section 28
निरीक्षक की शक्तियां
The M.P. Asangthit Karamkaar Kalyan Adhiniyam, 2003निरीक्षक की शक्तियां (१) इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अध्यधीन रहते हुए, कोई निरीक्षक, उन स्थानीय सीमाओं के भीतर जिनके लिए उसे नियुक्त किया गया है तथा अध्याय-४ के उपबंधों को प्रवर्तित करने की दृष्टि से,−
(क) समस्त युक्तियुक्त समयों पर, अपने ऐसे सहायकों (यदि कोई हों), के साथ जो कि सरकारी या किसी स्थानीय या अन्य लोक प्राधिकारी की सेवा के व्यक्ति हों, किन्हीं परिसरों या स्थान में जहां असंगठित कर्मकार नियोजित हैं या जहां से उन्हें (कर्मकारों को) कार्य दिया जाता है, किसी रजिस्टर या अभिलेख या नोटिसों के जिनका वहां रखा जाना या प्रदर्शित किया जाना इस अधिनियम या किसी अन्य अधिनियम के द्वारा या उनके अधीन अपेक्षित है, परीक्षण के प्रयोजन के लिए प्रवेश कर सकेगा या उनकी तलाशी ले सकेगा;
(ख) किसी ऐसे व्यक्ति का परीक्षण कर सकेगा जो उस परिसर या स्थान में पाया जाए, और जिसके बारे में उसमें नियोजित असंगठित कर्मकार के होने का विश्वास करने के लिए उसके पास युक्तियुक्त कारण है या वहां उसे कार्य दिया जाता है;
(ग) असंगठित कर्मकार को काम देने वाले व्यक्ति से, कोई सूचना देने की अपेक्षा कर सकेगा जिसका दिया जाना उसकी शक्ति के अधीन है और जो उन व्यक्तियों के नाम और पते से संबंधित है जिनके लिए कार्य दिया जाता है या जिनसे कार्य लिया जाता है और उक्त कार्य के लिए भुगतान किया जाता है;
(घ) ऐसे रजिस्टर, मजदूरी के अभिलेख या नोटिसों अथवा उनके प्रभागों की प्रतियां अभिगृहीत करेगा या लेगा जो कि वह इस अधिनियम के अधीन अपराध के संबंध में सुसंगत समझे, जिसके बारे में उसे यह विश्वास करने का कारण है कि वह नियोजक द्वारा किया गया है; और
(ङ) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा जैसा कि विहित किया जाए:
परन्तु इस उपधारा के अधीन शक्तियों का प्रयोग राज्य सरकार या श्रम आयुक्त द्वारा इस निमित्त जारी साधारण या विशेष आदेश के अनुसार किया जाएगा.
(२) कोई व्यक्ति जिससे उपधारा (१) के अधीन निरीक्षक द्वारा किसी दस्तावेज को प्रस्तुत करने या किसी जानकारी को देने की अपेक्षा की जाती है, वह भारतीय दंड संहिता, १८६० (१८६० का ४५) की धारा १७५ और १७६ के अधीन ऐसा करने के लिए विधिक रूप से बाध्य समझा जाएगा.
(३) दण्ड प्रक्रिया संहिता, १९७३ (१९७४ का २) के उपबंध जहां तक हो सके, उपधारा (१) के अधीन तलाशियों और अभिग्रहण पर उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वह उक्त संहिता की धारा ९४ के अधीन जारी प्राधिकारी के वारंट के अधीन तलाशियों और अभिग्रहण पर लागू होते हैं।
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