section 51
नियम बनाने की शक्ति
The M.P. Asangthit Karamkaar Kalyan Adhiniyam, 2003नियम बनाने की शक्ति (१) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी।
(२) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :- (क) धारा ३ की उपधारा (४) के अधीन बोर्ड के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति के निबन्धन तथा शर्तें, उनको संदेय वेतन तथा अन्य भत्ते और उनके पदों में आकस्मिक नियुक्तियों को भरने की रीति; (ख) धारा ५ की उपधारा (१) के अधीन बोर्ड के सम्मिलन का समय और स्थान तथा ऐसे सम्मिलन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया के नियम जिनके अन्तर्गत कारबार के संव्यवहार के लिए आवश्यक गणपूर्ती भी है; (ग) प्रसुविधा, जो धारा ७ की उपधारा (२) के अधीन दी जाएं; (घ) धारा ७ की उपधारा (५) के खण्ड (ख) के अधीन स्थानीय प्राधिकारियों और कर्मचारियों को संदेय सहायता अनुदान की सीमा; (ङ) वह प्ररूप, जिसमें और वह समय जिसके भीतर धारा १० के अधीन बोर्ड का बजट तैयार किया जाएगा और सरकार को भेजा जाएगा; (च) वह प्ररूप जिसमें और वह समय जिसके भीतर धारा ११ के अधीन बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत की जाएगी; (छ) धारा १२ की उपधारा (३) के अधीन लेखाओं के वार्षिक विवरण का प्ररूप और वह तारीख जिसके पूर्व उपधारा (३) के अधीन संपरीक्षक की रिपोर्ट के साथ लेखाओं की संपरीक्षित प्रति दी जाएगी; (ज) उन रजिस्टरों का प्ररूप जो धारा १४ की उपधारा (७) के अधीन संधारित किए जाएंगे; (झ) वे प्रसुविधाएं, जो धारा १६ की उपधारा (२) के अधीन दी जा सकेंगी; (ञ) उन रजिस्टरों का प्ररूप जो धारा १७ के अधीन नियोजक द्वारा संधारित किए जाएंगे; (ट) धारा २२ की उपधारा (२) के अधीन आवेदन का प्ररूप, वे विशिष्टियां जो उसमें होंगी और संदत्त की जाने वाली फीस; (ठ) धारा २२ की उपधारा (३) के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र का प्ररूप, वह समय जिसके भीतर और वे शर्तें जिनके अध्यधीन रहते हुए ऐसा प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा; (ड) वह प्ररूप जिसमें स्वामित्व या प्रबंध में परिवर्तन या अन्य विशिष्टियों की सूचना धारा २२ की उपधारा (४) के अधीन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को दी जाएंगी; (ढ) वह प्ररूप जिसमें धारा २६ की उपधारा (५) के अधीन बोर्ड द्वारा नियोजक को मांग सूचना जारी की जाएगी; (ण) ये शक्तियां जिनका धारा २० की उपधारा (१) के खण्ड (ठ) के अधीन किसी निरीक्षक द्वारा प्रयोग किया जा सकेगा; (त) वह रीति जिसमें क्रमशः धारा २९, ३० तथा ३१ के अधीन उद्गृहीत किया गया अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क, मोटरयान कर तथा कल्याण उपकर और धारा ३२ के अधीन पृथक् रखी गयी रायल्टी या अनिवार्य भाटक संग्रहीत तथा राज्य की संचित निधि में जमा किया जाएगा; (थ) वह रीति जिसमें धारा २९ के अधीन वसूल की गई रकम धारा ३३ के अधीन दो निधियों के बीच प्रभाजित की जाएगी; (द) धारा ३४ की उपधारा (५) के अधीन कल्याण उपकर के संग्रहण तथा लेखा रखने और उसे बोर्ड को अंतरित करने की प्रक्रिया; (ध) वह प्राधिकारी जिसे धारा ३७ की उपधारा (१) के अधीन अपील की जाएगी; (न) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना अपेक्षित है या विहित किया जाए।
(३) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र राज्य विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा।
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