The Jharkhand State University Act, 2026
Chapter XIII Chapter XIII
Chapter XIII Chapter XIII
129. िनत के शलए उत्तरिायी प्राधधकरण एवं कमतचारी
विविध
- (1) विश्वविद्यालय का प्रत्येक प्राधिकारी, उसका प्रत्येक सदस्य, विश्वविद्यालय का प्रत्येक पदाधिकारी या कर्मचारी विश्वविद्यालय की किसी भी संपत्ति, धन या निधि के किसी भी नुकसान, अपव्यय या दुरुपयोग के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होगा, यदि ऐसा नुकसान, अपव्यय या दुरुपयोग उसके द्वारा किए गए जानबूझकर किए गए कदाचार या घोर उपेक्षा का प्रत्यक्ष परिणाम हो।
- (2) ऐसे नुकसान, अपव्यय या दुरुपयोग की राशि का निर्धारण सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जाएगा तथा उत्तरदायी व्यक्ति से ऐसी राशि की वसूली लोक मांग वसूली अधिनियम के उपबंधों के अधीन अथवा परिनियमों द्वारा विहित रीति से की जाएगी: परंतु यह कि वसूली का कोई भी आदेश पारित करने से पूर्व संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस एवं सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर प्रदान किया जाएगा।
Chapter XIII Chapter XIII
130. राज्य ववधानमंडल एवं संसि की सिस्यता
- (1) यदि विश्वविद्यालय या उसके किसी अंगीभूत महाविद्यालय का कोई पूर्णकालिक शिक्षक या शिक्षकेत्तर कर्मचारी राज्य विधानमंडल या संसद के किसी सदन का सदस्य निर्वाचित होता है, तो वह ऐसे निर्वाचन की तिथि से उस अवधि के लिए, जिसके दौरान वह ऐसा सदस्य रहता है, बिना वेतन के असाधारण अवकाश पर समझा जाएगा।
- (2) उप-धारा
- (1) के अधीन अवकाश की अवधि के दौरान संबंधित शिक्षक या कर्मचारी विश्वविद्यालय या महाविद्यालय से किसी भी प्रकार के वेतन, भत्ते या अन्य पारिश्रमिक का हकदार नहीं होगा।
- (3) राज्य विधानमंडल या संसद की सदस्यता की अवधि समाप्त होने पर, वह अपने मूल पद पर पुनः योगदान करने का हकदार होगा तथा ऐसी अवकाश अवधि को सेवा में निरंतरता के प्रयोजन के लिए माना जाएगा, जैसा कि परिनियमों द्वारा निर्धारित किया जाए।
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131. पेंिन, उपािान, बीमा तथा िववष्य ननधध
पेंिन, उपािान, बीमा तथा िववष्य ननधध
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132. वववेचन, वववाि इत्यादि
- (1) यदि इस अधिनियम, परिनियम, विश्वविद्यालय अध्यादेश या विश्वविद्यालय नियमावली के किसी उपबंध के अर्थ या निर्वचन के संबंध में अथवा किसी व्यक्ति के विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकरण, निकाय या समिति का सदस्य बनने, नामनिर्दिष्ट होने या बने रहने के अधिकार के संबंध में कोई विवाद या प्रश्न उठता है, तो वह मामला कुलाधिपति को संदर्भित किया जाएगा।
- (2) इस संबंध में कुलाधिपति का निर्णय अंतिम एवं बाध्यकारी होगा।
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133. अधधननयमों तथा आिेिों का संरिण
इस अधिनियम, परिनियमों, विश्वविद्यालय अध्यादेशों या विश्वविद्यालय नियमावली के अनुसरण में सद्भावपूर्वक किए गए या किए जाने के लिए आशयित किसी कार्य के लिए विश्वविद्यालय, उसके किसी प्राधिकरण, निकाय, समिति या किसी पदाधिकारी अथवा कर्मचारी के विरुद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं चलाई जाएगी।
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134. िक्ततयों का प्रत्यायोजन
विश्वविद्यालय का कोई भी प्राधिकरण या निकाय, परिनियमों द्वारा विहित शर्तों और परिसीमाओं के अधीन रहते हुए, लिखित आदेश द्वारा अपनी किसी भी शक्ति या कर्तव्य को, सिवाय परिनियम, अध्यादेश या नियमावली बनाने की शक्ति के, किसी समिति, पदाधिकारी या सदस्य को प्रत्यायोजित कर सकता है।
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135. कायत तथा कायतवादहयााँ अमान्य नहीं हैं
कायत तथा कायतवादहयााँ अमान्य नहीं हैं
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