section 36
अन्य अपराधों के लिए शास्ति
The M.P. Asangthit Karamkaar Kalyan Adhiniyam, 2003अन्य अपराधों के लिए शास्ति (1) जो कोई, इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध का या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों का उल्लंघन करेगा अथवा इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध का या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों का अनुपालन करने में असफल रहेगा वह, यथास्थिति, ऐसे प्रत्येक उल्लंघन या असफलता के लिए जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, और यथास्थिति, जारी रहने वाले उल्लंघन या असफलता की दशा में, ऐसे अतिरिक्त जुर्माने से, जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान ऐसा उल्लंघन या असफलता ऐसे प्रथम उल्लंघन या असफलता के लिए दोषसिद्धि के पश्चात् जारी रहती है एक सौ रुपये तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा। (2) उपधारा (1) के अधीन कोई शास्ति श्रम आयुक्त या सहायक श्रम आयुक्त से अनिन श्रेणी के ऐसे अन्य अधिकारी द्वारा, जिसे राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में अधिसूचना द्वारा सशक्त किया जाए, अधिरोपित की जा सकेगी। (3) कोई शास्ति तब तक अधिरोपित नहीं की जाएगी, जब तक कि संबंधित व्यक्ति को लिखित सूचना,— (क) उन आधारों को, जिन पर शास्ति अधिरोपित करने का प्रस्ताव है, जानकारी देते हुए; और (ख) उसे ऐसे युक्त-युक्त समय के भीतर, जो उसमें उल्लिखित शास्ति के अधिरोपण के बारे में सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, लिखित अभिवेदन करने का और यदि वह ऐसी वांछा करता है तो उस मामले में उसकी सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देते हुए, नहीं दे दी जाती है। (4) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी अन्य उपबंध पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, श्रम आयुक्त और ऐसे अन्य अधिकारियों को, जो उपधारा (2) के अधीन सशक्त किए जाएं, निम्नलिखित विषयों की बाबत् इस धारा के अधीन किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां प्राप्त होंगी, अर्थात् :— (क) साक्षियों को समन करना और हाजिर करना; (ख) किसी दस्तावेज के प्रकट और पेश करने की अपेक्षा करना; (ग) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रति की अध्यपेक्षा करना; (घ) शपथ-पत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना; और (ङ) साक्षियों या दस्तावेजों के परीक्षण के लिए कमीशन जारी करना। (5) इस धारा में अंतर्विष्ट किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह संबंधित व्यक्ति को यथास्थिति, इस अधिनियम या किसी अन्य विधि द्वारा दण्डनीय बनाए गए किसी अपराध के लिए इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन या किसी अन्य विधि के अधीन अभियोजित किए जाने से अथवा इस अधिनियम या किसी ऐसे विधि के अधीन उस शास्ति या दण्ड से जो इस धारा द्वारा उस अपराध के लिए उपबंधित है, कोई अन्य या उच्चतर शास्ति के लिए दायी होने से निवारित करती है : परन्तु किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए दो बार दंडित नहीं किया जाएगा।
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