समझे: परन्तु आदेश का हनष्पदान, एक बार में, तीन मास से अहधक के हलए या अगली सुनवाई की तारीख तक, जो भी पूवडतर हो, नहीं रोका जाएगा। (4) ककसी आदेश का हनष्पादन रोक कदये जाने का हनदेश देने वाला राजस्व अहधकारी या प्राहधकारी ऐसी शतें अहधरोहपत कर सकेगा या ऐसी प्रहतभूहत कदये जाने का आदेश दे सकेगा जैसी कक वह ठीक समझे । (5) कोई ऐसा आदेश, हजससे ककसी आदेश के हनष्पादन को रोक कदये जाने का हनदेश कदया गया हो, इस धारा के उपबन्धों के अनुसार ही पाररत ककया जाएगा अन्यथा नहीं।
53. हलहमटेशन ऐक्ट का लागू होना
बकायादार से हभि कोई भी पिकार, हजसके हवरूद्ध हनयम 49, 50 या 52 के अधीन आदेश ककया गया है, उस अहधकार को स्थाहपत करने के हलये वाद संहस्थत कर सकेगा हजसका कक दावा वह सभपहत्त के तत्काल कब्जे के हलये करता है, ककन्तु ऐसे वाद के, यकद कोई हो, पररणाम के अध्यधीन रहते हुए आदेश हनिायक होगा ।
54. लहभबत पुनरीिण
इस अध्याय में अंतर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी ऐसी समस्त कायडवाहहयां जो मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहहता (संशोधन) अहधहनयम, 2011 के प्रवृत्त होने के ठीक पूवड ककसी राजस्व अहधकारी के समि पुनरीिण में लंहबत हों, ऐसे राजस्व अहधकारी द्वारा उसी प्रकार सुनी जाएंगी तथा हवहनहित की जाएंगी मानो कक यह संशोधन अहधहनयम पाररत ही न हुआ हो ।
55. अध्याय का लागू होना
शंका के पररवजडन के हलये, एतद्द्वारा यह घोहषत ककया जाता है कक इस संहहता में अहभव्यि रूप से अन्यथा उपबहन्धत के हसवाय, इस अध्याय के उपबन्ध हनम्नहलहखत होंगे – (क) ऐसे समस्त आदेशों को, जो इस संहहता के प्रवृत्त होने की तारीख के पूवड ककसी राजस्व अहधकारी द्वारा पाररत ककये गये हों और हजनके कक हवरूद्ध कोई अपील या पुनरीिण कायडवाहहयाँ ऐसी तारीख के पूवड लहभबत न हों; और (ख) राजस्व अहधकाररयों के समि की समस्त कायडवाहहयों को, इस बात के होते हुए भी कक वे इस संहहता के प्रवृत्त होने के पूवड संहस्थत की गई थीं या प्रारभभ की गई थी अथवा इस संहहता के प्रवृत्त होने के पूवड संहस्थत था प्रारभभ की गई कायडवाहहयों से उद्भूत हुई थीं।
56. आदेश का अथाडन्वयन
कोई भी राजस्व अहधकारी – (क) अपनी अहधकाररता की स्थानीय सीमाओं से परे हनवासी ककसी भी व्यहि की; (ख) ककसी भी ऐसे व्यहि की, जो ऐसी सीमाओं को उस तारीख से पहले छोड़ने वाला है हजसको कक न्यायालय में परीिा की जाने के हलये वह अपेहित है; (ग) केन्रीय सरकार या राज्य सरकार की सेवा में के ककसी ऐसे व्यहि की, हजसके कक बारे में ऐसे राजस्व अहधकारी की यह राय हो कक लोक सेवा का उपाय ककये हबना वह हाहजर नहीं हो सकता, परीिा करने के हलये कमीशन ककन्हीं भी कायडवाहहयों में जारी कर सकेगा ।
57. समस्त भूहमयों में राज्य का स्वाहमत्व
(1) ककसी व्यहि की परीिा करने के हलये कमीशन ककसी भी ऐसे व्यहि को, हजसे कक न्यायालय उसका हनष्पादन करने के हलये ठीक समझता है, या ककसी ऐसे अन्य राजस्व अहधकारी को, जो सुहवधापूवडक ऐसे व्यहि की परीिा कर सकता हो, जारी ककया जा सकेगा । (2) प्रत्येक राजस्व अहधकारी, हजसे ककसी व्यहि की परीिा करने के हलये कमीशन प्राप्त हो, उसके अनुसरण में उसकी परीिा करेगा या करवायेगा । (3) राजस्व अहधकारी, कोई भी कमीशन इस हनयम के अधीन जारी करने पर यह हनदेश देगा कक क्या कमीशन उसको ही लौटाया जायेगा या कक उसके ककसी अधीनस्थ राजस्व अहधकारी को।
58. भू-राजस्व के भुगतान के हलये भूहम का दाहयत्व
(1) समस्त भूहम चाहे वह ककसी भी प्रयोजन के हलए उपयोहजत की जाती हो और चाहे वह कहीं भी हस्थत हो राज्य सरकार के राजस्व के भुगतान के हलये दाहयत्वाधीन है हसवाय ऐसी भूहम के हलये राज्य सरकार के हवशेष अनुदान या राज्य सरकार के साथ की गई संहवदा द्वारा या तत्समय प्रवृत्त ककसी हवहध या हनयम के उपबंधों के अधीन ऐसे दाहयत्व से पूणडत: छूट दे दी गई है: परन्तु धारा 245 के उपबधों के अध्यधीन रहते हुए आबादी भूहम, और वह भूहम जो नगरेतर िेत्रों में हस्थत है तथा कृहषक प्रयोजनों के हलये उपयोग में लाई जाती है जो ऐसे दाहयत्व से छूट प्राप्त नहीं है, ग्राम सभा को राजस्व के भुगतान के हलये दाहयत्वाधीन है । (2) ऐसा राजस्व ‘भू–राजस्व’ कहलाता है और उस शब्द के अन्तडगत भूहम के हलये राज्य सरकार को देय समस्त धन है, भले ही ऐसे धन ककसी अहधहनयहमहत, हनयम, संहवदा या हवलेख में प्रीहमयम, लगान पट्टा – धन प्रमुहि-भाटक के रूप में या ककसी अन्य रूप में वर्तणत ककये जायें ।
59. हजस प्रयोजन के हलये भूहम उपयोग में लाई जावे उसी के अनुसार भू-राजस्व में फेराफार
(1) ककसी भूहम पर राजस्व का हनधाडररत हनम्नहलहखत प्रयोजनों के हलये उस भूहम के उपयोग को दृहष्ट में रखते हुए ककया जायेगा. (क) कृहष या ऐसे प्रिेत्र गृह (फामड हाउस) के प्रयोजन के हलये उपयोग जो एक एकड या अहधक के खाते पर हस्थत है; (ख) हनवास–ग्रहों के हलये स्थानों के रूप में उपयोग; (ग) शैिहणक प्रयोजन के हलये उपयोग; (घ) औद्योहगक प्रयोजन के हलए उपयोग: (ड) वाहणहज्यक प्रयोजन के हलए उपयोग; (च) खान और खहनज (हवहनयमन और हवकाश) अहधहनयम, 1957 (1957 का 67) के अथड के अंतगडत खनन पट्टे के अधीन खनन के प्रयोजन के हलये; (छ) उपरोि पद (क) से (च) में हवहनर्ददष्ट ककए गए प्रयोजनों से हभि प्रयोजनों के हलये उपयोग: परन्तु ककसी ऐसी भूहम पर, जो उन िेत्रों में हस्थत है, हजन्हें भारतीय वन अहधहनयम, 1927 (1927 का सं. 16) के अधीन आरहित या संरहित वनों के रूप में गरठत ककया जाये पूवोि प्रयोजनों में से ककसी भी प्रयोजन के हलये भूहम के उपयोग के प्रहत हनदेश से भू-राजस्व के हनधाडरण की कायडवाही या संहहता के सुसंगत उपबन्धों के अधीन हनधाडरण के समबन्ध में अनुसररत की जाने वाली कोई भी प्रकिया, वन हवभाग के ऐसे ककसी अहधकारी द्वारा, हजसे राज्य सरकार द्वारा इस हनहमत्त, सभयक् रूप से प्राहधकृत ककया गया हो भूहम के उपयोग को अनुज्ञात करते हुए जारी ककये गये प्रमाण-पत्र पर ही की जायेगी या प्रारभभ की जायगी अन्यथा नहीं । स्पष्टीकरण - खण्ड (क) के प्रयोजन के हलए “प्रिेत्र गृह” (फामड हाउस) से अहभप्रेत है ऐसा भवन या सहिमाडण जो धारा 2 की उपधारा (1) के खण्ड (ज्ञ) में यथा पररभाहषत सुधार है और हजसका कुसी िेत्र (सप्लथ एररया) एक सौ वगड मीटर से अहधक नहीं होगा और हनर्तमत िेत्र एक सौ पचास वगड मीटर से अहधक नही होगा। (2) जहां कोई भूहम, हजस पर ककसी एक प्रयोजन के हलये उपयोग में लाये जाने के हेतु हनधाडरण ककय गया हो, ककसी अन्य प्रयोजन के हलये व्यपवर्ततत कर दी जाय, वहां ऐसी भूहम पर देय भू राजस्व इस बात के होते हुए भी कक उस अवहध का हजसके कक हलये हनधाडरण हनयत ककया गया हो, अवसान नहीं
60. हनधाडरण ककसके द्वारा हनयत ककया जायेगा
राजस्व अहधकारी इन हनयमों के अधीन कोई कमीशन जारी करने के पूवड यह आदेश दे सकेगा कक ऐसी राहश (यकद कोई हो), जैसी कक वह कमीशन के व्ययों के हलये युहियुि समझे, हनयत ककये जाने वाले समय के भीतर उस पिकार द्वारा भुगतान की जाय हजसकी कक प्रेरणा पर या हजसके कक फायदे के हलये कमीशन जारी ककया जाना है ।
61. इस अध्याय का नगरेतर िेत्रों में की भूहमयों को लागू होना
(1) साहियों का समन करने, साहियों की हाहजरी और साहियों के परीिा संबंधी और साहियों के पाररश्रहमक तथा उन पर अहधरोहपत की जाने वाली शाहस्तयों सभबन्धी इस संहहता के उपबन्ध उन व्यहियों को लागू होंगे हजनसे साक्ष्य देने की या दस्तावेज पेश करने की अपेिा इन हनयमों के अधीन की गई है और कमीशन के बारे में इस हनयम के प्रयोजनों के हलये यह समझा जायेगा कक वह राजस्व न्यायालय है ।
62. बन्दोबस्त आयुि की हनयुहि
(1) जहां कक कमीशन इन हनयमों के अधीन जारी ककया जाता है, वहां राजस्व अहधकारी यह हनदेश देगा कक कायडवाहहयों के पिकार कहमश्नर के सामने या तो स्वयं या अपने अहभकताडओं के या प्लीडरों के द्वारा उपसंजात हों । (2) जहां कक समस्त पिकार या उनमें से कोई ऐसे उपसंजात न हों वहां कहमश्नर उनकी अनुपहस्थहत में कायडवाही कर सकेगा ।
63. अपर बन्दोबस्त आयुिों की हनयुहि और उनकी शहियाँ तथा कतडव्य
(1) राज्य सरकार एक या अहधक अपर बन्दोबस्त आयुिों की हनयुहि कर सकेगी । (2) अपर बन्दोबस्त आयुि, ऐसे मामलो में या ऐसे वगड के मामलो में, जैसे कक राज्य सरकार या बन्दोबस्त आयुि हनदेहशत करे, ऐसी शहियों का प्रयोग करेगा जो इस संहहता द्वारा या तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य अहधहनयहमहत द्वारा अथवा इस संहहता या ऐसी अन्य अहधहनयहमहत के अधीन बनाये गये ककसी हनयम द्वारा बन्दोबस्त आयुि को प्रदत्त की गई है तथा ऐसे कतडव्यो का हनवडहन करेगा जो इस संहहता द्वारा या तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य अहधहनयहमहत द्वारा अथवा इस संहहता या ऐसी अन्य अहधहनयहमहत के अधीन बनाये गये ककसी हनयम द्वारा बन्दोबस्त आयुि पर अहधरोहपत ककये गये है और अपर बन्दोब्सत आयुि के सभबन्ध में, जबकक वह ऐसी शहियों का प्रयोग कर रहा हो तथा ऐसे कतडव्यों का हनवडहन कर रहा हो, यह समझा जायेगा कक उसे इस संहहता या ऐसी अन्य अहधहनयहमहत के या इस संहहता या ऐसी अन्य अहधहनयहमहत के अधीन बनाये गये ककसी हनयम के प्रयोजन के हलये बन्दोबस्त आयुि हनयुि ककया है।
64. बन्दोबस्त अहधकारी, उप-बन्दोबस्त अहधकाररयों तथा सहायक बन्दोबस्त अहधकाररयों की हनयुहि
(1) राज्य सरकार ककसी अहधकारी को, हजसे इसमें इसके पिात् बन्दोबस्त अहधकारी कहा गया है, राज्य सवेिण और/या बन्दोबस्त के भारसाधक के रूप में हनयुि कर सकेगी तथा इतने उप-बन्दोबस्त अहधकारी और सहायक बन्दोबस्त अहधकारी हनयुि कर सकेगी हजतne कक वह ठीक समझे। (2) समस्त बन्दोबस्त अहधकारी, उप-बन्दोबस्त अहधकारी तथा सहायक बन्दोबस्त अहधकारी बन्दोबस्त आयुि के अधीनस्थ होंगे और ककसी स्थानीय िेत्र के समस्त उप-बन्दोबस्त अहधकारी तथा सहायक बन्दोबस्त अहधकारी, बन्दोस्त अहधकारी के अधीनस्थ होंगे।
65. बन्दोबस्त अहधकारी, उप-बन्दोबस्त अहधकारी तथा सहायक बन्दोबस्त अहधकारी की शहियाँ
(1) राज्य सरकार, ककसी बन्दोबस्त अहधकारी या उप-बन्दोबस्त अहधकारी या सहायक बन्दोबस्त अहधकारी में इस संहहता के अधीन की कलेक्टर की समस्त शहियाँ या उनमें से कोई भी शहि हवहनहहत कर सकेगी जो उसके द्वारा ऐसे मामलों में या ऐसे वगड के मामलों में प्रयोग में लाई जायेंगी जैसा कक राज्य सरकार हनर्ददष्ट करे । (2) राज्य सरकार ककसी उप-बन्दोबस्त अहधकारी या सहायक बन्दोबस्त अहधकारी में इस संहहता या तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य अहधहनयहमहत के अधीन की बन्दोबस्त अहधकारी में समस्त शहियाँ या उनमें से कोई भी शहि हवहनहहत कर सकेगी ।
66. राजस्व सवेिण की पररभाषा
इस भाग के उपबन्धों के अनुसार की गई संकियाएँ अथाडत् – (1) भूहम को सवेिण संखयांकों में हवभाहजत करने तथा उनके ग्रामों के रूप में समूह बनाने, हवद्यमान सवेिण संखयांकों को मान्य करने, उन्हें पुनगडरठत करने या नवीन सवेिण संखयांक हवरहचत करने सभबन्धी समस्त संकियाएँ या उनमें से कोई संकिया और उनसे आनुषंहगक संकियाएँ; (2) हमट्टी का वगीकरण; (3) खेत का नक्शा तैयार करना या यथाहस्थहत उसका पुनरीिण करना या उनमें सुधार करना; (4) ककसी स्थानीय िेत्र में भू-अहभलेखों को अद्यतन बनाने के हलये अहधकार अहभलेख तैयार करना, राजस्व सवेिण कहलाती है ।
67. प्रस्थाहपत राजस्व सवेिण की अहधसूचना
(1) जब कभी राज्य सरकार यह हवहनहित करे कक ककसी स्थानीय िेत्र का राजस्व सवेिण ककया जाना चाहहए, तो वह उस प्रभाव की अहधसूचना प्रकाहशत करेगी और ऐसा स्थानीय िेत्र ऐसी अधीसूचना कक तारीख से लेकर तब तक ऐसे सवेिण के अधीन समझा जायेगा जब कक ऐसी संकियाओं के बन्द ककये जाने की घोषणा करने वाली अहधसूचना जारी न कर दी जाये । (2) ऐसी अहधसूचना का हवस्तार स्थानीय िेत्र में की साधारणत: समस्त भूहमयों पर या केवल ऐसी भूहमयों पर हो सकेगा हजनके बारे में राज्य सरकार हनर्ददष्ट करे।
68. सवेिण संखयांकों तथा ग्रामों की हवरचना
इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अध्यधीन रहते हुए, बन्दोबस्त अहधकारी – (क) उस भूहम का, हजस पर राजस्व सवेिण हवस्ताररत है, माप कर सकेगा और उस पर इतनी संखया में सवेिण हचन्ह सन्दर्तभत कर सकेगा और हजतने कक आवश्यक हों; (ख) ऐसी भूहमयों को सवेिण-संखयांकों में हवभाहजत कर सकेगा और ऐसे सवेिण संखयांकों के ग्रामों के रूप में समूह बना सकेगा, और (ग) हवद्यमान सवेिण- संखयांकों को मान्य कर सकेगा, सवेिण-संखयांकों को पुनगडरठत कर सकेगा या नवीन सवेिण-संखयांक हवरंहचत कर सकेगा परन्तु इसमें इसके पिात् तथा उपबहन्धत के हसवाय, कृहष प्रयोजनों के हलये उपयोग में लाई जाने वाली भूहम को समाहवष्ट करने वाले कोई भी सवेिण-संखयांक इसके पिात् उस न्यूनतम हवस्तार से कम हवस्तार के नहीं बनाये जायेंगे जो कक भूहम के हवहभि वगों के हलये हवहहत ककया जाये: परन्तु यह और पूवोि परन्तु के अधीन हवहहत की गई सीमा उन सवेिण-संखयांकों की दशा में लागू नहीं होगी जो धारा 67 की उपधारा (1) के अधीन अहधसूचना की तारीख के ठीक पूवड पहले से ही हवद्यमान हो ।
69. व्यपवर्ततत की गई या हवशेष रूप से समनुदेहशत की गई भूहम का पृथक् सीमांकन
धारा 68 के उपबन्धों के होते भी, जब कृहष भूहम का कोई प्रभाव धारा 172 के उपबन्धों के अधीन ककसी कृहष हभि प्रयोजन के हलये व्यपवर्ततत ककया जाता है, या जब भूहम का कोई प्रभाव धारा 237 के अधीन हवशेष रूप से समनुदेहशत ककया जाता है या भूहम के ककसी प्रभाग पर का कोई हनधाडरण धारा 59 की उपधारा (2) के अधीन पररवर्ततत ककया जाता है तो बन्दोबस्त अहधकारी ऐसे प्रभाग को पृथक् सवेिण संखयांक या सवेिण संखयांक के उपखंड के रूप में गरठत कर सकेगा ।
70. सवेिण-संखयांकों को पुनिडमांककत या उपहवभाहजत करने की शहि
(1) बन्दोबस्त अहधकारी सवेिण संखयांकों को या तो पुनिडमांककत कर सकेगा या उन्हें इतने उपखंडों में उप हवभाहजत कर सकेगा हजतने कक भूहम में अहधकारों के अजडन की दृहष्ट से या ककसी अन्य कारण से अपेहित हो । (2) सवेिण संखयांकों का उपखंडों में हवभाजन तथा सवेिण संखयांक पर के हनधाडरण का उपखंडों के बीच प्रभाजन इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अनुसार ककया जायगा और ऐसे हनयमों में या तो िेत्रफल की या भू – राजस्व की या दोनो की ऐसी सीमाओं का उपबन्ध हो सकेगा हजनसे नीचे कोई उपखंड मान्य नहीं ककया जायेगा: परन्तु ककसी सवेिण संखयांक पर के हनधाडररत की कुल रकम में बन्दोबस्त की अवहध के दौरान तब तक वृहद्ध नहीं की जायगी तब तक कक ऐसा हनधाडरण इस संहहता के उपबन्धों के अधीन पररवतडनीय हो । (3) जहाँ कोई खाता कई खसरा िमांको से हमलकर बना हो, वहाँ बन्दोबस्त अहधकारी प्रत्येक खसरा िमांक के हलये देय भू–राजस्व हनधाडरण करेगा और उन्हें पृथक्–पृथक् सवेिण- संखयांकों के रूप में अहभहलहखत करेगा। (4) जब कभी सवेिण–संखयांकों को पुनिडमांककत ककया जाये तो बन्दोबस्त अहधकारी अध्याय 9 के अधीन तैयार ककये गये या रखे गये समस्त अहभलेखों की प्रहवहष्टयों में शुहद्धयाँ करेगा ।
71. अहभलेखों में सवेिण-संखयांकों तथा उपखंडों की प्रहवहष्ट
सवेिण- संखयांकों तथा सवेिण – संखयाकों के उपखंडों का िेत्रफल तथा हनधाडरण ऐसे अहभलेखों में प्रहवष्ट ककया जायेगा जो कक हवहहत की जाये ।
72. ग्राम की आबादी का अवधारण
बन्दोबस्त अहधकारी प्रत्येक बसे हुए ग्राम के मामले में भूहमयों में के अहधकाररयों का सभयक् ध्यान रखते हुए हनवाहसयों के हनवास के हलये या उसमें आनुषंहगक प्रयोजनों के हलये आरहित ककये जाने वाला िेत्र अहभहनहश्चत तथा अवधाररत और ऐसे िेत्र को ग्राम की आबादी समझा जायेगा ।
73. ग्रामों को हवभाहजत या संयोहजत करने या उनमें से ककसी िेत्र को अपवर्ततत करने की बन्दोबस्त
बन्दोबस्त अहधकारी इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अनुसार ककसी एक ग्राम को दो या अहधक ग्राम गरठत करने के प्रयोजन से हवभाहजत कर सकेगा या दो या अहधक ग्रामों को एक ग्राम गरठत करने के प्रयोजन से समामेहलत कर सकेगा, या ककसी ग्राम की सीमाओं को, उनमें ककसी ऐसे ग्राम के, जो उनके समीप्य में हो, ककसी िेत्र को सहभमहलत करके अथवा उनमें समाहवष्ठ ककसी िेत्र को उनमें से अपवर्तजत करके; पररवर्ततत कर सकेगा ।
74. ग्रामों के समूह बनाना
प्रत्येक हजले या तहसील के या ककसी हजले या तहसील के भाग के उन ग्रामों के जो उस िेत्र में समाहवष्ट हो हजसका कक राजस्व सवेिण ककया जाना है; समूह बनाये जायेंगे और ऐसे समूह बनाने में प्राकृहतक हवशेषताओं, कृहषक तथा आर्तथक दशाओं एवं व्यापाररक सुहवधाओं तथा संचार साधनों को ध्यान में रखा जायेगा।
75. बन्दोबस्त की पररभाषा
परन्तु यह और भी कक पूवडवती परन्तुक के खंड (एक) के उपखंड (क) के अधीन औद्योहगक प्रयोजन के हलये भूहम का अन्तरण हनम्नहलहखत शतों के अध्यधीन होगा, अथाडत्- (एक) यकद ऐसे भूकक ककसी कृहष हभि प्रयोजन के हलये व्यपवर्ततत की जानी हो तो ऐसे व्यपवतडन के हलये धारा 172 के अधीन उपखंड अहधकारी की अनुज्ञा ऐसे अंतरण के पूवड प्राप्त कर ली गई है; और (दो) धारा 172 के उपबन्ध ऐसे अंतरण को इस उपांतरण के साथ लागू होंगे कक उसकी उपधारा (1) के परन्तुक में वर्तणत तीन मास तथा [एक मास] [छ: मास] की कालावहध, ऐसे व्यपवतडन हेतु आवेदन के प्रयोजनों के हलये िमाश: पैंतालीस कदन और [एक मास] [नब्बे कदवस] होगी । स्पष्टीकरण.- इस उपधारा के प्रयोजनों के हलये, ककसी व्यहि के कुटुभब में वह व्यहि स्वयं, उसकी अवयस्क संतान तथा ऐसे व्यहि की पत्नी या उसका पहत जो उनके साथ संयुि रूप से रहता हो, और यकद ऐसा व्यहि अवयस्क हो तो उसके साथ संयुि रूप से रहने वाले उनके माता हपता सहभमहलत होंगे।
76. प्रस्ताहवत बन्दोबस्त की अहधसूचना
धारा 67 की उपधारा (1) के अधीन राजस्व सवेिण की संकियाओं को बन्द करने की घोषणा करने वाली अहधसूचना के जारी होने पर राज्य सरकार, यकद वह
77. हनधाडरण दरों का हनयत ककया जाना
(1) बन्दोबस्त अहधकारी, आवश्यक जाँच, जो कक हवहहत की जाये, पूरी कर लेने पर, हवहभि वगो की भूहम के हलये हनधाडरण दरों के सभबन्ध में अपने प्रस्ताव ऐसे प्रारूप में तथा ऐसी अन्य हवहशहष्टयों के साथ जैसा कक हवहहत ककया जाये, राज्य सरकार को अग्रेहषत करेगा। (2) राज्य सरकार हनधाडरण दरों को ऐसे उपान्तरणों के साथ अनुमोकदत कर सकेगी जैसा कक वह ठीक समझे।
78. हवलुप्त
हवलुप्त
79. उहचत हनधाडरण का हनयत ककया जाना
बन्दोबस्त अहधकारी प्रत्येक खाते पर हनधाडरण, धारा 77 के अधीन अनुमोकदत की गई हनधाडरण दरों के तथा धारा 81 के उपबन्धों के अनुसार; हनयत करेगा और ऐसा हनधाडरण ऐसे खाते का उहचत हनधाडरण होगा।
80. समस्त भूहमयाँ हनधाडरण के दाहयत्वाधीन होंगी
बन्दोबस्त अहधकारी को यह शहि होगी कक वह ककसी भी प्रकार की ऐसी समस्त भूहमयों पर; हजन पर बन्दोबस्त हवस्ताररत होता है, उहचत हनधाडरण करे, चाहे ऐसी भूहमयाँ भू-राजस्व के भुगतान के दाहयत्वाधीन हो या हों।
81. हनधाडरण के हसद्धान्त
(1) समस्त भूहमयों के उहचत हनधाडरण की संगणना इस धारा में उपवर्तणत ककये गये हसद्धान्तों तथा हनबडन्धनो के अनुसार की जायेगी । (2) हवशेषाहधकार प्राप्त हनबडन्धनो पर भूहम धारण करने के ककसी भी दावे पर हवचार नही ककया जायेगा। (3) कृहष भूहम की दशा में, कृहष के लाभो का, पट्टों के हलये कदये गये प्रहतफल का, भूहम की हविय कीमतों का तथा बन्धकों पर के मूलधनों का, तथा कृहष हभि की दशा में, उस प्रायोजन के हलये हजसके कक हलये वह भूहम धाररत है, भूहम के मूल्य का ध्यान रखा जायेगा । (4) गैर कृहष प्रयोजन के हलये उपयोग की गई भूहम पर उहचत हनधाडरण धारा 59 के अधीन बनाए गए हनयमो के अनुसार हनयत ककया जाएगा। (5) जहाँ कृहष के प्रयोजन के हलये धाररत ककसी खाते में उसके धारक द्वारा या धारक के खचे से ककसी भी समय कोई सुधार ककया गया हो, वहाँ ऐसे खाते का उहचत हनधाडरण इस प्रकार हनयत ककया जायेगा मानो कक वह सुधार ककया ही नही गया हो। (6) हवलुप्त
82. बन्दोबस्त का आखयापन
(1) जब ककसी भूहम का हनधाडरण 79 के अनुसार हनयत कर कदया गया हो, तो उसकी सूचना इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अनुसार दी जायेगी, और ऐसी सूचना बन्दोबस्त का आखयापन कहलायेगी। (2) ककसी भूहम का इस धारा के अधीन यथा आखयाहपत हनधाडरण बन्दोबस्त की अवहध के दौरान ऐसी भूहम के सभबन्ध में प्रहतवषड देय भू-राजस्व होगा जब तक कक उसे इस संहहता के या ककसी अन्य हवहध के उपबंधों के अनुसार उपान्तररत न ककया जाय।
83. बन्दोबस्त का प्रारभभ
बन्दोबस्त की अवहध, आखयापन की तारीख के ठीक आगामी राजस्व वषड का आरभभ होने के समय से या पूवड बन्दोबस्त की अवहध का अवसान होने के समय से, इसमें से जो भी बात की हो प्रारभभ होगी।
84. अहधकारों को त्यागने वाले भूहम स्वामी को वृहद्ध से माफी
बन्दोबस्त की अवहध के प्रथम वषड के दौरान ककसी भी ऐसे भूहम स्वामी को, जो नवीन हनधाडरण से असन्तुष्ट हो कृहष वषड प्रारभभ होने के एक मास पूवड उसके द्वारा अपने खाते में के अपने अहधकार धारा 173 द्वारा हवहहत की गई रीहत में त्याग देने पर, ककसी भी ऐसी वृहद्ध से; जो उस हनधाडरण द्वारा अहधरोहपत की गई हो, हमल सकेगी: परन्तु ककसी खाते के केवल ऐसे भाग का या ऐसे खाते का, का जो ककसी हवल्लंगम या भार के अध्यधीन हो, त्यागना अनुज्ञात नहीं ककया जायेगा ।
85. बन्दोबस्त की अवहध
(1) बन्दोबस्त की अवहध राज्य सरकार द्वारा हनयत की जायेगी और वह तीस वषड से कम की नहीं होगी : परन्तु यकद बन्दोबस्त चालू रहने के दौरान, ककसी भी समय, राज्य सरकार यह पाये कक बन्दोबस्त के पिात् साधारण पररहस्थहतयों में हुई तब्दीहलयों को ध्यान में रखते हुए यह वांछनीय है कक हनधाडरण में कमी की जानी चाहहए तो वह ऐसे हनधाडरण में ऐसी कालावहध तक के हलये, जो कक वह ठीक समझे, कमी कर सकेगी (2) उपधारा (1) में अन्तर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी, ककसी ऐसे िेत्र में, जहां खेती के हवस्तार के हलये या कृहष के हवकास के हलये पयाडप्त गुंजाइश है या जहां कक लगान का पररमाण (हपच आफ रेंट ) असभयक् रूप से कम है या जहाँ सड़कों, रेलों या नहरों के सहिमाडण के कारण गत बन्दोबस्त के पिात् संधानों का रुत गहत से हवकाश हुआ है, वहाँ राज्य सरकार अहभहलहखत ककये जाने वाले कारणों से, ऐसी अवहध हनयत कर सकेगी जो तीस वषड से कम की हो सकेगी ककन्तु वह ककसी भी दशा में बीस वषड से कम की नहीं होगी (3) इस बात के होते हुए भी कक ककसी स्थानीय िेत्र के हलये उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन हनयत की गई बन्दोबस्त की अवहध का अवसान हो चुका है, उि अवहध के सभबन्ध में यह समझा जायगा कक वह उस िेत्र में पिात्वती बन्दोबस्त की अवहध के प्राश्रभभ होने के हलये बढाऺ दी गई है ।
86. अधूरी कायडवाहहयों को पूरा करने की कलेक्टर की शहि
जहाँ बन्दोबस्त संकियाएँ बन्द कर दी जाये, वहाँ ऐसे समस्त आवेदन तथा कायडवाहहयाँ जो बन्दोबस्त अहधकारी के समि उस समय लहभबत हो, कलेक्टर को अन्तररत कर दी जायेगी हजसे उनके हनपटारे के हलये बन्दोबस्त अहधकारी की शहियाँ होगी ।
87. कृहष के लाभों तथा भूहम के मूल्य के सभबनध में जाँच
(1) इस संहहता के प्रवृत्त होने के समय से, राज्य सरकार, कृहष के लाभों के सभबन्ध में तथा कृहष एवं कृहष-हभि प्रयोजनों के हलये उपयोग में लाई जाने वाली भूहम के मूल्य के सभबन्ध में इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अनुसार हनरन्तर जारी रखवा सकेगी । (2) कृहष के लाभों का अवधारण करने के प्रयोजन के हलये, खेती की लागत का प्राक्कलन करने में हनभमहलहखत तत्वों पर हवचार ककया जायेगा, अथाडत.- (क) स्टाफ तथा भवनों का अवियण; (ख) खेहतहर के तथा उसके कुटुभब के श्रम तथा पयडवेिण के समतुल्य धन; (ग) जाँच के अधीन आने वाली भूहम पर खेती करने में सामान्यत: उपगत ककये गये समस्त अन्य व्यय, और (घ) भवनों तथा स्टाफ की लागत पर और बीज एवं खाद के व्यय पर तथा कृहष संकियाओं के हलये नगदी में भुगतान ककये गये खचड पर ब्याज । (3) बन्दोबस्त अहधकारी, हनधाडरण दरों के हलये अपनी प्रस्थापनाएँ तैयार करते समय, इस जाँच के अनुिम में संग्रहीत की गई जानकारी पर हवचार करेगा ।
88. नक्शे तथा अहभलेख रखने का कतडव्य बन्दोबस्त अहधकारी को अन्तररत करने की शहि
जब कोई स्थानीय िेत्र राजस्व सवेिण के अधीन हो तो नक्शे तथा अहभलेख रखने का कतडव्य, राज्य सरकार के आदेशों के अधीन, कलेक्टर के पास से बन्दोबस्त अहधकारी को अन्तररत ककया जा सकेगा जो तदुपरर उन समस्त शहियों का प्रयोग करेगा जो अध्याय 9 तथा अध्याय 18 के उपबन्धों में से ककसी भी उपबन्ध में कलेक्टर को प्रदत्त की गई है।
89. गलहतयों को ठीक करने की उपखंड अहधकारी की शहि
उपखंड अहधकारी, राजस्व सवेिण बन्द हो जाने के पिात् तथा बंदोबस्त की प्रहवहध के दौरान ककसी सवेिण संखयांक या खाते के िेत्रफल या हनधाडरण में की ककसी ऐसी गलती को, जो सवेिण में हुई भूल या गणना करने में हुई भूल के कारण हुई हो ठीक कर सकेगा : परन्तु ऐसी गलती को ठीक करने के कारण भू-राजस्व का कोई बकाया देय नहीं हो जायगा ।
90. बन्दोबस्त आकद की अवहध के दौरान कलेक्टर की शहि
राजस्व सवेिण बन्द हो जाने के पिात् तथा बंदोबस्त की अवहध के दौरान, कलेक्टर, जबकक राज्य सरकार द्वारा उसे ऐसा हनदेश कदया जाय, धारा 68, 69, 70, 72 तथा 73 के अधीन बंदोबस्त अहधकारी की शहियों का प्रयोग करेगा ।
91. बन्दोबस्त की अवहध के दौरान बन्दोबस्त अहधकारी को शहि प्रदान करने की शहि
राज्य सरकार, राजस्व सवेिण बंद हो जाने के पिात् तथा बंदोबस्त की अवहध के दौरान, इस अध्याय के अधीन की बंदोबस्त अहधकारी की सतस्त शहियाँ या उनमें से कोई भी शहि ऐसे िेत्र के भीतर तथा ऐसे हनबडन्धनों के अध्यधीन एंव ऐसी कालावहध के हलये जैसी कक वह ठीक समझे, ककसी राजस्व अहधकारी में हवहनहहत कर सकेगी ।
92. इस अध्याय के उपबन्ध नगरीय िेत्रों में की भूहम को लागू होंगे
(1) इस अध्याय के उपबन्ध उस भूहम को लागू होंगे जो .- (एक) भूहम स्वामी द्वारा; (दो) नवीकरण का अहधकार प्रदान करने वाले पट्टे के अधीन सरकारी पट्टेद्वार द्वारा; और (तीन) सेवा-भूहम के धारक द्वारा; नगरीय िेत्र में, चाहे कृहष प्रयोजनों के हलये चाहे कृहष हभि प्रयोजनों के हलये धाररत हो । (2) जब कभी ककसी भू-खण्ड संखयांक पर हनधाडररत ककया गया भू-राजस्व या लगान पुनरीिण योग्य हो जाय तो कलेक्टर उस भू-खण्ड पर हनधाडरण इस अध्याय के उपबन्धों के अनुसार करेगा। स्पष्टीकरण.- इस धारा के प्रयोजनों के हलये, ककसी भू-खण्ड के हलये देय भू–राजस्व या लगान- (एक) उस दशा में जबकक वह भू-खण्ड पट्टे पर धाररत हो, उस समय पुनरीिण योग्य हो गया समझा जायगा जबकक पट्टा नवीकरण योग्य हो जाता है, और (दो) उस दशा में जबकक वह भू-खण्ड भूहम-स्वामी द्वारा धाररत हो, उस समय पुनरीिण योग्य हो गया समझा जायगा जबकक बन्दोबस्त की मूल अवहध का अवसान हो जाता है ।
93. भूहमयों को भू-खंड संखयांकों में हवभाहजत करने की कलेक्टर की शहियाँ
इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अध्यधीन रहते हुए, कलेक्टर – (क) नगरीय िेत्र में की भूहमयों को भू–खंड संखयांक में हवभाहजत कर सकेगा; और (ख) हवद्यमान सवेिण- संखयांकों को भू–खंड संखयांकों के रूप में मान्य कर सकेगा, भू–खंड संखयांकों को पुनगडरठत कर सकेगा या नवीन भू–खंड संखयांक हवरहचत कर सकेगा
94. भू-खंड संखयांकों के पुनिमांककत करने का उपहवभाहजत करने की कलेक्टर की शहियाँ
(1) कलेक्टर भू–खंड संखयांकों को या तो पुन: िमांककत कर सकेगा या उन्हें उपखंडों में उपहवभाहजत कर सकेगा हजतने कक भूहम में अहधकारों के अजडन की दृहष्ट से या ककसी अन्य कारण से अपेहित हो । (2) भू-खंड संखयांकों का उपखंडों में हवभाजन तथा भू-खंड संखयांक के हनधाडरण का उपखंडों के बीच प्रभाजन इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अनुसार ककया जायगा ऐसे हनयमों द्वारा, ककसी स्थानीय िेत्रों में, यथाहस्थहत िेत्रफल की अथवा भू-राजस्व का लगान की या दोनों की ऐसी सीमाओं का उपबन्ध हो सकेगा हजनसे नीचे कोई उपखंड मान्य नहीं ककया जायेगा: परन्तु ककसी भू-खंड संखयांक के हनधाडरण की कुल रकम में बन्दोबस्त की अवहध के दौरान तब तक कोई वृहद्ध नहीं की जायेगी जब तक कक ऐसा हनधाडरण इस संहहता के उपबन्धों के अधीन पररवतडनीय न हो ।
95. भू-खंड संखयांकों तथा उपखंडों का िेत्रफल तथा हनधाडरण अहभलेखों में दजड ककया जायगा
भू-खंड संखयांकों के उपखंडों तथा भू-खंड संखयांकों का िेत्रफल तथा हनधाडरण ऐसे अहभलेखों में दजड ककया जायेगा जो कक हवहहत ककये जायँ ।
96. हनधाडरण के हलये नगर का िेत्र खंडों में हवरहचत ककया जायगा
हनधाडरण के प्रयोजनों के हलये, ककसी नगर का िेत्र खंडों (ब्लाक्स) में हवरहचत ककया जायेगा और ऐसे खंडों को हवरहचत करने में, औद्योहगक, वाहणहज्यक, हनवास सभबन्धी या ऐसे अन्य हवशेष प्रयोजनों के हलये, जो कक हवहहत ककये जायं, भूहम के उपयोग को ध्यान में रखा जायेगा ।
97. हवलुप्त
हवलुप्त
98. उहचत हनधाडरण
(1) कृहष प्रयोजन के हलए उपयोग की जा रही भूहमयों का उहचत हनधाडरण धारा 81 में कदए गए हसद्धांतों और हनबडन्धनों के अनुसार संगहणत तथा हनयत ककया जाएगा और गैर कृहष प्रयोजन के हलए उपयोग की जा रही भूहमयों का, उहचत हनधाडरण धारा 59 के अधीन बनाए गए हनयमों के अनुसार, हनयत ककया जाएगा । (2) प्रत्येक खंड में की भूहमयों का, उन भूहमयों के सभबन्धों में जो कक धारा 59 की उपधारा (1) में वर्तणत प्रयोजनों के हलये धाररत हों, औसत वार्तषक भाटक मूल्य उस वषड से हजसमें कक भाटक मूल्य अवधाररत ककया जा रहा है, ठीक पूवड के बीच पाँच वषों की कालावहध के दौरान ऐसे खंड में पूवोि प्रयोजनों में से प्रत्येक प्रयोजन के हलये धाररत की गई भूहम के सभबन्ध में हुए हवियों तथा पट्टों के
99. हवलुप्त
हवलुप्त
100. पुनरीिण के समय उहचत हनधाडरण का हनयत ककया जाना
पुनरीिण के समय उहचत हनधाडरण का हनयत ककया जाना – उन भूहमयों की दशा में, हजन पर कक हनधाडरण ककसी ऐसे प्रयोजन के हलए ककया जा रहा हो हजसके कक संबंध में उनका हनधाडरण पुनरीिण के ठीक पूवड ककया जा चुका था, वह हनधाडरण जो कक इस प्रकार संगहणत ककया गया हो, कृहष भूहम की दशा में, उस भू-राजस्व या लगान के, जो पुनरीिण के ठीक पूवड देय हो, डेढ़ गुने से अहधक होता हो तथा अन्य भूहमयों की दशा में, उस भू-राजस्व या लगान के, जो पुनरीिण के ठीक पूवड देय हो, छह गुने से अहधक होता हो, तो हनधाडरण कृहष भूहम की दशा में , ऐसे भू-राजस्व या लगान के डेढ़ गुने के हहसाब से तथा अन्य भूहमयों की दशा में, ऐसे भू-राजस्व या लगान के छह गुने के हहसाब से हनयत ककया जाएगा : परन्तु जहां कृहष के प्रयोजन के हलए धाररत ककसी खाते में उसके धारक द्वारा या उसके धारक के व्यय पर ककसी भी समय कोई सुधार ककया गया हो, वहाँ ऐसे खाते का हनधाडरण इस प्रकार हनयत ककया जाएगा मानो कक वह सुधार ककया ही नहीं गया था।
101. बन्दोबस्त की अवहध
बन्दोबस्त की अवहध – धारा 100 के अधीन हनयत ककया गया हनधाडरण तीन वषड की कालावहध तक या ऐसी दीघडतर कालावहध तक, जो कक उस कालावहध के पिात् पुनर्तनधाडरण ककये जाने के पूवड बीत जाय, प्रवृत्त रहेगा और ऐसी कालावहध को, समस्त प्रयोजनो के हलये, बन्दोबस्त की अवहध समझा जायेगा ।
102. हनयत ककया गया हनधाडरण भू-राजस्व या लगान होगा
हनयत ककया गया हनधाडरण भू-राजस्व या लगान होगा – धारा 100 के अधीन हनयत ककया गया हनधाडरण, जब तक ऐसे भू-खंड संखयांक पर प्रहतवषड देय भू-राजस्व या लगान होगा जब तक कक वह इस संहहता या ककसी अन्य हवहध के उपबन्धों के अनुसार उपान्तररत न कर कदया जाय।
103. पूवड के बन्दोबस्त या पट्टों के अधीन हनयत ककया गया हनधाडरण भू-राजस्व या लगान चालू होगा
पूवड के बन्दोबस्त या पट्टों के अधीन हनयत ककया गया भू-राजस्व या लगान चालू रहेगा – इस संहहता के प्रवृत्त होने के पूवड ककये गये बन्दोबस्त या नवीकरण के अहधकारों सहहत सरकार से प्राप्त ककये गये पट्टे के अधीन नगरीय िेत्र में की ककसी भूहम के हलये हनयत ककया गया भू-राजस्व या लगान; ऐसे बन्दोबस्त या पट्टे की अवहध का अवसान हो जाने पर भी; तब तक प्रवृत्त बना रहेगा जब तक कक ऐसी भूहम पर हनधाडरण इस अध्याय के उपबन्धों के अनुसार हनयत नहीं कर कदया जाय ।
104. पटवारी के हल्कों की हवरचना तथा उनमें पटवाररयों की हनयुहि
पटवारी के हल्कों की हवरचना तथा उनमें पटवाररयों की हनयुहि
105. राजस्व हनरीिकों के हल्कों की हवरचना
राजस्व हनरीिकों के हल्कों की हवरचना
106. राजस्व हनरीिकों आकद की हनयुहि
(1) कलेक्टर प्रत्येक हजले में इतने व्यहियों को, हजतने कक वह ठीक समझे राजस्व हनरीिक, नगर सवेिक; सहायक नगर सवेिक तथा मापक (मेजरर) इस हेतु से हनयुि कर सकेगा कक वे भू-अहभलेख तैयार ककये जाने तथा रखे जाने का पयडवेिण करें और ऐसे अन्य कतडव्यों का, जो कक हवहहत ककयें जायें पालन करें । (2) नगर सवेिक तथा सहायक नगर सवेिक को, उनके भारसाधन के अधीन आने वाले िेत्रों के सभबन्ध में; धारा 28, 109, 110, 112, 118 तथा 120 के प्रयोजनों के हलये पटवारी समझा जायेगा ।
107. खेत का नक्शा
(1) उस दशा में के हसवाय जबकक राज्य सरकार द्वारा अन्यथा हनर्ददष्ट ककया जाय; प्रत्येक ग्राम के हलये, सवेिण–संखयांकों या भू-खंड संखयांकों की सीमाओं तथा बन्जर भूहमयों को दशाडने वाला एक नक्शा तैयार ककया जायेगा जो खेत का नक्शा कहलायेगा। (2) प्रत्येक ग्राम की आबादी के हलये नक्शा तैयार ककया जा सकेगा हजसमें प्राइवेट धारकों द्वारा अहभयोग में रखा गया िेत्र तथा वह िेत्र, जो ऐसे अहधभोग में न हो, एवं ऐसी अन्य हवहशहष्टयां जो कक हवहहत की जायँ, दशाडई जाएंगी। (3) यकद राज्य सरकार यह समझे कक ककसी ग्राम के मामले में यह आवश्यक है कक उपधारा (2) के अधीन तैयार ककये गये नक्शे में उन भू-खंडों को, जो प्राइवेट धाराकों के अहधयोग में है, पृथक से दशाडया जाय, तो वह कलेक्टर को यह हनदेश दे सकेगी कक वह नक्शे को उस प्रकार करवाये या पुनरीहित करवाये। (4) यकद कोई ग्राम पंचायत ऐया संकल्प पाररत कर देती है कक प्राइवेट धारकों के अहधयोग में के भू-खंडों को पृथकता दशाडते हुए ग्राम की आबादी का नक्शा तैयार ककया जाय और वह सवेिण सभबन्धी संकियाओं के खचड के प्रहत उतने अनुपात में, जो कक हवहहत ककया जाय, अहभदाय करने के हलये रजामन्द है, तो राज्य सरकार ऐसा नक्सा तैयार कराने का कायड हाथ में ले सकेगी। (5) ऐसा नक्शा राजस्व सवेिण के समय बन्दोबस्त अहधकारी द्वारा और समस्त अन्य पररहस्थहतयों में कलेक्टर द्वारा यथाहस्थहत तैयार या पुनरीहित ककया जायेगा ।
108. अहधकार-अहभलेख
(1) प्रत्येक ग्राम के हलये अहधकार–अहभलेख उन हनयमो के अनुसार तैयार ककया जाएगा तथा रखा जायेगा जो कक इस सभबन्ध में बनाये गये हों और ऐसे अहभलेख में हनम्नहलहखत हवहशहष्टयां सहभमहलत होंगी;--- (क) समस्त भूहम स्वाहमयों के नाम, उनके द्वारा धाररत सवेिण संखयांको या भू-खंड संखयांकों तथा उनके ससहचत या अससहचत िेत्रफल सहहत, (ख) समस्त मौरूसी कृषकों तथा सरकारी पट्टेदारों के नाम, उनके द्वारा धाररत सवेिण संखयांकों या भू-खंड संखयाकों तथा उनके ससहचत या अससहचत िेत्रफल सहहत, (ग) ऐसे व्यककतयों के अपने–अपने हहतों का प्रकार तथा उनकी सीमा और उससे सलग्न शते या दाहयत्व, यकद कोई हों; (घ) ऐसे व्यहियों द्वारा देय लगान या भू-राजस्व, यकद कोई हो; और (ड) ऐसी अन्य हवहशहष्टयाँ जो कक हवहहत की जाएं। (2) उपधारा (1) में वर्तणत अहधकार–अहभलेख राजस्व सवे्रिण के दौरान या जब कभी भी राज्य सरकार, अहधसूचना द्वारा, ऐसा हनदेश दे, तैयार ककया जायगा।
109. अहधकारों के अजडन की ररपोटड की जायगी
(1) कोई भी व्यहि, जो भूहम में कोई अहधकार का हहत (...) हवहधपूवडक अर्तजत करता है, अपने द्वारा ऐसा अहधकार अर्तजत ककये जाने की ररपोट ऐसे अजडन की ररपोटड ऐसे अजडन की तारीख से छह मास के भीतर पटवारी को मौहखक रूप से या हलहखत में करेगा, और पटवारी ऐसी ररपोटड के हलये हलहखत अहभस्वीकृहत ररपोटड करने वाले व्यहि को हवहहत प्ररूप में तत्काल देगा: परन्तु जब अहधकार अर्तजत करने वाला व्यहि अवयस्क हो या अन्यथा हनरर्तहत हो तो उसका संरिक या ऐसा अन्य व्यहि, जो उसकी सभपहत का भारसाधक हो, पटवारी को ऐसी ररपोट करेगा। स्पष्टीकरण एक.- उपर वर्तणत ककये गये अहधकार के अन्तगडत कोई सुखाचार या सभपहत्त अन्तरण अहधहनयम ,1882 (1882 का अहधहनयम संखयांक 4) की धारा 100 में हवहनर्ददष्ट ककये गये प्रकारण का कोई भार, जो बन्धक की कोरट में नही आता है, नही है। स्पष्टीकरण दो.- कोई ऐसा व्यहि, हजसके कक पि में ककसी बन्धक का मोचन हो जाय या भुगतान कर कदया जाय ककसी पटटे का पयाडवसान हो जाय ,इस धारा के अथड के अन्तगडत अहधकार अर्तजत करता है। स्पष्टीकरण तीन.- इस अध्याय के प्रयोजन के हलये शब्द “पटवारी” के अतंगडत कोई ऐसा व्यहि है हजसे इस अध्याय के अधीन पटवारी के कतडव्यों का पालन करने के हलये हनयुि ककया गया हो। स्पष्टीकरण चार.- इस धारा के अधीन पटवारी को दी जाने के हलये अपेहित हलहखत प्रज्ञापना था तो संदेशवाहक की माफडत दी जा सकेगी या व्यहिश: सौंपी जा सकेगी या रहजस्टीकृत डाक द्वारा भेजी जा सकेगी। (2) कोई भी ऐसा व्यहि, जो कक उपधारा (1) में हनर्ददष्ट ककया गया है, अपने द्वारा ऐसे अहधकारो के अजडन की हलहखत ररपोटड, ऐसे अजडन की तारीख से छह मास के भीतर तहसीलदार को भी कर सकेगा।
110. िेत्र-पुस्तक तथा अन्य सुसंगत भू-अहभलेखों में अहधकार अजडन बाबत नामान्तरण
(1) पटवारी अहधकार के प्रत्येक ऐसे अजडन को, हजसकी कक ररपोटड उसे धरा 109 के अधीन की गई हो या जो ग्राम पंचायत या ककसी अन्य स्त्रोत से प्राप्त प्रज्ञापना पर से उसकी जानकारी में आए, उस रहजस्टर में दजड करेगा जो कक उस प्रयोजन के हलये हवहहत ककया गया है। (2) पटवारी अहधकार–अजडन सभबन्धी समस्त ऐसी ररपोटड, जो उपधारा (1) के अधीन उसे प्राप्त हुए हो, उन ररपोटो के उसे प्राप्त होने के तीन कदन के भीतर तहसीलदार को प्रज्ञाहपत करेगा। (3) उपधारा (2) के अधीन पटवारी से प्रज्ञापना के प्राप्त होने पर, तहसीनदार उसे हवहहत रीहत में ग्राम में प्रकाहशत करवायेगा और उसकी हलहखत प्रज्ञापना उन समस्त व्यहियों को जो कक उसे नामान्तरण में हहतबद्ध प्रतीत होते हो, तथा साथ ही ऐसे अन्य व्यहियों एवं प्राहधकाररयों को भी देगा जो कक हवहहत ककये जाएं। (4) तहसीलदार हहतबध्द व्यहियों को सुनवाई का युहियुि अवसर देने के पिात् तथा ऐसी अहतररि जाँच, जैसी कक वह आवश्यक समझे, करने के पिात् िेत्र–पुस्तक तथा अन्य सुसगंत भू- अहभलेखो में आवश्यक प्रहवहष्ट करेगा।
111. हसहवल न्यायाधीशों की अहधकाररता
हसहवल न्यायलयो को, ककसी भी ऐसे अहधकार से, जो अहधकार अहभलेख में अहभहलहखत हो, सभबहन्धत ककसी भी ऐसे हववाद को हवहनहर्श्त करने की अहधकाररता होगी हजसमें राज्य सरकार न हो।
112. अन्तरणों के संबंध में रहजस्रीकताड अहधकाररयों द्वारा प्रज्ञापना
जब कोई ऐसी दस्तावेज, हजसके द्वारा ककसी ऐसी भूहम, जो कृहष प्रयोजनों के हलये उपयोग में लाई जाती है, या हजसके कक संबंध में िेत्र पुस्तक तैयार की जा चुकी है, के संबंध में कोई हक या उस पर कोई भार सृहजत ककया जाना, समनुदेहशत ककया जाना या हनवाडहचत ककया जाना तात्पर्तयत हो, भारतीय रहजस्रीकरण अहधहनयम 1908 (1908 का संखयांक 16) के अधीन रहजस्रीकृत की जाती है, तो रहजस्टीकताड अहधकारी ,उस िेत्र पर, हजसमें कक वह भूहम हस्थत है, अहधकाररता रखने वाले तहसीलदार को ऐसे प्ररूप में तथा ऐसे समयों पर, जैसा कक इस संहहता के अधीन के हनयमों द्वारा हवहहत ककया जाय, प्रज्ञापना भेजेगा।
113. लेखन सभबन्धी गलहतयों का शुहद्धकरण
उपखंड अहधकारी; ककसी भी समय, लेखन समबन्धी ककन्ही भी गलहतयों को, तथा ककन्हीं भी ऐसी गलहतयों को, हजनके कक सभबन्ध में हहतबघ्द पिकार यह स्वीकार करते हों कक वे अहधकार-अहभलेख में हूई हैं, शुध्द कर सकेगा या शुध्द करवा सकेगा।
114. भू-अहभलेख
नक्शे तथा भू अहधकार पुहस्तकाओं के अहतररि, प्रत्येक गावं के हलये खसरा या िेत्र पुस्तक (फील्ड बुक) और ऐसे अन्य भू-अहभलेख, जो कक हवहहत ककया जाय, तैयार ककये जायेगे।
115. खसरा तथा ककन्हीं अन्य भू-अहभलेखों में गलत प्रहवहष्ट का वररष्ठ पदाहधकाररयों द्वारा शुहद्धकरण
115. खसरा तथा ककन्हीं अन्य भू अहभलेखों में गलत प्रहवहष्ट का वररष्ट पदाहधकाररयों द्वारा शुहद्धकरण.- यकद ककसी तहसीलदार को यह पता चले कक उसके अधीनस्थ पदाहधकारी द्वारा धारा 114 के अधीन तैयार ककये गये भू-अहभलेखों में गलत या कक अशुद्ध प्रहवहष्ट की गई है, तो वह सभयक् हलहखत सूचना देने के पिात् सभबहन्धत व्यहियों से ऐसी पूछ-ताछ करने के पिात् जैसी कक वह उहचत समझे, उसमें आवश्यक पररवतडन (लाल स्याही से) ककये जाने का हनदेश देगा
116. खसरा या ककन्हीं अन्य भू-अहभलेखों में की प्रहवहष्ट के बारे में हववाद
116. खसरा या ककन्ही अन्य भू अहभलेखों में की प्रहवहष्ट के बारे में हववाद.- 1 यकद कोई व्यकक्त धारा 114 के अधीन तैयार ककये गये भू-अहभलेखों में की ककसी ऐसी प्रहवहष्ट से व्यहथत हो तो धारा 108 में हनर्ददष्ट की गई बातों से हभि बातों के सभबन्ध में की गई हो, तो वह ऐसी प्रहवहष्ट के कदनांक से एक वषड के भीतर उसके शुहद्धकरण के हलये तहसीलदार को आवेदन करेगा। (2) तहसीदार, ऐसी जाँच करने के पिात् जैसी कक वह उहचत समझे, मामले में आवश्यक आदेश देगा।
117. भू-अहभलेखों में की प्रहवहष्टयों के बारे में उपधारणा
117. भू-अहभलेखों में की प्रहवहष्टयों के बारे में उपधारणा- भू –अहभलेखों में इस अध्याय के अधीन की गई समस्त प्रहवहष्टयों के बारे में यह उपधारणा की जायेगी कक वे सही हैं जब तक कक तत्प्रहतकूल साहबत न कर कदया जाय।
118. हक के बारे में जानकारी देने की बाध्यता
118. हक के बारे में जानकारी देने की बाध्यता- कोई ऐसा व्यहि, हजससे अहधकारों, हहत या दाहयत्वों का इस अध्याय के अधीन के ककसी अहभलेख या रहजस्टर में प्रहवष्ट ककया जाना अपेहित हो या जो उसमें प्रहवष्ट ककये जा चुके हों, ककसी ऐसे राजस्व अहधकारी, राजस्व हनरीिक या पटवारी की, जो अहभलेख या रहजस्टर का संकलन करने का उसका पुनरीिण करने में लगा हो, हलहखत अध्यपेिा पर इस बात के हलये आबद्ध होगा कक वह उस अहभलेख या रहजस्टर के सही संकलन या पुनरीिण के हलये आवश्यक समस्त ऐसी जानकरी या दस्तावेजों,जो उसकी जानकारी में या उसके कब्जे या अहधकार में हों, ऐसी अध्यपेिा की जाने की तारीख से एक मास के भीतर, उसके हनरीिण के हलये दे या पेश करे। (2) वह राजस्व अहधकारी, राजस्व हनरीिण या पटवारी, हजसको उपधारा (1) के अधीन कोई जानकारी दी हो या हजसके समि उि उपधारा के अधीन कोई दस्तावेज पेश की गई हो, उस व्यहि को, हजसने ऐसी जानकारी दी हो या ऐसी दस्तावेज पेश की हो, उसकी हलहखत अहभस्वीकृहत तुरन्त देगा और ककसी ऐसी दस्तावेज पर, उसके पेश ककये जाने तथा पेश ककये जाने की तारीख सभबन्धी तथ्य का उल्लेख करते हुए, एक टीप अपने हस्तािर से पृष्ठांककत करेगा।
119. जानकारी देने में उपेिा करने के हलये शाहस्त
119. जानकारी देने में उपेिा करने के हलये शाहस्त- (1) कोई भी व्यहि, जो हवहनर्ददष्ट की गई कालावहध के भीतर धारा 109 द्वारा अपेहित की गई ररपोटड करने में या धारा 118 द्वारा अपेहित की गई जानकारी में या दस्तावेज पेश करने में उपेिा करेगा, वह तहसीलदार के हववेकाहधकार पर, एक हजार रूपये से अनहधक की शाहस्त का दायी होगा जो भू- राजस्व की बकाया के तौर पर वसूली योग्य होगी। (2) [धारा 109 के अधीन] ककसी प्रकार के अजडन सभबन्धी ककसी ऐसी ररपोटड के बारे में, जो हवहनर्ददष्ट की गई कालावहध के पिात् पटवारी को प्राप्त हुई हो, धारा 110 के उपबन्धों के अनुसार कायडवाही की जायेगी। [परन्तुक लुप्त.............]
120. नक्शे तथा अहधकार अहभलेख तैयार करने में सहायता की अध्यपेिा
120. नक्शे तथा अहधकार अहभलेख तैयार करने में सहायता की अध्यपेिा. – इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अध्यधीन रहते हुए, कोई भी राजस्व अहधकारी, राजस्व हनरीिक, मापक या पटवारी कोई नक्शा या रेखांक, जो इस अध्याय के अधीन ककसी अहभलेख या रहजस्टर के हलये या उसके सभबन्ध में अपेहित हो, तैयार करने या पुनरीहित करने के प्रयोजन के हलये, भूहम के ककसी धारक तथा आबादी में हस्थत भू-खंड के ककसी धारक से यह अपेिा कर सकेगा कक वह अपनी भूहम या भू-खंड की सीमाएं बतलाये।
121. भू-अहभलेखों के हलये हनयम बनाने की शहि
121. भू-अहभलेखों के हलये हनयम बनाने की शहि – राज्य शासन, इस संहहता के प्रयोजनों के हलये अपेहित भू-अहभलेखों के तैयार ककये जाने, रखे जाने तथा पुनरीहित ककये जाने का हवहनयमन करने हेतु हनयम बना सकेगा।
122. इस अध्याय के उपबन्धों से छूट
122. इस अध्याय के उपबन्धों से छूट - राज्य सरकार अहधसूचना द्वारा हनदेश दे सकेगी कक वह अध्याय या इसका कोई उपबन्ध ककसी उहल्लहखत स्थानीय िेत्र पर या ककन्हीं भूहमयों या गांवों या भूहमयों के ककसी वगड पर लागू नहीं होगा।
123. संहहता के प्रारभभ होने के समय अहधकार अहभलेख
123. संहहता के प्रारभभ होने के समय अहधकार अहभलेख – (1) जब तक कक मध्य भारत; भोपाल, हवन्ध्य प्रदेश तथा हसरोंज प्रदेशों के गांवों के हलये धारा 108 के उपबन्धों के अनुसार अहधकार अहभलेख तैयार न हो जाय, तब तक प्रत्येक ऐसे गांव की जमाबन्दी या खतौनी, जहां तक उसमें धारा 108 में उहल्लहखत हववरण अन्तर्तवष्ट हों शासन द्वारा अहधसूहचत कृहष के हलये उस गांव के हलये अहधकार अहभलेख समझी जायगी। (2) उपधारा (1) में हनर्ददष्ट जमाबन्दी या खतौनी ऐसी रीहत में; जैसी कक कलेक्टर द्वारा हनदेहशत की जाय गांव में प्रकाहशत की जायगी। (3) जमाबन्दी या खतौनी में की ककसी प्रहवहष्ट के सभबन्ध में आपहत्तयाँ प्रस्तुत (फाइल) की जा सकेंगी जो तहसीलदार द्वारा ऐसी रीहत में हनपटाई जायेंगी जो कक हवहहत की जाय। (4) महाकौशल प्रदेश के गांवों की कृहष वषड 1954-55 की जमाबन्दी ऐसी गांवों के अहधकार अहभलेख के रूप में तक तक समझी जाती रहेगी, जब तक धारा 108 के उपबन्धों के अनुसार अहधकार अहभलेख तैयार न हो जाएं।
124. ग्रामों तथा सवेिण संखयांकों या भू-खंड संखयांकों के सीमा-हचन्हों का सहिमाडण
124. ग्रामों तथा सवेिण संखयांकों या भू-खंड संखयांकों के सीमा-हचन्हों का सहिमाडण – (1) समस्त ग्रामों की सीमाएं हनयत की जाएंगी तथा स्वामी सीमा-हचन्ह द्वारा उनका सीमांकन ककया जायगा। (2) राज्य सरकार, ककसी भी ग्राम के सभबन्ध में, अहधसूचना द्वारा यह आदेश दे सकेगी कक समस्त सवेिण-संखयांकों या भू-खंड संखयांकों की भी सीमाएँ हनयत की जायँ तथा सीमा-हचन्हों द्वारा उनका सीमांकन ककया जाय। (3) ऐसे सीमा हचन्ह, इसमें इसके पिात् अन्तर्तवष्ट उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, ऐसे हवहनदेश के होंगे तथा ऐसी में सहिर्तमत तथा अनुरहित ककये जायेंगे जैसा कक हवहहत ककया जाये। (4) जहां हनयमों द्वारा ऐसे हवहनदेश के सीमा-हचन्ह हवहहत ककये जायँ जो ककसी ग्राम में प्रचहलत हवहनदेश से हभि हों, वहां ऐसे ग्राम में नवीन हवहनदेश उस ग्राम के भू-धारकों में से कम-से कम आधे भू-धारकों द्वारा तहसीलदार को आवेदन ककया जाने पर ही प्रवर्ततत ककया जायगा अन्यथा नहीं। जब ऐसा आवेदन कर कदया गया हो तो तहसीलदार सभपूणड ग्राम में नवीन सीमा-हचन्हों का सहिमाडण करायेगा और उस पर हुए खचड को इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अनुसार ग्राम के भू-धारकों के बीच अनुपातता हवभाहजत करेगा। प्रत्येक धारक का अंश-राजस्व की बकाया के तौर पर वसूली योग्य होगा। (5) प्रत्येक भू-धारक, भूहम पर बनाये गये स्थायी सीमा हचन्हों तथा सवेिण-हचन्हों के अनुरिण तथा उनकी मरभमत के हलये हजभमेदार होगा।
125. ग्रामों, सवेिण संखयांकों तथा भू-खंड संखयांकों के बीच सीमाओं के बारे में हववाद
125. ग्रामों, सवेिण संखयांकों तथा भू-खंड संखयांकों के बीच सीमाओं के बारे में हववाद – ग्रामों, सवेिण-संखयांकों तथा भू-खंड संखयांकों की सीमाओं के बारे में समस्त हववाद, जहां कक ऐसी सीमाएँ धारा 124 के उपबन्धों हनयत कर दी गई हो, तहसीलदार द्वारा, ऐसी स्थानीय जांच हजसमें समस्त हहतबद्ध व्यहि को उपसंजात होते तथा साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त होगा; करने के पिात् हवहनिय ककये जायेंगे।
126. सदोष कब्जा रखने वाले व्यहियों को बेदखली
126. सदोष कब्जा रखने वाले व्यहियों को बेदखली. – (1) जब धारा 124 के उपबन्धों के अधीन कोई सीमा हनयत कर दी गई हो, तो तहसीलदार ककसी भी ऐसे व्यहि को संिेपत: बेदखल कर सकेगा जो ककसी ऐसी भूहम का, हजसके बारे में यह पाया गया हो कक वह उसके खाते से या ककसी ऐसे व्यहि के, हजसकी कक माफडत या हजसके कक अधीन वह दावा करता है, खाते से अनुलग्न नहीं है, सदोष कब्जा रखता है। (2) जहां ककसी व्यहि को उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन ककसी भूहम से बेदखल कर कदया गया हो, वहां वह, उन भूहम पर अपना हक स्थाहपत करने के हलये ऐसी बेदखली की तारीख से एक वषड की कालावहध के भीतर हसहवल वाद संहस्थत कर सकेगा: परन्तु तहसीलदार या ककसी राजस्व अहधकारी को उस हैहसयत में ऐसा वाद का पिकार नहीं बनाया जा सकेगा। (3) तहसीलदार, ककसी भी समय, भू-राजस्व के ऐसे पुनर्तवतरण के हलये आदेश कर सकेगा जैसा कक उसकी राय में, उपधारा (2) के अधीन संहस्थत ककये गये ऐसी बेदखली बाद में दी गई हडिी के पररणामस्वरूप ककया जाना चाहहए, और ऐसा पुनर्तवतरण उस आदेश की तारीख के आगामी राजस्व वषड के प्रारभभ से प्रभावी होगा।
127. सीमांकन तथा सीमा पंहियों का अनुरिण
127. सीमांकन तथा सीमा पंहियों का अनुरिण. – (1) ग्राम की सड़क, ग्राम की बंजर भूहम या सामुदाहयक प्रयोजन के हलये आरहित की गई भूहम से लगी हुई भूहम का प्रत्येक धारक, अपने स्वयं के खचे से तथा हवहहत रीहत में – (क) अपनी भूहम तथा उससे लगी हुई ग्राम की सड़क, ग्राम की बंजर भूहम या सामुदाहयक प्रयोजनों के हलये आरहित की गई भूहम के बीच सीमांकन, सीमा-हचन्हों द्वार करेगा; और (ख) समय-समय पर ऐसी सीमा हचन्हों की मरभमत तथा उनका नवीकरण होगा। (2) यकद धारक उपधारा (1) द्वारा अपेहित ककये गये अनुसार सीमांकन नहीं करता है या सीमा हचन्हों की मरभमत या उनका नवीकरण नहीं करता है तो तहसीलदार, ऐसी सूचना के पिात् जैसी कक वह ठीक समझे, सीमांकन करवा सकेगा या सीमा हचन्हों की मरभमत या उनका नवीकरण करवा सकेगा तथा उपगत ककया गया खचड भू-राजस्व की बकाया के तौर पर वसूल कर सकेगा। (3) सीमांकन के बारे में या सीमा-हचन्हों को मरभमत करके समुहचत अवस्था में बनाये रखने के बारे में कोई हववाद उठने की दशा में, वह मामला कलेक्टर द्वारा हवहनहित ककया जायेगा हजसका हवहनिय अंहतम होगा। स्पष्टीकरण – इस धारा के प्रयोजनों के हलये, ग्राम की सड़क से अहभप्रेत है कोई ऐसी सड़क हजस पर कोई उपदशडक सवेिण संखयांक या भू-खण्ड संखयांक अंककत हों।
128. सीमा हचन्हों या सवेिण हचन्हों की मरभमत कराने कक हलये बाध्य करना
128. सीमा हचन्हों या सवेिण हचन्हों की मरभमत कराने के हलये बाध्य करना. – (1) प्रहतवषड नवभबर मास की समाहप्त के पिात् ग्राम का पटेल ऐसे प्रत्येक धारक को, हजसकी भूहम पर सीमा हचन्ह का सवेिण त्रुरटपूणड है, एक हलहखत सूचना देगा हजसमें उससे यह अपेिा की जायगी कक वह आगामी 1 माचड के पूवड उनकी उहचत मरभमत करवाये। (2) ककसी भी वषड में 1 माचड के पिात्, तहसीलदार या कोई ऐसा अन्य राजस्व अहधकारी, जो कायड करने के हलये सशि हो, ककन्हीं भी त्रुरटपूणड सीमा-हचन्हों या सवेिण-हचन्हों की उहचत रूप से मरभमत करवा सकेगा और ऐसी मरभमत का खचड ऐसे सीमा-हचन्हों या सवेिण-हचन्हों के अनुरिण के हलये उत्तरदायी धारक या धारकों से; ऐसी शाहस्त सहहत वसूल कर सकेगा जो इस प्रकार मरभमत ककये गये प्रत्येक सीमा-हचन्ह के हलये एक हजार रूपये तक की हो सकेगी। ऐसी खचड तथा शाहस्त भू-राजस्व की बकाया के तौर पर वसूल की जा सकेगी।
129. सवेिण संखयांक या उपखंड भ-खंड संखयाकांक की सीमांकन
129. सवेिण संखयांक या उपखंड भू-खंड संखयांक की सीमांकन – (1) तहसीलदार या कोई अन्य राजस्व अहधकारी जो कायड करने के हलये सशि हो, ककसी हहतबद्ध पिकार के आवेदन पर ककसी सवेंिण-संखयांक की या उपखंड या भू-खंड संखयांक की सीमाओं का सीमांकन कर सकेगा और उस पर सीमा-हचन्ह सहिर्तमत कर सकेगा। (2) राज्य सरकार, सवेिण-संखयांक या उपखंड या भू-खंड संखयांक का सीमांकन करने में तहसीलदार द्वारा या कायड करने के हलये सशि ककये गये अन्य ककसी राजस्व अहधकारी द्वारा अनुसररत की जाने वाली प्रकिया का हवहनयमन करने के हलये हनयम बना सकेगी हजनमें उन सीमा-हचन्हों का, जो उपयोग में लाये जायेंगे, प्रकार हवहहत ककया जायगा, और सीमांककत सवेिण संखयांक या उपखंड संखयांक में की भूहम के धारकों से फीस का उद्ग्रहण प्राहधकृत ककया जायगा।
130. सीमा हचन्हों या सवेिण-हचन्हों को हवनष्ट करने, िहत पहुँचाने या हटाने के हलये शाहस्त
130. सीमा हचन्हों या सवेिण-हचन्हों को हवनष्ट करने, िहत पहुँचाने या हटाने के हलये शाहस्त – यकद कोई व्यहि, हवहध-पूवडक सहिर्तमत ककये गये सीमा-हचन्ह या सवेिण-हचन्ह को जानबूझकर हवहनष्ट करेगा या िहत पहुँचायेगा या हवहधपूणड प्राहधकार के हबना हटायेगा तो उसे तहसीलदार द्वारा या कायड करने के हलये सशि ककये गये ककसी अन्य राजस्व अहधकारी द्वारा यह आदेश कदया जा सकेगा कक वह ऐसे प्रत्येक हचन्ह के हलये, हजसे इस प्रकार हवनष्ट ककया गया हो, िहत पहुँचाई गई हो या हटाया गया हो, एक हजार रूपये से अनहधक ऐसे जुमाडने का भुगतान करे जो तहसीलदार या कायड करने के हलये सशि ककये गये ककसी अन्य अहधकारी राजस्व की राय में, उसी सीमा-हचन्ह या सवेिण-हचन्ह को पुन:स्थाहपत करने के तथा इहत्तला देने वाले को यकद कोई हो, इनाम देने के व्यय को चुकाने के हलये आवश्यक हो।
131. मागाडहधकार तथा अन्य प्राइवेट सुखाचार सभबन्धी अहधकार
131. मागाडहधकार तथा अन्य प्राइवेट सुखाचार सभबन्धी अहधकार – (1) इस बारे में कक कोई खेहतहर अपने खेतों पर या ग्राम की बन्जर भूहम या चारागाहों पर मान्यता प्राप्त सड़कों, पथों या सावडजहनक भूहम पर से, हजसके अन्तगडत वे सड़कें तथा पथ हैं जो धारा 242 के अधीन तैयार ककये गये ग्राम के बाहजबुउल-अजड में अहभहलहखत हैं, न होकर अन्यथा ककसी मागड द्वारा पहुँचेगा या इस बारे में कक वह ककस स्त्रोत से या ककस जलसरणी से अपने हलये जल प्राप्त कर सकेगा, कोई हववाद उद्भूत होने की दशा में तहसीलदार स्थानीय जांच करने के पिात्, उस मामले को, प्रत्येक मामले हवषयक पूवड रूकढ़ के प्रहत हनदेश करके तथा समस्त सभबहन्धत पिकारों की सुहवधा को सभयक् ध्यान रखते हुए, हनहित कर सकेगा।
132. मागड आकद पर बाधा उपहस्थत करने के हलये शाहस्त
कोई भी व्यहि, जो ककसी ग्राम की ककसी मान्यता प्राप्त सड़क तथा पथ हजसके अन्तगडत वे सड़कें तथा पथ हैं जो ग्राम के वाहजबउल अजड में अहभलहखत हैं, पर अथवा ककसी सावडजहनक भूहम पर अहधिमण करेगा या उसके उपयोग में कोई बाधा पहुँचायेगा या जो धारा 131 के अधीन पाररत ककये गये तहसीलदार के हवहनिय की अवज्ञा करेगा तहसीलदार के हलहखत आदेश, हजसमें मामले के तथ्य तथा पररहस्थहतयाँ कहथत की जायेंगी, के अधीन शाहस्त का जो दस हजार रूपये तक की हो सकेगी, दायी होगा।
133. बाधा का हटाया जाना
यदक ककसी तहसीलदार को यह प्रतीत हो कक कोई बाधा ककसी ग्राम की ककसी मान्यता प्राप्त सड़क, पथ या सावडजहनक भूहम के अबाध उपयोग में अड़चन डालती है या हजससे ककसी ऐसी सड़क या जल सरणी या जल स्त्रोत में, जो धारा 131 के अधीन ककसी हवहनिय का हवषय रहा हो, अड़चन पड़ती है, तो वह ऐसी बाधा के हलए उत्तरदायी व्यहि को उसे हटाने का आदेश दे सकेगा और, यकद ऐसा व्यहि उस आदेश का अनुपालन न करे तो वह उस बाधा को हटवा सकेगा और उसके हटाए जाने का खचड ऐसे व्यहि से वसूल कर सकेगा तथा ऐसा व्यहि, तहसीलदार के ऐसे हलहखत आदेश के अधीन, हजसमें मामले के तथ्यों और पररहस्थहतयों का कथन ककया गया हो, ऐसी शाहस्त का दायी होगा जो दस हजार रूपये तक की हो सकेगी।
134. कहतपय कायों की पुनरावृहत्त से हवरत रहने के हलये बन्धपत्र का हनष्पादन
ककसी भी ऐसे व्यहि से; धारा 131, 132 या 133 के अधीन कोई अहधिमण करेगा या कोई बाधा पहुँचाएगा, तहसीलदार द्वारा यह अपेिा की जा सकेगी कक वह ऐसे कायड की पुनरावृहत्त करने से हवरत रहने के हलये पाँच सौ रूपये से अनहधक ऐसी राहश का, जो कक तहसीलदार ठीक समझे, स्वीय बन्धपत्र हनष्पाकदत करे।
135. सड़क, पथ आकद के हलये भूहम का अजडन
(1) यकद ग्रामवाहसयों के आवेदन पर या अन्यथा, कलेक्टर का, जांच के पिात्, यह समाधान हो जाता है कक ऐसे ग्राम में ग्राम समुदाय के उपयोग के हलये दस फीट से अनहधक चौड़ी सड़क की, बैलगाड़ी मागड या पथ की व्यवस्था करने के प्रयोजन के हलये कोई भूहम अर्तजत करना समीचीन है, तो वह उस ग्राम के हनवाहसयों से यह अपेिा कर सकेगा कक वे ऐसी भूहम के सभबन्ध में उपधारा (3) के अधीन देय प्रहतकर की रकम हवहनर्ददष्ट की गई कालावहध के भीतर जमा करें। ऐसा हनिेप कर कदया जाने पर कलेक्टर, हवहहत रीहत में प्रकाहशत ककये गये आदेश द्वारा, ऐसी भूहम को अर्तजत कर सकेगा और ऐसा आदेश कर कदये जाने पर ऐसी भूहम राज्य सरकार में पूणडरूप में हनहहत हो जायेगी। (2) ककसी भी ऐसी भूहम में ककसी हहत का दावा करने वाला कोई व्यहि, उपधारा (1) के अधीन हनहहत होने की तारीख से एक वषड की कालावहध के भीतर; कलेक्टर को अपने हहत के सभबन्ध में प्रहतकर के हलये आवेदन कर सकेगा। (3) ऐसी भूहम के सभबन्ध में देय प्रहतकर, उस पर हनधाडररत ककये गये या उस पर हनधाडरण योग्य भू-राजस्व का पंरह गुना होगा।
136. इस अध्याय के प्रवतडन से मुि करने की शहि
राज्य सरकार अहधसूचना द्वारा घोहषत कर सकेगी कक इस अध्याय के कोई भी समस्त उपन्ध ककसी ग्राम या ग्रामों के ककसी वगड पर लागू नहीं होंगे।
137. भू-राजस्व भूहम पर प्रथम भार होगा
ककसी भूहम पर हनधाडररत ककया गया भू– राजस्व उस भूहम तथा उसके लगानों एंव लाभों पर प्रथम भार होगा
138. भू-राजस्व के भुगतान के हलये उत्तरदाहयत्व
(1) ककसी खाते पर हनधाडररत ककये गये भू– राजस्व के भुगतान के हलये हनम्नहलहखत व्यहि मुखयत: दायी होंगे .- (क) भूहम स्वामी के खाते के मामले में, भूहम स्वामी; (ख) ककसी ऐसे खाते के मामले में, जो राज्य सरकार द्वारा पट्टे पर दी गई भूहम से हमलकर बनता हो, उसका पट्टेदार । (2) जब ककसी खाते में एक से अहधक भूहमस्वामी या पट्टेदार हों तो ऐसे खाते पर हनधाडररत ककये गये भू–राजस्व के भुगतान के हलये यथाहस्थहत ऐसे समस्त भूहमस्वामी या पटटेदार, संयुि और पृथि: दायी होंगे ।
139. भू-राजस्व, कब्जा रखने वाली ककसी भी व्यहि से वसूल ककया जायेगा
ककसी ऐसे व्यकक्त द्वारा, जो धारा 138 के अधीन मूखयत: दायी है, व्यहतिम ककया जाने की दशा में भू–राजस्व, हजसके अंतगडत बकाया भी है, कब्जा रखने वाले ककसी भी व्यहि से वसूल ककया जा सकेगा: परन्तु ऐसा व्यहि उससे वसूल की गई रकम को मुखयत: दायी व्यहि से मुजरा कराने का हकदार होगा ।
140. तारीख हजसको भू-राजस्व शोध्य होगा तथा देय होगा
(1) ककसी राजस्व वषड के मद्दे देय भू–राजस्व उस वषड के प्रथम वषड कदन शोध्य हो जायगा । (2) राज्य सरकार भू–राजस्व का भुगतान ककश्तों में तथा राजस्व वषड के प्रथम कदन की पिात्-वती तारीखों को (जो इसमें इसके पिात् हवहहत तारीख के नाम से हवहनर्ददष्ट है) ककये जाने हेतु उपलब्ध करते हुए हनयम बना सकेगी, और ऐसे हनयमों में वे व्यहि हजनको तथा वे स्थान जहां ऐसी ककश्तों का भुगतान ककय जायगा, हवहहत ककये जा सकेंगे। (3) उपधारा (2) के अधीन हवहहत ककये गये व्यहि को भू-राजस्व का भुगतान नकदी में ककया जा सकेगा या हवप्रेषक के खचे पर मनीआडर ककय जा सकेगा । (4) राजस्व वषड के प्रथम कदन तथा ऐसे हनयमों द्वारा भू–राजस्व के भुगतान के हलये हनयत की गई ककसी तारीख के बीच बीतने वाली कोई कालावहध अनुग्रह की कालावहध समझी जायगी, और वह उपधारा (1) के उपबन्धों पर प्रभाव नहीं डालेगी ।
141. “बकाया” तथा “बकायादार” की पररभाषाएँ
कोई भी भू–राजस्व जो शोध्य हो और हजसका भुगतान हवहहत तारीख को या उनके पूवड न ककया गया हो, उस तारीख से बकाया हो जाता है और उसके हलये उत्तरदायी व्यहि, चाहे वे धारा 138 के उपबन्धों के अधीन उत्तरदायी हो या धारा 139 के उपबन्धों के अधीन, बकायादार हो जाते है।
142. पटेल, पटवारी, ग्राम सभा या ग्राम पंचायत रसीद देने के हलये आबद्ध होंगे
(1) जहां कोई पटेल, पटवारी, ग्रामसभा या ग्राम पंचायत ककसी व्यहि से भू–राजस्व के मद्दे या भू–राजस्व के बकाया के तौर पर वसूली योग्य ककसी धनराहश के मद्दे कोई भुगतान प्राप्त करे, वहां वह ऐसी राहश के हलये रसीद हवहहत प्ररूप में देगी । (2) यकद कोई पटेल; पटवारी, ग्राम या ग्राम पंचायत उपधारा (1) द्वारा अपेहित ककये गये अनुसार रसीद नहीं देती है तो यथाहस्थहत ऐसा पटेल, पटवारी या ग्राम सभा या ग्राम पंचायत की दशा में, वह व्यहि जो ऐसी ग्राम सभा या ग्राम पंचायत की ओर से ऐसी रसीद देने के हलये उत्तरदायी है, भुगतानकताड के आवेदन पर, तहसीलदार के आदेश से ऐसी शाहस्त का भुगतान करने का दायी होगा जो भुगतान की गई रकम के दुगुने के अहधक नहीं होगी ।
143. भू-राजस्व के भुगतान में व्यहतिम पर शाहस्त
यदक भू-राजस्व की ककसी ककश्त का या उसके ककसी भाग का भुगतान हवहहत तारीख के पिात् एक मास के भीतर न ककया जाय तो उपखंड अहधकारी, जानबूझकर व्यहििम करने वाले व्यहि के मामले में, ऐसी शहस्त अहधरोहपत कर सकेगा जो उस रकम के, हजसका इस प्रकार भुगतान न ककया गया हो, [सौ] प्रहतशत से अहधक नहीं होगी: परन्तु कोई भी ऐसी शाहस्त, ककसी भी ऐसी ककश्त का, हजसका कक भुगतान सरकार के आदेश से हनलहभबत कर कदया गया हो, भुगतान न ककया जाने के कारण उस कालावहध की बाबत अहधरोहपत नहीं की जायेगी हजसके कक दौरान वह भुगतान हनलहभबत रहा हो।
144. फसलों के मारे जाने पर भू-राजस्व की माफी या उसका हनलभबन
(1) राज्य सरकार, उन वषो में, हजनमें ककसी िेत्र में फसले मारी गई हों हजन वषो में ककसी सिम प्राहधकारी द्वारा ककसी हवहध के अधीन ककये गये ककसी आदेश के पररणामस्वरूप, ककसी िेत्र में फसलें नहीं उगाई जा सकी हों, भू– राजस्व की माफी या उसका हनलभबन कर सकेगी, और माफी या हनलभबन का अवधारण इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अनुसार ककया जायेगा । (2) ककसी राजस्व अहधकारी द्वारा ऐसे हनयमों के अधीन पाररत ककये गये ककसी आदेश के हवरूद्ध कोई अपील या पुनरीिण नहीं होगा और ककसी ऐसे आदेश का प्रहतवाद करने के हलये ककसी हसहवल न्यायालय में कोई वाद नहीं होगा ।
145. प्रमाहणत लेखा, बकाया तथा बकायादार के बारे में साक्ष्य होगा
(1) कलेक्टर या तहसीलदार द्वारा प्रमाहणत ककये गये लेखा-हववरण के बारे में, तब तक कक प्रहतकूल साहवत न कर कदया जाय, इस अध्याय के प्रयोजनों के हलये यह उपधाररत ककया जायेगा कक वह सरकार को देय बकाया या उसकी रकम तथा उस व्यहि का, बकायादार है, सही हववरण है । (2) उपधारा (1) में हनर्ददष्ट ककया गया हववरण तैयार करने के पूवड बकायादार को कोई सूचना देना आवश्यक नहीं होगा ।
146. मांग की सूचना
तहसीलदार या नायब तहसीलदार, बकाया की वसूली के हलये धारा 147 के अधीन कोई आदेहशका जारी होने के पूवड, ककसी बकायादार पर मांग की सूचना तामील करवा सकेगा ।
147. बकाया की वसूली के हलये आदेहशका
सरकार को या ग्राम सभा को देय भू- राजस्व का बकाया तहसीलदार द्वारा हनम्नहलहखत आदेहशकाओं में से ककसी एक या अहधक आदेहशकाओं द्वारा वसूल ककया जा सकेगा – (क) जंगम सभपहत्त की कुकी तथा हविय द्वारा; (ख) उस खाते की हजस पर बकाया शोध्य है, कुकी तथा हविय द्वारा और जहां ऐसा खाता एक से अहधक सवेिण-संखयाकों या भू–खंड संखयाकों से हमलकर बना हो, वहां ऐसे सवेिण संखयांकों में से एक या अहधक सवेिण संखयांकों या भू-खंड संखयांकों के, जैसा भी कक उस बकाया को वसूल करने के हलये आवश्यक समझा जाय, हविय द्वारा: परन्तु ककसी सहकारी सोसायटी के ककन्ही शोध्यों की वसूली के हलये ककसी भी खाते का हविय, धारा 154-क में हवहहत प्रककया को पहले हन:शेष ककए हबना नही ककया जायगा; (खख) उस खाते की, हजस पर कक बकाया शोध्य है, कुकी द्वारा तथा उसे धारा 154-क के अधीन पट्टे पर देकर; (खखख) बकायादार के ककसी अन्य खाते की, जो कक कृहष के प्रयोजनों के हलये उपयोग में लाया जाता हो, कुकी द्वारा तथा उसे धारा 154-क के अधीन पट्टे पर देकर; (ग) बकायादार की ककसी अन्य स्थावर सभपहत्त की कुकी तथा हविय द्वारा: परन्तु खंड (क) तथा (ग) में हवहनर्ददष्ट की गई आदेहशकाओं से हनम्नहलहखत की कुकी तथा हविय नहीं हो सकेगा, अथाडत् -. (एक) बकायादार, उसकी पत्नी और उसके बच्चों के पहहनने के आवश्यक वस्त्र, भोजन बनाने के बतडन, चारपाइयाँ तथा हबछौने और ऐसे हनजी आभूषण हजन्हे कोई स्त्री धार्तमक प्रथा के अनुसार अपने से पृथक् नहीं कर सकती; (दो) हशहल्पयों के औजार और यकद बकायादार कृषक है तो याहन्त्रक शहि द्वारा चाहलत उपकरण के अहतररि उसके खेती के उपकरण और ऐसे मवेशी तथा बीज जो तहसीलदार की राय में, उसे उस हैहसयत में अपनी जीहवका उपार्तजत करने में समथड बनाने मे हलये आवययक हो; (तीन) वे वस्तुएं जो केवल धार्तमक हवन्यासों के उपयोंग के हलये पृथक रख दी गई हो; (चार) ककसी कृषक के तथा उसके अहधभोग में के गृह तथा अन्य भवन (उनकी सामहग्रयों तथा उनके स्थलों सहहत एवं उस भूहम सहहत, जो कक उनसे हबलकुल लगी हुई हों तथा उनके उपयोग के हलये आवश्यक हो: परन्तु यह और भी कक खंड (बी) में हवहनर्ददष्ट की गई आदेहशका खाते की कुकी तथा हविय की अनुज्ञा उस दशा में नहीं देगी जहां कक बकायादार- (एक) अनुसूहचत िेत्रों में छह हेक्टर या छह हेक्टर से कम भूहम; या (दो) अन्य िेत्रों में, चार हेक्टर या चार हेक्टर से कम भूहम धारण करता हो । स्पष्टीकरण.- इस परन्तुक के प्रयोजन के हलये “अनुसूहचत िेत्र” से अहभप्रेत है कोई ऐसा िेत्र जो भारत के संहवधान की पंचम अनुसूची की कंहडका 6 के अधीन मध्यप्रदेश राज्य के भीतर अनुसूहचत िेत्र घोहषत ककया गया हो।
148. खचे-बकाया के भाग के रूप में वसूल ककये जा सकेंगे
धारा 146 के अधीन मांग की सूचना तामील करने का या धारा 147 में की कोई आदेहशका जारी करने तथा प्रवर्ततत करने का खचड उस बकाया के, हजसकी कक बाबत् उस सूचना की तामील की गई थी या वह आदेहशका जारी की गई थी, भाग के रूप में वसूल ककया जा सकेगा
149. अन्य हजलों में आदेहशकाओं का प्रवतडन
धारा 147 के खंड (क) तथा (ग) में हवहनर्ददष्ट की गई आदेहशकाएँ या तो उस हजले में, हजसमें कक व्यहतिम ककया गया है या ककसी अन्य हजले में प्रवर्ततत कराई जा सकेगी ।
150. अभ्यापहत्त के साथ भुगतान तथा वसूली के हलये वाद
(1) यकद भू–राजस्व की बकाया की वसूली के हलये ककसी वयहि के हवरूद्ध कायडवाररयॉ इस अध्याय के अधीन की जाती है, तो वह व्यहि सभपहत के हविय की बोली खत्म होने के पूवड ककसी भी समय उस रकम का हजसका कक दावा ककया है, भुगतान कर सकेगा और उसी समय, स्वयं द्वारा या अपने प्राहधकृत हस्तािररत अभ्याहपत ऐसी कायडवाहहयाँ करने वाले राजस्व अहधकारी को पररदत्त कर सकेगा और तदुपरर वे कायडवाहहयाँ रोक दी जायेगी।
151. हविय-आगमों का उपयोजन
(1) इस अध्याय के अधीन के प्रत्येक हविय के आगम, प्रथमत: उस बकाया की हजसके कक कारण हविय ककया गया था तथा ऐसे हविय के व्ययों की तुहष्ट के हलये, हद्वतीयत: सभबहन्धत िेत्र में तत्समय प्रवृत्त ककसी हवहध के अधीन बकायादार से शोध्य उपकरों की ककसी बकाया के भुगतान के हलये, तृतीयत: बकायादार द्वारा राज्य सरकार को देय ककसी अन्य बकाया के भुगतान के हलये, और चतुथडत: बकायादार से ककसी सहकारी सोसायटी का शोध्य ककसी बकाया के भुगतान के हलये उपयोहजत ककये जायेंगे और इसके बाद यकद कोई अहधशेष हो, तो वह उसको, या जहां एक से अहधक बकायादार हों, वहां ऐसे बकायादारों को उनके अपने-अपने उन अंशों के अनुसार देय होगा जो कक वे बेची गई सभपहत्त में रखते हों: परन्तु ऐसे अहधशेष का बकायादार या बकायादारों को भुगतान तब तक नहीं ककया जायगा जब तक कक जंगम सभपहत्त के मामले में हविय की तारीख से, या स्थावर सभपहत्त के मामले में हविय के पुहष्टकरण की तारीख से दो मास का अवसान न हो गया हो । (2) उपधारा (1) में ककसी बात के होते हुए भी, धारा 147 के खड (ग) के अधीन हविय के आगम, प्रथमत: बेची गई स्थावर सभपहत की बाबत् हविय की तारीख तक के हलये बकायादार द्वारा देय भू-राजस्व की बकाया के भुगतान के हलये उपयोहजत ककये जायेंगे और अहधशेष, यकद कोई हो, उपधारा (1) के अनुसार उपयोहजत ककया जायेगा।
152. बकाया के हलये बेची गई भूहम हवल्लंगमों से मुि होगी
(1) जब तक उपखंड अहधकारी हविय का आदेश देते समय अन्यथा हनदेश न दे उस भूहम का जो उसके सभबन्ध में शोघ्य भू–राजस्व के बकाया के हलये बेची गई हो, िेता, उस भूहम को उन समस्त हवल्लंगमों से, जो िेता से हभि ककसी व्यहि द्वारा उस भूहम पर अहधरोहपत ककये गये हों, तथा उन समस्त अनुदानों एवं संहवदाओं से, जो िेता से हभि ककसी व्यहि द्वारा भूहम की बाबत की गई हों, मुि रूप से अर्तजत करेगा । (2) ककन्हीं ऐसे वृिों के या ककन्हीं ऐसे वृिों की उपज के, जो उस भूहम के, हजसमें कक वे खडें हैं, भूहमस्वामी की सभपहत्त हो या ककसी समय सभपहत्त रहे हों, सभबन्ध में ककये गये ककसी अन्तरण, अनुदान या संहवदा के सभबन्ध में यह समझा जायेगा कक वह ऐसा अनुदान या संहवदा है जो ऐसी भूहम के सभबन्ध में उपधारा (1) के तात्पयड के अंतगडत की गई है ।
153. िेता का हक
जहां स्थावर सभपहत्त का हविय इस अध्याय के उपबन्धों के अधीन ककया जाता है और ऐसा हविय पूणड हो गया है, वहां वह सभपहत्त िेता में उस समय से हनहहत हो गई समझी जायेगी जबकक सभपहत्त का हविय ककया गया हो न कक उस समय से जब कक हविय पूणड हो जाता है ।
154. िेता, हविय से पूवड शोध्य भू-राजस्व के हलये दायी नहीं होगा
धारा 138 या धारा 139 में ककसी बात के होते हुए भी, िय के प्रमाण-पत्र में नाहमत व्यहि उस भू-राजस्व के हलये दायी नहीं हेागा जो हविय की तारीख से पूवड की ककसी कालावहध के हलये उस भूहम के सभबन्ध में देय है।
155. भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूली योग्य धन
हनम्नहलहखत धन, यथाशक्य, इस अध्याय के उपबन्धों के अधीन उसी रीहत में वसूल ककया जा सकेगा हजस रीहत में कक भू–राजस्व का बकाया वसूल ककया जाता है.- (क) ऐसे प्रभारों के हसवाय जो धारा 58 की उपधारा (2) के अधीन भू-राजस्व में सहभमहलत ककये गये हैं, इस संहहता या तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य अहधहनयहमहत के अधीन देय या उद्ग्रहणीय समस्त लगान, स्वाहमत्व जल की दरें, उपकर, फीस, प्रभार, प्रीहमयम, शाहस्तयाँ, जुमाडने तथा खचड; (ख) ऐसे समस्त धन जो ककसी ऐसे अनुदान; पट्टे संहवदा के, हजसमें यह उपबन्ध हो कक वे उसी रीहत में वसूल ककये जा सकेंगे हजस रीहत में कक भू–राजस्व का बकाया वसूल ककया जाता है, अधीन राज्य सरकार के शोध्य होते हैं; (खख) ककसी प्रत्याभूहत संहवदा के अधीन प्रत्याभूत की गई रकम की सीमा तक राज्य सरकार द्वारा प्रत्याभूत ककये गये समस्त धन हजनके सभबन्ध में उस प्रत्याभूहत-संहवदा में यह उपबन्ध हो कक वे उसी रीहत में वसूली योग्य होंगे हजसमें कक भू–राजस्व का बकाया वसूल ककया जाता है; (ग) ऐसी समस्त शहियाँ हजनके बारे में इस संहहता या तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य अहधहनयहमहत द्वारा यह घोहषत ककया गया हो कक वे उसी रीहत में वसूल योग्य होंगी हजस रीहत में कक भू-राजस्व का बकाया वसूल ककया जाता है; और (घ) कोई ऐसी राहश हजसके बारे में राज्य के ककसी िेत्र में तत्समय प्रवृत्त सहकारी सोसाइरटयों से सभबहन्धत ककसी हवहध के अधीन हनयुि ककये गये समापक द्वारा यह आदेश कदया गया है कक वह राहश ककसी सोसाइटी के आहस्तयों के प्रहत अहभदाय के रूप में या समापक के खचड में वसूल की जाय : परन्तु खंड (घ) में हवहनर्ददष्ट राहश की वसूली के हलये प्रस्तुत ककये गये आवेदन पर तब तक कोई कायडवाही नहीं की जावेगी जब तक कक ऐसे आवेदन के साथ, ऐसी हवहध के अधीन हनयुहि ककये गये रहजस्रार द्वारा हस्तािररत इस आशय का प्रमाण-पत्र संलग्न न कर कदया गया हो कक उि राहश भू–राजस्व के बकाया के तौर पर वसूल की जानी चाहहए (ड.) समस्त धन- (एक) जो मध्यप्रदेश स्टेट एग्रो इण्डस्रीज डेवलपमेंट कापोरेशन हलहमटेड द्वारा कृषकों को कृहष के या भूहम के सुधार के प्रयोजनाथड बेचे कृहषक उपकरणों या अन्य सामग्री के हविय सभबन्धों ककसी करार के, जो कक उि हनगम द्वारा ककया गया हो, अधीन शाहस्त के कारण, उि उपकरणों या सामग्री के दामों के कारण या अन्यथा उि हनगम को देय होते हो; (दो) जो उि हनगम द्वारा कदये गये ककसी उधार का या उि हनगम के साथ ककये गये पट्टे, संहवदा या करार के अधीन या उस हनगम के ककसी अन्य व्यवहार के अधीन उि हनगम को शोध्य ककसी रकम का प्रहतसंदाय करने में उि हनगम को देय होते हों: परन्तु इस खडं में हवहनर्ददष्ट की गई धनराहश की वसूली के हलये प्रस्तुत ककये गये आवेदन-पत्र पर तब तक कोई कायडवाही नहीं की जायगी जब तक कक ऐसे आवेदन-पत्र के साथ उि हनगम के प्रबन्ध-हनदेशक द्वारा हस्तािररत ककया गया इस आशय का प्रमाण-पत्र कक उि धनराहश की वसूली भू-राजस्व के बकाया की भाँहत की जानी चाहहए, संलग्न न कर कदया गया हो (च) समस्त धन जो- (एक) मध्यप्रदेश लघु उद्योग हनगम मयाडकदत तथा मध्यप्रदेश औद्योहगक हवकास हनगम मयाडकदत द्वारा उद्यहमयों को ककसी उद्योग की स्थापना करने, उसका हवस्तार करने या उसके चलाने के प्रयोजन के हलये या ककसी उद्योग से आनुषंहगक ककसी अन्य प्रयोजन के हलये बेची गई मशीनरी या अन्य सामहग्रयों का भाडाऺ िय पर या अन्यथा हविय ककये जाने सभबन्धी ककसी करार के, जो कक उि हनगमों द्वारा ककया गया हो, अधीन सेवा प्रभार के कारण, शाहस्त के कारण, ब्याज के कारण, उि मशीनरी या अन्य सेवा सामहग्रयों के मूल्य के कारण उि हनगमों को देय होते हों; (दो) मध्यप्रदेश लघु उद्योग हनगम मयाडकदत तथा मध्यप्रदेश औद्योहगक हवकास हनगम मयाडकदत द्वारा ककसी पट्टे, संहवदा या करार के अधीन यथाहस्थहत भाडे पर कदये गये या बेचे गये ककसी भवन के ककराये या मूल्य के कारण उि हनगमों को देय होते हो; (तीन) मध्यप्रदेश लद्यु उद्योग हनगम मयाडकदत तथा मध्यप्रदेश औद्योहगक हवकास हनगम मयाडकदत द्वारा कदये गये ककसी उधार का या उि हनगमों के साथ ककये गये पट्टे, संहवदा या करार के अधीन उि हनगमों के ककसी अन्य व्यवहार के अधीन उि हनगमों के शोध्य ककसी रकम का प्रहतसंदाय करने में उहि हनगमों को देय होते हों: परन्तु इस खंड में हवहनर्ददष्ट की गई धनराहश की वसूली के हलये प्रस्तुत ककये आवेदन-पत्र पर तब तक कोई कायडवाही नहीं की जायेगी जब तब कक ऐसे आवेदन पत्र के साथ उि हनगम के प्रबंध-हनदेशक द्वारा हस्तािररत ककया गया इस आशय का प्रमाण-पत्र कक उि धनराहश की वसूली भू-राजस्व के बकाया की भांहत की जानी चाहहए, संलग्न न कर कदया गया हो । (छ) समस्त धन जो- (एक) नल कूपों के सहिमाडण सभबन्धी प्रभारों के कारण मध्यप्रदेश हलफ्ट इरीगेशन कापोरेशन हलहमटेड को देय होते हो; (दो) ककन्हीं उसत्सचन स्कीमों से ससचाई के प्रयोजन से प्रदाय ककये गये जल के मद्दे लगने वाले जल कर के कारण मध्यप्रदेश हलफ्ट इरीगेशन कापोरेशन हलहमटेड को देय होते हों; (तीन) मध्यप्रदेश हलफ्ट इरीगेशन कापोरेशन हलहमटेड के साथ हनष्पाकदत ककये गये ककसी पट्टे करार या संहवदा के अधीन उि कापोशन को शोध्य ककसी धनराहश के कारण देय होते हों: परन्तु इस खंड में हवहनर्ददष्ट की गई धनराहश की वसूली के हलये प्रस्तुत ककये गये आवेदन-पत्र तब तक कोई कायडवाही नही की जायगी जब तक कक ऐसे आवेदन-पत्र के साथ उि कापोशन के प्रबंध हनदेशक द्वारा हस्तािररत ककया गया इस आशय का प्रमाण-पत्र कक उि धनराहश की वसूली भू-राजस्व के बकाया की भांहत की जानी चाहहए, संलग्न न कर कदया गया हो ।
156. प्रहतभू से धनों की वसूली
प्रत्येक ऐसा व्यहि जो इस संहहता के ककसी भी उपबन्ध के अधीन या ककसी अन्य अहधहनयहमहत के या ककसी अनुदान, पट्टे या संहवदा के हजसके कक अधीन वह राहश, जो कक प्रहतभूहत की गई है, मूल ऋणी से भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूली योग्य है, अधीन प्रहतभूत बन गया हो, उस रकम का या उसके ककसी भाग का हजसका कक भुगतान करने के हलये वह अपने प्रहतभूहत पत्र के हनबन्धनों के अधीन दायी हो गया हो, भुगतान न करने की दशा में इस बात के दाहयत्वाधीन होगा कक उसके हवरूद्ध इस संहहता के उपबन्धों के अधीन उस रीहत मे कायडवाही की जाय हजसमें कक भू–राजस्व के बकाया के हलये कायडवाही की जाती है ।
157. भू-धारणाहधकारी (भू-धृहत) का वगड
राज्य के धाररत भूहमयों के भू-धारणाहधकाररयों का केवल एक ही वगड होगा जो भूहम स्वामी के नाम से ज्ञात होगा
158. भूहमस्वामी
(1) प्रत्येक ऐसा व्यकक्त, जो इस संहहता के प्रवृत्त होने के समय, हनम्नहलहखत ककन्हीं भी वगों का हो, भूहमस्वामी कहलायेगा और उसे वे समस्त अहधकार होंगे जो इस संहहता द्वारा या इस संहहता के अधीन भूहमस्वामी को प्रदत्त ककये गये हैं तथा वह उन समस्त दाहयत्वों के अध्यधीन होगा जो इस संहहता द्वारा या इस संहहता के अधीन भूहमस्वामी पर अहधरोहपत ककये गये हैं, अथाडत्.- (क) प्रत्येक व्यककत उस भूहम के सभबन्ध में जो कक मध्यप्रदेश लैण्ड रेवेन्यू कोड, 1954 (ि. 2 सन् 1955) के उपबन्धों के अनुसार भूहमस्वामी या भूहमधारी अहधकारो में उसके द्वारा महाकौशल िेत्र मे धाररत हो; (ख) प्रत्येक व्यहि उस भूहम के सभबन्ध में जो कके मध्य भारत भू-आगम एवं कृहषकाहधकार हवधान, सभवत् 2007 (ि. 66 सन् 1950) में यथा पररभाहषत पद का कृषक के रूप में या माफीदार, इनामदार या छूट खातेदार के रूप में उसके द्वारा मध्य भारत में धाररत हो; (ग) प्रत्येक व्यहि उस भूहम के सभबन्ध में जो कक भोपाल स्टेट लैण्ड रेवेन्यू ऐक्ट, 1932 (ि. 4 सन् 1932) में यथा-पररभाहषत दखलकार के रूप मे उसके द्वारा भोपाल िेत्र मे धाररत हो; (घ)(एक) प्रत्येक व्यहि उस भूहम के सभबन्ध जो कके हवन्ध्यप्रदेश लैण्ड रेवेन्यू एण्ड टेनेन्सी ऐक्ट, 1953 (ि. 3 सन् 1955) में यथा पररभाहषत पचपन-पैंतालीस; पट्टेदार कृषक, हनकुन्जधारी के रूप में या तालाब धारक के रूप में उसके द्वारा हवन्ध्यप्रदेश िेत्र में धाररत हो; (दो) प्रत्येक व्यहि उस भूहम के (जो उस भूहम से, जो हनकुंज या तालाब हो या जो सरकारी या लोक प्रयोजनो के हलये अर्तजत की गई हो या उन प्रयोजनो के हलये अपेहित हो, हभि हो) सभबन्ध में जो कक गैर हकदार कृषक के रूप में उसके द्वारा हवन्ध्यप्रदेश िेत्र में धारा 57 की धाररत हो और हजसके कक सभबन्ध में वह रीवा स्टेट लैंड रेवेन्यू एण्ड टेनेन्सी कोड, 1935 की उपधारा (4) के उपबन्धों के अनुसार पट्टा पाने का हकदार हो; (तीन) प्रत्येक व्यकक्त उस भूहम के सभबन्ध में जो कक कृषक के रूप में उसके द्वारा हवन्ध्यप्रदेश िेत्र में धाररत हो और हजसके सभबंध में वह हवन्ध्यप्रदेश लैडं रेवेन्यू एण्ड टेनेन्सी ऐक्ट, 1953 (ि. 3 सन् 1955) की धारा 151 की उपधारा 2 तथा 3 से उपबन्धो के अनुसार पट्टा पाने का हकदार हो ककतु हजसne ऐसा पट्टा इस सहहता के प्रवृत्ता होने के पूवड अहभप्रात्त न ककया हो (ड.) प्रत्येक व्यकक्त उस भूहम के सभबन्ध में जो कक राजस्थान टेनेन्सी ऐक्ट, 1955 (ि. 3 सन् 1955) में यथा पररभाहषत खातेदार कृषक के रूप में या हनकुंजधारी के रूप मे उसके द्वारा हसरोंज िेत्र में धाररत हो (2) ककसी ऐसे देशी राज्य का, जो कक मध्यप्रदेश राज्य का भाग है, शासक, जो संहवधान प्रारभभ होने के पूवड उसके द्वारा की गई प्रसंहवदा या करार के आधार पर ऐसे शासक के रूप में इस कोड के प्रवृत्त होने के समय भूहम धारण ककये हुए था या भूहम धारण के हकदार था, इस कोड के प्रवृत्त होने की तारीख से इस कोड के अधीन ऐसी भूहम का भूहमस्वामी होगा और उन समस्त अहधकारों तथा दाहयत्वों के अध्यधीन होगा जो कक इस कोड के द्वारा या अधीन ककसी भूहमस्वामी को प्रदत्त तथा उस पर अहधरोहपत ककये गये हों। स्पष्टीकरण.- धारा में अहभव्यहि ’’शासन” तथा “देशी राज्य” के वही अथड होंगे जो कक भारत के संहवधान के अनुच्छेद 366 के िमश: खंड (22) तथा (15) में इन अहभव्यहियों के हलये कदये गये है। (3) प्रत्येक व्यहि--- (एक) जो राज्य सरकार या कलेक्टर या आवंटन अहधकारी द्वारा उसे मध्यप्रदेश भू-राज्स्व संहहता (संशोधन) अहधहनयम, 1992 के प्रारंभ पर या उसके पूवड मंजूर ककये गये ककसी पट्टे के आधार पर भूहमस्वामी अहधकार में भूहम धारण ककये हुये है, ऐसे प्रारंभ की तारीख से, और (दो) हजसे राज्य सरकार या कलेक्टर या आवंटन अहधकारी द्वारा भूहम का आवंटन भूहमस्वामी अहधकार में, मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहहता (संशोधन) अहधहनयम, 1992 के प्रारंभ के पिात् ककया गया है, ऐसे आवंटन की तारीख से, ऐसी भूहम के सभबन्ध में भूहम स्वामी समझा जायेगा और उन समस्त अहधकारों दाहयत्वों के अध्यधीन होगा जो इस संहहता द्वारा या उसके अधीन ककसी भूहम स्वामी को प्रदत्त और उस पर अहधरोहपत ककये गये हैं: परन्तु ऐसा कोई भी व्यहि पट्टे या आवंटन की तारीख से 10 वषड की कालावहध के भीतर ऐसी भूहम को अन्तररत नहीं करेगा ।
159. भूहमस्वाहमयों द्वारा देय भू-राजस्व
धारा 158 के अधीन भूहम स्वामी होने वाला प्रत्येक व्यहि-(क) यकद वह अपने द्वारा धाररत भूहमयों के सभबन्ध में भू-राजस्व का भुगतान कर रहा था ऐसे भू-राजस्व का; या (ख) यकद वह अपने द्वारा धाररत भूहमयों के सभबन्ध में लगान का भुगतान कर रहा था ऐसे लगान के बराबर की रकम का; भू-राजस्व के रूप में भुगतान करेगा ।
160. भू-राजस्व का भुगतान करने के दाहयत्व से दी गई छूट का प्रहतसंहरण
(1) कहीं भी हस्थत प्रत्येक माफी या इनाम भूहम, हजसे सरकार के हवशेष अनुदान से या तत्समय प्रवृत्त ककसी हवहध के उपबन्धों के अधीन या ककसी अन्य हलहखत के अनुसरण में, सभपूणड भू–राजस्व या उसके ककसी भाग के भुगतान से इसके पूवड छूट दे दी गई थी, इस संहहता के प्रवृत्त होने के ठीक पिात् आने वाले राजस्व वषड के प्रारंभ से उस सभपूणड भू-राजस्व के भुगतान के दाहयत्वाधीन होगी जो कक उस भूहम पर हनधाडरणीय हो; भले ही ककसी ऐसे अनुदान हवहध या हलहखत में कोई बात अन्तर्तवष्ट क्यों न हों । (2) जहां कोई ऐसी माफी या इनाम भूहम ककसी सावडजहनक; धार्तमक या पूतड संस्था को बनाये रखने या उसके समारिण के हलये धाररत हो, वहां राज्य सरकार, ऐसी संस्था के आवेदन पर; जो हवहहत प्ररूप तथा हवहहत समय के भीतर ककया गया हो उसे भू–राजस्व में उसके द्वारा उपयुि छूट की रकम से अनहधक ऐसी वार्तषकी प्रदान कर सकेगी जो ऐसी संस्था को समुहचत रूप से बनाये रखने या उसके समारिण के हलये वार्तषक प्रदान कर सकेगी जो ऐसी संस्था को समुहचत रूप से बनाये रखने या उसके समारिण के हलये अथवा उसके द्वारा की जाने वाली सेवा को चालू रखने के हलये युहियुि समझी जाय। (3) उपधारा (2) के अधीन प्रदान की गई वार्तषकी ऐसी शतों के अध्यधीन होगी जो कक हवहहत की जाय, और वह राज्य सरकार द्वारा, समय-समय पर, पुनरीहित या प्रत्याहृत की जा सकेगी । (4) जहां उपधारा (2) के अधीन आवेदन कर कदया जाता है, वहां सभबहन्धत संस्था से भू-राजस्व की वसूली आवेदन का हवहनिय होने तक के हलये रोक दी जायगी।
161. बन्दोबस्त चालू रहने के दौरान राजस्व में कमी
कलेक्टर, बन्दोबस्त चालू रहने के दौरान ककसी समय, भूहमस्वामी के आवेदन पर या स्वप्रेरणा से, ऐसे हनयमों के अनुसार, जो कक इस सभबन्ध में बनाये जायें, ककसी भूहम के सभबन्ध में राजस्व को हनम्नहलहखत आधारों में से ककसी भी आधार पर कम कर सकेगा; अथाडत्--- (एक) यह कक भूहम बाढ़ों के पररणामस्वरूप या ऐसे भूहम–स्वामी के हनयंत्रण से परे ककसी अन्य कारण से पूणडत: या भागत: खेती के अयोग्य हो गई है। (दो) यह कक राज्य खचे से सहिर्तमत तथा अनुरहित ससचाई का कोई स्त्रोत, चाहे वह नया हो या पुराना, बेमरभमत पडा हुआ है और उससे उसके सभपूणड खाते, या उसके ककसी भाग की, हजसको कक राजस्व की बढाई गई दर ससचाई के कारण लागू कर दी गई है, ससचाई नही हो रही है। (तीन) यह कक ससचाई के ककसी प्राइवेट स्त्रोत से उसके सभपूणड खाते या उसके ककसी भाग की, हजस पर बढ़ाये गये भू-राजस्व का हनधाडरण ससचाई के कारण ककया गया है, ककसी ऐसे कारण से, जो भूहमस्वामी के हनयंत्रण से परे है, ससचाई नही हो रही है। (चार) यह कक भूहमस्वामी द्वारा उस भूहम के सभबन्ध में देय राजस्व उस राजस्व से अहधक है हजसकी की संगणना ऐसी भूहम के हलये गत बन्दोबस्त में या ककसी अन्य हवहध के अधीन है हनयत की गई दरों से की गई थी। (पांच) यह कक ऐसे भूहम–स्वामी के खाते का िेत्रफल, ककसी कारण, से उस िेत्रफल से कम हो गया है हजस पर हवघमान भू-राजस्व हनधाडररत ककया गया था । (2) जहां उपधारा (1) के अधीन ककसी कमी का आदेश ककया जाता है, वंहा ऐसी कमी उन आदेश की तारीख के ठीक आगामी राजस्व वषड के प्रारभभ से प्रभावशील होगी। (3) यकद वह हेतुक; हजसकी कक वजह से उपधारा के अधीन राजस्व में कमी की गई हो, बाद में नहीं रह जाता है या दूर कर कदया जाता है, तो कलेक्टर, भूहमस्वामी को सुनवाई का युहियुि अवसर देने के पिात्, यह हनदेश देते हुए आदेश कर सकेगा कक ऐसी कमी प्रभाव में नही रहेगी, और ऐसा आदेश पाररत कर कदया जाने पर ऐसी कमी उस आदेश की तारीख के ठीक आगामी राजस्व वषड के प्रारभभ से प्रहतसंहृत हो जायगी।
163. भूहमस्वामी अहधकार प्रदान ककये जाने के हलये लहभबत आवेदन
भूहमस्वामी अहधकार प्रदान ककये जाने के हलये भूहमधाररयों द्वारा ककये गये समस्त ऐसे आवेदन, जो इस संहहता के प्रवृत्त होने के ठीक पूवड महाकौशल िेत्र के ककसी राजस्व न्यायालय के समि चाहे अपील, पुनरीिण या पुनर्तवलोकन में या चाहे अन्यथा लहभबत हों, फाईल कर कदये जायेंगे और ऐसे भूहमधाररयों द्वारा जमा रकम, यकद कोई हों, उन्हें वापस कर दी जायगी।
164. न्यागमन
भूहमस्वामी का हहत, उसकी मृत्यु हो जाने पर, उसकी स्वीय हवहध के अध्यधीन रहते हुए, यथाहस्थहत हवरासत, उत्तरजीहवता या वसीयत द्वारा संिान्त होगा
165. अन्तरण के अहधकार
(1) इस धारा के अन्य उपबन्धों के तथा धारा 168 के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए भूहमस्वामी अपनी भूहम का कोई भी हहत [………] अन्तररत कर सकेगा। (2) उपधारा (1) में ककसी बात के होते हुए भी— (क) भूहमस्वामी द्वारा ककसी भूहम का कोई भी बन्धक इसके पिात् तब तक हवहधमान्य नहीं होगा जब तक कक कम से कम पाँच एकड हससचत भूहम या दस एकड़ अससहचत भूहम ककसी भी हवल्लंगम या भार से मुि रूप में उसके पास न बच जाय; (ख) खंड (क) के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, भूहमस्वामी द्वारा ककसी भी भूहम का कोई भाग बन्धक इसके पिात् हवहधमान्य नहीं होगा यकद वह छह वषड से अहधक की कालावहध के हलये हो, और जब तक कक उस बन्धक की एक शतड यह न हो कक बन्धक हवलेख में वर्तणत की गई कालावहध का अवसान हो जाने पर उस बन्धक के सभबन्ध में यह समझा जायेगा कक भूहमस्वामी द्वारा ककसी भी प्रकार का कोई भुगतान ककये हबना ही उसका पूणडत: मोचन हो गया है, और बन्धकदार उस बन्धक भूहम का कब्जा भूहमस्वामी को तुरन्त वापस दे देगा ; (ग) यकद बन्धक की गई भूहम का कोई कब्जा बन्धकदार बन्धक की कालावहध का छह वषड का, इनमें से हजसका भी अवसान पहले होता हो, अवसान हो जाने के पिात् भूहम का कब्जा नहीं सौपता है, तो बन्धकदार तहसीलदार के आदेश द्वारा अहतचारी के तौर पर बेदखल ककये जाने का दायी होगा और तहसीलदार द्वारा बन्धककताड को उस भूहम का कब्जा कदया जायेगा : परन्तु इस उपधारा में की कोई भी बात ककसी ऐसी भूहम के बन्धक के मामले में लागू नहीं होगी जो भूहमस्वामी द्वारा कृहष -हभि प्रयोजनों के हलये धाररत हो (3) जहां भूहमस्वामी उपधारा (2) के उपबन्धों के अनुसरण में अपनी भूहम का कोई ऐसा बन्धक करता है जो भोग-बन्धक से हभि हो, वहां बन्धक हवलेख में अन्तर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी, बन्धक के अधीन प्रोद्भूत होने वाले ब्याज की कुल रकम बन्धकदार द्वारा दी गई मूल रकम के आधे से अहधक नही होगी। (4) उपधारा (1) में अंतर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी, ककसी भी भूहमस्वामी को यह अहधकार नहीं होगा कक वह कोई भी भूहम- (क) ककसी ऐसे व्यहि के पि में अंतररत करे जो ऐसे अंतरण के फलस्वरूप उतनी भूहम का हकदार हो जावेगा जो स्वयं उसके द्वारा या उसके कुटुभब द्वारा धाररत भूहम, यकद कोई हो; सहहत खेल हमलाकर ऐसी अहधकतम सीमाओं से, जो कक हवहहत की जाएं, अहधक हो जाये; (ख) x x x]; परन्तु- (एक) इस उपधारा में की कोई भी बात हनम्नहलहखत दशाओं में लागू नहीं होगी- (क) (एक) ककसी सावडजहनक, धार्तमक या पूतड प्रयोजनों के हलये स्थाहपत ककसी संस्था के पि में ककये गये अंतरण या औद्योहगक प्रयोजन के हलये ककये गये अंतरण या बन्धक के रूप में ककये गये अंतरण की दशा में; (दो) ककसी सहकारी सोसाइटी के पि में औधोहगक प्रयोजन के हलये ककये गये अंतरण या बन्धक रूप में ककये गये अंतरण की दशा में; तथाहप इस शतड के अध्यधीन रहते हुए कक कृहष प्रयोजनों के हलये कोई भी बन्धक, ककसी अहग्रम की वसूली के हलये हविय की धारा 147 के खंड (ख) के उल्लंघन में प्राहधकृत नहीं करेगा; (ख) कृहष हभि प्रयोजनों के हलये धाररत भूहम के अंतरण की दशा में :
166. कहतपय अन्तरणों के मामले में समपहरण
(1) यकद भूहम का अंतरण धारा 165 की उपधारा (4) के खंड (क) के उपबंधों के उल्लंघन में ककया जाता है, तो अन्तररती के पास की उतनी भूहम जो हवहहत की उच्चतम सीमा के ऊपर हो, अंतररती द्वारा हवहहत कालावहध के भीतर चयन कर ली जाने पर और उपखंड अहधकारी द्वारा उसका सीमांकन ऐसे हनयमों के, जो उस संभबंध में बनाये जायें; अनुसार कर कदया जाने के पिात, राज्य सरकार समपह्रत हो जायेगी: परंतु यकद अंतररती हवहहत कालावहध के भीतर चयन नहीं करता है तो ऐसा चयन उपखंड अहधकारी द्वारा ककया जायेगा । (2) X X X] (3) उपखण्ड अहधकारी, उपधारा (1) तथा (2) में, हनर्ददष्ट ककए गये मामलों में, अंतररती के पास बच रही भूहम के संबंध में भू- राजस्व, हवहहत रीहत में हनयत करेगा ।
167. भूहम का हवहनमय
--- धारा 165 के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, भूहमस्वामी, खेतों की चकबंदी के प्रयोजनों के हलये, या खेतों में और अहधक सुहवधा सुहनहित करने के प्रयोजनों के हलये, अपने सभपूणड खाते या उससे ककसी भाग का हवहनमय पारस्पररक करार द्वारा कर सकेंगे ।
168. पट्टे
(1) उन मामलों में के हसवाय हजनके कक हलये उपधारा (2) में उपबंध ककया गया है, कोई भी भूहमस्वामी उसके खाते में समाहवष्ट ककसी भूहम को तीन वषड की ककसी िमवती कालावहध के दौरान एक वषड से अहधक समय के हलये पट्टे पर नहीं देगा: परंतु इस उपधारा में की कोई भी बात ककसी भूहम के ऐसे पट्टे को लागू नहीं होगी जो – (एक) भूहमस्वामी द्वारा ऐसी रहजस्रीकृत सहकारी कृहष सोसाइटी को कदया गया हो हजसका कक वह सदस्य है; (दो) भूहम-स्वामी द्वारा कृहष- हभि प्रयोजनों के हलये धाररत हो । स्पष्टीकरण– इस धारा के प्रयोजनों के हलये— (क) “पट्टा” से अहभप्रेत है ककसी भूहम का उपयोग करने के अहधकार का ऐसा अंतरण जो एक अहभव्यि या हववहित समय के हलये, ककसी कीमत के, जो दी हो, या हजसे देने का वचन कदया गया हो अथवा धन या ककसी अन्य मूल्यांकन वस्तु के, जो कालावधीय रूप से अंतररती द्वारा, जो उस अंतरण को ऐसे हनबंधनो पर प्रहतगृहीत करता है, अन्तरक को दी जानी है, प्रहतफल के रूप में ककया गया हो; (ख) ककसी ऐसे ठहराव को, हजसके द्वारा कोई व्यहि (पट्टेदार) अपने बैलों से या अपने द्वारा उपाप्त बैलों से और उसके द्वारा भूहमस्वामी को भूहम की उपज का कोई हवहनर्ददष्ट अंश देने की शतड पर भूहमस्वामी की ककसी भूहम पर खेती करना है, पट्टा समझा जायेगा; (ग) केवल पास काटने या पशु चराने या ससघाड़ा उगाने या लाख का प्रजनन या संग्रहण करने, तेंदू पत्ते तोड़ने या उनका संग्रहण करने के अहधकार का कदया जाना भूहम या पट्टा नहीं समझा जायेगा । (2) भूहमस्वामी, जो— (एक) हवधवा है; या (दो) अहववाहहत स्त्री है, या (तीन) ऐसी हववाहहत स्त्री है हजसे पहत ने त्याग कदया हे, या (चार) अवयस्कता है; या (पांच) ऐसा व्यहि है जो वृद्धावस्था के कारण या अन्यथा शारीररक या मानहसक दृहष्ट से हन:शि हो गया है; या (छह) ऐसा व्यहि है जो ककसी हवहध- आदेहशका के अधीन हनरूद्व या कारावाहसत है; या (सात) ऐसा व्यहि है जो संघ के सशि बल की सेवा में है; या (आठ) सावडजहनक, पूवड या धार्तमक संस्था है; या (नौ) स्थानीय प्राहधकारी या सहकारी सोसाइटी है; अपना सभपूणड खाता या उसका कोई भाग पट्टे पर दे सकेगा: परंतु जहां कोई खाता एक से अहधक व्यहियों द्वारा संयुित: धाररत है, वहां इस उपधारा के उपबंध तब तक लागू नहीं होंगे जब तब कक ऐसे समस्त व्यहि पूवोि वनों में ककसी एक वगड या एक से अहधक वगो के न हों; परंतु यह और भी कक इस उपधारा के अनुसरण में कदया गया कोई भी पट्टा मृत्यु हो जाने या अन्य प्रकार से हन:शिता समाप्त हो जाने के एक वषड पिात् प्रवृत्त नहीं रहेगा । (3) X X X] (4) जहां पट्टा उपधारा (2) के अनुसरण में कदया जाता है, वहां पट्टेदार उस भूहम को ऐसे हनबंधनों तथा शतों पर धारण करेगा जैसी कक उसके तथा भूहमस्वामी के बीच करार पाई जायँ और उसे उस दशा में उपखंड अहधकारी के आदेश से बेदखल ककया जा सकेगा जबकक भूहम स्वामी ने इस आधार पर आवेदन ककया हो कक उस पट्टे के ककसी ताहत्वक हनबन्धन या शतड का उल्लंघन हुआ है या इस आधार पर आवेदन ककया हो कक पट्टा प्रवृत्त नहीं रहा है। (5) जहां इस संहहता के प्रवृत्त होने के समय कोई भूहम ककसी ऐसे भूहम स्वामी से; जो उपधारा (2) में वर्तणत वगो में से ककसी वगड का या एक से अहधक वगो का है, पट्टे पर धाररत है, है, वहां इस संहहता के प्रवृत्त होने पर पट्टे के सभबंध में यह समझा जावेगा कक वह उपधारा (2) के अनुसरण में कदया गया पट्टा हैं ।
169. अनहधकृत पट्टा आकद
अनहधकृत पट्टा आकद
170. धारा 165 के उल्लंघन में ककये गये अन्तर का पररवजडन
--- (1) जहां ककसी भूहम स्वामी द्वारा कब्जे का अंतरण ककसी ऐसे अंतरण के अनुसरण में ककया गया हो जो कक धारा 165 की उपधारा (6) के उल्लंघन में हो, यहां कोई भी ऐसा व्यहि जो ककसी ऐसे भूहमस्वामी का हजसके कक कोई हनकटतर वाररस न हों उत्तरजीवी होने की दशा में उस खाते को हवरासत में प्राप्त करता – (एक) 1 जुलाई सन् 1976 के पूवड कब्जे के अंतरण के मामले में, 31 कदसभबर सन् 1978 तक; और (दो) पिात्वती मामलों में कब्जे के ऐसे अंतरण के बारह वषड के भीतर उपखंड अहधकारी को आवेदन कर सकेगा कक उसे इस बात के अध्यधीन कब्जा कदलाया जाय कक उसे भू-राजस्व की बकाया या ककन्हीं भी अन्य शोध्यों, जो कक उस खाते पर भार हों, बाबत वे दाहयत्व स्वीकायड होंगें हजन्हें कक उपखंड अहधकारी इस सभबंध में बनाये गये हनयमों के अनुसार अवधाररत करे और उपखंड अहधकारी ऐसे आवेदन का हनपटारा ऐसी प्रकिया के अनुसार करेगा जैसी कक हवहहत की जाय । (2) जहां भूहमस्वामी की कोई भूहम धारा 165 की उपधारा (5) उल्लंघन में बेची जाती है वहां वह न्यायालय हजसके कक द्वारा ऐसे हविय का आदेश कदया जाता है, उस भूहमस्वामी के या ककसी भी ऐसे व्यहि के; जो उस भूहमस्वामी का हजसके कक कोई हनकटतर वाररस न हों उत्तरजीवी होने की दशा में उस खाते को हवरासत में प्राप्त करता, आवेदन पर जो ऐसे हविय को दो वषड के भीतर ककया गया हो; उस हविय को अपास्त कर देगा और आवेदन को उस भूहम का कब्जा इस बात के अध्यधीन कदलाएगा कक उसे भू-राजस्व की बकाया या ककन्हीं भी अन्य शोध्यों; जो कक उस भूहम पर भार हों, सभबंधी दाहयत्व स्वीकायड होंगे ।
171. सुधार करने का अहधकार
कृहष के प्रयोजन के हलये धाररत भूहम का भूहमस्वामी, उस भूहम पर अहधक अच्छी खेती के हलये या पूवोि प्रयोजन के हलये उसके अहधक सुहवधापूणड उपयोग हेतु उस पर कोई भी सुधार करने का हकदार है ।
172. भूहम का व्यपवतडन
(1) यकद – (एक) नगरीय िेत्र में या ऐसे िेत्र की बाहरी सीमाओं से पांच मील की हत्रज्या के भीतर; या (दो) ककसी ऐसे ग्राम में, हजसकी जनसंखया गत जनगणना के अनुसार दो हजार या उससे अहधक हो; या (तीन) ऐसे अन्य िेत्रों में, हजन्हें राज्य सरकार, अहधसूचना द्वारा, हवहनर्ददष्ट करे, ककसी प्रयोजन के हलये धाररत भूहम का भूहमस्वामी अपने खाते या उसके ककसी भाग को कृहष के हसवाय ककसी अन्य प्रयोजन के हलये व्यपवर्ततत करना चाहता है तो वह इस बाबत अनुज्ञा दी जाने के हलये उपखंड अहधकारी को आवेदन करेगा, जो इस धारा के तथा इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के उपबंधो के अध्यधीन रहते हुए, अनुज्ञा देने से इंकार कर सकेगा या अनुज्ञा ऐसी शतो पर दे सकेगा जैसा कक वह ठीक समझे: परंतु यकद उपखंड अहधकारी उपधारा (1) के अधीन आवेदन प्राप्त होने क पिात् तीन मास तक; उसके सभबंध में अनुज्ञा या इंकारी का आदेश करने तथा उसे आवेदक का पररदत्त करने में उपेिा या चूक करता है, और आवेदक ने उस चूक या उपेिा की ओर उपखंड अहधकारी का ध्यान हलहखत संसूचना द्वारा आकृष्ट कर कदया हो तथा ऐसी चूक या उपेिा एक मास की और कालावहध तक जारी रहती है तो यह समझा जायगा कक उपखंड अहधकारी ने अनुज्ञा हबना ककसी शतड के प्रदान कर दी है: परंतु यह और कक यकद ककसी ऐसी भूहम का, जो हवकास योजना में कृहष से हभि प्रयोजनों के हलए आरहित की गई है ककतु उसका उपयोग कृहष के हलये ककया जाता है भूहमस्वामी अपनी भूहम या उसके ककसी भाग को ऐसे प्रयोजन के हलये व्यपवर्ततत करना चाहता है हजसके हलए वह भूहम हवकास योजना में आरहित है, तो भूहमस्वामी द्वारा अपने आशय की उपखंड अहधकारी को दी गई जानकारी पयाडप्त होगी और ऐसे व्यपवतडन के हलए कोई अनुज्ञा अपेहित नहीं है: परंतु यह भी कक यकद ककसी ऐसी भूहम का, जो कृहष प्रयोजन के हलए हनधाडररत की गई है, भूहमस्वामी अपनी भूहम या उसके ककसी भाग को उद्योग के प्रयोजन के हलए व्यपवर्ततत करना चाहता है और ऐसी भूहम हवकास योजना के अंतगडत आने वाले िेत्र से हभि ककसी िेत्र में हस्थत हो, तो भूहम स्वामी द्वारा अपने आशय की उपखण्ड अहधकारी को दी गई हलहखत जानकारी पयाडप्त होगी और ऐसे व्यपवतडन के हलये कोई अनुज्ञा अपेहित नहीं है । परंतु यह भी कक यकद सिम प्राहधकारी ककसी अवैध कालोनी, हजसकी भूहम व्यपवर्ततत नहीं की गई है, के हनयहमतीकरण के कायड का हजभमा लेता है तो ऐसी भूहम हवकास योजना के उपबंधो के अध्यधीन रहते हुए व्यपवर्ततत हो गई समझी जाएगी और ऐसी भूहम धारा 59 के अधीन प्रीहमयम तथा पुनरीहित भू-राजस्व के हलए दायी होगी. स्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोजन के हलये सिम प्राहधकारी का वही अथड होगा जो उसके हलए मध्यप्रदेश नगरपाहलक हनयम अहधहनयम, 1956 (िमांक 23 सन् 1956) और मध्यप्रदेश नगरपाहलका अहधहनयम, 1961 (िमांक 37 सन् 1961) के अधीन बनाए गए मध्यप्रदेश नगर पाहलका (कालोनाईजर का रहजस्रीकरण, हनबंध तथा शते) हनयम, 1998 में कदया गया है । (2) व्यपवर्ततत करने की अनुज्ञा देने से उपखंड अहधकारी द्वारा केवल इन आधारों पर इंकार ककया जा सकेगा कक उस व्यपवतडत से लोक न्यूसेन्स होना संभाव्य है, या यह कक भूहमस्वामी उन शतो का, जो कक उपधारा (3) के अधीन अहधरोहपत की जाय, अनुपालन करने में असमथड है या अनुपालन करने के हलये राजी नहीं है। (3) व्यपवतडन के संबंध में शते हनम्नहलहखत उद्देश्यों, अथाडत् सावडजहनक स्वास्थ्य, सुरिा तथा सुहवधा सुहनहित करने के हलये ही अहधरोहपत की जा सकेंगी अन्य उद्देश्यों के हलए नहीं और उस भूहम की दशा में हजसका कक उपयोग हनमाडण स्थलों के रूप में ककया जाता है, उपयुडि बातों के अहतररि यह सुहनहित करने के हलये अहधरोहपत की जा सकेंगी कक स्थलों की हबना, उनका हवन्यास तथा उन तक पहुंच दखलकारों के स्वास्थ्य तथा सुहवधा की दृहष्ट से पयाडप्त हैं या संभबहधत बस्ती के हलये उपयुि हैं । (4) यकद कोई भूहम, भूहमस्वामी द्वारा हबना अनुज्ञा के या ककसी अन्य व्यहि द्वारा भूहमस्वामी की सभमहत से या उसकी सभमहत के हबना व्यपवर्ततत कर दी गई हो तो उपखंड अहधकारी, उसकी जानकारी प्राप्त होने पर, उस व्यहि पर, जो व्यपवतडन के हलए हजभमेदार है, ऐसी शाहस्त अहधरोहपत कर सकेगा जो ऐसी व्यपवर्ततत भूहम के बाजार मूल्य का बीस प्रहतशत से अहधक न हो, और उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार इस प्रकार कायडवाही कर सकेगा मानो व्यपवर्ततत करने की अनुज्ञा के हलये आवेदन कर कदया गया हो। (5) यकद कोई भूहम-पूवडगामी उपधाराओं में से ककसी उपधारा के अधीन पाररत ककये गये ककसी आदेश या अहधरोहपत की गई ककसी शतड के उल्लंघन में व्यपवर्ततत की गई है तो उपखंड अहधकारी उस व्यहि पर, जो ऐसे उल्लंघन के हलये हजभमेदार है, सूचना तामील कर सकेगा हजसमें उसे यह हनदेश कदया जायगा कक वह उस सूचना में कहथत युहियुि कालावहध के भीतर उस भूहम को उसके मूल प्रयोजन के हलये उपयोग में लाये या शतों का अनुपालन करें और ऐसी सूचना में ऐसे व्यहि से यह अपेिा की जा सकेगी कक वह ककसी संरचना को हटा ले, ककसी उत्खात को भर दे या ऐसे अन्य उपाय करे जो इस दृहष्ट से अपेहित हों कक उस भूहम को उसके मूल प्रयोजन के हलये उपयोग में लाया जा सके या यह कक शतड को पूरा ककया जा सके । उपखंड अहधकारी ऐसे व्यहि पर ऐसे उल्लंघन के हलये उपयोग में लाया जा सके या यह कक शतड को पूरा ककया जा सके । उपखंड अहधकारी ऐसे व्यहि पर ऐसे उल्लंघन के हलये ऐसी शाहस्त, जो ऐसी व्यपवर्ततत भूहम के बाजार मूल्य का बीस प्रहतशत से अहधक की नहीं होगी तथा ऐसी अहतररि शाहस्त भी, जो प्रत्येक धारा ऐसे कदन के हलये, हजसके कक दौरान ऐसा उल्लंघन चालू रहे, एक हजार रूपये से अहधक की नहीं होगी, अहधरोहपत कर सकेगा । (6) यकद कोई व्यहि, हजस पर उपधारा (5) के अधीन सूचना तामील की गई है, उपखंड अहधकारी द्वारा उस उपधारा के अधीन आकदष्ट उपाय सूचना में कहथत कालावहध के भीतर नहीं करता है तो अहधकारी ऐसे उपाय या तो स्वयं कर सकेगा या करवा सकेगा: और ऐसा करने में उपगत कोई भी खचड ऐसे व्यहि से उसी प्रकार वसूल ककया जा सकेगा मानो कक वह भू – राजस्व की बकाया हो । (6-क) यकद कोई भूहम धारा 165 की उपधारा (6-डड) के उल्लंघन में व्यपवर्ततत की गई है, तो उपखंड अहधकारी उपधारा (5) तथा (6) में अहधकहथत कारडवाई करने के अहतररि ऐसे उल्लंघन के हलए ऐसी शाहस्त, जो पांच हजार रूपये से अहधक की नहीं होगी, तथा ऐसी अहतररि शाहस्त, जो ऐसे प्रत्येक कदन के हलये, हजसके कक दौरान ऐसा उल्लंघन चालू रहे; एक सौ रूपये से अहधक की नहीं होगी, अहधरोहपत करेगा । (7) लुप्त स्पष्टीकरण-एक.– इस धारा में व्यपवतडन से अहभप्रेत है भूहम को, हजस पर धारा 59 के अधीन ककसी एक प्रयोजन के हलये हनधाडरण ककया गया हो, उस धारा में वर्तणत ककसी अन्य प्रयोजन के हलये उपयोग में लाना ककतु भूहम को, जबकक उस पर ककसी अन्य प्रयोजन के हलये हनधाडरण ककया गया हो, कृहष प्रयोजन के हलये उपयोग में लाना व्यपवतडन नहीं समझा जायगा । स्पष्टीकरण–दो – इस धारा के प्रयोजन के हलये शब्द ‘हवकास योजना’ का वही अथड होगा जो कक मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम हनवेश अहधहनयम, 1973 (िमांक 23 सन् 1973) में उसके हलये कदया गया है।
173. त्यजन
इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अध्यधीन रहते हुए, भूहमस्वामी, कृहष वषड प्रारभभ होने की तारीख से कम से कम तीस कदन पूवड तहसीलदार को हलहखत सूचना देकर अपने अहधकारों का त्यजन कर सकेगा अथाडत् उन्हें राज्य सरकार के पि में त्याग सकेगा ककतु ऐसा ककहीं ऐसे अहधकारों हवल्लंगमों या साभयाहधकारों के अध्यधीन रहते हुए ही ककया जा सकेगा जो राज्य सरकार या भूहमस्वामी से हभि ककसी भी व्यहि के पि में हवहधपूवडक हवद्यमान हो और तब वह भूहम स्वामी ऐसे आदेश का ऐसी तारीख के ठीक आगामी कृहष वषड के भूहम-स्वामी नहीं रह जायेगा । खाते के केवल ककसी भाग का त्यजन ककया जाये कक दशा में, तहसीलदार उस खाते पर हनधाडररत राहश को इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अनुसार प्रभाहजत करेगा : परंतु ककसी खाते का या खाते के ककसी भाग का हवल्लंगम या भार के अध्यधीन त्यजन हवहधमान्य नहीं होगा ।
174. त्यजन ककये गये उपखंड का हनपटारा
यदक धारा 173 के अधीन सवेिण संखयांक या भू-खंड संखयांक के ककसी उपखंड का त्यजन कर कदया जाता है, तो तहसीलदाल उसी सवेिण संखयांक या भू-खंड संखयांक के अन्य उपखंडों के भूहमस्वामी को ऐसी प्रीहमयम पर जो कक वह उहचत समझे, ऐसे उपंखंड को दखल में लेने के अहधकार देगा और यकद ऐसे भूहमस्वाहमयों में स्पधाड हो तो वह ऐसे अहधकार को उनमें से सबसे ऊँची बोली लगाने वाले भूहमस्वामी को बेच देगा।
175. त्यजन की गई भूहम के हलये मागड का अहधकार
यदक कोई व्यहि ककसी ऐसी भूहम के संबंध में, हजसके कक हलये भाग उसके द्वारा प्रहतधाररत अन्य भूहम से होकर जाता है, अपने अहधकारों का त्यजन कर देता है; तो त्यजन की गई भूहम का कोई भावी धारक प्रहतधाररत भूहम में से होकर आज का हकदार होगा ।
176. खाते का पररत्याग
(1) यकद कोई ऐसा भूहमस्वामी, जो अपने खाते पर या तो स्वयं या ककसी अन्य व्यहि द्वारा दो वषड तक खेती नहीं करता है, भू-राजस्व का भुगतान नहीं करता है और उसने उस ग्राम को, हजसमें कक वह सामान्यत: हनवास करता है, छोड़ कदया है तो तहसीलदार, ऐसी जांच के पिात्, जैसी कक वह आवश्यक समझे, उस खाते में समाहवष्ट भूहम का कब्जा ले सकेगा और एक बार में एक कृहष वषड की कालावहध के हलये उस भूहम को भूहमस्वामी की ओर से पट्टे पर देकर उस खेती की व्यवस्था कर सकेगा । (2) जहां भूहमस्वामी या भूहम के हलए हवहधपूवडक हकदार कोई अन्य व्यहि, उस तारीख के, हजसको कक तहसीलदार ने उस भूहम का कब्जा हलया हो, ठीक आगामी कृहष वषड के प्रारंभ से तीन वषड की कालावहध के भीतर उस भूहम के हलये दावा करता है, वहां वह, भूहम, शोध्यों का, यकद कोई हो, भुगतान कर कदया जाने पर तथा ऐसे हनबंधनों एवं शतो पर, जैसी कक तहसीलदार उहचत समझे, उसे वापस कदला दी जायेगी । (3) जहां उपधारा (2) के अधीन कोई दावा नहीं ककया जाता है या यकद कोई दावा ककया जाता है तो वह नामंजूर कर कदया जाता है तो तहसीलदार, उस खाते को पररत्यि घोहषत करते हुए आदेश करेगा और वह खाता ऐसी तारीख से, जो कक उस आदेश में उस हनर्तमत हवहनर्ददष्ट की जाये, सरकार ने पूणडरूप से हनहहत हो जायेगा । (4) जहां कोई खाता उपधारा (3) के अधीन पररत्यि घोहषत कर कदया जाता है; वहां राजस्व की उस बकाया के सभबंध में जो उस खाते की बाबत उस भूहमस्वामी से शोध्य हो, उस भूहमस्वामी के दाहयत्व का उन्मोचन हो जायेगा ।
177. खातों का हनपटारा
(1) यकद कोई ऐसा भूहमस्वामी, हजसकी भूहम पर धारा 59 के अधीन कृहष के प्रयोजन के हलये ककया गया हो, या जो भूहम को हनवास के प्रयोजनों के हलये धारण करता है, ककन्हीं ज्ञात वाररसों के हबना मर जाय, तो तहसीलदार उसकी भूहम का कब्जा ले लेगा और उसे एक बार में एक वषड की कालावहध के हलये पट्टे पर दे सकेगा । (2) यकद तहसीलदार द्वारा भूहम का कब्जा लेने की तारीख से तीन वषड के भीतर कोई दावेदार उस खाते को उसे वापस कदलाये जाने के हलये आवेदन करता है; तो तहसीलदार ऐसी जांच के पिात् जैसी कक वह उहचत समझे, ऐसे दावेदार को उस भूहम का कब्जा कदलवा सकेगा या उसका दावा नामंजूर कर सकेगा । (3) उपधारा (2) के अधीन पाररत तहसीलदार का आदेश अपील का पुनरीिण के अध्यधीन नहीं होगा ककतु कोई भी ऐसा व्यहि, हजसका कक दावा उपधारा (2) के अधीन नामंजूर कर कदया गया हो तहसीलदार का आदेश संसूहचत ककया जाने की तारीख से एक वषड के भीतर, अपना हक स्थाहपत करने के हलये हसहवल वाद फाइल कर सकेगा, और ऐसा वाद फाइल कर कदया जाने की दशा में तहसीलदार उपधारा (1) में उपबंहधत ककये गये अनुसार भूहम को तब तक पट्टे पर देता रहेगा जब तक कक उस वाद का हवहनिय न हो जाये । (4) यकद तहसीलदार द्वारा उस भूहम का कब्जा हलये जाने की तारीख से तीन वषड के भीतर कोई दावेदार सामने नहीं आता है या यकद वह दावेदार, हजसका कक दावा उपधारा (2) के अधीन नामंजूर कर कदया गया हो, उपधारा (3) में उपबंहधत ककये गये अनुसार एक वषड के भीतर वाद फाइल नहीं करता है, तो तहसीलदार मृत भूहमस्वामी के उस खाते में के अहधकार को नीलामी द्वारा बेच सकेगा । (5) तत्समय प्रवृत्त ककसी हवहध में ककसी बात के होते हुए भी, ऐसा दावेदार, जो उस भूहम में, हजसके कक संबंध में इस धारा के उपबंधों के अनुसार कायडवाही की जा चुकी है, अपना हक स्थाहपत कर देता है, उपधारा (1) के अधीन देय लगान, तथा उपधारा (4) के अधीन उगाहे गये हविय आगमों का ही हकदार होगा और उसमें से उस खाते पर भू-राजस्व के मद्दे शोध्य समस्त राहशयां तथा प्रबंध और हविय के व्यय काट हलये जायेंगे ।
178. खाते का हवभाजन
(1) यकद ककसी खाते में, हजस पर धारा 59 के अधीन कृहष के प्रयोजन के हलये हनधाडरण ककया गया हो, एक से अहधक भूहमस्वामी हों तो उनमें से कोई भी भूहमस्वामी उस खाते में के अपने अंश के हवभाजन के हलये तहसीलदार को आवेदन कर सकेगा: परंतु यकद हक संबंधी कोई प्रश्न उठाया जाता है, तो तहसीलदार अपने समि की कायडवाहहयों को तीन मास की कालावहध तक के हलये रोक देगा, हजससे कक हक संभबंधी प्रश्न के अवधारण के हलए हसहवल वाद का संहस्थत ककया जाना सुकर हो जाय । (1-क) यकद कोई हसहवल वाद उपधारा (1) के परंतुक में हवहनर्ददष्ट की गई कालावहध के भीतर फाइल कर कदया जाय, और हसहवल न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त कर हलया जाय, तो तहसीलदार अपनी कायडवाहहयों को हसहवल न्यायालय का हवहनिय होने तक रोक रखेगा । यकद कोई हसहवल वाद उि कालावहध के भीतर फाइल न ककया जाय, तो वह रोक रखने के आदेश को अहभशून्य कर देगा और खाते के हवभाजन की कायडवाही अहधकार अहभलेख में की प्रहवहष्टयों के अनुसार करेगा । (2) तहसीलदार, सह-भूधाररयों की सुनवाई करने के पिात्, खाते को हवभाहजत कर सकेगा और उस खाते के हनधाडरण को इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अनुसार प्रभाहजत कर सकेगा । (3) [x x x] (4) [x x x] (5) [x x x] स्पष्टीकरण.– (एक) इस धारा के प्रयोजनों के हलये भूहमस्वामी के खाते के ककसी भी ऐसे सह-अंशधारी को, हजसने ककसी सिम हसहवल न्यायालय से ऐसे खाते में के अपने हक के सभबन्ध में घोषणा प्राप्त कर ली हो, ऐसे खाते का सह-भूधारी समझा जायगा । स्पष्टीकरण - (दो) … … ...
179. खाते में के वृिों पर अहधकार
(1) धारा 240 तथा 241 के उपबंधो के अध्यधीन रहते हुए वे समस्त वृि जो भूहमस्वामी के खाते में खड़े हों, उस भूहमस्वामी के ही होंगें । (2) उपधारा (1) की कोई भी बात भूहमस्वामी के खाते में खड़े हुए वृिों में के ककसी ऐसे अहधकार पर, जो उस संहहता के प्रवृत्त होने की तारीख को ककसी व्यहि के पि में हवद्यमान हो, प्रभाव नहीं डालेगी ककतु भूहमस्वामी ऐसे अहधकार का मूल्य हनयत ककये- जाने के हलये तहसीलदार को आवेदन कर सकेगा और अहधकार को ऐसी रीहत में, जैसी कक हवहहत की जाय, तहसीलदार की माफडत िय कर सकेगा ।
180. वृिों के अन्तरण पर हनबडन्धन
(1) भूहमस्वामी द्वारा अपने खाते में समाहवष्ट ककसी भूहम पर खड़े हुये वृिों का अंतरण वृिों की उपज के अन्तरण को छोड़कर शून्य होगा, जब तक कक भूहम ही अन्तररत न कर दी जाये । (2) ऐसे वृि, जो ककसी भूहमस्वामी के खाते में समाहवष्ट ककसी भूहम में खड़े हुए हों, ककसी हसहवल न्यायालय की हडिी या आदेश के हनष्पादन में अथवा ककसी राजस्व अहधकारी के ककसी आदेश के अधीन या तत्समय प्रवृत्त ककसी हवहध के ककन्हीं उपबंधों के अनुसरण में ककये गये ककसी आदेश के अधीन तब तक कुकड नहीं ककये जायेंगे या बेचे नहीं जायेंगं जब तक कक वह भूहम ही कुकड न कर ली जाय या बेच न दी जाये ।
181. सरकारी पट्टेदार
(1) प्रत्येक ऐसा व्यहि, जो राज्य सरकार से भूहम धारण करता है या हजसे राज्य सरकार या कलेक्टर ने भूहम की दखल में लेने का अहधकार प्रदान कर कदया है और जो भूहम की भूहमस्वामी के रूप में धारण करने का हकदार नहीं है ऐसी भूहम के सभबन्ध में सरकारी पट्टेदार कहलायेगा । (2) प्रत्येक ऐसे व्यहि को, जो इस संहहता के प्रवृत्त होने के समय – (क) मध्य भारत िेत्र में कोई भूहम मध्य भारत भू-आगम एवं कृहषक अहधकार हवधान संवत् 2007 (िमांक 66, सन् 1950) में यथापररभाहषत साधारण कृषक के रूप में धारण करता है; या (ख) हवन्ध्य प्रदेश में कोई भूहम हवन्ध्य प्रदेश लैण्ड रेवेन्यू एण्ड टेनेन्सी ऐक्ट, 1953 (िमांक 3, सन् 1955) में यथापररभाहषत हवशेष कृषक के रूप में या कोई ऐसा हनकुन्ज या तालाब या ऐसी भूहम, जो सरकारी या सावडजहनक प्रयोजनों के हलये अर्तजत कर ली गई है या अपेहित है, गैर हकदार कृषक के रूप में धारण करता है; या (ग) हसरोंज िेत्र में कोई भूहम राज्य सरकार से राजस्थान टेनेन्सी ऐक्ट 1953 (िमांक 3, सन् 1955) में यथापररभाहषत गैर खातेदार कृषक के रूप में धारण करता है; या ऐसी भूहम के संबंध में सरकारी पट्टेदार समझा जायेगा । (3) [x x x]
182. सरकारी पट्टेदार के अहधकार तथा दाहयत्व
(1) सरकारी पट्टेदार इस संहहता में के ककन्हीं अहभव्यहि उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए अपनी भूहम उस अनुदान के, जो कक सरकारी अनुदान अहधहनयम, 1895 (1895 का संखयांक 15) के अथड के अंतगडत अनुदान समझा जायेगा, हनबंधों तथा शतो के अनुसार धारण करेगा । (2) सरकारी पट्टेदार को उसकी भूहम से राजस्व अहधकारी के आदेश द्वारा हनम्नहलहखत आधारों में से ककसी एक या अहधक आधारों पर बेदखल ककया जा सकेगा अथाडत्– (एक) यह कक उसने लगान का उस तारीख से, हजसकी वह शोध्य हो गया था, तीन मास की कालावहध तक भुगतान नहीं ककया है; या (दो) यह कक उसने ऐसी भूहम का उपयोग उन प्रयोजनों से, हजनके कक हलये वह प्रदान की गई थी, हभि प्रयोजनों के हलये ककया है; (तीन) यह कक उसके पट्टे की अवहध का अवसान हो चुका है; या (चार) यह कक उसने अनुदान के ककसी हनबंध तथा शतड का उल्लंघन ककया है: परंतु इस उपधारा के अधीन ककसी सरकारी पट्टेदार को बेदखल करने के हलए कोई आदेश उसे अपनी प्रतीिा में सुने जाने का अवसर कदये हबना पाररत नहीं ककया जायेगा ।
183. सेवा भूहम
(1) ग्राम सेवक के रूप में सेवा करने की शतड पर भूहम धारण करने वाला कोई व्यहि उस दशा में भूहम का हकदार नहीं रह जायेगा जबकक वह ऐसी भूहम को कृहष – हभि प्रयोजनों के हलये अपवर्ततत कर देता है । (2) ऐसा संव्यवहार, हजसके द्वारा कोई ग्राम सेवक अपनी सेवा भूहम में के अपने हहत को हविय, दान, बंधक, उप-पट्टे या अन्यथा, एक वषड अनहधक कालावहध तक के उप-पट्टे द्वारा के हसवाय, अंतररत करने का प्रयत्न करता है, शून्य होगा । (3) यकद ऐसी भूहम में का धारक मर जाये, पद त्याग दे या हवहधपूवडक पदच्युत कर कदया जाये, तो वह भूहम उसके पद उत्तरवती को संिांत हो जायेगी । (4) धारक का ऐसी भूहम में अहधकार ककसी हडिी के हनष्पादन में कुकड नहीं ककया जायेगा और न ही ऐसी भूहम का प्रबंध करने के हलये हसहवल प्रकिया संहहता, 1908 (1908 का संखयांक 5) की धारा 51 के अधीन कोई ररसीवर हनयुि ककया जायेगा ।
184. हसरोंज िेत्र में की सेवा भूहम का उस दशा में हनपटारा जबकक सेवाओं के आगे आवश्यकता न हो
यदक कलेक्टर यह घोहषत कर देता कक हसरोंज िेत्र में ग्राम सेवक द्वारा की जाने वाली सेवाओं की आगे आवश्यकता नहीं है, तो ऐसा ग्राम सेवक अपनी सेवा भूहम के सभबन्ध में भूहमस्वामी हो जायेगा और तद्नुसार भू-राजस्व का भुगतान करने के हलये उत्तरदायी होगा ।
185. मौरूसी कृषक
(1) प्रत्येक ऐसा व्यहि, जो इस संहहता के प्रवृत्त होने के समय – (एक) महाकौशल िेत्र में – (क) कोई ऐसी भूहम धारण करता है जो मध्यप्रदेश लैंड रेवेन्यू कोड, 1954 (िमांक 2 सन् 1955) के प्रवृत होने के पूवड माहलक मकबूजा थी और हजसके सभबंध में ऐसे व्यहि को पूणड मौरूसी कृषक के रूप में अहभहलहखत ककया गया था; या (ख) कोई भूहम, मध्यप्रदेश लैंड रेवेन्यू कोड, 1954 (िमांक 2 सन् 1955) में यथा पररभाहषत मौरूसी कृषक के रूप में धारण करता है, या (ग) कोई भूहम, मध्यप्रदेश लैंड रेवेन्यू कोड, 1954 (िमांक 2 सन् 1955) में यथा पररभाहषत मामूली कृषक के रूप में धारण करता है, या (दो) मध्य भारत िेत्र में ---- (क) कोई इनाम भूहम कृषक या उप-कृषक या साधारण कृषक के रूप में धारण करता है; या स्पष्टीकरण– अहभव्यहि “इनाम भूहम” का वही अथड होगा जो उसे मध्य भारत माफी तथा इनाम कृषक एवं उप-कृषक संरिण हवधान, 1954 (िमांक 32 सन् 1954) में ककया गया है । (ख) कोई भूहम, मध्य भारत रैयतवारी उप-पट्टेदार संरिण हवधान, 1955 (िमांक 29 सन् 1955) में यथा पररभाहषत रैयतवारी उप-पट्टेदार के रूप में धारण करता है; या (ग) मध्य भारत जागीर समाहप्त हवधान, 1951 (िमांक 28 सन् 1951) में यथा पररभाहषत कोई जागीर भूहम उप-कृषक के रूप में या उप-कृषक के कृषक के रूप में धारण करता है; या (घ) मध्य भारत जमींदारी समाहप्त हवधान, 1951 (िमांक 13 सन् 1951) में यथा पररभाहषत स्वामी कोई भूहम उप-कृषक के रूप में या उप-कृषक के कृषक के रूप में धारण करता है; (तीन) हवन्ध्य प्रदेश िेत्र में कोई भूहम-हवन्ध्य प्रदेश लैंड रेवेन्यू एण्ड टेनेन्सी ऐक्ट, 1953 (िमांक 3 सन् 1955) में यथा पररभाहषत पचपन पैंताहलस कृषक पट्टेदार कृषक, हनकुंजधारी या ककसी तालाब धारक के उप-कृषक के रूप में धारण करता है; या (चार) भोपाल िेत्र में --- (क) कोई भूहम, भोपाल स्टेट सब-टेनेण््स प्रोटेक्शन ऐक्ट, 1952 (िमांक 7 सन् 1953) में यथा पररभाहषत उप-कृषक के रूप में धारण करता है; या (ख) कोई भूहम, भोपाल स्टेट लैंड रेवेन्यू ऐक्ट, 1932 (िमांक 4 सन् 1932) में यथा पररभाहषत दखलकार से हशकमी के रूप में धारण करता है; या (पाँच) हसरोंज िेत्र में – (क) कोई, भूहम, राजस्थान टेनेण्सी ऐक्ट, 1955 (िमांक 3 सन् 1955) में यथा पररभाहषत खातेदार कृषक या हनकुंजधारी के उप-कृषक के रूप में धारण करता है; या (ख) कोई भूहम, राजस्थान टेनेण्सी ऐक्ट, 1955 (िमांक 3 सन् 1955) में यथा पररभाहषत खुदकाश्त के उप-कृषक या कृषक के रूप में धारण करता है; मौरूसी कृषक कहलायेगा और उसे वे समस्त अहधकार होंगे जो इस संहहता द्वारा या इस संहहता के अधीन मौरूसी कृषक को प्रदत्त ककये गये हैं तथा वह उन समस्त दाहयत्वों के अध्यधीन होगा जो इस संहहता द्वारा या इस संहहता के अधीन मौरूसी कृषक पर अहधरोहपत ककये गये हैं । (2) जहां उपधारा (1) के खंड (दो) की मद (ग) या (घ) में हनर्ददष्ट कोई भूहम, इस संहहता के प्रवृत्त होने के समय, ककसी उप-कृषक के वास्तहवक कब्जे में है, वहां ऐसे कृषक को ही ऐसी भूहम का मौरूसी कृषक समझा जायेगा न कक उस उपकृषक को । (3) जहां उपधारा (1) की कोई भी बात ककसी ऐसे व्यककत को लागू नहीं होगी जो इस संहहता के प्रवृत्त होने के समय ऐसे भूहमस्वामी से, जो धारा 168 की उपधारा (2) में वर्तणत वगो में से ककसी एक या एक से अहधक वगो का है भूहम धारण करता है । (4) इस धारा की कोई भी बात उपधारा (1) के खंड (दो) की मद (ग) या (घ) में हवहनर्ददष्ट प्रवगों में से ककसी भी प्रवगड के उप-कृषक या उप-कृषक के कृषक ने उन अहधकारों पर प्रभाव नहीं डालेगी जो यथाहस्थहत मध्य भारत जागीर समाहप्त हवधान, 1951 (िमांक 28 सन् 1951) या मध्य भारत जमींदारी समाहप्त हवधान, 1951 (िमांक 13 सन् 1951) के उपबंधों के अनुसार पक्का कृषक के अहधकार अर्तजत करने के बारे में है ।
186. अहधकतम लगान
ककसी भी करार या प्रथा या ककसी न्यायालय की ककसी भी हडिी या आदेश के होते हुये भी या ककसी भी हवहध के प्रहतकूल होते हुये भी, मौरूसी कृषक द्वारा उसके द्वारा धाररत भूहम के सभबंध में देय अहधकतम लगान – (क) ससहचत भूहम के ककसी भी वगड के मामले में ऐसी भूहम पर हनधाडररत ककये गये भू-राजस्व के चौगुने से; (ख) हवन्ध्य प्रदेश िेत्र में, बाँध भूहम के मामले में ऐसी भूहम पर हनधाडररत ककये गये भू-राजस्व के हतगुने से; और (ग) ककसी अन्य मामले में हनधाडररत ककये गये भू-राजस्व के दुगुने से अहधक नहीं होगा]: परंतु जहां ऐसी भूहम की धारा 58-क के अधीन भू-राजस्व की देनगी से छूट दी गई हो, वहां पूवोि अहधकतम में से भू-राजस्व की वह रकम कर दी जायगी हजसकी कक उि धारा के अधीन इस प्रकार छूट दी गई हो । स्पष्टीकरण – जहां ककसी भूहम पर भू-राजस्व का हनरीिण न ककया गया हो वह पूवोि गुहणतों की गणना ऐसी भूहम पर हनधाडरण योग्य भू-राजस्व के आधार पर की जायगी ।
187. पररवतडन
(1) जहां कोई मौरूसी कृषक अपने लगान का भुगतान वस्तु के रूप में सेवा, श्रम सफल के अंश या अनाज के हवहनर्ददष्ट पररणाम के रूप में करता है, वहां वह उसे नगदी में पररवर्ततत कराने के हलये उपखंड अहधकारी को आवेदन कर सकेगा । (2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन प्राप्त होने पर, उपखंड अहधकारी जांच करने के पिात् हलहखत आदेश द्वारा ऐसे लगान को नकदी में पररवतडन करेगा जो उस अहधकतम लगान से अहधक नहीं होगा जैसा कक धारा 186 में अहधकहथत है ।
188. लगान
(1) इस संहहता के प्रवत्त होने की तारीख के ठीक आगामी कृहष वषड के प्रारभभ से मौरूसी कृषक द्वारा देय लगान वह अहधकतम लगान होगा जो धारा 186 में अहधकहथत है या यकद कृषक तथा उसके भूहमस्वामी के बीच तय पाया गया लगान होगा: परंतु जहां तय पाया गया लगान वस्तु के रूप में देय हो, तो जब तक कक ऐसा लगान धारा 187 के अधीन नगदी में पररवर्ततत नहीं कर कदया जाता है, वह कृषक ऐसे अहधकतम लगान का भुगतान करने का दायी होगा जैसा कक धारा 186 में अहधकहथत है । (2) प्रत्येक मौरूसी कृषक अपने भूहमस्वामी को लगान का भुगतान ऐसी तारीख को या उसके पूवड करेगा जो कक उस सभबंध में हवहहत की जाय ।
189. कहतपय मामलों में भूहमस्वामी द्वारा पुनग्रडहण
(1) भूहमस्वामी, हजसकी कक भूहम हसवाय उन प्रवगो के जो कक धारा 185 की उपधारा (1) के खंड (एक) की मद (क) तथा (ख) में हवहनर्ददष्ट है धारा 185 की उपधारा (1) में हवहनर्ददष्ट प्रवगो में से ककसी भी प्रवगड के मौरूसी कृषक द्वारा धाररत है, उस दशा में जब कक उनकी हनजी खेती के अधीन भूहम का िेत्रफल पच्चीस एकड़ अससहचत भूहम से कम है, उसके मौरूसी कृषक द्वारा धाररत भूहम का अपनी हनजी खेती के हलये पुनग्रडहण करने हेतु इस संहहता के प्रवृत्त होने के एक वषड के भीतर उस खंड अहधकारी को आवेदन कर सकेगा । (2) ऐसा आवेदन प्राप्त होने पर, उपखंड अहधकारी पिकारों की सुनवाई करने तथा ऐसी और जांच करने के पिात् जैसी कक आवश्यकता हो आवेदन को हवहनहित करेगा; परंतु पुनग्रडहण का अहधकार उतने िेत्रफल तक ही सीहमत होगा जो पहले से ही उस भूहमस्वामी की हनजी खेती के अधीन के िेत्रफल सहहत पच्चीस एकड़ अससहचत भूहम से अहधक नहीं होगा; परन्तु यह और भी कक ऐसा कोई पुनग्रडहण अनुज्ञात नहीं ककया जायगा कक हजसने उस मौरूसी कृषक के कब्जे में की भूहम का कुल िेत्र फल – (एक) उस मामले में, जबकक वह मौरूसी कृषक ऐसी भूहम ककसी ऐसे भूहमस्वामी से, जो धारा 168 की उपधारा (2) में वर्तणत वगो में से ककसी वगड का न हो, इस संहहता के प्रवृत्त होने के पूवड पाँच वषड से भी अहधक समय से धारण ककये रहा है, पच्चीस एकड़ अससहचत भूहम से कम हो जाय; (दो) ककसी अन्य मामले में, दस एकड़ से कम हो जाय । (3) जहां उपधारा (2) के अधीन पाररत ककये गये ककसी आदेश के अधीन भूहमस्वामी को उस भूहम का जो कक मौरूसी कृषक द्वारा ऐसे भूस्वामी से धाररत है, कोई भाग पुनग्रडहण करने के हलये अनुज्ञात ककया जाता है, वहां उपखंड अहधकारी पुनग्रडहण की जाने के हलये अनुज्ञात की गई भूहम का चयन तथा सीमांकन इन हनयमों के अनुसार करेगा जो कक उस संबंध में बनाये जायें । पुनग्रडहण केवल उसी दशा में अनुज्ञात ककया जायेगा जब कक भूहमस्वामी मौरूसी कृषक को ऐसे प्रहतकर का भुगतान करने के हलये सहमत हो जाता है जैसा कक उपखंड अहधकारी पिकारों की सुनवाई करने के पिात्, उस भूहम पर जो, कक भूहमस्वामी द्वारा पुनग्रडहण करने के हलये अनुज्ञात की गई है, गोस्वामी कृषक द्वारा ककये गये सुधार के हलये हनयत करे । उपखंड अहधकारी ऐसे मामले से, मौरूसी कृषक द्वारा ककये गये सुधार के हलये हनयत करे । उपखंड अहधकारी ऐसे मामले से, मौरूसी कृषक के पास बच रही भूहम के संबंध में लगान भी हवहहत रीहत में हनयत करेगा । (4) पुनग्रडहण अनुज्ञात करने वाला प्रत्येक आदेश, उस आदेश की तारीख के ठीक आगामी कृहष वषड से प्रभावी होगा और पुनग्रडहण की गई भूहम के सभबन्ध में, मौरूसी कृषक का कृहषकाहधकार समाप्त हो जायेगा । स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजन के हलये – (1) भूहमस्वामी की हनजी खेत के अधीन की भूहम के अंतगडत आयेगी – (क) कोई ऐसी भूहम जो कक उसने हविय द्वारा या अन्यथा 1 जनवरी, 1959 को या उसके पिात् अंतररत की हो; और (ख) कोई ऐसी भूहम जो कक उसके द्वारा पड़त पड़ी रहने दी गई हो । (2) एक एकड़ ससहचत भूहम को दो एकड़ अससहचत भूहम के बराबर समझा जायेगा तथा इसी प्रकार इसका हवपयडय ।
190. मौरूसी कृषकों को भूहमस्वामी अहधकार प्रदान ककया जाना
(1) जहां कोई भूहमस्वामी, हजसकी कक भूहम हसवाय उन प्रवगो के, जो कक धारा 185 की उपधारा (1) के खंड (एक) की मद (क) तथा (ख) में हवहनर्ददष्ट है, धारा 185 की उपधारा (1) में हवहनर्ददष्ट प्रवगो में से ककसी भी प्रवगड के मौरूसी कृषक द्वारा धाररत है, धारा 189 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन उस कालावहध के भीतर नहीं करता है जो कक उसमें अहधकहथत है, वहां उस मौरूसी कृषक को, उसके द्वारा ऐसे भूहमस्वामी से धाररत भूहम के सभबन्ध में भूहमस्वामी के अहधकार पूवोि कालावहध का अवसान होने के ठीक आगामी कृहष वषड के प्रारभभ से प्रोद्भूत हो जायेंगे । (2) जहां भूहमस्वामी द्वारा धारा 189 की उपधारा (1) के उपबन्धों के अनुसार आवेदन ककया जाता है, वहां मौरूसी कृषक को उस भूहम के संबंध में जो भूहमस्वामी को अनुज्ञात ककये गये पुनग्रडहण, यकद कोई हो, के पिात् उसके पास बच रहे, भूहमस्वामी के अहधकार उस तारीख के, हजसको कक आवेदन अंहतम रूप से हनपटाया जाता है, ठीक आगामी कृहष वषड के प्रारभभ से प्रोद्भूत हो जायेंगे। (2-क) जहां भूहमस्वामी की भूहम उपधारा (1) में हवहनर्ददष्ट मौरूसी कृषक से हभि मौरूसी कृषक द्वारा धाररत है, वहां उस मौरूसी कृषक को ऐसी भूहम के सभबन्ध में भूहमस्वामी के अहधकार– (क) धारा 185 की उपधारा (1) के खंड (एक) मद (क) तथा (ख) में हवहनर्ददष्ट ककये गये प्रवगो के मौरूसी कृषकों के मामले में, मूल अहधहनयम के प्रारभभ होने के ठीक आगामी कृहष वषड के प्रारंभभ से, (ख) ककसी अन्य मामले में, उस तारीख के, हजसको कक ऐसे कृषक को मौरूसी कृषक के अहधकार प्रोद्भूत होते हैं, ठीक आगामी कृहष वषड के प्रारभभ से, प्रोद्भूत हो जायेंगे । (3) जहां उपधारा (2) [उपधारा (2) या उपधारा (2-क)] के अधीन मौरूसी कृषक को भूहमस्वामी के अहधकार प्रोद्भूत हो जाते हैं, वहां ऐसा मौरूसी कृषक अपने भूहमस्वामी को ऐसे प्रहतकर का जो उस भूहम के सभबन्ध में देय भू-राजस्व के पन्रह गुने के बराबर हो, पाँच समान वार्तषक ककश्तों में भुगतान करने का दायी होगा, प्रत्येक ककश्य उस तारीख को देय होगी हजसको कक तत्सभबधी वषड के हलये धारा 188 के अधीन देय लगान शोध्य होता है, और यकद भुगतान करने में व्यहतिम ककया जाता है तो वह भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूल ककया जायेगा: परंतु यकद ककसी हेतुक से ककसी वषड ककसी िेत्र में भू-राजस्व पूणडत: या भागत: हनलहभबत कर कदया जाता है या उसमें माफी दे दी जाती है तो प्रहतकर की यह वार्तषक ककश्त, जो कक ऐसे िेत्र में भूहम
191. मौरूसी कृषक को भूहम वापस कदलाया जाना
(1) यकद वह भूहमस्वामी, हजसके कक पि में धारा 189 की उपधारा (2) के अधीन पुनग्रडहण का आदेश पाररत ककया गया हो, उस तारीख के, हजसको कक वह आदेश पाररत ककया गया हो, ठीक आगामी कृहष वषड के दौरान ऐसी भूहम पर स्वयं खेती नहीं करता है, तो मौरूसी कृषक ऐसी भूहम को वापस कदलाये जाने के हलये उपखंड अहधकारी को ऐसे समय के भीतर आवेदन कर सकेगा जो, कक हवहहत ककया जाये: परंतु मौरूसी कृषक उस दशा में आवेदन के हलये हकदार नहीं होगा जबकक वह भूहमस्वामी को ऐसी भूहम का कब्जा लेने या उस पर खेती करने में ककसी भी प्रकार से बाधा पह ुचाए । (2) ऐसे आवेदन के प्राप्त होने पर, उपखंड अहधकारी भूहमस्वामी को सुनवाई का अवसर देने तथा ऐसी और जाँच जैसी कक आवश्यक समझी जाये, करने मे पिात् प्रश्नगत भूहम का कब्जा मौरूसी कृषक को वापस देने का आदेश पाररत कर सकेगा, और जहां ऐसा आदेश पाररत कर कदया जाता है, वहां मौरूसी कृषक को उस भूहम का कब्जा उि आदेश की तारीख के ठीक आगामी कृहष वषड के प्रारभभ से कदला कदया जायेगा और तब उसे भूहमस्वामी के अहधकार प्रोद्भूत हो जायेंगे तथा धारा 190 का उपबन्ध के उसकी उपधारा (2) को छोड़कर तद्नुसार लागू होंगें । (3) यकद उपधारा (2) के अधीन वापस दे दी गई भूहम के हलये देय लगान के बारे में कोई हववाद हो तो वह हववाद उपखंड अहधकारी द्वारा हवहनहित ककया जायेगा । (4) जहां उपधारा (2) के अधीन कोई भूहम ककसी मौरूसी कृषक को वापस दे दी गई है, वहां वह भूहमस्वामी हजसके हवरूद्ध वापसी का आदेश कदया गया हो, धारा 189 के अधीन ऐसे मौरूसी कृषक की ककसी भी भूहम के पुनग्रडहण का दावा करने से सदैव के हलये हववर्तजत हो जायेगा ।
192. मौरूसी कृषक अहधकारों का न्यागमन
मौरूसी कृषक का उसके खाते में का हहत, उसकी मृत्यु हो जाने पर उसकी स्वीय हवहध के अनुसार, हवरासत या उत्तरजीहवका द्वारा संिांत होगा ।
193. कृषकाहधकार की समाहप्त
(1) मौरूसी कृषक का उसके खाते में का कृषकाहधकार उपखंड अहधकारी के आदेश द्वारा जो हनम्नहलहखत ककन्हीं भी आधारों पर ककया गया हो, समाप्त ककया जा सकेगा, अथाडत्--- (क) उसने ककसी कृहष वषड में, उस वषड के हलये ऐसी भूहम के लगान का भुगतान हनयत तारीख को या उसके पूवड नहीं ककया हैं; या (ख) उसने कोई ऐसा कायड ककया है, जो उस भूहम के हलये हवनाशक या स्थाई रूप से हाहनकर है; या (ग) उसने ऐसी भूहम का उपयोग कृहष से हभि ककसी प्रयोजन के हलए ककया है; या (घ) उसने उस भूहम में के अपने हहत का अंतरण धारा 195 के उल्लंघन में कर कदया है । (2) उपधारा (1) के खंड (क) में हवहनकरष्ट ककये गये आधार पर कोई भी आदेश मौरूसी कृषक के भूहम में के उसके अहधकारों की समाहप्त के हलये तब तक पाररत नहीं ककया जायेगा जब तक उपखंड अहधकारी ने सूचना द्वारा, मौरूसी कृषक से शोध्य लगान, ऐसी कालावहध के भीतर, जो कक उपखंड अहधकारी द्वारा उस सूचना में हवहनर्ददष्ट की जाय, कायडवाहहयों के खचड सहहत हनहवदत्त करने की अपेिा न की हो और कृषक ने अपेहित रकम उि कालावहध के भीतर जमा न की हो । (3) उपधारा (1) के खंड (ख) में हवहनर्ददष्ट आधार पर कोई भी कायडवाही तब तक नहीं होगी जब तक कक ऐसी भूहम के भूहमस्वामी ने मौरूसी कृषक पर एक हलहखत सूचना, हजसमें हवनाश या हाहन का वह कायड हवहनर्ददष्ट ककया गया हो; हजसके कक सभबन्ध में पररवाद ककया गया है, तामील न कर दी हो, तथा कृषक ने सूचना की तामील की तारीख से छह मास की कालावहध के भीतर या ऐसी और कालावहध के भीतर जो कक उपखंड अहधकारी मंजूर करे उस भूहम को उसी अवस्था में प्रत्यावर्ततत न कर कदया हो हजसमें कक वह ऐसे हवनाश या हाहन के पूवड थी ।
194. ऐसे मौरूसी कृषक को हजसका कृषकाहधकार समाप्त कर कदया गया हो लागू होने वाले उपबन्ध
(1) ऐसे प्रत्येक मौरूसी कृषक के मामले में, हजसका कृषकाहधकार समाप्त कर कदया गया हो, हनम्नहलहखत उपबंध लागू होंगें, अथाडत --- (क) यकद मौरूसी कृषक ने, कृषकाहधकार समाप्त होने की तारीख से पूवड, उस भूहम में, जो कक खाते में समाहवष्ट है, फसलों की बुबाई कर दी हो या उनकी पौध लगा दी हो, तो वह ऐसी भूहम के भूहमस्वामी के हवकल्प पर, या तो फसलों की देखभाल करने तथा उन्हें वहाँ से उठा लेने के प्रयोजन के हलये ऐसी भूहम का कब्जा रखे रहने तथा उस प्रयोजन के हलये उसका उपयोग करने का; अथवा ऐसी भूहम को तैयार करने में तथा ऐसी फसलों की बुवाई करने, उनकी पौध लगाने तथा देखभाल करने में लगे श्रम का मूल्य तथा उन कायो पर उसके द्वारा व्यय की गई पूंजी, उस पर युहियुि ब्याज सहहत, ऐसी भूहम के भूहमस्वामी से प्राप्त करने का हकदार होगा । (ख) यकद मौरूसी कृषक ने कृषकाहधकार समाप्त होने की तारीख के पूवड कोई भूहम, जो कक उसके खाते में समाहवष्ट है बुवाई के हलये तैयार कर ली हो ककन्तु उस पर फसलों की बुवाई न की हो या उनकी पौध न लगाई हो, तो वह ऐसी भूहम को तैयार करने में लगें श्रम का मूल्य तथा उसके द्वारा व्यय की गई पूँजी, उस पर युहियुि ब्याज सहहत, ऐसी भूहम के भूहमस्वामी से प्राप्त करने का हकदार होगा: परन्तु (एक) मौरूसी कृषक इस धारा के अधीन अपनी भूहम प्रहतधाररत करने का या उसके सभबन्ध में कोई राहश प्राप्त करने का उस दशा में हकदार नहीं होगा जबकक ऐसी भूहम के भूहमस्वामी द्वारा कृषकाहधकार की समाहप्त के हलये कायडवाहहया प्रारंभभ ककये जाने के पिात् उसने स्थानीय प्रथा के प्रहतकूल ऐसी भूहम पर खेती की हो या ऐसी भूहम को खाते के हलये तैयार ककया हो (दो) कृषकाहधकार की समाहप्त के समय मौरूसी कृषक द्वारा ऐसी भूहम के स्वामी को देय लगान, यकद कोई हो, मौरूसी कृषक को इस धारा के अधीन देय ककसी राहश के प्रहत मुजरा ककया सकेगा । (ग) यकद मौरूसी कृषक ने अपने खाते में समाहवष्ट ककसी भूहम में कृषकाहधकार की समाहप्त की तारीख के पूवड कोई सुधार ककया हो, तो वह ऐसी भहमस्वामी से उसके हलये ऐसा प्रहतकर पाने का हकदार होगा जैसा कक राजस्व अहधकारी पिकारों की सुनवाई करने के पिात् अवधाररत करे । (2) कृषकाहधकार समाप्त करने वाला राजस्व अहधकारी, उपधारा (1) के अधीन देय रकम यकद कोई हो अवधाररत करेगा ।
195. मौरूसी कृषक के अन्तरण सभबन्धी अहधकार
(1) कोई भी मौरूसी कृषक भूहम में के या उसके ककसी भाग में के अपने अहधकार को हविय, दान, बन्धक, उपपट्टे के तौर पर या अन्यथा अन्तररत करने का हकदार नहीं होगा और प्रत्येक ऐसा हविय, दान, बन्धक, उपपट्टा या अन्य अन्तरण धारा 197 में उपबहन्धत ककये गये अनुसार पररवतडनीय होगा परन्तु मौरूसी कृषक द्वारा या उसकी ओर से उपपट्टा कदया जा सकेगा यकद ऐसा व्यहि धारा 168 की उपधारा (2) में वर्तणत प्रवगो में से ककसी प्रवगड का है । स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजनों के हलये अहभव्यहि उपपट्टा का वही अथड लगाया जायगा जो कक धारा 168 में पट्टा के हलये कदया गया है! (2) उपधारा (1) में की कोई भी बात मौरूसी कृषक को अपना खाता या उसका कोई भाग हविय या दान द्वारा ककसी सह कृषक को या ककसी ऐसे वयहि को, जो उस कृषक के हनकटतर वाररसों के न होने पर उस कृषक का उत्तरजीवी होने की दशा में उस खाते को हवरासत में प्राप्त करता, अन्तररत करने से हनवाडहसत नहीं करेगी । (3) इस धारा में की कोई भी बात मौरूसी कृषक को भूहम हवकास उधार अहधहनयम, 1883 (1883 का संखयाक 19), या कृषक उधार अहधहनय, 1884 (1884 का संखयाक 12) के अधीन उसे कदये गये ककसी अहग्रम के संदाय को प्रहतभूत करने के हलये अपनी भूहम में के ककसी अहधकार को अन्तररत करने से हनवाररत नहीं करेगी या ऐसे अहग्रत की वसूली के हलये ऐसे अहधकार का हविय करने के राज्य सरकार के अहधकार पर प्रभाव नहीं डालेगी । (4) इस धारा में की कोई भी बात मौरूसी कृषक को ककसी सहकारी संस्था द्वारा उसे कदये गये अहग्रम के संदाय को हनधाडररत प्रहतभूत करने के हलये अपने खाते में के ककसी अहधकार को अन्तररत करने से नहीं करेगी; या ऐसे अहग्रम की वसूली के हलये ऐसे अहधकार का हविय करने के ऐसी संस्था के अहधकार पर प्रभाव नहीं डालेगी । (5) पूवडगामी ककन्हीं भी उपबन्धों के अधीन अनुज्ञात अन्तरण के अनुसरण में के हसवाय या प्रहतकर की ककसी वार्तषक ककश्त के बकाया की वसूली सभबन्धी कायडवाहहयों के मामले में के हसवाय मौरूसी कृषक के उसके खाते में के हहत के हविय के हलये न तो कोई हडिी या आदेश पाररत ककया जायगा, न ऐसा हहत ककसी हडिी या आदेश के हनष्पादन में कुकड ककया जायेगा या बेचा जायेगा; न ऐसे खाते का प्रबन्ध करने के हलये हसहवल प्रकिया संहहता, 1908 (1908 का संखयाक 5) की धारा 51 के अधीन ककसी ररसीवर की हनयुहि की जायगी और न ही ऐसा हहत प्रान्तीय कदवाला अहधहनयम, 1920 (1920 का संखयाक 5) के अधीन न्यायालय में या ककसी ररसीवर में हनहहत होगा।
196. सुधार करने के मौरूसी कृषक के अहधकार
कृहष प्रयोजन के हलये धाररत भूहम का मौरूसी कृषक, उस भूहम पर अहधक अच्छी खेती के हलये पूवोि प्रयोजन के हलये उस भूहम के अहधक सुहवधापूणड उपयोग के हलये उस पर कोई भी सुधार करने का हकदार है ।
197. मौरूसी कृषकों द्वारा ककये गये अन्तरणों को अपास्त कराने के हलये आवेदन करने का कहतपय
व्यहियों का अहधकार
198. अभ्यपडण
(1) कोई मौरूसी कृषक, कृहष वषड प्रारभभ होने के कम से कम तीस कदन पूवड भूहमस्वामी के पि में रहजस्रीकृत दस्तावेज हनष्पाकदत करके, अपने अहधकार अभ्यर्तपत कर सकेगा और तदुपरर वह ऐसी तारीख के ठीक आगामी कृहष वषड से मौरूसी कृषक नहीं रह जायेगा । कोई भी अभ्यपडण तब तक हवहधमान्य नहीं होगा जब तक कक वह रहजस्रीकृत हलखत द्वारा न ककया जाय । (2) भारतीय स्टाभप अहधहनयम, 1899 (1899 का संखयांक 2) या भारतीय रहजस्रीकरण अहधहनयम, 1908 (1908 का संखयांक 15) में तत्प्रहतकूल ककसी बात के होते हुए भी मौरूसी कृषको द्वारा इस धारा के उपबन्धो के अनुसरण में हनष्पाकदत अभ्यपडण की हलखतों को उन पर प्रभायड स्टाभप शुल्क तथा रहजस्रीकरण फीस के भुगतान से छूट होगी । (3) उपधारा (1) के अधीन कोई अभ्यपडण हनष्पाकदत ककया जाने पर भूहमस्वामी का कब्जा धारा 189 के अधीन अपने पुनग्रडहण के अहधकार की सीमा तक ही लेने का हकदार होगा और अहतररि भूहम, यकद कोई हो, राज्य सरकार में हनहहत हो जायेगी और भूहमस्वामी को ऐसी अहतररि भूहम के हलये प्रहतकर कदया जायेगा जो धारा 188 के अधीन उसके हलये देय लगान के दुगुने के बराबर होगा । (4) जहां कोई भूहम उपकार (3) के अधीन राज्य सरकार में हनहहत हो जाती है, वहां भूहमस्वामी हवहहत कालावहध के भीतर तथा हवहहत रीहत में ऐसी भूहम को हवहनर्ददष्ट करेगा और कालावहध के भीतर उसके ऐसा न करने पर ऐसी एपखंड अहधकारी द्वारा हवहनर्ददष्ट की जायेगी । (5) ऐसी भूहम के उपधारा (4) के उपबन्धों के अनुसार हवहनर्ददष्ट कर कदये जाने के पिात् उपखंड अहधकारी उसका सीमांकन ऐसे हनयमों के अनुसार करेगा जो कक उस सभबन्ध में बनाये जायें और भूहमस्वामी द्वारा पुनग्रडहण की गई भूहम के सभबन्ध में भू-राजस्व भी हनयत करेगा ।
199. रसीद
प्रत्येक भूहमस्वामी लगान की रकम के हलये ऐसे प्ररूप तथा ऐसी रीहत में जैसा कक हवहहत ककया जाय; हलहखत रसीद उस समय देगा जबकक ककसी भूहम के सभबन्ध में ऐसी रकम उसके द्वारा प्राप्त की जाय ।
200. रसीद न देने या अहधक वसूली के हलये शाहस्त
यदक कोई भूहम स्वामी धारा 199 द्वारा अपेहित ककये गये अनुसार रसीद नहीं देगा या लगान के रूप में कोई रकम प्राप्त करेगा जो इस संहहता के अधीन देय लगान से अहधक हो, तो वह मौरूसी कृषक के आवेदन पर, तहसील के आदेश से इस बात के दाहयत्वाधीन होगा कक वह वसूल की गई अहतररि रकम वापस करे तथा शाहस्त के रूप में Rs. 2,000 से अनहधक राहश या यकद वसूल ककये गये कुल लगान की दुगुनी रकम Rs. 2,000 अहधक हो, तो ऐसी रकम के दुगुने के अनहधक राहश का भुगतान करे और तहसीलदार यह हनदेश दे सकेगा कक ऐसी सभपूणड राहश या उसका भाग मौरूसी कृषक द्वारा देय प्रहतकर की रकम के प्रहत समायोहजत ककया जायेगा ।
201. भू-राजस्व की माफी तथा उसके हनलभबन के पररणाम स्वरूप लगान की माफी तथा उसका
(1) यकद ककसी भूहम के सभबन्ध में देय सभपूणड भू-राजस्व या उसके ककसी भाग के भुगतान में ककसी कारणवश माफी दी जाती है या उसे हनलहभबत कर कदया जाता है तो कलेक्टर साधारण या हवशेष आदेश द्वारा, ऐसी भूहम के लगान के, भुगतान में उतनी रकम तक यथाहस्थहत माफी दे सकेगा या उसे उतनी रकम तक हनलहभबत कर सकेगा हजसका कक उस भूहम के सभबन्ध में देय सभपूणड लगान के साथ वही अनुपात होगा जो उस भू-राजस्व का, हजससे कक भुगतान में माफी दी गई है या हजसका भुगतान हनलहभबत कर कदया गया है, उस भूहम के सभबन्ध में देय सभपूणड भू – राजस्व के साथ होता है और इस प्रकार माफी दी गई या हनलहभबत की गई रकम का हवतरण ऐसी भूहम धारण करने वाले मौरूसी कृषकों के बीच ऐसी रीहत में कर सकेगा जो उसे उस प्रभाव का ध्यान रखते हुए सभपूणड प्रतीत हों जो कक उनके खातों पर उस कारण से पडाऺ हो हजससे कक पररणाम भू-राजस्व में माफी दी गई या उसे हनलहभबत ककया गया हो । (2) यकद लगान के भुगतान को हनलहभबन कर कदया गया हो तो ऐसे लगान की वसूली के हलये हवहहत पररसीमाकाल की संगणना करने में ऐसे हनलभबन की कालावहध को अपवर्तजत कर कदया जायेगा । (3) उपधारा (1) तथा (2) के उपबन्ध ऐसी भूहम को, हजससे कक भू-राजस्व को पूणडत: या भागत: हनमोचन कर कदया गया हो प्रशमन कर हलया गया हो या मोचन कर कदया हो, ककसी ऐसे मामले में होंगे हजसमें कक, यकद उस भूहम के सभबन्ध में भू-राजस्व का हनमोचन नहीं ककया गया होता, प्रशमन नहीं ककया गया होता या मोचन नहीं ककया गया होता कलेक्टर की राय में सभपूणड भू– राजस्व या उसके ककसी भाग की छूट दे दी गई होती या उसे हनलहभबन कर कदया गया होता
202. दोषपूणड ढंग से बेदखल ककये गये मौरूसी कृषक का पुन:स्थापन
(1) यकद ककसी व्यहि को, जो संहहता के प्रवृत्त होने के ठीक पूवड ककसी िेत्र में कोई भूहम धारा 185 में वर्तणत हैहसयतों में से ककसी हैहसयत में धारण करता था, इस संहहता के प्रवृत्त होने के ठीक पूवडवती तीन वषो के दौरान उसके द्वारा धाररत ककसी भूहम से हवहध की प्रकिया से हभि प्रकिया द्वारा बेदखल या बेकब्जा कर कदया गया हो तो वह ऐसी भूहम पर अपने पुन:स्थापन के हलये, इस संहहता के प्रवृत्त होने की तारीख से दो वषड के भीतर तहसीलदार को आवेदन कर सकेगा । (2) यकद ककसी ऐसे व्यहि को, जो इस संहहता के प्रवृत्त होने के समय मौरूसी कृषक के रूप में भहम धारण करता है, इस संहहता के प्रवृत्त होने के पिात् ककसी ऐसी भूहम से; जो कक उसके द्वारा धाररत है, उस संहहता के उपबन्धों के उल्लघन में बेदखल कर कदया गया हो, तो वह ऐसे भूहम पर अपने पुन:स्थापन के आवेदन इस प्रकार बेदखल या बेकब्जा ककये जाने की तारीख से दो वषड के भीतर तहसीलदार को कर सकेगा । (3) उपधारा (1) या (2) के अधीन आवेदन प्राप्त होने पर, तहसीलदार, पिकारों से सभबहन्धत दावों की जांच करने के पिात् आवेदन को हवहनिय करेगा और जब वह मौरूसी कृषक को कब्जा वापस कदये जाने का आदेश दे देता है, तो उसे भूहम का कब्जा कदलायेगा । (4) तहसीलदार, आवेदक को उपधारा (3) के अधीन भूहम का कब्जा सौंपे जाने के हलये अन्तररम आदेश जांच के ककसी भी प्रिम पर पाररत कर सकेगा यकद उसे यह प्रतीत हो कक हवरोधी पि द्वारा आवेदक को उपधारा (1) या (2) के अधीन आवेदन प्रस्तुत ककये जाने के पूवड के छह मास के भीतर बेदखल कर कदया गया था या बेकब्जा कर कदया गया था, और यकद आवश्यक हो तो हवरोधी पि को उसके (तहसीलदार) के आदेश के अधीन बेदखल कर कदया जायेगा (5) जब उपधारा (4) के अधीन अन्तररम आदेश पाररत कर कदया गया हो, तो तहसीलदार हवरोधी पि से अपेिा कर सकेगा कक वह उस समय तक, जब तक कक तहसीलदार द्वारा अहन्तम आदेश पाररत न कर कदया जाय, भूहम का कब्जा लेने से प्रहवरत रहने के हलये उतनी राहश का बन्धपत्र हनष्पाकदत करे हजतनी कक वह (तहसीलदार) उहचत समझे । (6) यकद यह पाया कक बन्धपत्र हनष्पाकदत करने वाले व्यहि के बन्धपत्र के उल्लंघन में भूहम में प्रवेश कर हलया है या उसका कब्जा ले हलया है तो तहसीलदार बन्धपत्र को पूणडत: या भागत: समपहृत कर सकेगा और ऐसी रकम भू – राजस्व के बकाया के तौर पर वसूल कर सकेगा । (7) यकद उपधारा (3) के अधीन पाररत आदेश आवेदन के पि में हो तो तहसीलदार युहियुि प्रहतकर भी अहधहनर्तणत करेगा जो हवरोधी पि द्वारा आवेदक को संदत्त ककया जायगा; परन्तु प्रहतकर की रकम प्रत्येक वषड के दखल के हलये उस भूहम के राजस्व के दस गुने से अहधक नहीं होगी। (8) इस धारा के अधीन अहधहनर्तणत प्रहतकर भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूल ककया जा सकेगा (9) तहसीलदार को यह शहि होगी कक वह ककन्ही भी ऐसे िेत्रों में, जो राज्य सरकार द्वारा इस सभबन्ध में अहधसूहचत ककये जायं, ऐसे मामलों का, जो कक मौरूसी कृषकों के, चाहे अभ्यपडण द्वारा या अन्यथा दोषपूणड ढंग से बेदखल ककये जाने या बेकब्जा ककये जाने से सभबहन्धत हों, स्वप्रेरणा से पुनर्तवलोकन करे। जहां इस उपधारा के अधीन कायडवाही की जाती है, वहां यावत्यशक्य, पूवडगामी उपधाराओं के उपबन्ध लागू होंगे
203. जलोढ़ तथा जल-प्लावन
(1) ककसी तट पर बनी जलोढ़ भूहम राज्य सरकार में हनहहत होगी, ककन्तु ऐसे तट से लगी हुई भूहम का भूहमस्वामी, यकद कोई हो उसके खाते में इस प्रकार बढ़ गई जलोढ़ भूहम का उपयोग बन्दोबस्त की चालू अवहध के दौरान तब तक भू–राजस्व का भुगतान ककये हबना करने का हकदार होगा जब तक कक उसके खाते में बढ़ गया िेत्रफल एक एकड़ से अहधक न हो जाय । (2) जब ककसी खाते में बढ़ गई जलोढ़ भूहम का िेत्रफल एक एकड़ से अहधक हो जाय और उपखंड अहधकारी को यह प्रतीत हेा कक सावडजहनक सुहवधा तथा लोक राजस्व के हहतों का सभपकड ध्यान रखते हुए ऐसी भूहम का हनपटारा ककया जा सकता है तो वह ऐसे खाते के भूहमस्वामी को ऐसी भूहम भूहमस्वामी अहधकारों में ऐसे प्रीहमयम पर देने की प्रस्थापना करेगा जो इस प्रकार बनी भूहम के उहचत हनधाडरण के बीस गुने से अहधक नहीं होगा यकद उि भूहमस्वामी उस प्रस्थापना को स्वीकार न करे तो उपखंड अहधकारी उस भूहम का हवहहत रीहत में हनपटारा कर सकेगा (3) जहां जल-प्लावन द्वारा ककसी खाते के िेत्रफल में एकड से अहधक की कमी हो जाय, वहां ऐसे खाते के सभबन्ध में देय भू-राजस्व कम कदया जायगा ।
204. हनधाडरण करने तथा हववादों को हवहनहित करने की शाहि
(1) उपखंड अहधकारी को इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अध्यधीन रहते हुए, यह शहि होगी कक वह भू-राजस्व में ऐसी समस्त वृहद्ध तथा कमी को, जो कक इस अध्याय के अधीन अपेहित है या अनुज्ञात है, हनधाडररत करे। (2) उपखंड अहधकारी को यह भी शहि होगी कक वह जलोढ भूहम के हववरण से सभबहन्धत ककसी भी ऐसे हववाद को, जो ऐसी भूहम का दावा करने वाले हवहभि भूहमस्वाहमयों के बीच उद्भूत हो, हवहनहश्चत करे ।
205. पररभाषाएँ
(एक) “खातों की चकबन्दी” से अहभप्रेत है ककसी ग्राम के की समस्त या ककसी भूहम का ऐसा पुनर्तवतरण कक हजससे खेती की सूहवधा के हलये भूहमस्वाहमयों की लगे हुए भू – खंड आवंरटत हो जाये (दो) “चकबन्दी अहधकारी” से अहभप्रेत है तहसीलदार की पद श्रेणी से अहनम्न पद श्रेणी का कोई ऐसा राजस्व अहधकारी हजससे इस संहहता के अधीन चकबन्दी अहधकारी की शहियों का प्रयोग करने तथा उसके कतडव्यों का पालन करने के हलये राज्य सरकार द्वारा ककसी हजले या ककन्हीं हजलों के हलये हनयुि ककया गया हो ।
206. चकबन्दी की कायडवाहहयों का शुरू ककया जाना
(1) ककसी ग्राम को कोई भी दो या अहधक भूहमस्वामी, जो परस्पर हमलकर धारा 221 के अधीन बनाये गये हनयमों द्वारा हवहहत न्यूनतम िेत्रफल से अन्यून भूहम धारण करते हों, अपने खातों की चकबन्दी के हलये अहधकारी को हलहखत आवेदन कर सकेगे हजसमें ऐसी हवहशहष्टयाँ कहथत की जायेंगी जो धारा 221 के अधीन बनाये गये हनयमों द्वारा हवहहत की जायें (2) कलेक्टर स्वप्रेरणा से चकबन्दी अहधकारी को यह हनदेश दे सकेगा कक वह ककसी ग्राम में खातों की चकबन्दी साध्य होने के बारे में जांच करे (3) यकद ककसी ग्राम के दो-हतहाई भूहमस्वामी अपने खातों की चकबन्दी के हलये आवेदन करें या यकद उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन ककये ककसी आवेदन के सभबन्ध में जांच के अनुिम में उस ग्राम के दो-हतहाई भूहमस्वामी अपने खातों की चकबन्दी के हलये सहमत होते हुए आवेदन करें तो ऐसा आवेदन उस ग्राम के समस्त भूहमस्वाहमयों की ओर से ककया गया आवेदन समझा जायेगा (4) यकद उपधारा (3) के अधीन आने वाले ककसी मामले में, खातों की चकबन्दी की ककसी स्कीम की पुहष्ट कर दी जाय, तो वह उस ग्राम के समस्त भूहमस्वाहमयों पर तथा ककन्हीं भी ऐसे व्यहियों पर, जो कक उस भूहम को धारणा करने या दखल में लेने बाद में हकदार हो जायें, आबद्ध कर होंगी । (5) यकद किसी अन्य मामले में, खातों की चकबनदी की ककसी स्कीम की पुहष्ट कर दी जाय, तो वह आवेदकों पर तथा उन व्यककतयों पर, जो कक अपने खातों की चकबन्दी के हलये सहमत हो गये हो तथा ककन्हों भी ऐसे व्यहियों पर, जो कक उस स्कीम से प्रभाहवत भूहम को धारण करने या दखल में लेने क हलये बाद में हकदार हो जायँ, आबद्धकर होगी ।
207. आवेदन का नामन्जूर ककया जाना
(1) यकद ककसी ऐसे आवेदन के प्राप्त होने पर या उस आवेदन पर की जा रही कायडवाहहयों के ककसी भी प्रिम पर, आवेदन को नामंजूर करने, या ककसी आवेदक के मामले को, उस पर हवचार करने से अपवर्तजत ककये जाने के हलये अच्छा तथा पयाडप्त कारण प्रतीत होता हो तो चकबन्दी अहधकारी वह आवेदन कलेक्टर को इस हसफाररश के साथ प्रस्तुत कर सकेगा कक उस आवेदन को पूणडत: या भागत: नामंजूर कर कदया जाय या यह कक कायडवाहहयाँ मंसूख कर दी जायँ । (2) कलेक्टर, उस हसफाररश के प्राप्त होने पर, उसे स्वीकार कर सकेगा और तद्नुसार आदेश पाररत कर सकेगा या अहतररि जांच के हलये आदेश दे सकेगा ।
208. आवेदन का ग्रहण ककया जाना
यदक चकबन्दी अहधकारी आवेदन ग्रहण कर लेता है, तो वह उसके सभबभध में उस प्रककया के अनुसार कायडवाही करेगा जो कक इस संहहता द्वारा या इस संहहता के अधीन अहधकहथत है ।
209. खातों की चकबन्दी के हलये स्कीम तैयार ककया जाना
(1) यकद धारा 206 के अधीन आवेदन करने वाला भूहमस्वामी खातों की चकबन्दी की कोई ऐसी स्कीम प्रस्तुत करता है हजसके कक सभबन्ध में पारस्पररक करार हो गया हो, तो चकबन्दी अहधकारी, धारा 221 के अधीन बनाये गये हनयमों द्वारा अहधकहथत रीहत में, उसकी परीिा करेगी और यकद आवश्यक हो तो उसे उपान्तररत करेगा । (2) यकद आवेदन के साथ कोई स्कीम प्रस्तुत न की जाय, तो चकबन्दी अहधकारी खातों की चकबन्दी के हलये एक स्कीम धारा 221 के अधीन बनाये गये हनयमों द्वारा अहधकहथत रीहत में तैयार करेगा । (3) यकद चकबन्दी अहधकारी की यह राय हो कक चकबन्दी की ककसी स्कीम के अनुसार भूहम के पुनर्तवतरण के, पररणामस्वरूप ककसी भूहमस्वामी के आवंटन में कोई ऐसा खाता या भूहम आवेगी हजसका कक बाजार मूल्य या उत्पादी मूल्य उसके मूल खाते या भूहम के बाजार मूल्य या उत्पादी मूल्य की अपेिा कम है, तो उस स्कीम में यह उपलब्ध हो सकेगा कक ऐसे भूहमस्वामी को ऐसे व्यहि या व्यहियों द्वारा, हजन्हें चकबन्दी अहधकारी हनदेहशत करें, प्रहतकर का भुगतान ककया जाय ।
210. स्कीम की पुहष्ट
210. स्कीम की पुहष्ट- कलेक्टर चकबन्दी की स्कीम के सभबन्ध में की गई आपहत्त या आपहत्तयों, यकद कोई हो, पर तथा चकबन्दी अहधकारी की हसफाररश पर हवचार करने के पिात् या तो स्कीम की, उपान्तरणों के साथ या उपान्तरणों के हबना पुहष्ट कर सकेगा या उसकी पुहष्ट करने से इन्कार कर सकेगा । कलेक्टर का हवहनिय, ककसी भी ऐसे आदेश के अध्यधीन रहते हुए जो कक बन्दोबस्त आयुि द्वारा पुनरीिण में धारा 50 मे अधीन पाररत ककया जाय, अहन्तम होगा।
211. पुहष्ट हो जाने पर प्रकिया
211. पुहष्ट हो जाने पर प्रककया - (1) चकबन्दी की स्कीम की पूहष्ट हो जाने पर, चकबन्दी अहधकारी यकद आवश्यक हो, खातों का सीसांकन करेगा तथा अहन्तम रूप से ककये हवहनियों को आखयाहपत करने की कायडवाही करेगा और स्कीम के अनुसार खेत का नक्शा, अहधकार-अहभलेख, धारा 114 अधीन हवहहत अन्य अहभलेख, हनस्तार-पत्रक तथा वाहजब-उल-अजड नये तैयार करवायेगा। (2) उपधारा (1) के अधीन तैयार ककये गये अहभलेखों के सभबन्ध में यह समझा जायेगा कक वे यथाहस्तहत अध्याय-9 या अध्याय-18 के अधीन तैयार ककये गये हैं
212. खातों के कब्जे के सभबन्ध में भूहमस्वाहमयों के अहधकार
212. खातों के कब्जे के सभबन्ध में भूहमस्वाहमयों के अहधकार - चकबन्दी की स्कीम से प्रभाहवत भूहमस्वामी, यकद उन्हेोंने धारा 209 की उपधारा (5) के अधीन कब्जा न हलया हो, स्कीम की पुहष्ट होने के ठीक आगामी कृहष वषड के प्रारभभ से उन खातों के कब्जे के हलये हकदार होंगे जो कक स्कीम के अधीन उनकी आवंरटत ककये हों; और चकबन्दी अहधकारी, यकद आवयश्क हो, उनको उन खातों का हजनके कक वे हकदार हैं, कब्जा वारंट द्वारा कदलवायेगा: परन्तु यकद समस्त भूहमस्वामी सहमत हो जाय, तो उन्हें स्कीम की पुहष्ट होने के पिात् चकबन्दी अहधकारी द्वारा उनके खातों का कब्जा ककसी पूवडतर तारीख से भी कदखाया जा सकेगा ।
213. भूहम स्वाहमयों के उनके खातों में के अहधकारों का अन्तरण
213. भूहम स्वाहमयों के उनके खातों में के अहधकारों का अन्तरण - इस संहहता में अन्तर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी, भूहमस्वाहमयों के उनके खातों में के अहधकार, चकबन्दी की ककसी ऐसी स्कीम को, जो कक उन पर प्रभाव डालती हो, कायाडहन्वत करने के प्रयोजन के हलये हवहनयम द्वारा या अन्यथा अन्तरणीय होंगे और कोई भी व्यहि इस बात का हकदार नहीं होगा कक वह उि प्रयोजन के हलये ककये गये ककसी अन्तरण के सभबन्ध मे आपहत्त करे या उसमें हस्तिेप करें। (2) चकबन्दी अहधकारी, राज्य सरकार की ककसी भूहम को भी हवहनयम द्वारा या अन्यथा अन्तररक कर सकेगा जहां कक ऐसा अन्तरण चकबंदी की ककसी स्कीम को कायडहन्वत करने के प्रयोजन के हलये आवश्यक हो ।
214. अन्तरण प्रभावाहन्वत करने के हलये हलखत आवश्यक नहीं होगी
214. अन्तरण प्रभावाहन्वत करने के हलये हलखत आवश्यक नहीं होगी – तत्समय प्रवृत्त ककसी हवहध में अंतर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी – (क) ककसी ऐसे अन्तरण को हजसमें खातों की चकबन्दी की ककसी स्कीम को कायाडहन्वत करना अन्तवडहलत है, प्रभावाहन्वत करने क हलये कोई हलखत आवश्यक नहीं होगी, और (ख) ककसी भी ऐसी हलखत का, यकद वह हनष्पाकदत की गई हो, रहजस्रीकरण अपेहित नहीं होगा।
215. स्कीम को कायाडहन्वत करने के खचड
215. स्कीम को कायाडहन्वत करने के खचड.- (1) चकबंदी अहधकारी; जब तक कक राज्य सरकार पयाडप्त कारणों से अन्यों हनदेहशत न करे, स्कीम को कायाडहन्वत करने के खचे, जो कक धारा 221 के अधीन बनाये गये हनयमों के अनुसार हनधाडररत ककये जायेंगे, उन भूहमस्वाहमयों से वसूल करेगा, हजनके कक खाते, खातों की चकबन्दी की स्कीम द्वारा प्रभाहवत होते हों। (2) चकबन्दी अहधकारी, उन भूहमस्वाहमयों के बीच खचे का प्रभाजन, जो कक उसका भुगतान करने के दाहयत्वाधीन हों, ऐसी स्कीम से प्रभाहवत खातों के उन िेत्रफल के अनुसार करेगा जो कक ऐसे भूहमस्वाहमयों के दखल में हैं।
216. प्रहतकर तथा खचे की वसूली
216. प्रहतकर तथा खचे की वसूली.– कोई रकम, जो धारा 209 की उपधारा (3) के अधीन प्रहतकर के रूप में, या धारा 215 के अधीन खचे के रूप में देय हो, भू–राजस्व के बकाया, के तौर पर वसूल की जा सकेगी ।
217. हवभाजन कायडवाहहयों का चकबन्दी कायडवाहहयों के चालू रहने के दौरान हनलंबन
217. हवभाजन कायडवाहहयों का चकबन्दी कायडवाहहयों के चालू रहने के दौरान हनलंबन- जब खातों की चकबन्दी के हलए आवेदन धारा 208 के अधीन ग्रहण कर हलया गया हो तो खातों के हवभाजन के हलये कोई भी कायडवाहहयाँ जो चकबन्दी की स्कीम पर प्रभाव डालती हो, प्रारभभ नहीं की जायेगी और लहभबत समाप्त ऐसी कायडवाहहयों के चालू रहने के दौरान प्रास्थहगत रहेंगी।
218. कायडवाहहयों के दौरान सभपहत्त का अन्तरण
218. कायडवाहहयों के दौरान सभपहत्त का अन्तरण.- जब खातों की चकबन्दी के हलये कोई आवेदन ग्रहण कर हलया गया हो, तो ककसी ऐसे भूहमस्वामी को, हजस पर स्कीम आबद्धकर होगी, यह शहि नहीं होगी कक वह चकबन्दी कायडवाहहयों के चालू रहने के दौरान, अपने मूल, खाते या भूहम के ककसी भाग को इस प्रकार अन्तररत करें या उसके सभबन्ध में अन्यथा इस प्रकार कायडवाही करे कक हजससे चकबन्दी की स्कीम के अधीन ककसी अन्य भूहम-स्वामी के तत्सभबन्धी अहधकारों पर प्रभाव पडे।
219. चकबन्दी के पिात् भूहमस्वाहमयों के अहधकार पूवडवत बने रहेंगे
219. चकबन्दी के पिात् भूहमस्वाहमयों के अहधकार पूवडवत बने रहेंगे.- ककसी भूहमस्वामी के उस खाते या भूहम में जो चकबन्दी की स्कीम के अनुसरण में उसे आवंरटत की गई हो, वे ही अहधकार प्राप्त होंगे जो कक उसे उसके मूल खाते में प्राप्त थे ।
220. भूहमस्वाहमयों के हवल्लंगम
220. भूहमस्वाहमयों के हवल्लंगम – (1) यकद चकबन्दी की स्कीम के अन्तगडत लाये गये ककसी भूहम-स्वामी के खाते पर ककसी पट्टे, बन्धक या अन्य हवल्लंगम का भार हवहध मान्यता है, तो ऐसा पट्टा बन्धक या आय हवल्लंगम अन्तररत कर कदया जायेगा और वह स्कीम के अधीन उसे आवंरटत ककये गये खाते से या उसके ऐसे भाग से सभबद्ध हो जायेगा हजसे चकबंदी अहधकारी ने, स्कीम तैयार करते समय, ककन्हीं ऐसे हनयमों के अध्यधीन रहते हुए, जो कक धारा 221 के अधीन बनाये जायें, हनयत ककया हो; और तदुपरर उस भूहम में या उसके प्रहत हजस पर से कक पट्टा बन्धक या अन्य हवल्लंगम अन्तररक कर कदया गया है, यथाहस्थहत पट्टेदार, बन्धकदार या अन्य हवल्लंगमदार का कोई अहधकार नहीं रह जायेगा । (2) उपधारा (1) में या तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य अहधहनयहमहत में अन्तर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी चकबन्दी अहधकारी, यकद आवश्यक हो, ककसी ऐसे पट्टेदार या बन्धकदार या अन्य हवल्लंगमदार को, जो कक कब्जे का हकदार हो उस खाते का या खाते के उस भाग का कब्जा हजस कक पर कक उसका पट्टा, बन्धक या अन्य हवल्लंगम उपधारा (1) से अधीन अंतररत हो गया हो वारंट द्वारा कदलायेगा।
221. हनयम बनाने की शहि
221. हनयम बनाने की शहि.- (1) राज्य सरकार इस अध्याय के उपबन्धों के कायाडहन्वत करने के प्रयोजन के हलये हनयम बना सकेगी । (2) हवहशष्टतया तथा पूवाडगामी शहि की व्यापकता पर प्रहतकूल प्रभाव डाले हबना राज्य सरकार – (क) धारा 206 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन करने वाले व्यहियों द्वारा धारण की जाने वाली भूहम का न्यूनतम िेत्रफल हवहहत करते हुए; (ख) धारा 206 के अधीन ककये जाने वाले ककसी आवेदन में अन्तर्तवष्ट की जाने वाली हवहशहष्टयों के हलये उपबन्ध करते हुए; (ग) खातों की चकबन्दी के हलये आवेदनों के सभबन्ध में कायडवाही करने में चकबन्दी अहधकारी द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रकिया के हलये और स्कीम की परीिा करने या उसे तैयार करने में चकबन्दी अहधकारी की सहायता करने के हलये सलाहकार सहमहत या पंचायत की हनयुहि तथा गठन के हलये उपबन्ध करते हुए; (घ) धारा 209 की उपधारा (3) के अतंगडत आने वाले मामलों में हलये जाने वाले प्रहतकर की अवधारणा करने के हलये; (ड) धारा 215 के अधीन खचड के हनधाडरण का हवहनयमन करने के हलये; (च) चकबन्दी की ककसी स्कीम के अधीन लाये गये हवहभि खातों तथा भूहमयों के बाजार मूल्य या उत्पादी मुल्य का अवधारण करने के हलये; (छ) धारा 220 के अधीन हवल्लंगमों तथा पट्टों के अन्तरण के सभबन्ध मे चकबन्दी अहधकारी के मागडदशडन के हलये; और (ज) साधारणत: इस अध्याय अधीन की समस्त कायडवाहहयों में चकबन्दी अहधकारी तथा अन्य अहधकाररयों एवं व्यहियों के मागड दशडन के हलये, हनयम बना सकेगी ।
222. पटेलों की हनयुहि
अध्याय - 17 ग्राम अहधकारी क-पटेल 222. पटेलों की हनयुहि – (1) धारा 258 के अधीन बनाये गये हनयमों के अध्यधीन रहते हुए, कलेक्टर प्रत्येक ग्राम या ग्रामों के समूह के हलये एक या अहधक पटेल हनयुि कर सकेगा । (2) जब ककसी ग्राम में दो अहधक पटेल हों तो कलेक्टर, धारा 258 के अधीन बनाये गये हनयमों के अधयधीन रहते हुए पटेल के पद के कतडव्यों का ऐसी रीहत में हवतरण कर सकेगा, जैसी कक वह उहचत समझे। (3) जहां हवन््ब प्रदेश िेत्र में, कोई पटवारी उन कतडव्यों का, जो कक इस संहहता के अधीन पटेल पर अहधरोहपत ककये गये हैं, इस संहहता के प्रारंभ होने के ठीक पूवड पालन करता रहा है, वहां वह ऐसे कतडव्यों का तब तक पालन करता रहेगा तथा इस संहहता के प्रयोजनों के हलये तब तक पटेल समझा जायेगा जब तक कक उपधारा (1) के अधीन कोई पटेल हनयुि न कर कदया जाय।
223. पटेलों का पाररश्रहमक
223. पटेलों का पाररश्रहमक.- पटेलों का पाररश्रहमक कलेक्टर द्वारा उन हनयमों के अनुसार हनयत ककया जायेग्रा जो राज्य सरकार द्वारा बनाये गये हों ।
224. पटेलों के कतडव्य
224. पटेलों के कत्तडव्य -. प्रत्येक पटेल का यह कत्तडव्य होगा कक वह- [(क) [(एक) ऐसे वसूली प्रभार की कटौती करने के पिात्, जैसा कक राज्य सरकार समय – समय, अवधाररत करे, भू-राजस्व तथा संबंहधत करों तथा उपकरों के संग्रहण को, जो कक उसके माफडत देय हैं, संग्रहीत करें तथा “ग्राम कोष” में जमा करें;] (दो) उपखण्ड (एक) के अधीन वसूली प्रभार तथा ऐसे अन्य सरकारी शोध्यों को, जो उसके द्वारा संग्रहीत ककए जाने हेतु आदेहशत हैं, संग्रहहत करें तथा सरकारी खजाने में जमा करें । (ख) अपने ग्राम की हस्थहत के बारे में ररपेाटड ऐसे स्थानों तथा ऐसे समयों पर करें जैसा कक कलेक्टर इस सभबन्ध में हनयत करें (ग) ग्रामों में की बंजर भूहम पर लोक पथों तथा सडकों पर अहतिमणों को यथासभभव रोंके; (घ) सरकारी सेवा में के सवेिकों द्वारा उसके में पररहनर्तमत ऐसे आस्थानों तथा सीमा -हचन्हों को, जो कक उसकी देख-रेख के हलये सौपे जायँ, पररलहित करें तथा सीमा-हचन्हों को पहुँचाये गये ककसी नुकसान की ररपोटड करें; (ड़) धारा 258 के अधीन बनाये हनयमों के अध्यधीन रहते हुए, ग्राम को समुहचत स्वच्छ दशा में रखें; (च) जंगल की अनहधकृत कटाई या राज्य सरकार के ककन्हीं खहनजों या अन्य सभपहत्तयों के अनहधकृत रूप से हटाये जाने को रोकें; (छ) कोटवार पर हनयत्रण रखें तथा उसका अधीिण करें, उसकी मूत्यु की या उसके कतडव्य से अनुपहस्थत करने की ररपोटड करें तथा ऐसे उपाय करें जो कक कोटवार को उसके कतडव्यों का पालन करने के हलये उसे हववश करने हेतु आवश्यक हों; (ज) ऐसे अन्य कतडव्यों का पालन करें जो कक धारा 258 के अधीन बनाये गये हनयमों द्वारा हवहहत ककये जाएँ।
225. ककसी हवहध के अधीन भू-धारकों पर अहधरोहपत कतडव्य पटेलों पर अहधरोहपत कतडव्य समझे
225. ककसी हवहध के अधीन भू-धारकों पर अहधरोहपत कतडव्य पटेलों पर अहधरोहपत कतडव्य समझे जायेंगे– यकद तत्समय प्रवृत्त ककसी अहधहनहमहत द्वारा भू-धारकों, उनके प्रबन्धकों या अहभकताडओं पर कोई लोक कतडव्य अहधरोहपत ककये जाते हैं या उनमें ककन्हीं लोक दाहयत्वों का सभबद्ध होना घोहषत ककया जाता है, तो यह समझा जायेगा कक इस संहहता के अधीन हनयुि ककये गये पटेलों पर ऐसे कत्तडव्य अहधरोहपत हैं तथा ऐसे दाहयत्व उनसे सभबन्ध हैं : परन्तु इनमें अन्तर्तवष्ट कोई भी बात भू-धाराकों, उनके प्रबन्धको या अहभकताडओं को ककन्हीं भी ऐसे कतडव्यों या दाहयत्वों से, जो कक उन पर हवहध के द्वारा अन्यथा अहधरोहपत ककये गये हों उन्मोहचत नहीं करेगी ।
226. पटेलों को हटाया जाना
226. पटेलों को हटाया जाना – धारा 258 के अधीन बनाये गयें हनयमों के अध्यधीन रहते हुए कलेक्टर ककसी पटेल को पद से हटा सकेगा ।
227. पटेलों को दण्ड
227. पटेलों को दण्ड - कोई पटेल, जो धारा 224 या 225 के अधीन उसे सौंपे गये ककसी कत्तडव्य का पालन करने में उपेिा करता हुआ पाया जायेगा वह तहसीलदार के अधीन, जुमाडने से, जो एक हजार रुपये तक हो सकेगा, दण्डनीय होगा
228. प्रहतस्थानी पटेल की हनयुहि
228. प्रहतस्थानी पटेल की हनयुहि.— जहां कोई पटेल अपने कतडव्यों का पालन करने में अस्थाई रूप से असमथड वहां उपखंड अहधकारी उसे पटेल के आवेदन पर या अन्यथा, छह मास से अनहधक कालावहध के हलये एक प्रहतस्थानी की हनयुहि कर सकेगा और इस प्रकार हनयुि ककया गया प्रहतस्थानी, इस संहहता के समस्त प्रयोजनों के हलये, पटेल समझा जायगा ।
229. ग्राम प्रबन्ध का सौंपा जाना
229. ग्राम प्रबंध का सौपा जाना.— इस संहहता में अंतर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकार, ककसी ग्राम का प्रबन्ध या ककसी पटेल को सौंपे गये कतडव्यों का पालन ककसी ग्राम पंचायत को या जहां कोई ग्राम पंचायत गरठन न की गई हो, वहां धारा 232 के उपबंधों के अनुसार गरठत की गई ककसी ग्राम सभा को सौंप सकेगी ।
230. कोटवारों की हनयुहि तथा उनके कतडव्य
कोटवारों की हनयुहि तथा उनके कतडव्य
231. कोटवारों का पाररश्रहमक
कोटवारों का पाररश्रहमक
232. ‘ग्राम सभा’
‘ग्राम सभा’
233. दखल-रहहत भूहम का अहभलेख
दखल-रहहत भूहम का अहभलेख
234. हनरस्तार-पत्रक का तैयार ककया जाना
हनरस्तार-पत्रक का तैयार ककया जाना
235. हवषय हजनका हनस्तार पत्रक में उपबन्ध ककया जायेगा
हवषय हजनका हनस्तार पत्रक में उपबन्ध ककया जायेगा
236. हनस्तार-पत्रक में कहतपय हवषयों के हलए उपबन्ध
हनस्तार-पत्रक में कहतपय हवषयों के हलए उपबन्ध
237. हनस्तार अहधकारों के प्रयोग के हलये कलेक्टर द्वारा भूहम का पृथक् रखा जाना
हनस्तार अहधकारों के प्रयोग के हलये कलेक्टर द्वारा भूहम का पृथक् रखा जाना
238. दूसरे ग्राम की बंजर भूहम के अहधकार
दूसरे ग्राम की बंजर भूहम के अहधकार
239. दखल-रहहत भूहम में रोहपत फलदार वृिों और अन्य वृिों में अहधकार
दखल-रहहत भूहम में रोहपत फलदार वृिों और अन्य वृिों में अहधकार
240. कहतपय वृिों के काटे जाने का प्रहतषेध
कहतपय वृिों के काटे जाने का प्रहतषेध
241. सरकारी वनों से इमारती लकड़ी की चोरी रोकने के उपाय
सरकारी वनों से इमारती लकड़ी की चोरी रोकने के उपाय
242. वाहजब उल अजड
(1) इस संहहता के प्रवृत्त होने के पिात् होने के पिात् यथाशक्य शीध्र, उपखंड अहधकारी ककसी ऐसी भूहम या जल में, जो राज्य सरकार या ककसी स्थानीस प्रहधकरण का न हो या जो उसके द्वारा हनयहन्त्रत या प्रबहन्धत न हो। ससचाई के अहधकार या मागाडहधकार या अन्य सुखाचार । मछली पकड़ने के अहधकार । की बाबत प्रत्येक ग्राम की रूहऺढयों को हवहहत रीहत में अहभहनहित तथा अहभहलहखत करेगा और ऐसा अहभलेख ग्राम के वाहजब – उल-अजड के नाम से जायगा । (2) उपधारा (1) के अनुसरण में तैयार ककया गया अहभलेख उपखंड अहधकारी द्वारा ऐसी रीहत में प्रकाहशत ककया जावेगा जो कक हवहहत की जाय । (3) ऐसी अहभलेख में की गई ककसी प्रहवहष्ट से व्यहथत कोई भी व्यहि ऐसी प्रहवहष्ट को रद्द या उपान्तररत कराने के हलये हसहवल न्यायालय में वाद ऐसी अहभलेख के उपधारा (2) के अधीन प्रकाहशत होने की तारीख से एक वषड के भीतर संहस्थत कर सकेगा । (4) उपधारा (1) के अधीन तैयार ककया गया अहभलेख, उपधारा (3) के अधीन संहस्थत ककये गये वाद में हसहवल न्यायालय के हवहनिय के अध्यधीन रहते हुए, अहन्तम और हनिायक होगा । (5) उपखंड अहधकारी, उसमें हहतबद्ध ककसी व्यहि के आवेदन पर स्वप्रेरणा से, हनम्नहलहखत ककन्हीं पर, वाहजब-उल-अजड में की ककसी प्रहवहष्ट को उपान्तररत कर सकेगा या उसमें कोई नवीन प्रहवहष्ट अन्त: स्थाहपत कर सकेगा – (क) यह कक ऐसी प्रहवहष्ट में हहतबद्ध समस्त व्यहि उसे उपान्तररत कराना चाहते हैं; या (ख) यह कक ककसी हसहवल वाद में दी गई ककसी हडिी द्वारा उसे गलत घोहषत कर कदया गया है; या (ग) यह कक हसहवल न्यायालय की ककसी हडिी या आदेश पर या ककसी राजस्व अहधकारी के आदेश, पर आधाररत होते हुए भी वह ऐसी हडिी या आदेश के अनुसार नहीं हैं; या (घ) यह कक इस प्रकार आधाररत होते हुए भी, बाद में ऐसी हडिी या ऐसे आदेश को अपील, पुनरीिण या पुनर्तवलोकन में फेरफाररत कर कदया है; या (ड़) यह कक हसहवल न्यायालय ने हडिी द्वारा, ग्राम में हवद्यमान ककसी रूकढ़ का पयडवसान कर कदया है ।
243. आबादी
(1) जहां आबादी के हलये रहित िेत्र कलेक्टर की राय में अपयाडप्त हो तो वह गांव की दखल रहहत भूहम में से ऐसा और िेत्र रहित कर सकेगा, जैसा कक वह उहचत समझे । (2) जहां आबादी के प्रयोजनों के हलये दखल रहहत भूहम उपलब्ध न हो, वहां राज्य सरकार आबादी के हवस्तारण के हलये कोई भी भूहम अर्तजत कर सकेगी । (3) लैण्ड एक्वीजीशन ऐक्ट, 1894 (भूहम अजडन अहधहनयम, 1984) (िमांक 1 सन् 1894) के उपबन्ध ऐसे अजडन से लागू होंगे और उस अहधहनमय के उपबन्धों के अनुसार ऐसी भूहम के अजडन के हलये मुआवजा (प्रहतकर) देय होगा ।
244. आबादी स्थलों का हनबटारा
इस सभबन्ध में बनाये गए हनयमों के अध्यधीन रहते हुए ग्राम पंचायत या जहाँ ग्राम पंचायत का गठन न ककया गया हो, वहाँ तहसीलदार आबादी िेत्र में स्थलों का हनपटारा करेगा ।
245. भू-राजस्व संहहता हबना, गृह स्थल धारण करने का अहधकार
आबादी में हस्थत ऐसा भवन-स्थल जो युहियुि माप (डायमेन्श्न) का है, भू-राजस्व के भुगतान के दाहयत्वाधीन नहीं होगा, यकद ऐसा स्थल ककसी कोटवार के या ककसी ऐसे व्यहि के दखल में है जो कक ऐसे ग्राम में, या उस ग्राम हजसमें के सामान्यत: ऐसे ग्राम से खेती की जाती है, भूहम धारण करता है, या कृहष हशल्पी या कृहष श्रहमक के रूप में कायड करता है ।
246. आबादी में गृह स्थल धारण करने वाले व्यहियों का अहधकार
धारा 244 के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए प्रत्येक ऐसा व्यहि, जो इस संहहता के प्रवृत्त होने के साथ आबादी में गृहस्थल के रूप में कोई भूहम हवहधपूवडक धारण करता है या जो इसके पिात् ऐसी भूहम को हवहधपूवडक अर्तजत कर ले, ऐसी भूहम के सभबन्ध में भूहम-स्वामी होगा: परन्तु मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहहता (संशोधन) अहधहनयम, 1973 के आरभभ होने पर या उसके पिात् ककसी भूहमहीन व्यहि को ग्रामीण आवास योजना के अधीन गृह-स्थल का आवंटन हनम्नहलहखत शतों के अध्यधीन ककया जाएगा – (एक) यह कक आवंरटती आवंटन की तारीख से पांच पषड की कालावहध के भीतर ऐसी भूहम पर गृह का हनमाडण करेगा; (दो) यह कक आवंरटती आवंटन की तारीख से दस वषड की कालावहध के भीतर उस भूहम का, जो कक उसे आवंरटत की गई हो, या उसमें के हहत का अन्तरण नहीं करेगा, (तीन) यह कक उपयुडि शतों में से ककसी भी शतड के भंग होने की दशा में यह भूहम भंग की तारीख से राज्य सरकार में हनहहत हो जायेगी । स्पष्टीकरण – इस धारा के प्रयोजन के हलये “ग्रामीण आवास-हवकास योजना” से अहभप्रेत है ग्रामीण िेत्रों में गृह-स्थलों की व्यवस्था के हेतु भारत सरकार द्वारा प्रायोहजत स्कीम हजसके अधीन राज्य सरकारों को ग्रामीण िेत्रों में के भूहमहीन कमडचारी के कुटुभबों के हलये, हजनके कक स्वाहमत्व के पहले से ही कोई गृह स्थ्ल न हों या हजसके स्वाहमत्व में पहले से ही अपनी स्वयं की भूहम पर कोई हनर्तमत गृह या कोई झोपड़ी न हो, हन:शुल्क गृह-स्थलों की व्यवस्था, भारत सरकार से 100 प्रहतशत अनुदान सहायता के आधार पर करनी है ।
247. खहनजों के सभबन्ध में सरकार का हक
खहनजों के सभबन्ध में सरकार का हक
248. अप्राहधकृत रूप से भूहम पर कब्जा कर लेने के हलये शाहस्त
अधीन ककसी हवशेष प्रयोजन के हलये पृथक् रखी गई हो, या ककसी ऐसी भूहम पर जो शासन की या राज्य की ककसी अहधहनयहमहत के अधीन गरठत या स्थाहपत संस्था या ककसी प्राहधकारी, हनगहमत हनकाय की सत्पहत्त हो, कब्जा कर लेते हैं या उस पर कब्जा बनाये रखता है, तहसीलदार के आदेश द्वारा संहिप्तत: बेदखल ककया जा सकेगा और कोई भी फसल जो कक भूहम पर खड़ी हो तथा कोई भी भवन या अन्य हनमाडण कायड, जो उसने उस पर हनर्तमत ककया हो, यकद ऐसे समय के भीतर, जैसा कक तहसीलदार हनयत करे, उसके द्वारा नहीं हटाया जाता है, तो अहधहररत ककया जा सकेगा। इस प्रकार अहधहररत की गई ककसी भी सभपहत्त का तहसीलदार के हनदेशानुसार हनपटारा ककया जायेगा और ककसी भी फसल, भवन या अन्य हनमाडण कायड को हटाने का तथा भूहम को उसकी मूल हस्थहत में लाने के हलये आवश्यक समस्त कायों का खचाड उनके भू-राजस्व की बकाया की भांहत वसूली योग्य होगा । ऐसा व्यहि, तहसीलदार के हववेकानुसार, अप्राहधकृत दखल की कालावहध के हलये भूहम का लगान उस स्थान में ऐसी भूहम के हलये स्वीकायड दर की दुगुनी दर से चुकाने के तथा ऐसे जुमाडने के, जो ऐसी अहधिहमत भूहम के बाजार मूल्य का बीस प्रहतशत रूपये तक हो सकता है, तथा ऐसे और जुमाडने के, जो ऐसे प्रत्येक कदन के हलये, हजसको ऐसा अप्राहधकृत दखल या कब्जा प्रथम बेदखली के कदनांक के पिात् चालू रहे, गैर नगरीय िेत्रों में पांच सौ रूपये और नगरीय िेत्रों में दो हजार रूपये तक हो सकता है, हलये भी दाहयत्वाधीन होगा । तहसीलदार सभपूणड जुमाडने या उसके ककसी भाग को ऐसे व्यहियों को प्रहतकर देने के हलये उपयोग में ला सकेगा हजन्हें उसकी राय में अहधिमण से हाहन या िहत हुई हो : परन्तु तहसीलदार – (एक) महाकौशल िेत्र में, -- (क) हवलीन राज्यों से हभि िेत्र में हसतभबर सन् 1917 के प्रथम कदन के पूवड; (ख) हवलीन राज्यों में अप्रैल सन् 1950 के तृतीय कदन के पूवड; (दो) मध्य भारत िेत्र से अगस्त सन् 1950 के पन्रहवें कदन के पूवड; (तीन) हवन्ध्य प्रदेश िेत्र में अप्रैल सन् 1955 के प्रथम कदन के पूवड; (चार) भोपाल िेत्र में नवभबर सन् 1933 के आठवें कदन के पूवड; और (पाँच) हसरोंज िेत्र में जुलाई सन् 1958 के प्रथम कदन के पूवड; हनर्तमत भवनों या हनमाडण कायों द्वारा ककये गये अहधिमण के सभबन्ध में इस उपधारा द्वारा प्रदत्त शहक्त्यों को प्रयोग में नहीं लायेगा । स्पष्टीकरण – इस उपधारा के प्रयोजनों के हलये शब्द “हवलीन राज्यों” का वही अथड होगा जो कक मध्यप्रदेश मजडड स्टे्स (स्टेट) लॉज ऐक्ट, 1950 (िमांक 12 सन् 1950) में उसके हलये कदया गया है । (1-क) ककसी अप्राहधकृत कब्जे के संबंध में ग्राम पंचायत द्वारा ककसी संकल्प के सभयक् रूप से पाररत ककए जाने पर तहसीलदार, ऐसे संकल्प की सूचना की प्राहप्त की तारीख से तीस कदन के भीतर इस धारा की कायडवाहहयों को प्रारंभ करेगा तथा पूणड करेगा और उसके द्वारा की गई कायडवाही ग्राम पंचायत को संसूहचत करेगा ।
249. मछली पकड़ने, आखेट करने आकद का हवहनयमन
(1) राज्य सरकार हनम्नहलहखत का हवहनयमन करने के हलये हनयम बना सकेगी--- (क) सरकारी तालाबों में मछली पकडना; (ख) ग्रामों में जीवजन्तु को पकडना, उनका आखेट करना या उनको गोली मारना; और (ग) राज्य सरकार की भूहमयों से ककसी पदाथो को हटाना। (2) ऐसे हनयमो में अनुज्ञा-पत्र देने के हलये ऐसे अनुज्ञा-पत्रों से सलग्न की जाने वाली शतो के हलये तथा अनुज्ञा-पत्रों के हलये फीस के अहधरोपण हेतु एवं अन्य अनुषंहगक हवषयों के हलये उपबंध हो सकेगे।
250. अनुहचत रूप से बे-कब्जा ककये गये भूहमस्वामी का पुन:स्थापन
(1) इस धारा और धारा 250-क के प्रयोजन के हलये; भूहम स्वामी के अन्तगडत मौरूसी कृषक और सरकारी पट्टेदार आयेंगे। (1-क) यकद ककसी भूहम स्वामी को भूहम से हवहध के सभयक् अनुिम में बे-कब्जा न करने अन्यथा बेकब्जा कर कदया गया हो, यकद कोई व्यहि भूहम स्वामी की ककसी ऐसी भूहम पर, हजसके कक उपयोग के हलये ऐसा व्यहि इस कोड के ककसी उपबन्ध के अधीन हकदार न रह गया हो, अप्राहधकृत रूप से कब्जा ककये रहे, तो भूहमस्वामी या उसका हहत-उत्तराहधकारी, (क) ककसी ऐसे भूहमस्वामी की दशा में जो ऐसी जनजाहत का हो हजसे धारा 165 की उपधारा (6) के अधीन आकदम जनजाहत घोहषत ककया गया हो – (एक) अप्राहधकृत बे-कब्जा के उन मामलों में जो कक 1 जुलाई सन् 1976 के पूवड के हों; 1 जुलाई सन् 1978 के पूवड; और (दो) ककन्हीं अन्य मामलों में, यथाहस्थहत बे-कब्जा ककये जाने की तारीख से उस तारीख से, हजसको कक ऐसे व्यहि का कब्जा अप्राहधकृत हो जाय, पाँच वषड के भीतर; (ख) खण्ड (क) के अन्तगडत न आने वाले ककसी भूहम स्वामी की दशा में, यथाहस्थहत कब्जा ककये जाने की तारीख से या उस तारीख से, हजसको कक ऐसे व्यहि का कब्जा अप्राहधकृत हो जाय, दो वषड के भीतर, तहसीलदार को यह आवेदन कर सकेगा कक उसे कब्जा वापस कदया जाय। (1-ख) तहसीलदार, यह ज्ञात होने पर कक ककसी भूहम स्वामी को उसकी भूहम से हवहध के सभयक् अनुिम में बे-कब्जा न करके अन्यथा बे-कब्जा कर कदया गया है, इस धारा के अधीन कायडवाहहयाँ स्व-प्रेरणा से आरभभ करेगा] (2) तहसीलदार, पिकारों से सभबहन्धत उनके दावों की जांच करने के पिात्, आवेदन को हवहनहित करेगा और जब वह भूहम स्वामी को कब्जा वापस कदये जाने का आदेश दे देता है, तो कफर वह उसे भूहम को कब्जा कदलायेगा भी । (2-क) इस धारा के अधीन आरभभ की गई कायडवाहहयाँ, दूसरे पिकार से उत्तर प्राप्त हो जाने के पिात् तब तक कदन-प्रहत-कदन चालू रहेंगी जब तक कक दीघडकाहलक स्थगन अहभहलहखत ककये जाने वाले कारणों से आवश्यक न समझा जाये, और उस दशा में उस आदेश – पत्रक (order - sheet) की, हजसमें कक ऐसे स्थगन के हलये कारण अन्तर्तवष्ट हों; एक प्रहत कलेक्टर को भेजी जायेगी। (3) तहसीलदार; जांच के ककसी भी प्रिम पर, यथाहस्थहत, भूहमस्वामी, मौरूसी कृषक या सरकारी पट्टेदार को भूहम का कब्जा कदये जाने के हलये अंतररम आदेश पाररत कर सकेगा, यकद वह इस हनष्कषड पर पहुँचा है कक उसे इस धारा के अधीन आवेदन प्रस्तुत ककये जाने या स्व-प्रेरणा से कायडवाहहयाँ प्रारभभ की जाने के पूवड के छह माह के भीतर उसे हवरोधी पिकार द्वारा बे-कब्जा कर कदया गया था। ऐसे ककसी मामले में हवरोधी पिकार को, यकद आवश्यक हो, तहसीलदार के आदेशों के अधीन बेदखल कर कदया जायेगा । (4) जब उपधारा (3) के अधीन कोई अन्तररम आदेश पाररत कर कदया गया हो, तो तहसीलदार द्वारा हवरोधी पिकार से यह अपेिा की जा सकेगी कक वह तहसीलदार द्वारा अहन्तम आदेश पाररत ककया जाने तक उस भूहम का कब्जा लेने से हवरत रहने के हलये ऐसी राहश का जैसी कक तहसीलदार उहचत समझे, बन्धपत्र हनष्पाकदत करें । (5) यकद यह पाया जाय कक बन्धपत्र हनष्पाकदत करने वाले व्यहि ने बन्धपत्र के उल्लंघन में उस भूहम में प्रवेश ककया है या उसका कब्जा ले हलया है, तो तहसीलदार बन्धपत्र को पूणडत: या भागत: समपह्त कर सकेगा और ऐसी रकम भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूल कर सकेगा । (6) यकद उपधारा (2) के अधीन पाररत ककया गया आदेश आवेदक के पि में हो तो तहसीलदार हवरोधी पिकार द्वारा आवेदक को संदत्त ककया जाने वाला प्रहतकर भी अहधहनणीत करेगा जो उस दर पर होगा जो दो हजार रूपये प्रहत हेक्टर प्रहतवषड के आनुपाहतक हो । (7) इस धारा के अधीन अहधहनणीत ककया गया प्रहतकर भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूली योग्य होगा। (8) जब उपधारा (2) अधीन, भूहमस्वामी को पुन: कब्जा कदलाया जाने के हलये, तो तहसीलदार हवरोधी पिकार को इस बात के हलये अपेहित कर सकेगा कक वह आदेश दे कदया गया हो, आदेश के उल्लंघन में भूहम का कब्जा लेने से हवरत रहने के हलये ऐसी राहश का, जैसी कक तहसीलदार उहचत समझे, बन्धनामा हनष्पाकदत करे। (9) जहां उपधारा (2) के अधीन, भूहमस्वामी को पुन: कब्जा कदलाया जाने के हलये आदेश दे कदया गया हो, वहा हवरोधी पिकार जुमाडने के, जो ऐसी भूहम के बाजार मूल्य का बीस प्रहतशत तक का हो सकेगा के हलये भी दाहयत्वाधीन होगा।
251. तालाबों का राज्य शासन में हनहहत होना
तालाबों का राज्य शासन में हनहहत होना
252. लोकोपयोगी हनमाडण कायों का अनुरिण
लोकोपयोगी हनमाडण कायों का अनुरिण
253. उपबन्धों के उल्लंघन के हलये दण्ड
उपबन्धों के उल्लंघन के हलये दण्ड
254. ग्राम सभा के कतडव्यों का पटेल द्वारा पालन ककया जाना
ग्राम सभा के कतडव्यों का पटेल द्वारा पालन ककया जाना
255. खेती तथा प्रबन्ध के मापदण्डों का हवहहत ककया जाना
खेती तथा प्रबन्ध के मापदण्डों का हवहहत ककया जाना
256. नक्शों तथा भू-अहभलेखों का, हनरीिण तथा उनकी प्रहतहलहपयाँ
नक्शों तथा भू-अहभलेखों का, हनरीिण तथा उनकी प्रहतहलहपयाँ
257. राजस्व प्राहधकाररयों की अनन्य अहधकाररता
राजस्व प्राहधकाररयों की अनन्य अहधकाररता
258. हनयम बनाने की साधारण शहि
(1) राज्य सरकार, साधारणत: इस संहहता के उपबन्धों को कायाडहन्वत करने के प्रयोजन के हलये हनयम बना सकेगी । (2) हवहशष्टतया तथा पूवडगामी शहि की व्यापकता पर प्रहतकूल प्रभाव डाले हबना, ऐसे हनयमों में हनम्नहलहखत के हलये उपबन्ध हो सकेंगे – (एक) धारा 3 के अधीन गरठत राजस्व मण्डल के अध्यि तथा सदस्यों की सेवा के हनबन्धन तथा शतें; (दो) भू-अहभलेख अधीिकों तथा सहायक भू-अहभलेख अधीिकों के कतडव्यों का हवहहत ककया जाना; (तीन) भूहम को ककन्हीं अन्य प्रयोजनों के हलये व्यपवर्ततत ककये जाने पर धारा 59 के अधीन भू-राजस्व के हनधाडरण का हवहनयमन तथा प्रीहमयम का अहधरोपण; (चार) धारा 60 के अधीन उस भूहम पर हनधाडरण हजस पर हनधाडरण नहीं हुआ हो; (पांच) धारा 68 के अधीन सवेिण-संखयांकों तथा ग्रामों की हवरचना और कृहष प्रयोजनों के उपयोग में लाई जाने वाली भूहम को समाहवष्ट करने वाले सवेिण संखयांकों का न्यूनतम हवस्तार; (छ:) धारा 70 के अधीन सवेिण–संखयांकों का उपखण्डों में हवभाजन और सवेिण-संखयांक के हनधाडरण का सवेिण-संखयांकों के उपखंडों के बीच प्रभाजन; (सात) उन अहभलेखों का हवहहत ककया जाना हजनमें धारा 71 के अधीन सवेिण-संखयांकों तथा सवेिण संखयांकों के उपखंडों का िेत्रफल तथा हनधाडरण प्रहवष्ट ककया जायेगा; (आठ) धारा 73 के अधीन ककसी एक ग्राम को दो या अहधक ग्रामों में हवभाहजत करने या दो या अहधक ग्रामों को एक ग्राम में संयोहजक करने या ग्राम गरठत करने या ग्राम की सीमाएँ पररवर्ततत करने की रीहत; (नौ) धारा 77 के अधीन यह आवश्यक जांच जो पूरी की जायेगी तथा वह प्ररूप हजसमें और हवहशहष्टयाँ हजनके साथ हनधाडरण दर सभबन्धी प्रस्तावनाएँ अग्रेहषत की जायेंगी । (दस) वह रीहत हजसमें धारा 82 के अधीन हनधाडरण की सूचना दी जायेगी; (ग्यारह)धारा 87 के अधीन कृहष के लाभों के सभबन्धों में तथा कृहष एवं कृहष-हभि प्रयोजनों के हलये उपयोग में लाई गई भूहम के मूल्य के सभबन्ध में जांच करने की रीहत; (बारह) धारा 91-क के अधीन राजस्व सवेिण या बन्दोबस्त के संचालन हवहनयमन; (तेरह) धारा 93 के अधीन नगरीय िेत्रों में की भूहमयों को भू-खंड संखयांकों के रूप में हवभाहजत ककये जाने, हवद्यमान सवेिण-संखयांकों को भू-खंड संखयांकों के रूप में मान्य ककये जाने, भू-खंडांक संखयांकों को पुनगडरठत ककये जाने या नवीन भू-खंड संखयांक हवरहचत ककये जाने का हवद्यमान; (चौदह)धारा 94 के अधीन भू-खण्ड संखयांकों को उपखंडों में हवभाहजत करने तथा भू-खंड संखयांक के हनधाडरण को उपखंडों के बीच प्रभाहजत करने की रीहत; और ककसी स्थानीय िेत्र में उपखंडों की मान्यता के हलये या तो िेत्रफल की या भू-राजस्व की या दोनों की सीमाएँ; (पन्रह)धारा 95 के अधीन अहभलेखों का हवहहत ककया जाना ; (सोलह)धारा 96 के अधीन अन्य हवशेष प्रयोजनों का हवहहत ककया जाना ; (सत्रह)धारा 97 के अधीन मानक दरों को प्रकाहशत करने की रीहत; (अठारह)(क) धारा 98 (1) के अधीन, भूहमयों के समस्त रहजस्रीकृत हवियों तथा पट्टों के अहभलेख रखने की रीहत; और (ख) धारा 98 (2) के अधीन भूहमयों के औसत वार्तषक भाटक मूल्य का अवधारण। (उिीस)धारा 104 की उपधारा (2) के अधीन पटवाररयों के अन्य कतडव्यों का हनहहत ककया जाना; (बीस) धारा 106 के अधीन राजस्व हनरीिकों के अन्य कतडव्यों का हवहहत ककया जाना; (इक्कीस) धारा 107(2) के अधीन अन्य हवहशहष्टयों का हवहहत ककया जाना; (बाईस) धारा 108 के अधीन अहधकार-अहभलेख के प्ररूप का तथा उन अहतररि हवहशहष्टयों का, जो अहधकार-अहभलेख में सहभमहलत ककये जाने वाले कागज-पत्रों में प्रहवष्ट की जानी हों, हवहहत ककया जाना; (तेईस) धारा 109 के अधीन पटवारी द्वारा दी जाने वाली अहभस्वीकृत का प्ररूप; (चौबीस) (क) धारा 109 के अधीन ररपोटड ककये गये अहधकारों के अजडन को दजड करने के हलये धारा 110 (1) के अधीन रहजस्टर का हवहहत ककया जाना; (ख) अन्य व्यहियों तथा प्राहधकाररयों का, हजन्हें कक धारा 110 (3) के अधीन हलहखत प्रज्ञानता दी जायेगी, हवहहत ककया जाना; (पच्चीस) (क) धारा 114 (1) के अधीन अन्य भू-अहभलेखों का हवहहत ककया जाना, (ख) उस फीस का हवहहत ककया जाना हजसका कक भुगतान करने पर धारा 114 (2) के अधीन रसीद-बही दी जायेगी और उन प्रहवहष्टयों का हवहहत ककया जाना जो कक उसमें अन्तर्तवष्ट होंगी; (छब्बीस) धारा 120 के अधीन सहायता की अध्यपेिा का हवहनयमन; (सत्ताईस) धारा 121 के अधीन भू-अहभलेखों का तैयार ककया जाना, रखा जाना तथा पुनरीहित ककया जाना; (सत्ताईस-क) वह रीहत हजसमें धारा 123 (3) के अधीन तहसीलदार द्वारा आपहत्तयों का हनपटारा ककया जायेगा; (अठाईस) (क) धारा 124 (3) के अधीन ग्रामों के तथा सवेिण संखयांकों या भू-खंड संखयांकों के सीमा हचन्हों सभबन्धी हवहनदेश तथा उनके सहिमाडण एवं अनुरिण की रीहत; और (ख) धारा 124(4) के अधीन नवीन सीमा हचन्हेां के सहिमाडण का खचड भू-धारकों के बीच हवभाहजत करने की रीहत; (उन्तीस) ग्राम की सड़क, ग्राम की बंजर भूहम या सामुदाहयक प्रयोजनों के हलये आरहित भूहम तथा उससे लगी हुई भूहम के बीच सीमा हचन्हों को अंककत करने की रीहत और वह रीहत हजसमें वे सु-अवस्था में रखें जायेंगे तथा उनका नवीकरण ककया जायेगा; (तीस) धारा 129 के अधीन सवेिण संखयांकों, उपखंडों या भू-खंड संखयांकों का सीमांकन करने की प्रकिया, सीमा हचन्हों का प्रकार तथा फीस का उद्ग्रहण; (इकतीस) धारा 140 के अधीन वे तारीखें हजनको तथा वे ककश्तें हजन्हें भू-राजस्व देय होगा तथा वे व्यहि हजन्हें तथा वह स्थान जहां ऐसी ककश्तों का उि धारा के अधीन भुगतान ककया जायेगा; (बत्तीस) वह प्ररूप हजसमें धारा 142 के अधीन रसीद दी जायेगी; (तैंतीस) धारा 144 (1) के अधीन भू-राजस्व की छूट या उसके हनलभबन का हवहनयमन; (चौंतीस) धारा 146 के अधीन मांग की सूचना जारी करने में और धारा 147 में हवहनर्ददष्ट की गई आदेहशकाओं का हनष्पादन करने में राजस्व अहधकाररयों का मागडदशडन; (पैंतीस) धारा 160 के अधीन वार्तषकी मंजूर करने के हलये आवेदन का प्ररूप, वह समय हजसके भीतर ऐसा आवेदन ककया जायेगा तथा ऐसी मन्जूरी की शतों का हवहहत ककया जाना; (छत्तीस) धारा 161 के अधीन बन्दोबस्त के चालू रहने के दौरान राजस्व से कम ककये जाने का हवहनयमन; (सैंतीस) x x x ] (अड़तीस) धारा 165 के अधीन भूहम की अहधकतम सीमाओं का हवहहत ककया जाना; (उन्तालीस) उस रीहत का हवहहत ककया जाना हजसमें धारा 166 के अधीन समपहृत भूहम का चयन तथा सीमांकन ककया जायेगा एवं अन्तररती के पास बच रही भूहम पर भू-राजस्व हनयत ककया जायेगा; (चालीस) धारा 170 के अधीन ककसी खाते का कब्जा कदलायें जाने सभबन्धी दावों को हनपटाने की प्रकिया का हवहनयमन; (चालीस-क) वह प्ररूप तथा रीहत हजसमें धारा 170-ख की उपधारा (1) के अधीन उप-खंड अहधकारी को जानकारी अहधसूहचत की जायेगी; (इकतालीस) धारा 176 के अधीन ककसी भूहमस्वामी को अपने खाते या उसके ककसी भाग को व्यपवर्ततत करने के हलये अनुज्ञा दी जाने या अनुज्ञा देने से इंकार ककये जाने का हवहनयमन; (बयालीस) धारा 173 के अधीन ककसी भूहमस्वामी द्वारा अहधकारों के त्यजन ककये जाने का हवहनयमन; (तैंतालीस) उन हनबन्धनों तथा शतों का हवहहत ककया जाना हजस पर ककसी व्यहि को धारा 176 (2) के अधीन ककसी पररव्यि खाते का कब्जा कदया जा सकेगा; (चवालीस) (क) धारा 178 (2) के अधीन खातों के हवभाजन तथा हनधाडरण के प्रभाजन का हवहनयमन; और (ख) ………………………….] (पैंतालीस) धारा 179 (2) के अधीन वृिों में के अहधकार का िय करने के हेतु आवेदनों के बारे में राजस्व अहधकाररयों का मागड-दशडन; (पैंतालीस-क) धारा 181-क के अधीन नगरीय िेत्रों में आवाहसक और वाहणहज्यक प्रयोजनों के हलये प्रदान ककए गए हवहभि पट्टों को फ्री होल्ड में संपररवर्ततत करने की रीहत; (हछयालीस) ………………………….] (सैंतालीस) धारा 189 के अधीन भूहमस्वामी द्वारा पुनग्रडहण ककये जाने के हलये अनुज्ञात भूहम के चयन तथा सीमांकन की तथा उस पर भू-राजस्व हनयत करने की एवं मौरूसी कृषक के पास बच रही भूहम के सभबन्ध में लगान हनयत करने की रीहत का हवहहत ककया जाना; (अड़तालीस) उस रीहत तथा प्ररूप का हवहहत ककया जाना हजसमें धारा 190 (5) के अधीन भूहमस्वामी को देय हों; (अड़तालीस-क) उस समय का हवहहत ककया जाना हजसके भीतर धारा 191 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन ककया जायेगा; (उनचास) धारा 197 के अधीन उस मौरूसी खाते का, जो कक अन्तररत कर कदया गया हो, कब्जा कदलाये जाने सभबन्धी दावों को हनपटाने की प्रकिया का हवहनयमन; (पचास) धारा 198 (4) के अधीन उस भूहम के, जो कक राज्य सरकार में हवहहत हो गई हो, चयन की सीमांकन की रीहत का हवहहत ककया जाना तथा भूहमस्वामी द्वारा आरहित भूहम पर भू-राजस्व का हनयत ककया जाना; (इक्यावन) वह प्ररूप तथा हजसमें धारा 199 के अधीन लगान के हलये रसीद दी जायेगी; (बावन) भूहमस्वामी में ऐसी वृहद्ध तथा कमी के हनधाडरण का हवहनयमन जैसा कक अध्याय 15 के अधीन अपेहित या अनुज्ञात है; (हतरपन) धारा 222 (1) के अधीन पटेलों की हनयुहि हवहनयमन, जहाँ ककसी ग्राम में दो या अहधक पटेल हों, वहाँ पटेल के पद कतडव्यों के हवतरण की रीहत, पटेल के पाररश्रहमक का हनयत ककया जाना और धारा 224 के अधीन पटेल के अहतररि कतडव्यों का हवहहत ककया जाना तथा धारा 226 के अधीन उसे पद से हटाया जाना और धारा 228 के अधीन प्रहत स्थायी पटेल का हनयुि ककया जाना; (चौवन) उन ग्रामों के हलये, जो ककसी नगरपाहलका या ककसी नगरपाहलक हनगम या ककसी अहधसूहचत िेत्र सहमहत ककसी ग्राम पंचायत के िेत्र में सहभमहलत न हों; ग्रामों की स्वचछता, जानवरों के शवों को गाड़े जाने, कुओं के संरिण तथा उनको लगाये जाने, ग्रामों की सड़कों के समारिण का तथा ग्राम स्वायत्त शासन से सभबहन्धत वैसे ही हवषयों का हवहनयमन; (पचपन) (क) कोटवारों की हनयुहि, उनके हलये दण्ड, उनका हनलभबन और उनकी पदच्युहत; (ख) कोटवारों के कतडव्यों का हवहहत ककया जाना और उनके पयडवेिण का ढंग; (छप्पन) (क) धारा 232 के अधीन ग्राम सभा की स्थापना के हलये प्रकिया का हवहनयमन; (ख) वह रीहत हजसमें ग्राम सभा धारा 232 (4) के अधीन जंगम तथा स्थावर सभपहत्त अर्तजत करेगी, उसे धारण या अन्तररत करेगी एवं संहवदाएँ आकद करेगी, और (ग) ग्राम सभा फीस तथा अन्य आयों के रूप में वसूल की जाने वाली राहशयाँ । (सत्तावन) धारा 233 के अधीन रखे जाने वाले अहभलेख का हवहहत ककया जाना; (अठावन) वह रीहत हजसमें धारा 234 (2) के अधीन ग्रामवाहसयों की इच्छाएँ अहभहनहित की जायेंगी; (उनसठ) (क) धारा 237(1) के अधीन हनस्तार अहधकारी का प्रयोग करने के हलये दखल रहहत भूहम के पृथक् रखे जाने का हवहनयमन; और (ख) धारा 237(1) (ट) के अधीन हवस्तार अहधकारों के प्रयोग के हलये अन्य प्रयोजन; (ग) धारा 237 (3) के अधीन दखलरहहत भूहम के व्यपवत्तडन का हवहनयमन;
259. कहतपय भूधृहतयों के प्रहत हनदेश
259. कहतपय भूधृहतयों के प्रहत हनदेश – ककसी अहधहनयहमहत में – (क) महाकौशल िेत्र में भूहमस्वामी या भूहमधारी; (क-1) मध्यभारत िेत्र में पक्के कृषक, माफीदार, ईमानदार या छूट खातेदार; (ख) हवन्ध्य प्रदेश िेत्र में के ककसी पचपन पैंतालीस कृषक, पट्टेदार कृषक, हनकुंजधारी या ककसी तालाब के धारक; (ग) हसरोंज िेत्र में के खातेदार कृषक या हनकुंजधारी; और (घ) भोपाल िेत्र में के दखलकार, के प्रहत ककये गये ककसी हनदेश के सभबन्ध में यह समझा जायेगा कक वह भूहमस्वामी के प्रहत हनदेश है।
260. ऐसी हवहधयों के प्रहत हनदेश जो ककसी भी िेत्र में प्रवृत्त न हो
260. ऐसी हवहधयों के प्रहत हनदेश जो ककसी भी िेत्र में प्रवृत्त न हो – इस संहहता में ऐसे केन्रीय अहधहनयम के प्रहत, जो राज्य के ककसी भी िेत्र में प्रवृत्त न हों, ककये गये ककसी हनदेश का, उस िेत्र के सभबन्ध में यह अथड लगाया जायेगा कक वह उस िेत्र में प्रवृत्त ककसी तत्स्थानी हवहध के प्रहत हनदेश है । स्पष्टीकरण -- इस धारा के प्रयोजनों के हलये, अहभव्यहि “केन्रीय अहधहनयम” का वही अथड होगा जो कक साधारण खंड अहधहनयम, 1897 (1897 का िमांक 10) की धारा 3 (7) उसके हलये कदया गया है ।
261. हनरसन तथा व्यावृहत्त
261. हनरसन तथा व्यावृहत्त (Repeal and Saving) – अनुसूची 2 में हवहनर्ददष्ट अहधहनयहमहतयाँ, एतद्द्वारा, उसके (अनुसूहच 2 के) चौथे स्तभभ में वर्तणत सीमा तक हनरस्त की जाती हैं – परन्तु हनरसन – (क) इस प्रकार हनरस्त ककसी हवहध के पूवड प्रवतडन पर या उसके अधीन सभयक् रूप से की गई या होने दी गई ककसी बात पर प्रभाव नहीं डालेगा; या (ख) इस प्रकार हनरस्त ककसी हवहध अधीन अर्तजत प्रोद्भूत या उपगत ककसी अहधकार, हवशेषाहधकार, बाध्यता या दाहयत्व पर प्रभाव नहीं डालेगा; या (ग) इस प्रकार हनरस्त ककसी हवहध के हवरूद्ध ककये गये ककसी अपराध की बाबत उपगत ककसी शाहस्त, समपहरणया दण्ड पर प्रभाव नहीं डालेगा; या (घ) यथापूवोि ककसी ऐसे अहधकार, हवशेषाहधकार, बाध्यता, दाहयत्व, शाहस्त, समपहरण या दण्ड के बारे में ककसी अन्वेषण, हवहधक कायडवाही या उपचार पर प्रभाव नहीं डालेगा, और कोई भी ऐसा अन्वेषण,हवहधक कायडवाही या उपचार उसे संहस्थत ककया जा सकेगा, चालू रखा जा सकेगा या प्रवर्ततत ककया जा सकेगा, और कोई भी ऐसी शाहस्त, समपहरणया दण्ड इस प्रकार अहधरोहपत ककया जा सकेगा मानों कक यह अहधहनयहमत पाररत ही नहीं हुआ था : परन्तु यह और भी कक पूवडवती परन्तुक के अध्यधीन रहते हुए ककसी भी ऐसी अहधहनयहमहत के अधीन की गई ककसी बात या ककसी कायडवाही (हजसमें बनाये गये कोई हनयम, ककये गये हनधाडरण, की गई हनयुहियाँ तथा ककये गये अन्तरण, जारी की गई अहधसूचनाएँ, जारी ककये गये समन, जारी की गई सूचनाएँ, जारी ककये गये वारण्ट तथा जारी की गई उद्घोषणाएँ प्रदत्त प्राहधकार तथा शहियाँ, मंजूर ककये गये फामड तथा पट्टे तैयार ककये गये या पुहष्ट ककये गये अहधकार-अहभलेख तथा आय अहभलेख, अर्तजत ककये गये उपगत अहधकार, ककये गये दाहयत्व तथा हनयत ककये समय तथा स्थान सहभमहलत हैं के सभबन्ध में यह समझा जायेगा कक वह इस संहहता के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई और वह तद्नुसार तब तक प्रवृत्त बनी रहेगी जब तक कक वह इस संहहता के अधीन की गई ककसी बात या की गई ककसी कायडवाही द्वारा अहतहष्ठत न कर दी जाये ।
262. अस्थायी उपबन्ध
262. अस्थायी उपबन्ध- (1) इस संहहता के अहभव्यि रूप से अन्यथा उपबहन्धत के हसवाय, ऐसे समस्त मामले, जो इस संहहता के प्रवृत्त होने के ठीक पूवड ककसी िेत्र में राज्य सरकार के या ककसी राजस्व न्यायालय के समि, चाहे अपील, पुनरीिण, पुनर्तवलोकन में या अन्यथा लहभबत हों, ऐसी समुहचत हवहध के जो कक इस संहहता के पाररत न होने की दशा में उन मामलों को लागू होती, उपबन्धों के अनुसार हवहनिय ककयें जायेंगे । (2) इस संहहता के प्रवत्त होने के समय ककसी हसहवल न्यायालय में लहभबत कोई ऐसा मामला, जो इसं संहहता के अधीन केवल ककसी राजस्व न्यायालय द्वारा हवचारणीय हो ऐसे हसहवल न्यायालय द्वारा उस हवहध के अनुसार हनपटाया जायेगा कक इस संहहता के प्रारभभ होने के पूवड प्रवृत्त हो । (3) अनुसूची (3) वर्तणत हवहधयों में से ककसी भी हवहध के अधीन की ऐसी समस्त कायडवाहहयाँ जो इस संहहता के प्रारभभ होने के ठीक पूवड राज्य सरकार के समि लहभबत हों, ऐसे प्रारभभ पर, मण्डल को अन्तररत हो जायेंगी और तदुपरर वे मण्डल द्वारा इस प्रकार हनपटाई जायेंगी मानों कक वे मण्डल द्वारा इस संहहता के अधीन ग्रहण की गई कायडवाहहयाँ हों । स्पष्टीकरण – इस उपधारा के प्रयोजन के हलये, “राज्य सरकार” के अन्तगडत राज्यपाल, महन्त्रपररषद या कोई मंत्री है ।
263. करठनाइयों का हनराकरण करने की शहि
263. करठनाइयों का हनराकरण करने की शहि – (1) यकद इस संहहता के उपबन्धों को ककसी िेत्र में प्रभावशील करने में कोई करठनाई उद्भूत हो, राज्य सरकार, राजपत्र में अहधसूहचत आदेश द्वारा, ऐसे उपबन्ध कर सकेगी या ऐसे हनदेश दे सकेगी जो कक उस करठनाई का हनराकरण करने के हलये उसे आवश्यक प्रतीत हों । (2) उपधारा (1) के अधीन पाररत आदेश की एक प्रहतहलहप, उसके पाररत ककये जाने के पिात् यावतशक्य शीघ्र हवधान सभा के समि रखी जायेगी ।
264. संहहता कहतपय मामलों में लागू नहीं होगी
264. संहहता कहतपय मामलों में लागू नहीं होगी – इस संहहता में अन्तर्तवष्ट कोई भी बात ककसी ऐसे व्यहि को लागू नहीं होगी जो केन्रीय सरकार से भूहम धारण करता है ।
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