section 26
नियोजकों द्वारा अभिदाय
The M.P. Asangthit Karamkaar Kalyan Adhiniyam, 2003नियोजकों द्वारा अभिदाय (१) प्रत्येक नियोजक, जिसकी स्थापना का रजिस्ट्रीकरण धारा २१ के अधीन अपेक्षित है, प्रत्येक मास की १६ तारीख के पूर्व उपधारा (२) में विनिर्दिष्ट बोर्ड को, उसके द्वारा पूर्व मास के दौरान असंगठित कर्मकारों को देय मजदूरी की पांच प्रतिशत से अनधिक ऐसे प्रतिशतता के समतुल्य राशि जैसी कि इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए, देगा।
(२) कोई नियोजक उपधारा (१) के अधीन अपना अभिदाय मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड या मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड को संदत करेगा जो इस बात पर निर्भर करेगा कि उसकी स्थापना कहां अवस्थित है, नगरीय क्षेत्र में या ग्रामीण क्षेत्र में.
(३) उपधारा (१) के अधीन संदेय अभिदाय, सचिव या बोर्ड के ऐसे अन्य अधिकारी जिसे बोर्ड द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए, के पक्ष में डिमांड ड्राफ्ट द्वारा संदत किया जाएगा जिसके साथ ऐसे प्ररूप में जैसा कि बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, विवरण पत्र संलग्न किया जाएगा.
(४) उपधारा (१) के अधीन संदेय अभिदाय के परिणामस्वरूप, नियोजक द्वारा असंगठित कर्मकार को संदेय मजदूरी में से कोई कटौती नहीं की जाएगी.
(५) यदि बोर्ड की यह राय है कि इस अधिनियम के अधीन उपधारा (१) में विनिर्दिष्ट तारीख को नियोजक द्वारा देय किसी राशि का संदाय नहीं किया गया है तो वह एक मांग नोटिस ऐसे प्ररूप में जैसा कि विहित किया जाए, जारी करेगा जिसमें नियोजक से अपेक्षा की जाएगी कि वह एक मास के भीतर राशि जमा करे या यह कारण बताए कि क्यों न इसे ढससे भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूल कर ली जाए.
(६) यदि उपधारा (५) के अधीन जारी नोटिस के अनुसरण में कोई नियोजक नोटिस में विनिर्दिष्ट कालावधि के भीतर रकम जमा करने में और साथ ही बोर्ड के समाधान रूप में कारण बताने में असफल रहता है तो बोर्ड, संबंधित जिले के कलक्टर को एक प्रमाण-पत्र उसमें कथित रकम की वसूली भू-राजस्व की बकाया की तौर पर करने हेतु जारी कर सकेगा और तदुपार कलक्टर उस रकम की भू-राजस्व की बकाया के तौर पर वसूली करने के लिए अग्रसर होगा और रकम को बोर्ड को विप्रेषित कर देगा:
परन्तु यदि नियोजक उपधारा (५) के अधीन जारी नोटिस के प्रत्युत्तर में कारण बताते हुए अभ्यावेदन प्रस्तुत कर देता है तो ऐसे अभ्यावेदन पर विचार करने, ऐसी जांच जैसी आवश्यक समझी जाए, करने और अभ्यावेदन रद्द करने के कारण देते हुए विस्तृत आदेश पारित करने के बाद ही उपर्युक्तानुसार प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा.
(७) उपधारा (५) और (६) के अधीन बोर्ड की शक्तियों का उसके सचिव द्वारा, और ऐसे अन्य अधिकारियों द्वारा जो कि बोर्ड द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किए जाएं, प्रयोग किया जाएगा।
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