The Jharkhand State University Act, 2026
Chapter II Chapter II
Chapter II Chapter II
3. विश्वविद्यालयों का निगमन
राजकीय विश्वविद्यालय
- (1) इस अवधवनयम के प्रारंभ की वतवथ से प्रभािी होते हुए, अनुसूची-I के कॉिम III में उखिखखत प्रत्येक विद्यमान विश्वविद्यािय को इस अवधवनयम के अधीन वनविवष्ट भौगोविक क्षेत्रावधकार के विए गवठत माना िाएगा।
- (2) राज्य सरकार समय-समय पर अवधकाररक रािपत्र में अवधसूचना द्वारा, इस अवधवनयम के अंतगवत, वकसी निीन विश्वविद्यािय की स्थापना कर सकती है, विसे वकसी विविष्ट नाम, क्षेत्र/प्रािेविक क्षेत्रावधकार तथा प्रभािी वतवथ के साथ वनविवष्ट वकया िाएगा, तथा इसके विए, अनुसूची-II में विक्षण प्रधान संबद्धता विश्वविद्यािय हेतु तथा अनुसूची-III में अनुसंधान-प्रधान एकि विश्वविद्यािय हेतु, आिश्यक प्रविवष्टयाँ सखिवित की िाएंगी। राज्य सरकार, इस प्रयोिन अथिा अन्य वकसी वनविवष्ट प्रयोिन हेतु, वकसी विद्यमान या निीन विश्वविद्यािय के क्षेत्र को पररिवतवत, विस्ताररत अथिा न्यून कर सकती है, तथा उि अवधसूचना द्वारा संबद्ध अनुसूची में संिोधन कर सकती है। इस प्रकार, अनुसूची-II या अनुसूची-III की प्रविवष्टयाँ यथासमय संिोवधत मानी िाएंगी। इसके पररणामस्वरूप, नए विश्वविद्यािय के क्षेत्रावधकार में खस्थत सभी िैवक्षक संस्थान, चाहे िह महाविद्यािय, संस्थान, स्वायत्त अथिा सिि स्वायत्त महाविद्यािय, सिि स्वायत्त संकु ि संस्थान, स्नातकोत्तर विभाग, विद्या कें द्र या अध्ययन कें द्र (वकसी भी नाम से िाने िाएं), यवि िह वकसी विद्यमान विश्वविद्यािय से संबद्ध, अंगीभूत अथिा मान्यता प्राप्त हों, तो िह उि वतवथ से निीन विश्वविद्यािय से संबद्ध, अंगीभूत अथिा मान्यता प्राप्त माने िाएंगे।
- (3) प्रत्येक विश्वविद्यािय को चि और अचि संपवत्त अविवत करने, धारण करने, पट्टे पर िेने, वििय करने, अथिा वकसी भी चि या अचि संपवत्त को, िो विश्वविद्यािय के अधीन हो अथिा उसके उद्देश्यों हेतु अविवत की गई हो, अन्य प्रकार से हस्तांतररत या वनष्पावित करने की िखि होगी, तथा इस अवधवनयम के प्रयोिनों हेतु अनुबंध करने एिं आिश्यक अन्य समस्त कायव करने की भी िखि प्राप्त होगी; परंतु यह उपबंवधत रहेगा वक, ऐसी वकसी भी संपवत्त के पट्टे, वििय अथिा हस्तांतरण से पूिव, विश्वविद्यािय द्वारा वनयुि स्वीकृ त मूल्ांकक द्वारा उसका मूल्ांकन वकया िाना अवनिायव होगा तथा राज्य सरकार की पूिव सहमवत प्राप्त की िानी आिश्यक होगी।
Chapter II Chapter II
4. विश्वविद्यालय के उद्देश्य
विश्वविद्यालय के उद्देश्य
- (1) विश्वविद्यािय के उद्देश्य सामान्यतः विक्षण, अनुसंधान एिं विकास, कौिि विकास, प्रविक्षण एिं
(ख) अनुिासन तथा बौखद्धक विज्ञासा की भािना को प्रोत्सावहत करना एिं स्वयं को एक वनडर
अकािवमक समुिाय के रूप में उत्कृ ष्टता की सतत खोि हेतु समवपवत करना;
(ग) सवहष्णुता एिं परस्पर समझ की भािना को बनाए रखते हुए व्यखित्व एिं विविधता को प्रोत्सावहत करना;
(घ) भारत के संविधान में वनवहत स्वतंत्रता, धमववनरपेक्षता, समानता, सामाविक न्याय को बढ़ािा
िेना तथा राष्ट र ीय विकास की मूिभूत प्रिृवत्तयों एिं मूल्ों को प्रेररत कर िेिभखिपरक सामाविक-आवथवक पररितवन का प्रेरक बनना;
(च) विश्वविद्यािय को स्थानीय, क्षेत्रीय एिं राष्ट र ीय विकास की समस्याओं से घवनष्ठ रूप से
िोड़कर, व्यखियों एिं समाि के विकास हेतु ज्ञान, िीिन एिं रोिगारपरक कौििों का
विस्तार करना;
सहायता प्रिान करना; (ि) उच्च विक्षा की विक्षण, अवधगम, प्रविक्षण एिं अन्य सहायता सेिाओं की सुविधाओं के समान वितरण को प्रोत्सावहत करना; (झ) अत्याधुवनक संचार, मीवडया एिं प्रौद्योवगवकयों का उपयोग कर सामाविक समस्याओं के समाधान हेतु अनुसंधान एिं निाचार में प्रविक्षण एिं कौिि संिधवन को प्रोत्सावहत करना; (ञ) ऐसी प्रेरक प्रणावियों का वनमावण करना, विससे वकसी भी व्यखि की बौखद्धक क्षमता सीवमत न हो, बखल्क निाचार की भािना, साथवक योगिान की अवभिािा एिं आत्म-वसखद्ध
तथा निीन एिं भािी प्रौद्योवगवकयों में सतत ज्ञान-िृखद्ध, प्रविक्षण एिं कौिि संिधवन के अिसर उपिि कराना तावक एक अवधगमिीि समाि की अिधारणा को साकार वकया िा सके; (ठ) राष्ट र ीय एकता, बंधुता की भािना को बढ़ािा िेना, सांस्कृ वतक धरोहर का संरक्षण करना
करना;
(ड) राज्य अथिा वनिी उद्योगों, सरकारी संगठनों के स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट
र ीय एिं िैवश्वक स्तर पर विक्षण, प्रविक्षण एिं संबंवधत कायविमों, अनुसंधान एिं विकास गवतविवधयों तथा संसाधन उत्पािक सेिाओं के िागत कु िि ढंग से वियान्वयन द्वारा वित्तीय आत्मवनभवरता को स्थावपत करना; (ढ) रोिगारोन्मुख आत्मवनभवर पाठ्यिमों की िुरुआत, परामिव सेिाओं, राज्य सरकार के
बढ़ािा िेना; (थ) समाि में िैंवगक समानता एिं संिेिनिीिता को प्रोत्सावहत करना; (ि) सभी िैक्षवणक एिं अन्य छात्रों से संबंवधत मामिों में प्रवतस्पधावत्मक योग्यता एिं उत्कृ ष्टता
को एकमात्र मागवििवक वसद्धांत के रूप में स्थावपत करना;
(ध) अकािवमक िे वडट बैंक
- (ABC) में पंिीकरण करना, िो अकािवमक उद्देश्यों के विए राष्ट र
ीय स्तर की एक सुविधा होगी, िहाँ विद्याथी अकािवमक खाताधारक के रूप में
पंिीकृ त होंगे; (न) विवभन्न रणनीवतयों एिं पहिों को विकवसत करना तथा अन्तरावष्ट र ीय स्तर पर विश्वविद्यािय की पहचान एिं प्रभाि को विस्तृत करने हेतु पाठ्यिमों का िैवश्वक महत्व, राज्य
अन्तरावष्ट र ीयकरण का अिसर प्रिान करना; (प) विश्वविद्यािय अनुिान आयोग (यूिीसी) द्वारा समय-समय पर वनगवत वकए गए समस्त वनिेिों तथा मानिंडों का पािन करना एिं उनका कायावन्वयन सुवनवित करना; (फ) विश्वविद्यािय को पूणव पारिविवता की भािना को आत्मसात करना होगा तथा वनम्नविखखत िानकारी को सािविवनक सूचना एिं प्रकटन हेतु अपनी िेबसाइट पर सहि रूप से उपिि कराना सुवनवित करना होगा:-
- (i) संस्थान, अवधवनयम एिं पररवनयम तथा उसके संस्थागत विकास योिना के बारे में िानकारी;
- (ii) अंगीभूत एिं संबद्ध महाविद्याियों के िेबसाइट के संपकक धििरि और धलंक, यधद लागू ह ;
- (iii) राष्ट र ीय मूल्ांकन एिं प्रत्यायन पररिि् एन०ए० ए०एसी०, राष्ट र ीय संस्थागत रैंवकंग रूपरेखा एन०आई०आर०एफ़० तथा झारखण्ड राज्य संस्थागत रैंवकं ग रूपरेखा में प्रत्यायन/ रैंवकं ग खस्थवत;
- (iv) यूिीसी के 2(f), 12(b) आवि विवभन्न अनुच्छेिों के अंतगवत स्वायत्तता की मान्यता एिं स्वीकृ वत की खस्थवत;
- (v) प्रमुख प्रिासवनक पिावधकाररयों, विभागाध्यक्षों, सीनेट एिं वसंवडके ट सिस्यों के
विस्तृत प्रोफाइि एिं उनके छायावचत्र;
- (vi) विवभन्न िैक्षवणक कायविमानुसार अनुसंधान एिं विकास हेतु उपिि आधारभूत संरचना और सुविधाओं की िानकारी;
- (vii) प्रिेि नीवत, िुल्क एिं िुल्क िापसी नीवत संबंधी नीवतयाँ;
- (viii) अनुसंधान एिं विकास प्रकोष्ठ संिधवन /निाचार एिं उद्यवमता प्रकोष्ठ, एंटी-रैवगंग
प्रकोष्ठ, समान अिसर प्रकोष्ठ इत्यावि विवभन्न सुविधाओं से संबंवधत िानकारी;
- (ix) विव्यांगिन एिं सामाविक-आवथवक रूप से िंवचत समूहों हेतु उपिि सुविधाएँ;
- (x) संसि् एिं झारखण्ड राज्य विधानमंडि में प्रस्तुत प्रश्ों के उत्तर;
- (xi) विश्वविद्यािय एिं उसके अंगीभूत महाविद्याियों का िाविवक प्रवतिेिन, यवि िागू हो;
- (xii) विश्वविद्यािय एिं उसके अंगीभूत महाविद्याियों का िाविवक प्रवतिेिन एिं खातों की अंके क्षण का वित्तीय वििरण;
- (xiii) विवभन्न विश्वविद्याियों एिं उनके अंगीभूत महाविद्याियों के अंके क्षण प्रवतिेिन;
- (xiv) समय-समय पर िारी पररपत्र एिं कायाविय आिेि;
- (xv) अन्य विभागों / बोडों/ एिेंवसयों / व्यखियों के साथ वकया गया पत्राचार;
- (xvi) समय-समय पर गवठत सवमवतयों से संबंवधत आिेि एिं उन सवमवतयों द्वारा प्रस्तुत प्रवतिेिन; तथा
- (xvii) उच्च विक्षण संस्थानों हेतु सािविवनक आत्म-प्रकटीकरण वििा-वनिेि, 2024
के अनुसार, समय-समय पर संिोवधत कोई भी अन्य आिश्यक िानकारी।
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5. विश्वविद्यालय की शक्तियाँ एवं कर्तव्य
विश्वविद्यािय को वनम्नविखखत िखियाँ एिं कतवव्य प्राप्त होंगे, िो वनम्नविखखत विियों से संबंवधत होंगे:—
- (1) विक्षण एिं अवधगम, अथावत् :- (क) विश्वविद्यािय द्वारा उपयुि समझी गई विविध विक्षािाखाओं, विनमें व्यािसावयक अध्ययन एिं प्रौद्योवगकी सखिवित हों, में विक्षण प्रिान करना; (ख) सुव्यिखस्थत, आकिवक एिं अद्यतन पाठ्यिमों का वनमावण एिं उनका संचािन करना; (ग) विविध विक्षण पद्धवतयों का प्रयोग कर सभी विक्षावथवयों की आिश्यकताओं को पूरा करना; (घ) विक्षण पद्धवतयों में निीनतम अनुसंधान वनष्किों को समावहत करना; (ङ) विद्यावथवयों को आिोचनात्मक वचंतन, समस्या-समाधान तथा व्यािसावयक कौििों से सुसखित करना;
(झ) समािेिी एिं समान गुणित्तायुि विक्षण िातािरण को प्रोत्सावहत करना; तथा
(ञ) बाह्य संगठनों के साथ भागीिारी कर व्यािहाररक अवधगम के अिसर उपिि कराना।
- (2) अनुसंधान एिं सहयोग, अथावत् :-
(क) अनुसंधान, ज्ञान संिधवन एिं प्रसार की व्यिस्था करना तथा सामान्य रूप से किा (िवित किा एिं प्रििवन किा सवहत), मानविकी, सामाविक विज्ञान, िेखा एिं िावणज्य, िुद्ध एिं अनुप्रयुि विज्ञान, ितवमान एिं उभरती हुई प्रौद्योवगवकयाँ, प्रबंधन, वचवकत्सा की विवभन्न प्रणावियाँ, अवभयांवत्रकी, विवध, िारीररक विक्षा एिं अन्य विक्षािाखाओं तथा इनके बहुविियक एिं अंतविवियक क्षेत्रों को विकवसत एिं प्रोत्सावहत करना;
(ख) अनुसंधान संस्थानों एिं विविष्ट अध्ययन संस्थानों की स्थापना, अनुरक्षण एिं संचािन करना;
(झ) उच्च गुणित्ता िािे अनुसंधान को विकवसत करना, विसका स्वरूप आधुवनक, िैवश्वक स्तर पर प्रवतस्पधावत्मक तथा स्थानीय, क्षेत्रीय एिं राष्टरीय स्तर पर प्रासंवगक हो; (ञ) स्नातक एिं स्नातकोत्तर स्तर पर विक्षा को सिि बनाना, प्रासंवगक पाठ्यिमों में अनुसंधान संस्कृ वत को बढ़ािा िेना एिं उद्यमिीिता हेतु रुवच उत्पन्न करना; तथा
(ट) अनुसंधान पाकव, तकनीक संिधवक एिं अन्य संिग्न संस्थाओं की स्थापना करना तावक विश्वविद्यािय द्वारा वकए गए अनुसंधान को व्यािसावयक क्षेत्र में रूपांतररत वकया िा सके तथा विवभन्न विियों के विक्षकों के सखिवित प्रयासों द्वारा राज्य के समक्ष उपखस्थत महत्त्वपूणव समस्याओं का समाधान वकया िा सके ।
- (3) कवमवयों की वनयुखि एिं प्रोन्नवत, अथावत् :- (क) धिश्वधिद्यालय के अधिकाररय ं, धिदेशक ं, प्रधानाचायों, धशक्षक ं, विक्षके त्तर कमकचाररय ं और अन्य पद ं पर पररधियम ं द्वारा धििाकररत तरीके से धियुक्तियाँ करिा;
(ख) पररवनयमों में वनविवष्ट अहवताओं एिं अनुभि के अनुसार विश्वविद्यािय कवमवयों की प्रोन्नवत करना;
(ग) प्रत्येक ििव 31 विसंबर तक िैक्षवणक, गैर-िैक्षवणक एिं अन्य स्वीकृ त पिों की ररखियों का विश्लेिण करना तथा समयबद्ध वनयुखि हेतु रोस्टर तैयार करना;
- (4) विद्यावथवयों की इंटनवविप, अप्रेंवटसविप एिं प्लेसमेंट, अथावत् :-
- (5) विश्वविद्यािय की वित्तीय व्यिस्थाएँ, अथावत् :-
- (6) समािेिी विक्षा को बढ़ािा िेना, अथावत् :-
(घ) मवहिा विक्षकों, विक्षके त्तर कमवचाररयों एिं विद्यावथवयों की पूणव सुरक्षा सुवनवित करने हेतु आधारभूत संरचनात्मक, तकनीक-आधाररत एिं सामाविक उपाय अपनाना।
- (7) विश्वविद्यािय का संचािन, अथावत् :- (क) विश्वविद्यािय विभागों, अध्ययन के न्द्ों, संस्थानों, प्रयोगिािाओं, अध्ययन संसाधन कें द्रों, पुस्तकाियों, संग्रहाियों तथा विक्षण, अवधगम, प्रविक्षण, अनुसंधान एिं विकास तथा प्रसार से संबंवधत उपकरणों की व्यिस्था, अनुरक्षण एिं प्रबंधन करना; (ख) छात्रािासों, स्वास्थ्य कें द्रों, प्रेक्षागृहों, विद्याथी संसाधन कें द्रों, व्यायामिािाओं एिं अन्य विद्याथी संबंधी गवतविवधयों का स्थापन, अनुरक्षण एिं संचािन करना; (ग) छात्रों और कमवचाररयों की सुरक्षा एिं संरक्षा हेतु आिश्यक बुवनयािी ढाँचे की स्थापना करना और सम्बंवधत कमवचाररयों की वनयुखि करना;
(झ) पररवनयमों में वनविवष्ट मानि उपावधयाँ अथिा अन्य अकािवमक विविष्टताएँ प्रिान करना; (ञ) विश्वविद्यािय पररसर में अनुिासन एिं सौहािवपूणव िातािरण को बनाए रखना;
(ढ) विद्याथी-कें वद्रत दृवष्टकोण अपनाना एिं ज्ञान सृिन की भूवमका का वनिवहन करना; (ण) ई-विक्षण एिं ई-प्रिासवनक सेिाओं हेतु एक व्यापक वडविटि विश्वविद्याियीय रूपरेखा तैयार करना;
(ब) उप-धारा
- (1) से उप-धारा
- (7) के अंतगवत उखिखखत कतवव्यों का वनिवहन करने के विए विश्वविद्यािय आिश्यकतानुसार िे.एस.एफ़.डी.ए./िे.एस.एच.ई.सी./िे.सी.एस.टी.आई. से परामिव कर सकता है।
- (8) इस अवधवनयम की अनुसूची-II में उखिखखत विश्वविद्यािय इस अवधवनयम की अनुसूची-II में सूचीबद्ध विश्वविद्याियों को अवतररि उत्तरिावयत्व एिं िखियाँ प्रिान की गई हैं, अथावत् :- (क) अंगीभूत एिं संबद्ध महाविद्याियों की स्थापना को सक्षम बनाने हेतु वििेिीकृ त अध्ययन हेतु प्रािधान करना;
(ठ) महाविद्याियों, संस्थानों अथिा संकु ि संस्थानों को िी गई संबद्धता, मान्यता अथिा सिि स्वायत्त खस्थवत को वनरस्त या वनिंवबत करना;
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7. ‘सभी के लिए खुला’ विश्वविद्यालय
- (1) भारत के किसी भी नागरिक को, केवल लिंग, नस्ल, पंथ, वर्ग, जाति, जन्म स्थान, धार्मिक विश्वास, व्यवसाय अथवा राजनीतिक या अन्य विचार के आधार पर विश्वविद्यालय के किसी पद से, विश्वविद्यालय की किसी भी प्राधिकरण, निकाय अथवा समिति की सदस्यता से, किसी भी पद पर नियुक्ति से एवं किसी भी उपाधि, डिप्लोमा, प्रमाणपत्र, अथवा अन्य अकादमिक विशिष्टता या अध्ययन पाठ्यक्रम में प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा: परंतु यह उपबंधित रहेगा कि, विश्वविद्यालय केवल महिलाओं के लिए किसी महाविद्यालय अथवा संस्थान को बनाए रख सकता है, प्रत्यायन कर सकता है अथवा मान्यता प्रदान कर सकता है अथवा महिलाओं के लिए आरक्षित कर सकता है।
- (2) विश्वविद्यालय शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के विभिन्न पदों पर नियुक्ति तथा अंगीभूत महाविद्यालयों, विश्वविद्यालय विभागों अथवा विश्वविद्यालय संस्थानों में विद्यार्थियों के प्रवेश के प्रयोजन से, विश्वविद्यालय को एक इकाई मानते हुए राज्य सरकार की आरक्षण नीति को अपनाएगा: परंतु यह उपबंधित रहेगा कि, इस अधिनियम की अनुसूची-III में उल्लिखित विश्वविद्यालयों के लिए यह प्रावधान केवल विश्वविद्यालय विभागों पर लागू होगा।
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8. राज्य सरकार की शक्ति
- (1) राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना विश्वविद्यालय निम्नलिखित कार्य नहीं कर सकेगा:- (क) स्व-वित्तपोषित पाठ्यक्रमों के संचालन को छोड़कर विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों के लिए नए पदों का सृजन करना; (ख) विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के लिए वेतन, भत्तों, सेवानिवृत्तोत्तर लाभ एवं अन्य लाभों की स्वीकृति एवं पुनरीक्षण करना; (ग) किसी विशेष उद्देश्य हेतु प्राप्त निधियों को अन्य किसी प्रयोजन में परिवर्तित करना; (घ) विश्वविद्यालय की अचल संपत्ति को विक्रय अथवा पट्टे द्वारा स्थानांतरित करना; तथा (ङ) राज्य सरकार, केंद्र सरकार अथवा अन्य किसी स्रोत से प्राप्त निधियों का उपयोग किसी विकास कार्य हेतु करना, जब तक कि वह निधि उसी प्रयोजन के लिए प्राप्त न हुई हो।
- (2) राज्य सरकार, इस अधिनियम में निहित उपबंधों के अनुरूप सभी विश्वविद्यालयों में समान शैक्षणिक मानकों को सुनिश्चित करने हेतु, आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से निर्धारित परिनियम के प्रावधान निम्नलिखित कार्यों हेतु होंगे:- (क) विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों की सेवा का वर्गीकरण, चयन की विधि एवं प्रक्रिया, पदों के लिए योग्यता एवं अनुभव, नियुक्ति की प्रक्रिया, प्रारंभिक, उच्चस्तरीय प्रशिक्षण एवं क्षेत्रीय अनुभव, प्रतिनियोजन, राज्य की आरक्षण नीति के अनुसार पदों का आरक्षण, कर्त्तव्य, कार्यभार, वेतन, भत्ते, सेवानिवृत्तोत्तर लाभ एवं अन्य लाभ, आचरण, अनुशासनात्मक विषयों एवं अन्य सेवा सम्बन्धी शर्तों हेतु; (ख) महाविद्यालयों को विश्वविद्यालयों द्वारा सम्बद्धता प्रदान करने, सम्बद्धता की निरंतरता बनाए रखने तथा सम्बद्धता की वापसी अथवा असम्बद्धता से सम्बंधित प्रक्रिया, मानदंड, मानक एवं प्रक्रिया को विनियमित करने वाले उपबंध; जिनमें शैक्षणिक प्रदर्शन, भौतिक आधारभूत संरचना के मानक, वित्तीय व्यावहारिकता, शासन प्रणाली, प्रबंधन पद्धतियाँ तथा अन्य ऐसे विषय जिन्हें आवश्यक समझा जाए, सम्मिलित होंगे; (ग) यह प्रावधान विश्वविद्यालय के विभिन्न प्राधिकरणों, समितियों, परिषदों,तथा पदाधिकारियों की स्थापना, संरचना, गठन अथवा नियुक्ति की प्रक्रिया, अहर्ताएँ, कार्यकाल, कर्तव्यों, अधिकारों, उत्तरदायित्वों, प्रतिवेदन दायित्वों, आचारसंहिता, निर्णय लेने की प्रक्रिया, प्रशासनिक, शैक्षणिक एवं वित्तीय भूमिकाओं की परिभाषा तथा कुलपति, प्रति-कुलपति कुल सचिव, वित्त परामर्शी, अधिष्ठाता, निदेशक एवं अन्य वैधानिक पदाधिकारियों के परस्पर संबंधों से सम्बंधित होगा; (घ) शैक्षणिक मामलों का संचालन और प्रशासन, पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या की रूपरेखा, छात्र कल्याण, कर्मचारियों और छात्रों की सुरक्षा, संरक्षा, कर्मचारियों और छात्रों के लिए स्वास्थ्य सेवा सुविधाएं, गुणवत्ता मानक, संस्थागत मूल्यांकन, प्रत्यायन और राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरीय रैंकिंग प्रणाली एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप पाठ्यक्रमों और शैक्षणिक कार्यक्रमों का विकास, समीक्षा एवं समय-समय पर पुनरीक्षण सुनिश्चित किया जाएगा; (ङ) विश्वविद्यालय और उसके अंगीभूत महाविद्यालयों के कर्मचारियों के पदों का सृजन, वेतन निर्धारण, स्थानांतरण, पदस्थापन और प्रतिनियुक्ति के सम्बन्ध में परिनियमों का निर्माण और निर्धारण; (च) बुनियादी ढाँचे के विकास, क्षेत्रीय केन्द्रों और अध्ययन केन्द्रों की स्थापना और संचालन तथा पर्यावरणीय, सामाजिक एवं शासन (ईएसजी) पहलों के कार्यान्वयन हेतु परिनियमों का निर्माण और निर्धारण; (छ) विश्वविद्यालय, उसके अंगीभूत और संबद्ध संस्थानों के कर्मचारियों और छात्रों के लिए शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना, संचालन, मानकीकरण तथा प्रभावी क्रियान्वयन; (ज) झारखण्ड राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग की स्थापना, संरचना, शक्तियां, कार्य और प्रक्रियाएँ ; तथा (झ) राज्य सरकार द्वारा अपेक्षित कोई अन्य विषय।
- (3) राज्य सरकार को निम्नलिखित से सम्बंधित शक्तियां होंगी :- (क) कर्मचारियों की सेवा शर्तें, अर्थात् :-
- (i) केवल विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय विभाग और अंगीभूत महाविद्यालयों में शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के पद सृजन की शक्ति;
- (ii) स्वीकृत पदों के विरुद्ध कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए रोस्टर की स्वीकृति;
- (iii) कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति, विश्वविद्यालय के भीतर स्थानांतरण तथा कर्मचारियों के अन्तर-विश्वविद्यालय स्थानांतरण को स्वीकृति देने हेतु तंत्र को अनिवार्य बनाना;
- (iv) विश्वविद्यालय के कुलपति तथा प्रति-कुलपति का चयन;
- (v) स्व-वित्तपोषित, बाह्य वित्तपोषित या परियोजना आधारित शैक्षणिक कार्यक्रमों के अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा पदों के सृजन हेतु शर्तें निर्धारित करना, जिसमें ऐसे पदों के अनुमोदन, कार्यकाल, नवीकरण और समाप्ति हेतु दिशा-निर्देश शामिल हैं;
- (vi) स्वीकृत पदों पर नियुक्त कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य लाभों के निर्धारण और संशोधन हेतु मानक और प्रक्रियाएँ;
- (vii) विश्वविद्यालय कर्मचारियों के वेतन निर्धारण हेतु राज्य सरकार के लिए नियामक ढाँचा, जिसमें कार्यान्वयन प्रक्रियाएँ, लेखा परीक्षण और विसंगतियों के सुधार शामिल हैं;
- (viii) विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की अन्य शैक्षणिक संस्थानों, राज्य निकायों, अनुसंधान संगठनों अथवा सरकार के अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति के लिए शर्तें, कार्यकाल तथा अनुमोदन की प्रक्रिया; तथा
- (ix) विश्वविद्यालयों में एक निष्पक्ष, योग्यता-आधारित एवं दक्ष मानव संसाधन प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक या प्रासंगिक कोई भी विषय। (ख) निधियाँ, लेखा और वित्तीय लेखा परीक्षण, अर्थात् :-
- (i) विश्वविद्यालय तथा उसके अंगीभूत महाविद्यालयों के वित्तीय प्रबंधन की देखरेख करना, तथा विश्वविद्यालय और उसकी अंगीभूत इकाइयों के खातों का नमूना लेखा परीक्षण या पूर्ण लेखा परीक्षण नियमित रूप से या ऐसी अवधि में करना जैसा उपयुक्त प्रतीत हो ;
- (ii) विशेष उद्देश्यों के लिए विशेष कोष या खाते स्थापित करना। विश्वविद्यालय को अनुदान और ऋण स्वीकृत करना तथा ऐसी वित्तीय सहायता के लिए शर्तों और नियमों को विनियमित करना ;
- (iii) विश्वविद्यालय के कोषों से किए गए लेन-देन के लिए लेखांकन, अभिलेखों का संधारण, पुस्तकों और अन्य दस्तावेजी या डिजिटल अभिलेखों के मानक निर्धारित करना;
- (iv) किसी भी संबद्ध, अंगीभूत, या स्वायत्त महाविद्यालय या विश्वविद्यालय का निरीक्षण किसी भी समय, जब उचित प्रतीत हो ; तथा
- (v) विश्वविद्यालयों के प्रभावी वित्तीय प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए अन्य आवश्यक या प्रासंगिक कार्य करना। (ग) निदेश, आदेश तथा उनका अनुपालन, अर्थात् :-
- (i) इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान अथवा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या अन्य किसी विनियामक निकाय द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुपालन हेतु समय-समय पर आवश्यकतानुसार या जैसा उपयुक्त समझा जाए, कोई भी निदेश, आदेश, या अधिसूचना जारी करना जिसका अनुपालन सभी विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य होगा;
- (ii) यदि विश्वविद्यालय धारा 5 में विनिर्दिष्ट शक्तियों का प्रयोग करने अथवा कर्तव्यों के निर्वहन में विफल रहता है, या विश्वविद्यालय द्वारा ऐसी शक्तियों का समुचित प्रयोग नहीं किया जाता अथवा कर्तव्यों का समुचित पालन नहीं किया जाता, या विश्वविद्यालय राज्य सरकार द्वारा जारी किसी निदेश या आदेश या अधिसूचना के अनुपालन में विफल रहता है, या राज्य सरकार किसी अन्य परिस्थिति में उचित समझे तो राज्य सरकार विश्वविद्यालय को उक्त शक्तियों के समुचित प्रयोग, कर्तव्यों के निष्पादन अथवा आदेश के अनुपालन हेतु निदेश जारी कर सकती है। विश्वविद्यालय के लिए यह बाध्यकारी होगा कि वह ऐसे सभी निदेशों का अनुपालन करे । (घ) आयोग का संचालन, अर्थात् :-
- (i) आयोग के अध्यक्ष, सदस्य (प्रशासन), तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति एवं सेवा शर्तों से संबंधित प्रावधान;
- (ii) सचिव, उप-सचिव, परीक्षा नियंत्रक, वित्त पदाधिकारी तथा अन्य किसी भी कर्मचारी सहित आयोग के कर्मचारियों के पदों का सृजन तथा उनकी सेवा शर्तों से संबंधित प्रावधान;
- (iii) किसी भी उपयुक्त विषय पर निदेश जारी करना तथा विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के लिए योग्यता मापदंड, अर्हता मापदंड, आरक्षण नीति, उम्र सीमाएँ और समतुल्यता शर्तों पर परामर्श प्राप्त करना; तथा
- (iv) आयोग के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कोई अन्य आवश्यक या प्रासंगिक विषय। (ङ) आधारभूत संरचना का निर्माण और रख-रखाव, अर्थात् :-
- (i) विश्वविद्यालय मुख्यालय, अंगीभूत महाविद्यालयों एवं संबद्ध परिसरों के लिए भौतिक, अकादमिक, डिजिटल, एवं आवासीय आधारभूत संरचना का विकास, उन्नयन, और अनुरक्षण जिसमें वित्त पोषण की व्यवस्थाएं, तकनीकी मानक, अनुमोदन प्रक्रियाएँ और अनुपालन की समय सीमाएँ शामिल हैं;
- (ii) विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केन्द्रों और अध्ययन केन्द्रों की स्थापना, प्रादेशिक क्षेत्राधिकार, प्रशासनिक संरचना और परिचालन शासन के लिए मानदंडों और प्रक्रियाओं का निर्धारण, जिसमें विश्वविद्यालय की भूमिकाएं भी शामिल हैं;
- (iii) विश्वविद्यालय की आवश्यकता आकलन और अनुशंसाओं के आधार पर सामुदायिक महाविद्यालयों की स्थापना;
- (iv) विश्वविद्यालय परिसरों, अंगीभूत महाविद्यालयों, क्षेत्रीय केन्द्रों और अध्ययन केन्द्रों, में ऊर्जा दक्षता, अपशिष्ट प्रबंधन, जल संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, कार्बन फुटप्रिंट और संबंधित मानकों का आकलन करने हेतु सक्षम प्राधिकारियों या एजेंसियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आवधिक हरित अंकेक्षण का अनिवार्य संचालन; तथा
- (v) कोई अन्य विषय जिसे राज्य सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों में पर्यावरण के लिए विशेषकर, सामाजिक रूप से उत्तरदायी तथा संस्थागत रूप से जवाबदेह वृद्धि और विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक समझे। (च) अनुदान सहायता और प्रोत्साहन, अर्थात् :-
- (i) विश्वविद्यालय या अंगीभूत महाविद्यालय को दिए जानेवाले अनुदान या निधियों के लिए मानदंड निर्धारित करना;
- (ii) विश्वविद्यालय, अंगीभूत महाविद्यालयों और संबद्ध महाविद्यालयों के कर्मचारियों के लिए कार्य निष्पादन आधारित प्रोत्साहनों हेतु योजनाएँ तैयार करना;
- (iii) अनुदानों के उपयोग की निगरानी करना और विश्वविद्यालयों के घाटा वित्तपोषण आधारित लेखांकन को अनिवार्य बनाना; तथा
- (iv) वित्तीय सावधानी को बढ़ावा देने और विश्वविद्यालय को प्रोत्साहन प्रदान करने से सम्बंधित अन्य कोई विषय। (छ) कर्मचारियों और छात्रों की शिकायत का निवारण, अर्थात्:-
- (i) छात्र शिकायत निवारण समिति (एसजीआरसी), कर्मचारी शिकायत निवारण समिति (ईजीआरसी) तथा कर्मचारी शिकायत निवारण प्राधिकरण (ईजीआरटी) का अधिदेश, उनकी संस्थागत संरचना, क्षेत्राधिकार, प्रक्रिया एवं कार्यप्रणाली को इस अधिनियम के अन्तर्गत प्रदान किए गए प्रावधानों के अनुसार उनके उद्देश्य, संरचना, कार्यकाल, कोरम शक्तियाँ तथा कर्तव्य सम्मिलित हैं, विनिर्दिष्ट किए जाते हैं;
- (ii) ई.जी.आर.सी. और ई.जी.आर.टी. के सदस्यों की नियुक्ति एवं प्रतिनियोजन की प्रक्रिया के साथ-साथ उनके वेतन और भत्तों का निर्धारण करना;
- (iii) प्रवेश
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