Bare Act
The M.P. Asangthit Karamkaar Kalyan Adhiniyam, 2003
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ
संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश असंगठित कर्मकार कल्याण अधिनियम, 2003 है। (2) इसका विस्तार अनुसूची में विनिर्दिष्ट नियोजनों पर है। (3) यह ऐसी तारीख से प्रवृत्त होगा जिसे सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे, और भिन्न-भिन्न क्षेत्रों के लिए भिन्न-भिन्न नियोजनों के लिए तथा इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी।
2. परिभाषाएं
परिभाषाएं इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,- (क) "प्रसुविधा" से अभिप्रेत है ऐसी प्रसुविधा जो धारा 7 की उपधारा (2) के अधीन दी जाए; (ख) "बोर्ड" से अभिप्रेत है धारा 3 के अधीन गठित बोर्ड; (ग) "ठेकेदार" से अभिप्रेत है ऐसा व्यक्ति जो किसी स्थापना के लिए, माल के प्रदाय मात्र अथवा विनिर्माण की वस्तुओं से भिन्न, परिणाम देने हेतु उत्पादन करने के लिए असंगठित कर्मकारों को लगा कर उसका जिम्मा लेता है अथवा स्थापना में किसी कार्य के लिए ऐसे कर्मकारों की पूर्ति करता है और इसमें उप-ठेकेदार तथा अभिकर्ता सम्मिलित हैं; (घ) किसी ठेकेदार द्वारा या उसके माध्यम से लगाए गए किसी असंगठित कर्मकार के संबंध में "नियोजक" से अभिप्रेत है प्रमुख नियोजक और किसी अन्य असंगठित कर्मकार के संबंध में ऐसा व्यक्ति जो स्थापना के क्रियाकलापों पर अंतिम नियंत्रण रखता हो और इसमें ऐसा कोई अन्य व्यक्ति सम्मिलित है जिसे ऐसी स्थापना के क्रियाकलाप सौपे जाते हों चाहे ऐसा व्यक्ति अभिकर्ता, प्रबंधक या अनुसूचित नियोजन में प्रचलित किसी अन्य नाम से जाना जाता हो; (ङ) "स्थापना" से अभिप्रेत है कोई स्थान या परिसर जिसमें उसकी ऐसी प्रसोमा भी सम्मिलित है, जिसमें या जिसके किसी भाग में सामान्यतः कोई अनुसूचित नियोजन चलाया जा रहा है या चलाया जाता है; (च) किसी नियोजक के संदर्भ में "परिवार" से अभिप्रेत है ऐसे नियोजक के पति-पत्नी, पुत्र, पुत्री, पिता, माता, भाई या बहन जो उसके साथ रहता है और उस पर पूर्णतः आश्रित है; (छ) "निधि" से अभिप्रेत है धारा 8 के अधीन गठित कल्याण निधि; (ज) "निरीक्षक" से अभिप्रेत है धारा 27 के अधीन नियुक्त निरीक्षक; (झ) "श्रम आयुक्त" से अभिप्रेत है मध्यप्रदेश औद्योगिक संबंध अधिनियम, 1960 (क्रमांक 27 सन् 1960) की धारा 3 के अधीन राज्य सरकार द्वारा राज्य के लिए नियुक्त किया गया श्रम आयुक्त; (ञ) इस अधिनियम के अधीन गठित की गई कल्याण निधि के संबंध में "सदस्य" से अभिप्रेत है धारा 14 के अधीन एक सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकृत असंगठित कर्मकार; (ट) "यथास्थिति किसी ग्रामीण या नगरीय क्षेत्र का सामान्यतः निवासी" से अभिप्रेत है ऐसा व्यक्ति जो पूर्वतर बारह मास के अधिकांश समय में ऐसे क्षेत्र में निवास कर चुका है, तथा उसका इसी प्रकार अगले बारह मास तक बने रहना प्रत्याशित हो; (ठ) "प्रमुख नियोजक" से अभिप्रेत है ऐसा नियोजक जो किसी अनुसूचित नियोजन में किसी ठेकेदार द्वारा या उसके माध्यम से असंगठित कर्मकारों को नियोजित करता हो; (ड) "ग्रामीण क्षेत्र" से अभिप्रेत है ऐसा क्षेत्र जो नगरीय क्षेत्र न हो; (ढ) "अनुसूचित नियोजन" से अभिप्रेत है अनुसूची में विनिर्दिष्ट कोई नियोजन और उसमें सम्मिलित है, ऐसे नियोजन का भाग बनने वाले कार्य की कोई प्रक्रिया या शाखा; (ण) "स्कीम" से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन बनाई गई स्कीम; (त) "अनुसूची" से अभिप्रेत है इस अधिनियम से संलग्न अनुसूची; (थ) "कानूनी कल्याण निधि" से अभिप्रेत है इस अधिनियम से भिन्न किसी राज्य या केन्द्रीय विधान के अधीन कर्मकारों के कल्याण के लिए स्थापित और राज्य सरकार द्वारा इस निमित जारी की गई अधिसूचना द्वारा घोषित की गई "कानूनी कल्याण निधि"; (द) "असंगठित कर्मकार" से अभिप्रेत है ऐसा व्यक्ति जो प्रत्यक्षतः या किसी एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से एक या अधिक अनुसूचित नियोजन/नयोजनों में लगा हुआ है, चाहे मजदूरी के लिए हो या बिना मजदूरी के लिए या ऐसे अनुसूचित नियोजन/नयोजनों में स्वयं या उसकी मर्जी से केवल परिवार श्रम के साथ कार्य के किसी ऐसे स्थान में कार्य करता है/करती है जिसमें उसका घर, खेत या कोई सार्वजनिक स्थान सम्मिलित है जो कि अन्य के नियंत्रणाधीन हो या न हो तथा इसमें सम्मिलित हैं:-(एक) ऐसा व्यक्ति जो गृह आधारित कर्मकार या आकस्मिक अथवा संविदा कर्मकार या स्व-नियोजित कर्मकार है; और (दो) ऐसा व्यक्ति जिसे किसी नियोजक या ठेकेदार द्वारा कच्चा माल उसे परिवर्तित करने या कोई उत्पाद बनाने या किसी कार्य के लिए दिया जाता हो या फेरी लगाकर या गली में बेचने के लिए तैयार माल दिया जाता है या चल या पहुंच सेवा उपलब्ध कराने के लिए यान, औजार या मशीनरी प्रदान की जाती हो, किन्तु इसमें किसी नियोजक के परिवार का कोई सदस्य सम्मिलित नहीं है; (ध) "नगरीय क्षेत्र" से अभिप्रेत है भारत के संविधान के अनुच्छेद 243-थ के अधीन मध्यप्रदेश के राज्यपाल द्वारा "बृहत्तर नगरीय क्षेत्र" और "लघुत्तर नगरीय क्षेत्र" के रूप में अधिसूचित क्षेत्र; (न) "मजदूरी" का वही अर्थ होगा जो मजदूरी भुगतान अधिनियम, 1936 (1936 का सं. 4) की धारा 2 के खण्ड (छ) में उसके लिए दिया गया है।
3. ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के असंगठित कर्मकारों के लिए कल्याण बोर्ड का गठन
ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के असंगठित कर्मकारों के लिए कल्याण बोर्ड का गठन (1) राज्य सरकार, ऐसी तारीख से, जो कि अधिसूचना द्वारा नियत की जाए, मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड और मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड के नाम से बोर्ड का गठन करेगी जो इस अधिनियम के अधीन उन्हें प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का पालन करेंगे: परन्तु प्रत्येक बोर्ड के गठन के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी। (2) उपधारा (1) के अधीन गठित प्रत्येक बोर्ड पूर्वोक्त नाम से एक निगमित निकाय होगा, जिसका शाश्वत उत्तराधिकार होगा तथा जिसकी सामान्य मुद्रा होगी और जो उक्त नाम से वाद चलायेगा तथा उक्त नाम से उसके विरुद्ध वाद चलाया जा सकेगा। (3) प्रत्येक बोर्ड एक अध्यक्ष (चेयरपर्सन) और पंद्रह से अनधिक उतनी संख्या में अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा जो राज्य सरकार द्वारा इसके लिए नियुक्त किए जाएं: परन्तु बोर्ड में राज्य सरकार, नियोजकों और असंगठित कर्मकारों का प्रतिनिधित्व कर रहे सदस्यों की एक समान संख्या सम्मिलित होगी और असंगठित कर्मकारों का प्रतिनिधित्व कर रहे लगभग एक तिहाई सदस्य महिलाएं होंगी। (4) बोर्ड के अध्यक्ष (चेयरपर्सन) और अन्य सदस्यों की नियुक्ति के निबंधन और शर्तें तथा उनको देय वेतन और अन्य भत्ते तथा बोर्ड के सदस्यों की आकस्मिक रिक्तियों को भरने की रीति ऐसी होगी जैसी कि विहित की जाए।
4. बोर्ड का सचिव और अन्य अधिकारी
बोर्ड का सचिव और अन्य अधिकारी (1) धारा 3 के अधीन गठित किया गया प्रत्येक बोर्ड एक सचिव और ऐसे अन्य अधिकारी तथा कर्मचारियों को नियुक्त करेगा जितने कि वह इस अधिनियम के अधीन कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए आवश्यक समझे: परन्तु बोर्ड का सचिव, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से नियुक्त किया जाएगा: परन्तु यह कि एक ही व्यक्ति को दोनों बोर्डों का सचिव नियुक्त किया जा सकेगा। (2) बोर्ड का सचिव इसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी होगा। (3) बोर्ड के सचिव और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों की नियुक्ति के निबंधन तथा शर्तें तथा उनको देय वेतन तथा भत्ते ऐसे होंगे जैसा कि बोर्ड विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट करे।
5. बोर्ड का सम्मिलन
बोर्ड का सम्मिलन (1) बोर्ड, ऐसे समय और स्थान पर सम्मिलन करेगा और उसके सम्मिलन में (ऐसे सम्मिलन में गणपूर्ति भी सम्मिलित है) कारबार के संव्यवहार के संबंध में प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा जैसा कि विहित किया जाए। (2) अध्यक्ष (चेयरपर्सन) या यदि वह किसी कारण से बोर्ड के सम्मिलन में उपस्थित होने में असमर्थ है तो इस संबंध में अध्यक्ष (चेयरपर्सन) द्वारा नाम-निर्दिष्ट किया गया कोई सदस्य और ऐसे नामनिर्देशन की अनुपस्थिति में, सम्मिलन में उपस्थित सदस्यों द्वारा उनमें से निर्वाचित कोई अन्य सदस्य, सम्मिलन की अध्यक्षता करेगा। (3) समस्त प्रश्न जो बोर्ड के किसी सम्मिलन के समक्ष आते हों, उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत द्वारा विनिश्चित किए जाएंगे और मतों के बराबर रहने की दशा में अध्यक्ष (चेयरपर्सन) या उसकी अनुपस्थिति में, अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति का द्वितीय या निर्णायक मत होगा।
6. रिक्तियों आदि से बोर्ड की कार्यवाहियां अविधिमान्य नहीं होंगी
रिक्तियों आदि से बोर्ड की कार्यवाहियां अविधिमान्य नहीं होंगी बोर्ड का कोई कार्य या कार्यवाहियां,-(क) बोर्ड में किसी रिक्ति या उसके गठन में किसी त्रुटि; या (ख) बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य कर रहे किसी व्यक्ति की नियुक्ति में किसी त्रुटि; या (ग) बोर्ड की प्रक्रिया में किसी अनियमितता जिससे मामले के गुणागुण पर प्रभाव नहीं पड़ता हो, के कारण अविधिमान्य नहीं होगा/होगी।
7. बोर्ड की अधिकारिता और कृत्य
बोर्ड की अधिकारिता और कृत्य (1) मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड और मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड की अधिकारिता का विस्तार उन असंगठित कर्मकारों पर होगा जो सामान्यतया राज्य के क्रमशः ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में निवास करते हैं। (2) उपधारा (1) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, धारा 13 के अधीन हकदार सदस्यों को निम्नलिखित में से समस्त या कोई प्रसुविधाएं उपलब्ध करा सकेगा, अर्थात्:-(क) दुर्घटना की दशा में किसी सदस्य को तुरन्त सहायता; (ख) उन सदस्यों को पेंशन जो 60 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हों; (ग) गृह निर्माण के लिए सदस्य को ऋण और अग्रिम; (घ) सदस्यों के समूह बीमा के लिए प्रीमियम का भुगतान; (ङ) बच्चों की शिक्षा के लिये वित्तीय सहायता; (च) किसी सदस्य या उसके ऐसे आश्रित को जिसे विहित किया जाए, की गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए सहायता; (छ) महिला सदस्यों को प्रसूति प्रसुविधा; और (ज) ऐसी अन्य प्रसुविधाएं जिन्हें विहित किया जाए। (3) किसी प्रसुविधा को प्रदान करने की पात्रता का मानदंड, वह पैमाना जिस पर यह दी जा सकेगी, आवेदन करने और मंजूर करने की प्रक्रिया तथा प्रसुविधा प्रदान करने से संसक्त अन्य आनुषंगिक विषय ऐसे होंगे जैसा कि बोर्ड इस निमित बनाई स्कीम द्वारा उपबंधित करे। (4) बोर्ड किसी स्थानीय प्राधिकरण या किसी नियोजक को किसी स्थापना में असंगठित कर्मकारों के कल्याण से संसक्त प्रयोजन के लिए राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किसी स्कीम के लिए ऋण या सहायता प्रदान कर सकेगा। (5) बोर्ड, किसी ऐसे स्थानीय प्राधिकरण या किसी ऐसे नियोजक को वार्षिक सहायता अनुदान संदत कर सकेगा।
8. कल्याण निधि का गठन और उसका उपयोजन
कल्याण निधि का गठन और उसका उपयोजन (१) राज्य सरकार द्वारा धारा ३ की उपधारा (१) के अधीन मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड और मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड गठित करने के लिए नियत की गई तारीख से क्रमशः मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण निधि और मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण निधि के नाम से ज्ञात निधियों का गठन किया जाएगा। (२) मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण निधि, मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड में निहित होगी और उसके द्वारा प्रशासित की जाएगी जबकि मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण निधि, मध्यप्रदेश असंगठित नगरीय कर्मकार कल्याण बोर्ड में निहित होगी और उसके द्वारा प्रशासित की जाएगी। (३) निधि में,— (क) राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा संबंधित बोर्ड को दिए गए अनुदान और ऋण; (ख) निधि के सदस्यों से प्राप्त अभिदाय; (ग) धारा २६ के अधीन नियोजकों से प्राप्त अभिदाय; (घ) धारा ३३ और ३४ के उपबंधों के अनुसार निधि में देय समस्त धन, जमा किए जाएंगे। (४) निधि को,— (क) धारा ७ के अधीन बोर्ड के कृत्यों के निर्वहन में उसके व्ययों; (ख) बोर्ड के सदस्यों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य पारिश्रमिक; और (ग) इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत उद्देश्यों और प्रयोजनों पर व्ययों, के लिए उपयोजित किया जाएगा। (५) बोर्ड किसी वित्तीय वर्ष में अपने सदस्यों, अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्तों तथा अन्य पारिश्रमिक के मददे तथा अन्य प्रशासनिक व्ययों की पूर्ति के लिए किसी वित्तीय वर्ष के दौरान अपने कुल व्ययों के पंद्रह प्रतिशत से अधिक व्यय उपगत नहीं करेगा।
9. उपनिधियों को सृजित और विलीन करने की शक्ति
उपनिधियों को सृजित और विलीन करने की शक्ति (१) राज्य सरकार, आदेश द्वारा, कल्याण बोर्ड की सलाह पर अथवा अन्यथा आदेश में विनिर्दिष्ट किए गए नाम से उपनिधि सृजित कर सकेगी और निदेश दे सकेगी कि आदेश में विनिर्दिष्ट तारीख को निधि में जमा धन एक या अधिक उपनिधियों में जमा कर दिया जाए। (२) उपधारा (१) में निर्दिष्ट आदेश में निम्नलिखित विनिर्दिष्ट होंगे,— (एक) वह क्षेत्र और/या अनुसूचित नियोजन जिसके लिए उपनिधि सृजित किया जाना है; (दो) वह सीमा जिस तक और वह रीति जिसमें आदेश में विनिर्दिष्ट तारीख को निधि में जमा धन, और भावी प्रोद्भवन उपनिधि में जमा किया जाना है; (तीन) इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों से अनसंगत यह मेकेनिज्म यह सुनिश्चित करने के लिए कि उपनिधि में जमा किया गया धन खण्ड (एक) में निर्दिष्ट क्षेत्रों और/या अनुसूचित नियोजन के निधि के सदस्यों के कल्याण के लिए उपयोजित किया जाए; और (चार) उपनिधि के सृजन से आनुषंगिक कोई अन्य मामले : परन्तु खण्ड (तीन) में निर्दिष्ट मेकेनिज्म में ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए बोर्ड की उप-समिति का गठन भी समाविष्ट हो सकेगा : परन्तु यह और कि ऐसी उप-समिति में सहयोजित सदस्य सम्मिलित होंगे, जो कि बोर्ड के सदस्य न हों, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा ऐसी रीति में नामनिर्दिष्ट किया जा सकेगा जैसी कि विहित की जाए : परन्तु यह भी कि सहयोजित सदस्यों को उप-समिति के सम्मेलन में जिसके लिए उन्हें नामनिर्दिष्ट किया गया हो भाग लेने का अधिकार होगा, परन्तु उन्हें सम्मेलन में मतदान करने का अधिकार नहीं होगा। (३) राज्य सरकार, आदेश द्वारा, बोर्ड की सलाह पर अथवा अन्यथा निदेश दे सकेगी कि:— (एक) उपधारा (१) के अधीन सृजित की गई किसी उपनिधि को दो या अधिक उपनिधियों में विभाजित किया जाए; (दो) उपधारा (१) के अधीन और/अथवा पूर्वोक्त खण्ड (एक) के अधीन सृजित की गई एक या अधिक उपनिधियों का उस निधि में विलय किया जाए जिसमें से उसे सृजित किया गया था; (तीन) उपधारा (१) के अधीन और/अथवा पूर्वोक्त खण्ड (एक) के अधीन सृजित की गई दो या अधिक उपनिधियां एकल उपनिधि में विलय की जाएं। (४) उपधारा (३) के अधीन पारित किए गए आदेश में उपधारा (२) के खण्ड (एक), (दो), (तीन), और (चार) में उल्लिखित बिन्दुओं पर उपबंध यथावश्यक परिवर्तनों सहित अंतर्विष्ट रहेंगे। (५) बोर्ड का यह कर्तव्य होगा कि वह इस धारा के अधीन पारित किए गए प्रत्येक आदेश को प्रभावशील करे।
10. बजट
बजट बोर्ड, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में, ऐसे प्रारूप में और ऐसे समय पर, जैसा कि विहित किया जाए, बोर्ड की प्राक्कलित प्राप्तियां और व्ययों को दर्शित करते हुए आगामी वित्तीय वर्ष के लिए उसका बजट तैयार करेगा और उसे राज्य सरकार को अग्रेषित करेगा।
11. वार्षिक रिपोर्ट
वार्षिक रिपोर्ट बोर्ड, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसे प्रारूप में और ऐसे समय पर जैसा कि विहित किया जाए, पूर्व वित्तीय वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों का एक पूर्ण लेखा देते हुए उसकी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा और उसकी एक प्रति राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा।
12. लेखा और संपरीक्षा
लेखा और संपरीक्षा (१) बोर्ड, उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख संधारित करेगा तथा लेखाओं का एक वार्षिक विवरण, ऐसे प्रारूप में तैयार करेगा जैसा कि विहित किया जाए। (२) बोर्ड के लेखाओं की संपरीक्षा, संचालक, स्थानीय निधि संपरीक्षा, द्वारा मध्यप्रदेश स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम, १९७३ (क्रमांक ४३ सन् १९७३) के उपबंधों के अनुसार की जाएगी और उक्त अधिनियम के उपबंध बोर्ड पर इस प्रकार लागू होंगे मानो कि यह एक स्थानीय निकाय है। (३) बोर्ड, राज्य सरकार को संपरीक्षक की रिपोर्ट के साथ उसके लेखाओं की संपरीक्षित प्रति, ऐसी तारीख के पूर्व प्रस्तुत करेगा जैसी कि विहित की जाए। (४) राज्य सरकार, वार्षिक रिपोर्ट और संपरीक्षक की रिपोर्ट, उनके प्राप्त होने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र विधान सभा के पटल पर रखवाएगी।
13. निधि का सदस्य
निधि का सदस्य इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए इस अधिनियम के अधीन सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकृत प्रत्येक असंगठित कर्मकार, बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के अधीन प्रशासित निधि से उपबंधित प्रसुविधाओं के लिए हकदार होगा।
14. सदस्य के रूप में असंगठित कर्मकार का रजिस्ट्रीकरण
सदस्य के रूप में असंगठित कर्मकार का रजिस्ट्रीकरण (१) प्रत्येक असंगठित कर्मकार जिसने अठारह वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है, किन्तु साठ वर्ष की आयु पूर्ण नहीं की है और जो किसी अन्य कानूनी कल्याण निधि के अधीन प्रसुविधा प्राप्त करने का पात्र नहीं है, इस अधिनियम के अधीन सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए पात्र होगा : परन्तु राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, निम्नलिखित एक या अधिक मानदंड विहित कर सकेगी जिसकी पूर्ति न होने पर असंगठित कर्मकार सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकरण हेतु अपात्र हो जायेगा:— (एक) भूमि के खाते का अधिकतम आकार, (दो) परिवार की अधिकतम आय : परन्तु यह और कि राज्य सरकार राज्य में भिन्न-भिन्न प्रवर्गों की या भिन्न-भिन्न भागों में स्थित भूमियों के लिए भूमि के खाते के भिन्न-भिन्न अधिकतम आकार विनिर्दिष्ट कर सकेगी। (२) सामान्यतया ग्रामीण क्षेत्र के निवासी असंगठित कर्मकार धारा ८ के अधीन गठित मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण निधि के सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए पात्र होंगे, जबकि नगरीय क्षेत्र में सामान्यतः निवास करने वाले असंगठित कर्मकार मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण निधि के सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए पात्र होंगे : परन्तु कोई भी कर्मकार एक साथ दोनों निधियों के सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए पात्र नहीं होगा। (३) रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन ऐसे प्रारूप में, जैसा कि विनियमों में विनिर्दिष्ट किया जाए तथा ऐसे अधिकारी को किया जाएगा जिसे इस संबंध में संबंधित बोर्ड द्वारा प्राधिकृत किया जाए। (४) उपधारा (३) के अधीन प्रत्येक आवेदन के साथ ऐसे दस्तावेज संलग्न किए जाएंगे तथा उसके साथ पच्चीस रुपए से अधिक की ऐसी फीस दी जाएगी जो विनियमों में विनिर्दिष्ट की जाए। (५) यदि उपधारा (३) के अधीन संबंधित बोर्ड द्वारा प्राधिकृत अधिकारी का समाधान हो जाता है कि आवेदक ने इस अधिनियम तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों का अनुपालन कर दिया है तो वह इस अधिनियम के अधीन सदस्य के रूप में कर्मकार का नाम रजिस्ट्रीकृत करेगा : परन्तु रजिस्ट्रीकरण के लिए कोई आवेदन आवेदक को सुनवाई का अवसर दिए बिना नामंजूर नहीं किया जाएगा। (६) उपधारा (५) के अधीन विनिश्चय से व्यथित कोई व्यक्ति ऐसे विनिश्चय की तारीख से तीस दिन के भीतर संबंधित बोर्ड के सचिव या इस निमित्त बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट किसी अन्य अधिकारी को अपील कर सकेगा तथा ऐसी अपील पर सचिव या ऐसे अन्य अधिकारी का विनिश्चय अंतिम होगा : परन्तु सचिव या इस निमित्त बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट कोई अन्य अधिकारी तीस दिन की उक्त कालावधि का अवसान होने पर अपील ग्रहण कर सकेगा यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि ऐसा व्यक्ति समय पर अपील फाइल करने से समुचित कारण से निवारित था। (७) बोर्ड का सचिव ऐसे रजिस्टर संधारित करवाएगा जैसा कि विहित किया जाए।
15. परिचय-पत्र
परिचय-पत्र संबंधित बोर्ड, प्रत्येक सदस्य को एक परिचय-पत्र, जिस पर उसका छायाचित्र (फोटोग्राफ) चिपका हो, देगा तथा जिसमें उसके द्वारा अनुसूचित नियोजन में किए गए कार्य के ब्यौरों की प्रविष्टि करने के लिए पर्याप्त स्थान होगा।
16. सदस्यता समाप्ति
सदस्यता समाप्ति (१) ऐसा असंगठित कर्मकार, जो इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया गया है, की सदस्यता,— (एक) धारा १९ के प्रवर्तन के परिणामस्वरूप; या (दो) जब वह,— (क) साठ वर्ष की आयु पूरी कर लेता है; या (ख) किसी अन्य कानूनी कल्याण निधि के अधीन सदस्य के रूप में, परिचय पत्रधारक के रूप में या हितधिकारी आदि के रूप में रजिस्ट्रीकृत हो जाता है जो ऐसी निधि से प्रसुविधा प्राप्त करने की उसे पात्रता प्रदान करता है, समाप्त हो जाएगी। (२) उपधारा (१) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, यदि कोई व्यक्ति साठ वर्ष की आयु पूर्ण करने के ठीक पूर्व लगातार विगत तीन वर्ष तक सदस्य रहा है तो वह ऐसी प्रसुविधा प्राप्त करने का पात्र होगा जैसी कि विहित की जाए।
17. सदस्यों का रजिस्टर
सदस्यों का रजिस्टर किसी स्थापना के संबंध में प्रत्येक नियोजक जिसको इस अधिनियम की धारा २१ के अधीन यह अधिनियम लागू होता है, एक रजिस्टर ऐसे प्रारूप में जैसा कि विहित किया जाए, संधारित करेगा जिसमें उसके द्वारा नियोजित सदस्यों के नियोजन के ब्यौरे दर्शाए जाएंगे। इस प्रकार संधारित रजिस्टर का संबंधित बोर्ड के सचिव या इस निमित्त बोर्ड द्वारा सम्यक् रूपेण प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के निरीक्षण किया जा सकेगा।
18. सदस्य द्वारा अभिदाय
सदस्य द्वारा अभिदाय ऐसा असंगठित कर्मकार जो इस अधिनियम के अधीन सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकृत किया गया है जब तक कि वह साठ वर्ष की आयु पूरी नहीं कर लेता है तब तक ऐसी दर पर जैसी कि बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, निधि में अभिदाय करेगा तथा भिन्न-भिन्न वर्गों के असंगठित कर्मकारों के लिए अभिदाय की भिन्न-भिन्न दरें विनिर्दिष्ट की जा सकेंगी :
परन्तु अभिदाय की दरें सामान्यतया प्रत्येक पांच वर्ष में एक बार पुनरीक्षित की जाएंगी।
19. अभिदाय के असंदाय का प्रभाव
अभिदाय के असंदाय का प्रभाव जहां किसी सदस्य ने धारा ८ के अधीन उस तारीख के पश्चात् जब अभिदाय शोध्य हो गया हो, लगातार एक वर्ष से अन्यून की कालावधि तक अपना अभिदाय संदत नहीं किया है तो वह सदस्य नहीं रह जाएगा:
परन्तु यदि बोर्ड के सचिव का यह समाधान हो जाता है कि अभिदाय का असंदाय युक्तियुक्त हेतुक से था तथा असंगठित कर्मकार बकाया जमा करने का इच्छुक है तो वह ऐसे कर्मकार को अभिदाय का बकाया जमा करने की अनुज्ञा दे सकेगा तथा बकाया के जमा कर दिए जाने पर, कर्मकार का रजिस्ट्रीकरण पुनःस्थापित हो जाएगा।
20. रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की नियुक्ति
रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की नियुक्ति राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा,−
(क) ऐसे व्यक्तियों को जो सरकार या स्थानीय निकाय के अधिकारी हों और जिन्हें वह उचित समझे, इस अधिनियम की धारा २२ के प्रयोजन के लिए रजिस्ट्रीकरण अधिकारी नियुक्त कर सकेगी; और
(ख) ऐसी सीमा परिनिश्चित कर सकेगी जिसके भीतर कोई रजिस्ट्रीकरण अधिकारी इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उसको प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करेगा।
21. स्थापना के रजिस्ट्रीकरण की अपेक्षा करने की शक्ति
स्थापना के रजिस्ट्रीकरण की अपेक्षा करने की शक्ति राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह अपेक्षा कर सकेगी कि ऐसे मानदंड तथा शर्तें, जैसा कि अधिसूचना में नियत की जाएं, की पूर्ति करने वाली प्रत्येक स्थापना इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार स्वयं को रजिस्ट्रीकृत कराएगी तथा तब यह अधिनियम प्रत्येक स्थापना को लागू हुआ माना जाएगा।
22. स्थापना का रजिस्ट्रीकरण
स्थापना का रजिस्ट्रीकरण (१) प्रत्येक नियोजक,−
(क) ऐसी स्थापना के संबंध में जिसको यह अधिनियम धारा २१ के अधीन कोई अधिसूचना जारी होने पर लागू होता है; और
(ख) किसी अन्य स्थापना के संबंध में, जिसको यह अधिनियम ऐसी अधिसूचना जारी होने के पश्चात् किसी समय लागू हो सकेगा,
उस तारीख से जिसको यह अधिनियम ऐसे स्थापना के लिए लागू होता है, साठ दिन की कालावधि के भीतर ऐसी स्थापना के रजिस्ट्रीकरण के लिए रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को आवेदन करेगा:
परन्तु रजिस्ट्रीकरण अधिकारी पूर्वोक्त कालावधि का अवसान होने के पश्चात् कोई ऐसा आवेदन ग्रहण कर सकेगा यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि आवेदक समुचित कारण से ऐसी कालावधि के भीतर आवेदन करने से निवारित था।
(२) उपधारा (१) के अधीन प्रत्येक आवेदन ऐसे प्रारूप में होगा, उसमें ऐसी विशिष्टियां अंतर्विष्ट होंगी तथा वह ऐसी फीस के साथ होगा जैसी कि विहित की जाएं।
(३) उपधारा (१) के अधीन ऐसा आवेदन प्राप्त होने पर रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ऐसी स्थापना को रजिस्ट्रीकृत करेगा तथा नियोजक को ऐसे प्ररूप में तथा ऐसे समय के भीतर और ऐसी शर्तों के अध्यधीन रहते हुए जैसी कि विहित की जाएं रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र जारी करेगा.
(४) जहां इस धारा के अधीन किसी स्थापना के रजिस्ट्रीकरण के पश्चात् ऐसी स्थापना के संबंध में उसके स्वामित्व या प्रबंधन या अन्य विहित विशिष्टियों में कोई परिवर्तन होता है, तो नियोजक द्वारा ऐसे परिवर्तन संबंधी विशिष्टियों की सूचना रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को ऐसे परिवर्तन की तारीख से तीस दिन के भीतर ऐसे प्ररूप में दी जाएगी जैसा कि विहित किया जाए।
23. कतिपय मामलों में रजिस्ट्रीकरण का प्रतिसंहरण
कतिपय मामलों में रजिस्ट्रीकरण का प्रतिसंहरण यदि रजिस्ट्रीकरण अधिकारी का इस निमित्त उसको किए गए किसी निर्देश पर या अन्यथा यह समाधान हो जाता है कि किसी स्थापना का रजिस्ट्रीकरण किसी सारवान तथ्य के दुर्व्यपदेशन से या छिपाने से अभिप्राय किया गया है या ऐसी स्थापना द्वारा किए गए किसी संकर्म के संबंध में इस अधिनियम के उपबंध का अनुपालन नहीं किया गया है या यह कि किसी अन्य कारण से रजिस्ट्रीकरण अनुपयोगी या प्रभावहीन हो गया है तथा उसे प्रतिसंहृत किया जाना अपेक्षित है, तो वह स्थापना के नियोजक को सुनवाई का अवसर दिए जाने के पश्चात् रजिस्ट्रीकरण प्रतिसंहृत कर सकेगा।
24. अपील
अपील (१) धारा २३ के अधीन किए किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, उस तारीख से जिसको उसे आदेश संसूचित किया है, तीस दिन के भीतर अपील अधिकारी को अपील प्रस्तुत कर सकेगा जो राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त नामनिर्दिष्ट व्यक्ति होगा:
परन्तु अपील अधिकारी तीस दिन की उक्त कालावधि का अवसान हो जाने के पश्चात् अपील ग्रहण कर सकेगा यदि उसका समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी पर्याप्त कारण से समय पर अपील फाइल करने से निवारित था।
(२) उपधारा (१) के अधीन अपील प्राप्त होने पर, अपील अधिकारी अपीलार्थी को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् प्रतिसंहरण के आदेश की यथासंभव शीघ्रता के साथ पुष्टि कर सकेगा, उसे उपांतरित कर सकेगा या उलट सकेगा।
25. अरजिस्ट्रीकरण का प्रभाव
अरजिस्ट्रीकरण का प्रभाव ऐसी स्थापना का जिसको धारा २१ के अधीन यह अधिनियम लागू होता है नियोजक,−
(क) धारा २१ के अधीन रजिस्ट्रीकृत किए जाने के लिए अपेक्षित ऐसी स्थापना की दशा में, किन्तु जो उस धारा के अधीन रजिस्ट्रीकृत नहीं की गई है;
(ख) ऐसी स्थापना की दशा में जिसके संबंध में रजिस्ट्रीकरण धारा २३ के अधीन प्रतिसंहृत किया गया है तथा धारा २४ के अधीन ऐसी अपील को प्रस्तुत करने के लिए विहित कालावधि के भीतर ऐसे प्रतिसंहरण के आदेश के विरुद्ध कोई अपील प्रस्तुत नहीं की गई जहां ऐसी अपील इस प्रकार प्रस्तुत की गई है, ऐसी अपील खारिज कर दी गई है,
यथास्थिति धारा २२ की उपधारा (१) में निर्दिष्ट कालावधि का अवसान हो जाने के पश्चात् या धारा २३ के अधीन रजिस्ट्रीकरण का प्रतिसंहरण होने के पश्चात् या धारा २४ के अधीन अपील प्रस्तुत करने की कालावधि का अवसान होने के पश्चात् या अपील के खारिज होने के पश्चात् स्थापना में असंगठित कर्मकार नियोजित नहीं करेगा।
26. नियोजकों द्वारा अभिदाय
नियोजकों द्वारा अभिदाय (१) प्रत्येक नियोजक, जिसकी स्थापना का रजिस्ट्रीकरण धारा २१ के अधीन अपेक्षित है, प्रत्येक मास की १६ तारीख के पूर्व उपधारा (२) में विनिर्दिष्ट बोर्ड को, उसके द्वारा पूर्व मास के दौरान असंगठित कर्मकारों को देय मजदूरी की पांच प्रतिशत से अनधिक ऐसे प्रतिशतता के समतुल्य राशि जैसी कि इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए, देगा।
(२) कोई नियोजक उपधारा (१) के अधीन अपना अभिदाय मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड या मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड को संदत करेगा जो इस बात पर निर्भर करेगा कि उसकी स्थापना कहां अवस्थित है, नगरीय क्षेत्र में या ग्रामीण क्षेत्र में.
(३) उपधारा (१) के अधीन संदेय अभिदाय, सचिव या बोर्ड के ऐसे अन्य अधिकारी जिसे बोर्ड द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए, के पक्ष में डिमांड ड्राफ्ट द्वारा संदत किया जाएगा जिसके साथ ऐसे प्ररूप में जैसा कि बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, विवरण पत्र संलग्न किया जाएगा.
(४) उपधारा (१) के अधीन संदेय अभिदाय के परिणामस्वरूप, नियोजक द्वारा असंगठित कर्मकार को संदेय मजदूरी में से कोई कटौती नहीं की जाएगी.
(५) यदि बोर्ड की यह राय है कि इस अधिनियम के अधीन उपधारा (१) में विनिर्दिष्ट तारीख को नियोजक द्वारा देय किसी राशि का संदाय नहीं किया गया है तो वह एक मांग नोटिस ऐसे प्ररूप में जैसा कि विहित किया जाए, जारी करेगा जिसमें नियोजक से अपेक्षा की जाएगी कि वह एक मास के भीतर राशि जमा करे या यह कारण बताए कि क्यों न इसे ढससे भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूल कर ली जाए.
(६) यदि उपधारा (५) के अधीन जारी नोटिस के अनुसरण में कोई नियोजक नोटिस में विनिर्दिष्ट कालावधि के भीतर रकम जमा करने में और साथ ही बोर्ड के समाधान रूप में कारण बताने में असफल रहता है तो बोर्ड, संबंधित जिले के कलक्टर को एक प्रमाण-पत्र उसमें कथित रकम की वसूली भू-राजस्व की बकाया की तौर पर करने हेतु जारी कर सकेगा और तदुपार कलक्टर उस रकम की भू-राजस्व की बकाया के तौर पर वसूली करने के लिए अग्रसर होगा और रकम को बोर्ड को विप्रेषित कर देगा:
परन्तु यदि नियोजक उपधारा (५) के अधीन जारी नोटिस के प्रत्युत्तर में कारण बताते हुए अभ्यावेदन प्रस्तुत कर देता है तो ऐसे अभ्यावेदन पर विचार करने, ऐसी जांच जैसी आवश्यक समझी जाए, करने और अभ्यावेदन रद्द करने के कारण देते हुए विस्तृत आदेश पारित करने के बाद ही उपर्युक्तानुसार प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा.
(७) उपधारा (५) और (६) के अधीन बोर्ड की शक्तियों का उसके सचिव द्वारा, और ऐसे अन्य अधिकारियों द्वारा जो कि बोर्ड द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किए जाएं, प्रयोग किया जाएगा।
27. निरीक्षकों की नियुक्ति
निरीक्षकों की नियुक्ति (१) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, अपने ऐसे अधिकारियों, बोर्ड के अधिकारियों, और धारा ४४ के अधीन नियुक्त किए गए उसके (बोर्ड के) अभिकर्ताओं के ऐसे अधिकारियों को, जैसा वह उचित समझे इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए निरीक्षक के रूप में नियुक्त कर सकेगी और उन्हें ऐसी स्थानीय सीमाएं समनुदेशित कर सकेगी जैसी कि वह उचित समझे.
(२) इस धारा के अधीन नियुक्त किया गया प्रत्येक निरीक्षक श्रम आयुक्त के नियंत्रण के अध्यधीन होगा और वह श्रम आयुक्त के साधारण नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अध्यधीन रहते हुए अपनी शक्तियों का प्रयोग करेगा और अपने कृत्यों का पालन करेगा.
(३) इस धारा के अधीन नियुक्त किया गया प्रत्येक निरीक्षक, भारतीय दंड संहिता, १८६० (१८६० का ४५) की धारा २१ के अर्थ के अंतर्गत लोक सेवक समझा जाएगा।
28. निरीक्षक की शक्तियां
निरीक्षक की शक्तियां (१) इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अध्यधीन रहते हुए, कोई निरीक्षक, उन स्थानीय सीमाओं के भीतर जिनके लिए उसे नियुक्त किया गया है तथा अध्याय-४ के उपबंधों को प्रवर्तित करने की दृष्टि से,−
(क) समस्त युक्तियुक्त समयों पर, अपने ऐसे सहायकों (यदि कोई हों), के साथ जो कि सरकारी या किसी स्थानीय या अन्य लोक प्राधिकारी की सेवा के व्यक्ति हों, किन्हीं परिसरों या स्थान में जहां असंगठित कर्मकार नियोजित हैं या जहां से उन्हें (कर्मकारों को) कार्य दिया जाता है, किसी रजिस्टर या अभिलेख या नोटिसों के जिनका वहां रखा जाना या प्रदर्शित किया जाना इस अधिनियम या किसी अन्य अधिनियम के द्वारा या उनके अधीन अपेक्षित है, परीक्षण के प्रयोजन के लिए प्रवेश कर सकेगा या उनकी तलाशी ले सकेगा;
(ख) किसी ऐसे व्यक्ति का परीक्षण कर सकेगा जो उस परिसर या स्थान में पाया जाए, और जिसके बारे में उसमें नियोजित असंगठित कर्मकार के होने का विश्वास करने के लिए उसके पास युक्तियुक्त कारण है या वहां उसे कार्य दिया जाता है;
(ग) असंगठित कर्मकार को काम देने वाले व्यक्ति से, कोई सूचना देने की अपेक्षा कर सकेगा जिसका दिया जाना उसकी शक्ति के अधीन है और जो उन व्यक्तियों के नाम और पते से संबंधित है जिनके लिए कार्य दिया जाता है या जिनसे कार्य लिया जाता है और उक्त कार्य के लिए भुगतान किया जाता है;
(घ) ऐसे रजिस्टर, मजदूरी के अभिलेख या नोटिसों अथवा उनके प्रभागों की प्रतियां अभिगृहीत करेगा या लेगा जो कि वह इस अधिनियम के अधीन अपराध के संबंध में सुसंगत समझे, जिसके बारे में उसे यह विश्वास करने का कारण है कि वह नियोजक द्वारा किया गया है; और
(ङ) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा जैसा कि विहित किया जाए:
परन्तु इस उपधारा के अधीन शक्तियों का प्रयोग राज्य सरकार या श्रम आयुक्त द्वारा इस निमित्त जारी साधारण या विशेष आदेश के अनुसार किया जाएगा.
(२) कोई व्यक्ति जिससे उपधारा (१) के अधीन निरीक्षक द्वारा किसी दस्तावेज को प्रस्तुत करने या किसी जानकारी को देने की अपेक्षा की जाती है, वह भारतीय दंड संहिता, १८६० (१८६० का ४५) की धारा १७५ और १७६ के अधीन ऐसा करने के लिए विधिक रूप से बाध्य समझा जाएगा.
(३) दण्ड प्रक्रिया संहिता, १९७३ (१९७४ का २) के उपबंध जहां तक हो सके, उपधारा (१) के अधीन तलाशियों और अभिग्रहण पर उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वह उक्त संहिता की धारा ९४ के अधीन जारी प्राधिकारी के वारंट के अधीन तलाशियों और अभिग्रहण पर लागू होते हैं।
29. संपत्ति के अंतरण पर अतिरिक्त शुल्क
संपत्ति के अंतरण पर अतिरिक्त शुल्क अचल सम्पत्ति के विक्रय, दान या बंधक से संबंधित लिखतों पर भारतीय स्टाम्प अधिनियम, १८९९ (१८९९ का २) के अधीन अधिरोपित शुल्क को, यथास्थिति, ऐसी सम्पत्ति के, मूल्य के, या बंधक की दशा में ऐसे लिखत द्वारा प्रतिभूत रकम के, एक प्रतिशत से अनधिक ऐसी दर से बढ़ाया जाएगा, जैसी कि राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर, विनिर्दिष्ट करे:
परन्तु बंधक के संबंध में अधिरोपित ऐसा अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क, उस पर स्टाम्प शुल्क की रकम से अधिक नहीं होगा।
30. कतिपय प्रवर्गों के मोटरियानों पर अतिरिक्त कर
कतिपय प्रवर्गों के मोटरियानों पर अतिरिक्त कर मध्यप्रदेश मोटरयान कराधान अधिनियम, 1991 की प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट मोटरयानों पर तिमाही कर की दर उस दर से बढ़ाई जाएगी जो पांच प्रतिशत से अधिक नहीं होगी जैसी राज्य सरकार, समय-समय पर, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे।
31. वन उत्पाद के विक्रय या प्रदाय पर कल्याण उपकर
वन उत्पाद के विक्रय या प्रदाय पर कल्याण उपकर (1) विक्रय की गई और प्रदाय की गई प्रत्येक वन उत्पाद पर वन विभाग द्वारा ऐसे मूल्य के जिस पर ऐसा वन उत्पाद बेचा या प्रदाय किया जाता है, एक प्रतिशत से अनधिक ऐसी दर से कल्याण उपकर उदगृहीत और संग्रहीत किया जाएगा जैसा कि राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर, विनिर्दिष्ट करे। (2) उपधारा (1) के अधीन उदगृहीत कल्याण उपकर, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन वन उत्पाद पर उदग्रहणीय किसी कर के अतिरिक्त होगा। (3) वन विभाग द्वारा विक्रय किये गये या प्रदाय किये गये वन उत्पाद के संबंध में उपधारा (1) के अधीन देय कल्याण उपकर उस व्यक्ति द्वारा देय होगा जिसको वन उत्पाद विक्रय या प्रदाय किया जाता है और ऐसे विक्रय या प्रदाय से संबंधित वन विभाग के अधिकारी या कर्मचारी द्वारा ऐसे विक्रय या प्रदाय के समय संग्रहीत किया जाएगा और वसूल किया जाएगा। स्पष्टीकरण.—अभिव्यक्ति "वन विभाग" और "वन उत्पाद" का वही अर्थ होगा जो मध्यप्रदेश कराधान अधिनियम, 1982 (क्रमांक 15 सन् 1982) में उसे समुददेशित किया गया है।
32. कतिपय गौण खनिजों पर रायल्टी और अनिवार्य भाटक के संबंध में उपबंध
कतिपय गौण खनिजों पर रायल्टी और अनिवार्य भाटक के संबंध में उपबंध राज्य सरकार द्वारा इस निमित जारी अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट की जाने वाली तारीख से खान और खनिज (विनियमन और विकास) अधिनियम, 1957 (1957 का सं. 67) की धारा 15 की उपधारा (3) के अधीन मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम, 1996 की अनुसूची-1 में सम्मिलित गौण खनिज के संबंध में देय रायल्टी अथवा अनिवार्य भाटक के पांच प्रतिशत के बराबर रकम पृथक् रखी जाएगी तथा धारा 33 के उपबंधों के अनुसार अदा की जाएगी।
33. धारा 29 से 31 के अधीन उद्गृहीत रकम के संग्रहण की प्रक्रिया तथा धारा 32 के अधीन रकम को पृथक् रखने तथा धारा 8 के अधीन गठित निधि में उन्हें जमा करने के लिए प्रक्रिया
धारा 29 से 31 के अधीन उद्गृहीत रकम के संग्रहण की प्रक्रिया तथा धारा 32 के अधीन रकम को पृथक् रखने तथा धारा 8 के अधीन गठित निधि में उन्हें जमा करने के लिए प्रक्रिया (1) धारा 29, 30 तथा 31 के अधीन उदगृहीत क्रमशः अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क, मोटर यान कर तथा कल्याण उपकर तथा धारा 32 के अधीन पृथक् की गई रायल्टी या अनिवार्य भाटक के आगम को प्रथमतः संग्रहीत किया जाएगा और उसे संचित निधि में ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, जमा किया जाएगा। (2) राज्य सरकार प्रत्येक वित्तीय वर्ष के प्रारंभ होने पर विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात् पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में उक्त धारा 29, 30 तथा 31 के अधीन वसूल किए गए आगम तथा धारा 32 के अधीन पृथक् रखी गई रकम के समतुल्य रकम को संचित निधि में से आहरित करेगी और इस प्रकार आहरित रकम को वित्तीय वर्ष की 31 जुलाई तक धारा 8 के अधीन गठित निधियों में निम्नलिखित रीति में संदत करेगी और उक्त निधि में ऐसी जमा राशि राज्य की संचित निधि पर प्रभारित होगी :— (एक) धारा 31 तथा 32 के अधीन वसूल की गई रकम मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण निधि में जमा की जाएगी; (दो) धारा 30 के अधीन वसूल की गई रकम मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण निधि में जमा की जाएगी; (तीन) धारा 29 के अधीन वसूल की गई रकम धारा 8 के अधीन गठित दोनों निधियों के बीच ऐसी रीति में विभाजित की जाएगी जैसी कि विहित की जाए।
34. अधिसूचित कृषि उपज के विक्रय पर कल्याण उपकर
अधिसूचित कृषि उपज के विक्रय पर कल्याण उपकर (1) प्रत्येक अधिसूचित कृषि उपज, जिस पर मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1972 (क्रमांक 24 सन् 1973) की धारा 19 के अधीन बाजार फीस उदगृहीत की जाती है, के विक्रय पर कल्याण उपकर ऐसी दर से जो बाजार फीस के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा, जैसा कि राज्य सरकार, समय-समय पर, अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, उदगृहीत किया जाएगा। (2) उपधारा (1) के अधीन कल्याण उपकर को उक्त धारा 19 के अधीन उदगृहीत एवं संग्रहीत की जाने वाली बाजार फीस के साथ मंडी समिति द्वारा संग्रहीत किया जाएगा। (3) कल्याण उपकर उसी व्यक्ति द्वारा संदत किया जाएगा जो उक्त धारा 19 की उपधारा (2) के अधीन बाजार फीस संदत करने के दायी है। (4) मंडी समिति द्वारा प्रत्येक माह संग्रहीत कल्याण उपकर की रकम मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड को पश्चात्वर्ती माह की 15 तारीख तक प्रेषित की जाएगी तथा बोर्ड इस प्रकार प्राप्त की गई समस्त रकम को मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण निधि में जमा करेगा। (5) मंडी समिति द्वारा कल्याण उपकर के संग्रहण, उसका लेखा रखने तथा बोर्ड को अंतरण करने की प्रक्रिया ऐसी होगी जैसी कि विहित की जाए। स्पष्टीकरण.—अभिव्यक्ति "मंडी समिति", "बाजार फीस" तथा "अधिसूचित कृषि उपज" के वही अर्थ होंगे जो मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1972 (क्रमांक 24 सन् 1973) में क्रमशः उनके लिए समुददेशित किये गये हैं।
35. बाधा डालने के लिए शास्ति
बाधा डालने के लिए शास्ति (1) जो कोई किसी निरीक्षक को इस अधिनियम के अधीन उसके कर्तव्यों का निर्वहन करने में बाधा डालेगा या किसी स्थापना के संबंध में इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्राधिकृत किसी निरीक्षण, परीक्षण, जांच या अन्वेषण करने के लिए युक्तियुक्त सुविधा देने से इंकार करेगा या जानबूझकर उपेक्षा करेगा, वह ऐसे कारावास से जिसकी अवधि तीन मास तक हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा। (2) जो कोई, किसी निरीक्षक द्वारा मांग किए जाने पर इस अधिनियम के अनुसरण में रखे गये किसी रजिस्टर या अन्य दस्तावेज को पेश करने से जानबूझकर इंकार करेगा अथवा किसी ऐसी बात को निवारित करेगा या निवारित करने का प्रयास करेगा अथवा कोई ऐसी बात करेगा जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि उससे किसी व्यक्ति के, इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों के अधीन कार्य करने वाले निरीक्षक के समक्ष उपसंजात होने से, या उसके द्वारा परीक्षण किये जाने से निवारित किए जाने की संभावना है, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा।
36. अन्य अपराधों के लिए शास्ति
अन्य अपराधों के लिए शास्ति (1) जो कोई, इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध का या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों का उल्लंघन करेगा अथवा इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध का या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों का अनुपालन करने में असफल रहेगा वह, यथास्थिति, ऐसे प्रत्येक उल्लंघन या असफलता के लिए जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, और यथास्थिति, जारी रहने वाले उल्लंघन या असफलता की दशा में, ऐसे अतिरिक्त जुर्माने से, जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान ऐसा उल्लंघन या असफलता ऐसे प्रथम उल्लंघन या असफलता के लिए दोषसिद्धि के पश्चात् जारी रहती है एक सौ रुपये तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा। (2) उपधारा (1) के अधीन कोई शास्ति श्रम आयुक्त या सहायक श्रम आयुक्त से अनिन श्रेणी के ऐसे अन्य अधिकारी द्वारा, जिसे राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में अधिसूचना द्वारा सशक्त किया जाए, अधिरोपित की जा सकेगी। (3) कोई शास्ति तब तक अधिरोपित नहीं की जाएगी, जब तक कि संबंधित व्यक्ति को लिखित सूचना,— (क) उन आधारों को, जिन पर शास्ति अधिरोपित करने का प्रस्ताव है, जानकारी देते हुए; और (ख) उसे ऐसे युक्त-युक्त समय के भीतर, जो उसमें उल्लिखित शास्ति के अधिरोपण के बारे में सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, लिखित अभिवेदन करने का और यदि वह ऐसी वांछा करता है तो उस मामले में उसकी सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देते हुए, नहीं दे दी जाती है। (4) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी अन्य उपबंध पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, श्रम आयुक्त और ऐसे अन्य अधिकारियों को, जो उपधारा (2) के अधीन सशक्त किए जाएं, निम्नलिखित विषयों की बाबत् इस धारा के अधीन किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां प्राप्त होंगी, अर्थात् :— (क) साक्षियों को समन करना और हाजिर करना; (ख) किसी दस्तावेज के प्रकट और पेश करने की अपेक्षा करना; (ग) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रति की अध्यपेक्षा करना; (घ) शपथ-पत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना; और (ङ) साक्षियों या दस्तावेजों के परीक्षण के लिए कमीशन जारी करना। (5) इस धारा में अंतर्विष्ट किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह संबंधित व्यक्ति को यथास्थिति, इस अधिनियम या किसी अन्य विधि द्वारा दण्डनीय बनाए गए किसी अपराध के लिए इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन या किसी अन्य विधि के अधीन अभियोजित किए जाने से अथवा इस अधिनियम या किसी ऐसे विधि के अधीन उस शास्ति या दण्ड से जो इस धारा द्वारा उस अपराध के लिए उपबंधित है, कोई अन्य या उच्चतर शास्ति के लिए दायी होने से निवारित करती है : परन्तु किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए दो बार दंडित नहीं किया जाएगा।
37. Appeal
(1) Any person aggrieved by the imposition of any penalty under section 36, (a) where the penalty is imposed by the Labour Commissioner, to the State Government; (b) where the penalty is imposed by an officer subordinate to the Labour Commissioner, to such authority as may be prescribed, may appeal within a period of three months from the date of communication of such penalty to such person: Provided that, if the State Government or the prescribed authority, as the case may be, is satisfied that the appellant was prevented by sufficient cause from preferring the appeal within the said period of three months, it may allow such appeal to be preferred within a further period of three months. (c) shall be entertained only on the complaint made by an officer related to the registered trade union or by any official of the trade union under Trade Unions Act, 1926 (16 of 1926) and not otherwise. (2) No court of a Judicial Magistrate of the First Class shall take cognizance of any offence punishable under this Act, except upon a complaint made by such person within three months of the date on which the alleged offence came to the knowledge of the Inspector, or any official of the voluntary organisation or any official of the concerned trade union.
38. जुर्माने की वसूली
जुर्माने की वसूली जहां धारा 36 के अधीन किसी व्यक्ति पर अधिरोपित किसी जुर्माने का संदाय नहीं किया जाता है वहां,— (एक) यथास्थिति, श्रम आयुक्त या धारा 36 की उपधारा (2) के अधीन सशक्त अन्य अधिकारी इस प्रकार संदेय रकम को, ऐसे व्यक्ति के माल को, जो उसके नियंत्रण के अधीन है, प्रतिधृत करके या उसका विक्रय करके वसूल करेगा; या (दो) यदि रकम खण्ड (एक) में उपबंधित रीति से ऐसे व्यक्ति से वसूल नहीं की जा सकती है, तो यथास्थिति, श्रम आयुक्त या धारा 36 की उपधारा (2) के अधीन सशक्त अन्य अधिकारी ऐसे व्यक्ति से शोध्य रकम को विनिर्दिष्ट करते हुए एक प्रमाण-पत्र तैयार कर सकेगा जिस पर उसके हस्ताक्षर होंगे और उसे उस जिले के कलक्टर को जिसमें ऐसा व्यक्ति किसी संपत्ति का स्वामी है या निवास करता है या अपना कारोबार करता है, भेजेगा और उक्त कलक्टर ऐसे प्रमाण-पत्र के प्राप्त होने पर उसमें विनिर्दिष्ट रकम को ऐसे व्यक्ति से वसूल करने के लिए वैसे ही अग्रसर होगा मानो वह भू-राजस्व की बकाया है।
39. कंपनियों द्वारा अपराध
कंपनियों द्वारा अपराध (1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया हो, वहां ऐसे प्रत्येक व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारोबार के संचालन के लिए, उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे : परन्तु इस उपधारा में अंतर्विष्ट कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी। (2) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध, किसी कम्पनी द्वारा किया गया हो और यह साबित हो जाए कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा। स्पष्टीकरण.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,— (क) "कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम है; या (ख) फर्म के संबंध में "निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है।
40. अपराधों का संज्ञान
अपराधों का संज्ञान (1) कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का संज्ञान श्रम आयुक्त या राज्य सरकार द्वारा इस निमित प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी की पूर्व लिखित मंजूरी से,— (क) किसी निरीक्षक द्वारा; या (ख) सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी स्वैच्छिक संगठन के पदाधिकारी द्वारा; या
41. Limitation for prosecution
No court shall take cognizance of any offence punishable under this Act unless the complaint thereof is made within three months from the date on which the alleged offence came to the knowledge of the prosecution, Inspector, any official of any voluntary organisation or any official of any concerned trade union.
42. Power to grant exemption
The State Government may, by notification and subject to such conditions and for such period as may be specified in the notification, exempt all or any of the provisions of this Act or any provision in their application to all unorganised labourers engaged in any scheduled employment or in any establishment or any part of an establishment, or to any class or classes of them, if the State Government is of the opinion that such unorganised labourers are enjoying benefits which are not less favourable than those provided by or under this Act: Provided that the State Government may, by notification, at any time, for reasons to be specified, rescind the aforesaid notification.
43. Amendment of Schedule
The State Government may, by notification, after giving at least three months notice of its intention to do so by the same notification, add to or amend any item of the Schedule of any employment in respect of which it is of the opinion that the provisions of this Act should apply, and thereupon the Schedule shall be deemed to be amended accordingly to include such employments, to which the provisions of this Act shall apply.
44. Power of Board to appoint agents
(1) Notwithstanding anything contained in this Act, the Board may, for the performance of all or any of the following tasks, appoint agents from one or more of the bodies referred to in sub-section (2) or sub-section (3): (i) registration of members and/or employers; (ii) collection of contributions from members and/or employers; (iii) issuance of identity cards to members and their renewal; (iv) receipt of applications from members for providing benefits, processing such applications and sanctioning benefits; (v) collection of instalments of any loan or advance given by or on behalf of the Board: Provided that the task of registration of employers and collection of their contributions shall be assigned only to those local bodies as are appointed as agents. (2) The Madhya Pradesh Rural Unorganised Labourers Welfare Board may appoint as agent under sub-section (1) any one or more of the following bodies: (i) Zila or Janpad Panchayat under the M.P. Panchayat Raj Avam Gram Swaraj Adhiniyam, 1993 (No. 1 of 1993); (ii) Nagar Panchayat constituted under the Madhya Pradesh Municipalities Act, 1961 (No. 37 of 1961); (iii) District Cooperative Union or any of its constituent units under the M.P. Rajya Laghu Vanopaj (Vyapar Avam Vikas) Sahkari Sangh; (iv) M.P. State Cooperative Dairy Federation or any of its constituent units; (v) M.P. State Cooperative Fisheries Federation or any of its constituent units; (vi) Any other Cooperative Society registered under the M.P. Cooperative Societies Act, 1960 (No. 17 of 1961) or M.P. Swayat Sahkarita Adhiniyam, 1999 (No. 2 of 2000); (vii) Any Labour Welfare Board constituted under any Central or State Act by whatever name called; (viii) Trade Union registered under the Trade Unions Act, 1926 (16 of 1926); (ix) Any voluntary agency working for the welfare of unorganised labourers, registered under the Societies Registration Act, 1973 (No. 44 of 1973). (3) The Madhya Pradesh Urban Unorganised Labourers Welfare Board may appoint as agent under sub-section (1) any one or more of the following: (i) Municipal Corporation or Municipal Council constituted under the M.P. Municipal Corporation Act, 1956 (No. 23 of 1956) or M.P. Municipalities Act, 1961 (No. 37 of 1961); (ii) District Urban Development Agency; (iii) Any Cooperative Society registered under the M.P. Cooperative Societies Act, 1960 (No. 17 of 1961) or M.P. Swayat Sahkarita Adhiniyam, 1999 (No. 2 of 2000); (iv) Any Labour Welfare Board constituted under any Central or State Act by whatever name called; (v) Trade Union registered under the Trade Unions Act, 1926 (16 of 1926); (vi) Any voluntary agency working for the welfare of unorganised labourers, registered under the Societies Registration Act, 1973 (No. 44 of 1973). (4) The Board shall obtain prior consent of any body other than Municipal Corporation, Municipal Council, Nagar Panchayat, Zila Panchayat and Janpad Panchayat before appointing such body as its agent under sub-section (2) or sub-section (3). (5) The Board shall make regulations to regulate the appointment and functioning of its agents.
45. Delegation of Powers
The Board may, by general or special order, delegate to the Chairperson or any other member or to the Secretary or any officer or employee of the Board, such powers and duties under this Act as it may deem necessary, subject to such conditions and limitations, if any, as may be specified in the order.
46. Review and monitoring of the implementation of the Act by District Planning Committee
(1) Notwithstanding anything contained in any other Act for the time being in force, it shall be the duty of the District Planning Committee to review and monitor the implementation of this Act in the district at least once in every six months and include it in its meeting. (2) Every review meeting referred to in sub-section (1) shall include, in addition to the members of the committee, at least three and not more than five representatives each of (a) unorganised labourers, (b) their employers, and (c) experts, active activists and voluntary agencies situated in the district, invited to be present as "Stakeholders". (3) The "Stakeholders" referred to in sub-section (2) shall have the right to participate in the discussions in the meeting but shall not have the right to vote. (4) The "Stakeholders" referred to in sub-section (2) shall be nominated for a period of two years at a time by the Chairperson of the committee in consultation with its Member Secretary: Provided that the term of a Stakeholder shall continue until his successor is nominated. (5) The District Planning Committee may delegate any of its duties under sub-section (1) to a Sub-committee: Provided that the Sub-committee shall invite the stakeholders to be present in every review meeting of the sub-committee. Explanation. (1) For the purposes of this section, "District Planning Committee" and its "Sub-committee" mean the committees formed under section 3 and 9 of the M.P. Zila Yojana Samiti Adhiniyam, 1995 (No. 19 of 1995) respectively. (2) The word "members" in sub-section (2) includes the special invitees mentioned in section 5 of the aforesaid Act.
47. Returns
The Board shall furnish such returns to the State Government from time to time as it may require.
48. Protection of action taken in good faith
No suit, prosecution or other legal proceeding shall lie against any person for anything which is in good faith done or intended to be done in pursuance of this Act or any rule or order made thereunder.
49. निदेश देने की राज्य सरकार की शक्ति
निदेश देने की राज्य सरकार की शक्ति राज्य सरकार किसी बोर्ड को इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के बारे में निदेश दे सकेगी।
50. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति
कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत होते हों :
परन्तु ऐसा कोई आदेश, इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तारीख से दो वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा।
51. नियम बनाने की शक्ति
नियम बनाने की शक्ति (१) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी।
(२) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :- (क) धारा ३ की उपधारा (४) के अधीन बोर्ड के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति के निबन्धन तथा शर्तें, उनको संदेय वेतन तथा अन्य भत्ते और उनके पदों में आकस्मिक नियुक्तियों को भरने की रीति; (ख) धारा ५ की उपधारा (१) के अधीन बोर्ड के सम्मिलन का समय और स्थान तथा ऐसे सम्मिलन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया के नियम जिनके अन्तर्गत कारबार के संव्यवहार के लिए आवश्यक गणपूर्ती भी है; (ग) प्रसुविधा, जो धारा ७ की उपधारा (२) के अधीन दी जाएं; (घ) धारा ७ की उपधारा (५) के खण्ड (ख) के अधीन स्थानीय प्राधिकारियों और कर्मचारियों को संदेय सहायता अनुदान की सीमा; (ङ) वह प्ररूप, जिसमें और वह समय जिसके भीतर धारा १० के अधीन बोर्ड का बजट तैयार किया जाएगा और सरकार को भेजा जाएगा; (च) वह प्ररूप जिसमें और वह समय जिसके भीतर धारा ११ के अधीन बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत की जाएगी; (छ) धारा १२ की उपधारा (३) के अधीन लेखाओं के वार्षिक विवरण का प्ररूप और वह तारीख जिसके पूर्व उपधारा (३) के अधीन संपरीक्षक की रिपोर्ट के साथ लेखाओं की संपरीक्षित प्रति दी जाएगी; (ज) उन रजिस्टरों का प्ररूप जो धारा १४ की उपधारा (७) के अधीन संधारित किए जाएंगे; (झ) वे प्रसुविधाएं, जो धारा १६ की उपधारा (२) के अधीन दी जा सकेंगी; (ञ) उन रजिस्टरों का प्ररूप जो धारा १७ के अधीन नियोजक द्वारा संधारित किए जाएंगे; (ट) धारा २२ की उपधारा (२) के अधीन आवेदन का प्ररूप, वे विशिष्टियां जो उसमें होंगी और संदत्त की जाने वाली फीस; (ठ) धारा २२ की उपधारा (३) के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र का प्ररूप, वह समय जिसके भीतर और वे शर्तें जिनके अध्यधीन रहते हुए ऐसा प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा; (ड) वह प्ररूप जिसमें स्वामित्व या प्रबंध में परिवर्तन या अन्य विशिष्टियों की सूचना धारा २२ की उपधारा (४) के अधीन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को दी जाएंगी; (ढ) वह प्ररूप जिसमें धारा २६ की उपधारा (५) के अधीन बोर्ड द्वारा नियोजक को मांग सूचना जारी की जाएगी; (ण) ये शक्तियां जिनका धारा २० की उपधारा (१) के खण्ड (ठ) के अधीन किसी निरीक्षक द्वारा प्रयोग किया जा सकेगा; (त) वह रीति जिसमें क्रमशः धारा २९, ३० तथा ३१ के अधीन उद्गृहीत किया गया अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क, मोटरयान कर तथा कल्याण उपकर और धारा ३२ के अधीन पृथक् रखी गयी रायल्टी या अनिवार्य भाटक संग्रहीत तथा राज्य की संचित निधि में जमा किया जाएगा; (थ) वह रीति जिसमें धारा २९ के अधीन वसूल की गई रकम धारा ३३ के अधीन दो निधियों के बीच प्रभाजित की जाएगी; (द) धारा ३४ की उपधारा (५) के अधीन कल्याण उपकर के संग्रहण तथा लेखा रखने और उसे बोर्ड को अंतरित करने की प्रक्रिया; (ध) वह प्राधिकारी जिसे धारा ३७ की उपधारा (१) के अधीन अपील की जाएगी; (न) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना अपेक्षित है या विहित किया जाए।
(३) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र राज्य विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा।
52. विनियम बनाने की शक्ति
विनियम बनाने की शक्ति (१) बोर्ड, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से अपने कारबार को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए ऐसे विनियम बना सकेगा जो इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों से संगत हों।
(२) विशिष्टतया और उपधारा (१) की शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित समस्त या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :- (क) बोर्ड के सचिव तथा अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की धारा ४ की उपधारा (३) के अधीन नियुक्ति का ढंग, सेवा के निबन्धन तथा शर्तें और उनको संदेय वेतन तथा भत्ते; (ख) बोर्ड की उपसमितियों का गठन, बोर्ड के कृत्य तथा शक्तियां जो ऐसी उपसमितियां प्रयोग करें तथा वह रीति जिसमें वह ऐसा कर सकती है : परन्तु बोर्ड की प्रत्येक उपसमिति में प्रतिनिधित्व कर रहे असंगठित कर्मकारों के सदस्य तथा उनके नियोजकों की सदैव समान संख्या समाविष्ट होगी; (ग) वह प्ररूप, जिसमें सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन धारा १४ की उपधारा (३) के अधीन किया जाएगा; (घ) वह दस्तावेज तथा फीस जो धारा १४ की उपधारा (४) के अधीन आवेदन के साथ संलग्न होगी; (ङ) सचिव के अलावा बोर्ड के अधिकारी जो धारा १४ की उपधारा (५) के अधीन पारित आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई के लिए सक्षम होंगे; (च) वह प्ररूप, जिसमें धारा १५ के अधीन सदस्यों को परिचय-पत्र जारी किए जाएंगे; (छ) सदस्यों के भिन्न-भिन्न प्रवर्गों द्वारा देय अभिदाय की दरें तथा उनके संग्रहण की रीति; (ज) बोर्ड को नियोजकों के अभिदाय के भुगतान का ढंग; (झ) धारा ४४ के अधीन अभिकर्ताओं की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया, उनके कृत्यों की प्रक्रिया तथा वह रीति जिसमें बोर्ड उनके कामकाज का पर्यवेक्षण करेगा।
53. बोर्ड द्वारा स्कीमों का तैयार किया जाना
बोर्ड द्वारा स्कीमों का तैयार किया जाना (१) बोर्ड, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से धारा ७ की उपधारा (२) के अधीन सदस्यों को प्रसुविधा देने के लिए स्कीम तैयार कर सकेगा।
(२) स्कीम में निम्नलिखित विषयों के बारे में उपबंध किए जा सकेंगे, अर्थात् :- (क) प्रसुविधा का प्रकार; (ख) पात्रता की शर्तें; (ग) व्यक्ति जिसे प्रसुविधा देय होगी; (घ) प्रसुविधा देने के लिए माप या दरें; (ङ) आवेदन करने के लिए प्रक्रिया तथा प्ररूप; (च) मंजूरी के लिए प्रक्रिया तथा वह सक्षम प्राधिकारी जो मंजूरी प्रदान करेगा; (छ) संवितरण की प्रक्रिया; (ज) निबन्धन तथा शर्तें जिनके अध्यधीन रहते हुए प्रसुविधा दी जाएंगी; और (झ) कोई अन्य आनुषंगिक विषय।
54. कतिपय विधियों की व्यावृत्ति
कतिपय विधियों की व्यावृत्ति इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट कोई भी बात राज्य में की किसी तत्स्थानी विधि के प्रवर्तन को प्रभावित नहीं करेगी जिसमें इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन असंगठित कर्मकारों के लिए उपबंधित कल्याण स्कीम से अधिक हितकारी उपबंध है।
Schedule. अनुसूची
[धारा २ (त) देखें]
भाग-एक १. कृषि में नियोजन जिसमें सम्मिलित है उद्यानिकी तथा कृषि प्रसंस्करण. २. दुग्ध-उद्योग (डेरी), मुर्गीपालन, सुअरपालन तथा अन्य पशुपालन में नियोजन. ३. मछलीपालन में नियोजन. ४. वानिकी में नियोजन जिसमें सम्मिलित है मुख्य तथा गौण वन उपज के उत्खनन तथा संग्रहण से संबंधित क्रियाकलाप. ५. रेशम-उत्पादन में नियोजन.
भाग-दो १. लेटेराइट गोलाश्म मृत्तिका का निकाला जाना, भवन का पत्थर, सड़क की गिट्टी, बजरी, मुरम, रेत तथा मिट्टी खदान क्रिया तथा उत्खनन में नियोजन. २. पत्थर को तोड़ने तथा दलने में नियोजन. ३. पकी ईंट तथा टाइल बनाने में नियोजन.
भाग-तीन १. (क) किसी बाजार या दुकान या डिपो या कारखाना या भांडागार या गोदाम या किसी अन्य स्थापना, एवं (ख) मध्यप्रदेश कृषि-उपज मंडी अधिनियम, १९७२ (क्रमांक २४ सन् १९७३) के अधीन गठित मण्डी समितियों के नियंत्रणाधीन कोई बाजार; में लदाई-उतराई, ढेर लगाने (स्टैकिंग), पैकिंग करने, वहन करने, तौलने, मापने और ऐसे ही अन्य शारीरिक कार्य, जिसमें उसकी तैयारी तथा अन्य संसक्त कार्य शामिल हैं, में नियोजन. २. सार्वजनिक परिवहन यानों में माल की लदाई या उनसे माल की उतराई से संबंधित तथा कोई अन्य आनुषंगिक या संसक्त प्रचालन में नियोजन. ३. गोदाम में खाद्यान्न की लदाई, उतराई तथा वहन करना खाद्यान्नों की छंटाई तथा सफाई, खाद्यान्नों का बोरों में भरना, ऐसे बोरों की सिलाई करना तथा उससे तथा आनुषंगिक तथा संसक्त अन्य कार्य में के संबंध में नियोजन.
भाग-चार १. खादी, हथकरघा (हैंडलूम) तथा पावरलूम उद्योग में नियोजन. २. कपड़े का विरंजित करना (ब्लीचिंग) रंगाई तथा छपाई में नियोजन. ३. सिलाई में नियोजन.
भाग-पांच १. सुगन्धित तिलियां (अगरबत्ती) के बनाने में नियोजन. २. कढाई, धूम्रपान (स्मोकिंग) तथा तैयार वस्त्र (रेडीमेड गारमेन्ट्स) बनाने में नियोजन. ३. पापड़, अचार, जेम्स, जेली अन्य परिशिष्त खाद्य पदार्थ, पिसे मसाले तथा वास्क बनाने में नियोजन. ४. खाना बनाने में नियोजन. ५. खिलौने बनाने में नियोजन. भाग-छह: 1. चमड़े के शोधन तथा प्रसंस्करण में नियोजन। 2. जूते तथा चमड़े की अन्य वस्तुएं बनाने तथा मरम्मत करने में नियोजन। 3. सफाई तथा झाडू-बहारू सेवाओं में नियोजन। भाग-सात: 1. रैग-पिकिंग में नियोजन। 2. दरवाजे-दरवाजे (द्वार-द्वार पर) पुराने समाचार-पत्रों (रद्दी) का संग्रहण (तथा विक्रय) तथा त्यक्त वस्तुएं (कबाड़ी) में नियोजन। 3. बेचने वाला (हॉकर) तथा मार्ग में फेरी लगाकर बेचने वाला (स्ट्रीट वेण्डर) के रूप में नियोजन। भाग-आठ: 1. मोटर परिवहन कर्मकार अधिनियम, 1961 (1961 का 27) में यथा परिभाषित मोटर परिवहन कर्मकार। 2. साइकिल-रिक्शा, आटो-रिक्शा तथा टैक्सी चलाने में ऐसा नियोजन जो "मोटर परिवहन कर्मकार" की श्रेणी में नहीं आता। 3. आटा, तेल, दाल तथा चावल मिल में नियोजन। 4. प्राइवेट सुरक्षा सेवाओं में नियोजन। 5. प्लास्टिक उद्योगों में नियोजन। 6. लकड़ी का काम करने की इकाइयों में नियोजन। 7. बर्तन बनाने में नियोजन। 8. कारीगर (शिल्पी) जैसे लुहार, बढ़ई, गारा बनाने, चाक बनाने (कुम्हार) आदि में नियोजन। 9. दरी तथा कारपेट बनाने में नियोजन। 10. आतिशबाजी तथा माचिस उद्योग में नियोजन। 11. डब्बे तथा पैकिंग की अन्य सामग्री बनाने में नियोजन।
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