The Jharkhand State University Act, 2026
Chapter XVII Chapter XVII
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Chapter XVII Chapter XVII
165. ववद्यमान पिाधधकाररयों और कमतचाररयों की ननरंतरता
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संक्रमणकालीन प्रावधान
- (1) इस अधिनियम के प्रारंभ होने के ठीक पूर्व किसी विश्वविद्यालय या अंगीभूत महाविद्यालय में कार्यरत सभी पदाधिकारी, शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर उसी पद, वेतनमान, भत्तों और सेवा शर्तों पर बने रहेंगे जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पूर्व उन पर लागू थे, जब तक कि इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए परिनियमों के अनुसार उनमें कोई परिवर्तन न किया जाए।
- (2) उप-धारा
- (1) के अंतर्गत आने वाले सभी कर्मचारी इस अधिनियम के अधीन संबंधित विश्वविद्यालय के कर्मचारी माने जाएंगे।
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166. ननरंतरता से संबंधधत प्रावधान
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- (1) निरसित अधिनियमों के अधीन गठित सभी सीनेट, सिंडिकेट, शैक्षणिक परिषद, वित्त समिति और अन्य प्राधिकार अथवा निकाय इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर तब तक कार्य करते रहेंगे जब तक कि इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार नए प्राधिकारों या निकायों का गठन नहीं हो जाता।
- (2) निरसित अधिनियमों के अधीन बनाए गए सभी परिनियम, विश्वविद्यालय अध्यादेश और विश्वविद्यालय नियमावली, जहाँ तक वे इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं हैं, तब तक प्रवृत्त रहेंगे जब तक कि इस अधिनियम के अधीन नए परिनियम, अध्यादेश या नियमावली नहीं बना लिए जाते।
- (3) निरसित अधिनियमों के अधीन प्रारंभ की गई कोई भी विधिक कार्यवाही, जांच, अपील या प्रक्रिया इस अधिनियम के तत्समान प्रावधानों के अधीन प्रारंभ की गई मानी जाएगी और जारी रहेगी।
- (4) निरसित अधिनियमों के अधीन प्रदत्त सभी उपाधियां, डिप्लोमा, प्रमाण पत्र, संबद्धता और मान्यता इस अधिनियम के अधीन प्रदत्त अथवा प्रदान की गई मानी जाएगी।
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167. ननरसन एवं व्यावूवृत्त
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निरसन एवं व्यावृत्ति
- (1) इस अधिनियम के प्रवृत्त होने पर निम्नलिखित अधिनियम निरसित किए जाते हैं:- (क) झारखण्ड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2000 (समय-समय पर यथा संशोधित); (ख) झारखण्ड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय अधिनियम, 2016; (ग) झारखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2015; (घ) पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 2022।
- (2) ऐसे निरसन के होते हुए भी,- (क) निरसित अधिनियमों के अधीन स्थापित समस्त विश्वविद्यालय इस अधिनियम के अधीन स्थापित माने जाएंगे; (ख) निरसित अधिनियमों के अधीन बनाए गए सभी परिनियम, अध्यादेश, विनियम, नियम एवं जारी किए गए आदेश अथवा अधिसूचनाएं, जहाँ तक वे इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं हैं, तब तक प्रभावी बने रहेंगे जब तक कि वे इस अधिनियम के अधीन बनाए गए परिनियमों, अध्यादेशों, विनियमों, नियमों या आदेशों द्वारा प्रतिस्थापित, संशोधित या निरसित न कर दिए जाएं; (ग) निरसित अधिनियमों के अधीन नियुक्त या कार्यरत सभी पदाधिकारी, शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी इस अधिनियम के अधीन अपने-अपने पदों पर समान पद, वेतनमान तथा सेवा शर्तों पर बने रहेंगे; (घ) निरसित अधिनियमों के अधीन प्रदत्त समस्त उपाधियां, डिप्लोमा, प्रमाण पत्र या अन्य शैक्षणिक विशिष्टताएं इस अधिनियम के अधीन प्रदत्त मानी जाएंगी; (ङ) निरसित अधिनियमों के अधीन किसी विश्वविद्यालय द्वारा किए गए समस्त कार्य, संविदाएं, करार, दायित्व एवं लेन-देन इस अधिनियम के अधीन संबंधित विश्वविद्यालय पर बाध्यकारी एवं मान्य रहेंगे; (च) निरसित अधिनियमों के अधीन न्यायालयों, अधिकरणों या अन्य प्राधिकारियों के समक्ष लंबित सभी वाद, अपीलें, विधिक कार्यवाहियां एवं अनुशासनात्मक कार्यवाहियां अप्रभावित रहेंगी और इस अधिनियम के अधीन उसी प्रकार जारी रहेंगी।
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168. समस्याओं का ननवारण
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- (1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो राज्य सरकार, आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों: परंतु इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् ऐसा कोई आदेश नहीं किया जाएगा।
- (2) उप-धारा
- (1) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, राज्य विधानमंडल के समक्ष रखा जाएगा।
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169. आधधकाररक पाठ की िाषा
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इस अधिनियम का आधिकारिक पाठ हिन्दी भाषा में होगा।
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