section 176
खाते का पररत्याग
The MP Land Revenue Code 1959(1) यकद कोई ऐसा भूहमस्वामी, जो अपने खाते पर या तो स्वयं या ककसी अन्य व्यहि द्वारा दो वषड तक खेती नहीं करता है, भू-राजस्व का भुगतान नहीं करता है और उसने उस ग्राम को, हजसमें कक वह सामान्यत: हनवास करता है, छोड़ कदया है तो तहसीलदार, ऐसी जांच के पिात्, जैसी कक वह आवश्यक समझे, उस खाते में समाहवष्ट भूहम का कब्जा ले सकेगा और एक बार में एक कृहष वषड की कालावहध के हलये उस भूहम को भूहमस्वामी की ओर से पट्टे पर देकर उस खेती की व्यवस्था कर सकेगा । (2) जहां भूहमस्वामी या भूहम के हलए हवहधपूवडक हकदार कोई अन्य व्यहि, उस तारीख के, हजसको कक तहसीलदार ने उस भूहम का कब्जा हलया हो, ठीक आगामी कृहष वषड के प्रारंभ से तीन वषड की कालावहध के भीतर उस भूहम के हलये दावा करता है, वहां वह, भूहम, शोध्यों का, यकद कोई हो, भुगतान कर कदया जाने पर तथा ऐसे हनबंधनों एवं शतो पर, जैसी कक तहसीलदार उहचत समझे, उसे वापस कदला दी जायेगी । (3) जहां उपधारा (2) के अधीन कोई दावा नहीं ककया जाता है या यकद कोई दावा ककया जाता है तो वह नामंजूर कर कदया जाता है तो तहसीलदार, उस खाते को पररत्यि घोहषत करते हुए आदेश करेगा और वह खाता ऐसी तारीख से, जो कक उस आदेश में उस हनर्तमत हवहनर्ददष्ट की जाये, सरकार ने पूणडरूप से हनहहत हो जायेगा । (4) जहां कोई खाता उपधारा (3) के अधीन पररत्यि घोहषत कर कदया जाता है; वहां राजस्व की उस बकाया के सभबंध में जो उस खाते की बाबत उस भूहमस्वामी से शोध्य हो, उस भूहमस्वामी के दाहयत्व का उन्मोचन हो जायेगा ।
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