section 2
परिभाषाएं
The M.P. Asangthit Karamkaar Kalyan Adhiniyam, 2003परिभाषाएं इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,- (क) "प्रसुविधा" से अभिप्रेत है ऐसी प्रसुविधा जो धारा 7 की उपधारा (2) के अधीन दी जाए; (ख) "बोर्ड" से अभिप्रेत है धारा 3 के अधीन गठित बोर्ड; (ग) "ठेकेदार" से अभिप्रेत है ऐसा व्यक्ति जो किसी स्थापना के लिए, माल के प्रदाय मात्र अथवा विनिर्माण की वस्तुओं से भिन्न, परिणाम देने हेतु उत्पादन करने के लिए असंगठित कर्मकारों को लगा कर उसका जिम्मा लेता है अथवा स्थापना में किसी कार्य के लिए ऐसे कर्मकारों की पूर्ति करता है और इसमें उप-ठेकेदार तथा अभिकर्ता सम्मिलित हैं; (घ) किसी ठेकेदार द्वारा या उसके माध्यम से लगाए गए किसी असंगठित कर्मकार के संबंध में "नियोजक" से अभिप्रेत है प्रमुख नियोजक और किसी अन्य असंगठित कर्मकार के संबंध में ऐसा व्यक्ति जो स्थापना के क्रियाकलापों पर अंतिम नियंत्रण रखता हो और इसमें ऐसा कोई अन्य व्यक्ति सम्मिलित है जिसे ऐसी स्थापना के क्रियाकलाप सौपे जाते हों चाहे ऐसा व्यक्ति अभिकर्ता, प्रबंधक या अनुसूचित नियोजन में प्रचलित किसी अन्य नाम से जाना जाता हो; (ङ) "स्थापना" से अभिप्रेत है कोई स्थान या परिसर जिसमें उसकी ऐसी प्रसोमा भी सम्मिलित है, जिसमें या जिसके किसी भाग में सामान्यतः कोई अनुसूचित नियोजन चलाया जा रहा है या चलाया जाता है; (च) किसी नियोजक के संदर्भ में "परिवार" से अभिप्रेत है ऐसे नियोजक के पति-पत्नी, पुत्र, पुत्री, पिता, माता, भाई या बहन जो उसके साथ रहता है और उस पर पूर्णतः आश्रित है; (छ) "निधि" से अभिप्रेत है धारा 8 के अधीन गठित कल्याण निधि; (ज) "निरीक्षक" से अभिप्रेत है धारा 27 के अधीन नियुक्त निरीक्षक; (झ) "श्रम आयुक्त" से अभिप्रेत है मध्यप्रदेश औद्योगिक संबंध अधिनियम, 1960 (क्रमांक 27 सन् 1960) की धारा 3 के अधीन राज्य सरकार द्वारा राज्य के लिए नियुक्त किया गया श्रम आयुक्त; (ञ) इस अधिनियम के अधीन गठित की गई कल्याण निधि के संबंध में "सदस्य" से अभिप्रेत है धारा 14 के अधीन एक सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकृत असंगठित कर्मकार; (ट) "यथास्थिति किसी ग्रामीण या नगरीय क्षेत्र का सामान्यतः निवासी" से अभिप्रेत है ऐसा व्यक्ति जो पूर्वतर बारह मास के अधिकांश समय में ऐसे क्षेत्र में निवास कर चुका है, तथा उसका इसी प्रकार अगले बारह मास तक बने रहना प्रत्याशित हो; (ठ) "प्रमुख नियोजक" से अभिप्रेत है ऐसा नियोजक जो किसी अनुसूचित नियोजन में किसी ठेकेदार द्वारा या उसके माध्यम से असंगठित कर्मकारों को नियोजित करता हो; (ड) "ग्रामीण क्षेत्र" से अभिप्रेत है ऐसा क्षेत्र जो नगरीय क्षेत्र न हो; (ढ) "अनुसूचित नियोजन" से अभिप्रेत है अनुसूची में विनिर्दिष्ट कोई नियोजन और उसमें सम्मिलित है, ऐसे नियोजन का भाग बनने वाले कार्य की कोई प्रक्रिया या शाखा; (ण) "स्कीम" से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन बनाई गई स्कीम; (त) "अनुसूची" से अभिप्रेत है इस अधिनियम से संलग्न अनुसूची; (थ) "कानूनी कल्याण निधि" से अभिप्रेत है इस अधिनियम से भिन्न किसी राज्य या केन्द्रीय विधान के अधीन कर्मकारों के कल्याण के लिए स्थापित और राज्य सरकार द्वारा इस निमित जारी की गई अधिसूचना द्वारा घोषित की गई "कानूनी कल्याण निधि"; (द) "असंगठित कर्मकार" से अभिप्रेत है ऐसा व्यक्ति जो प्रत्यक्षतः या किसी एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से एक या अधिक अनुसूचित नियोजन/नयोजनों में लगा हुआ है, चाहे मजदूरी के लिए हो या बिना मजदूरी के लिए या ऐसे अनुसूचित नियोजन/नयोजनों में स्वयं या उसकी मर्जी से केवल परिवार श्रम के साथ कार्य के किसी ऐसे स्थान में कार्य करता है/करती है जिसमें उसका घर, खेत या कोई सार्वजनिक स्थान सम्मिलित है जो कि अन्य के नियंत्रणाधीन हो या न हो तथा इसमें सम्मिलित हैं:-(एक) ऐसा व्यक्ति जो गृह आधारित कर्मकार या आकस्मिक अथवा संविदा कर्मकार या स्व-नियोजित कर्मकार है; और (दो) ऐसा व्यक्ति जिसे किसी नियोजक या ठेकेदार द्वारा कच्चा माल उसे परिवर्तित करने या कोई उत्पाद बनाने या किसी कार्य के लिए दिया जाता हो या फेरी लगाकर या गली में बेचने के लिए तैयार माल दिया जाता है या चल या पहुंच सेवा उपलब्ध कराने के लिए यान, औजार या मशीनरी प्रदान की जाती हो, किन्तु इसमें किसी नियोजक के परिवार का कोई सदस्य सम्मिलित नहीं है; (ध) "नगरीय क्षेत्र" से अभिप्रेत है भारत के संविधान के अनुच्छेद 243-थ के अधीन मध्यप्रदेश के राज्यपाल द्वारा "बृहत्तर नगरीय क्षेत्र" और "लघुत्तर नगरीय क्षेत्र" के रूप में अधिसूचित क्षेत्र; (न) "मजदूरी" का वही अर्थ होगा जो मजदूरी भुगतान अधिनियम, 1936 (1936 का सं. 4) की धारा 2 के खण्ड (छ) में उसके लिए दिया गया है।
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