The Jharkhand State University Act, 2026
Chapter I Chapter I
Chapter I Chapter I
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारंभ
प्रारंभिक
- (1) इस अवधवनयम को "झारखण्ड राज्य विश्वविद्यािय अवधवनयम, 2026" के नाम से िाना िाएगा।
- (2) यह झारखण्ड राज्य में िवणवत और स्थावपत समस्त विश्वविद्याियों पर प्रितवनीय होगा िैसा वक अवधवनयम के अनुसूची-II एिं III में िवणवत है ।
- (3) यह उस वतवथ से प्रभािी होगा विस वतवथ से अवधकाररक रािपत्र में अवधसूवचत वकया िाएगा।
Chapter I Chapter I
2. परिभाषाएँ
पररभाषाएँ
इस अवधवनयम में, िब तक संिभव से अन्यथा अपेवक्षत न हो, वनम्नविखखत िब्ों के अथव इस प्रकार होंगे:-
(क) "ए.बी.सी." का अथव अकािवमक िे वडट बैंक से है; (ख) "िैक्षवणक पररिि्" का अथव विश्वविद्यािय की िैक्षवणक पररिि् से है; (ग) "संबद्ध महाविद्यािय" का अथव िह महाविद्यािय है विसे विश्वविद्यािय द्वारा संबद्धता प्रिान की गई हो; (घ) "ए.आई.सी.टी.ई." का अथव अखखि भारतीय तकनीकी विक्षा पररिि् से है, विसे अखखि भारतीय
(च) "स्वायत्त महाविद्यािय" अथिा "स्वायत्त संस्थान" का अथव िह महाविद्यािय अथिा संस्थान है विसे स्वायत्तता प्रिान की गई हो और विसे पररवनयमों द्वारा इस रूप में वनविवष्ट वकया गया हो;
एिं प्रिासवनक स्वायत्तता प्राप्त करेगा;
(ि) "अद्धविाविवक अवधिेिन" का अथव प्रवतििव आयोवित होने िािे सीनेट के अवधिेिनों में से एक
अवधिेिन से है;
गए हों; (ट) "कु िावधपवत" और “प्रवत कु िावधपवत” का अथव इस अवधवनयम द्वारा वनविवष्ट विश्वविद्यािय के कु िावधपवत और प्रवत कु िावधपवत से है;
(ठ) “मुख्यमंत्री” का अथव है झारखण्ड राज्य के मुख्यमंत्री;
(ड) "महाविद्यािय" का अथव िह महाविद्यािय है विसे विश्वविद्यािय द्वारा स्थावपत या संबद्ध वकया गया हो; (ढ) "अंगीभूत महाविद्यािय" का अथव िह महाविद्यािय है विसे विश्वविद्यािय अथिा राज्य सरकार द्वारा स्थावपत और संचावित वकया िाता हो; (ण) “सवमवत” का अथव विश्वविद्यािय एिं/अथिा महाविद्यािय की सवमवत है िो विश्वविद्यािय के क्षेत्रावधकार में है;
(त) “आयोग” का अथव इस अवधवनयम के धारा-142 के अंतगवत स्थावपत “झारखण्ड राज्य विश्वविद्यािय
सेिा आयोग” से है; (थ) “सामुिावयक महाविद्यािय” से आिय राज्य सरकार द्वारा स्थावपत वकसी भी अंगीभूत महाविद्यािय
की एक उप-इकाई से है िो राज्य के िूरस्थ या िैक्षवणक रूप से वपछड़े क्षेत्रों में िहां सकि नामांकन
अनुपात
- (GER) कम है, स्थावपत की िाती है। इस प्रकार के महाविद्याियों का उद्देश्य व्यािसावयक, कौिि आधाररत अथिा उच्चतर विक्षा कायविमों को स्नातक वडप्लोमा स्तर तक प्रिान करना होता है। ये कायविम राष्ट र ीय व्यािसावयक प्रविक्षण एिं विक्षा पररिि् (NHEQF) द्वारा वनधावररत राष्ट र ीय कौिि योग्यता रूपरेखा
- (NSQF) अथिा विश्वविद्यािय अनुिान आयोग द्वारा वनविवष्ट राष्ट र ीय उच्चतर
(ि) “अवधष्ठाता” का अथव है संबंधित संकाय एिं धिश्वधिद्यालय के शैक्षधिक मामल ं के अवधष्ठाता; (ध) “वडग्री”, “वडप्लोमा”, “प्रमाण पत्र” का अथव विश्वविद्यािय द्वारा प्रित्त िैक्षवणक योग्यता से है;
कायव करता हो; (प) "उच्च एिं तकनीकी विक्षा विभाग" का अथव झारखण्ड सरकार का उच्च एिं तकनीकी विक्षा विभाग है;
(फ) "वनिेिक" का अथव विश्वविद्यािय के वकसी संस्थान, बोडव या कें द्र का प्रमुख है, विसे सीनेट या
वसंवडके ट द्वारा नावमत वकया गया हो;
(ब) “उच्च धशक्षा धिदेशक” तथा “तकिीकी धशक्षा धिदेशक” से तात्पयव है झारखण्ड सरकार के उच्च
एिं तकिीकी धशक्षा धिभाग के अिीि उच्च धशक्षा धिदेशक एिं तकिीकी धशक्षा धिदेशक;
(भ) "कमवचारी" का अथव विश्वविद्यािय के स्वीकृ त पिों पर वनयुि स्थायी वनयवमत विक्षक या विक्षके त्तर
कमवचारी या अवधकाररयों से है; (म) "सिि स्वायत्त महाविद्यािय" का अथव िह स्वायत्त महाविद्यािय है विसे विश्वविद्यािय अनुिान
अवधकार प्राप्त हो;
प्राप्त हो, विन्हें सरकार द्वारा अवधकाररक रािपत्र में अवधसूवचत उच्च ग्रेड प्रिान वकया गया हो और
हो; (र) “िुल्क” का अथव विक्षण िुल्क, अन्य िुल्क तथा प्रभार, विसमें विकासात्मक िुल्क सखिवित हैं,
है; (ि) “विश्वविद्यािय विभागाध्यक्ष” तथा “महाविद्यािय विभागाध्यक्ष” का अथव िमिः विश्वविद्यािय विभाग
के अध्यक्ष तथा महाविद्यािय विभाग के अध्यक्ष को इंवगत करता है, िैसा वक पररवनयमों में विवनविवष्ट
वकया गया है;
(ि) “उच्च धशक्षा” से तात्पयव है धिश्वधिद्यालय, धिश्वधिद्यालय धिभाग या धकसी महाधिद्यालय द्वारा प्रदाि
की जािे िाली धशक्षा; (ि) “मानि उपावध” का अथव ऐसी वडग्री या िैक्षवणक योग्यता से है िो वकसी व्यखि को विविष्ट उपिखि
या प्रवतष्ठा के कारण प्रिान की िाती है, िैसा वक सीनेट द्वारा वनणीत हो तथा राज्य सरकार द्वारा
उसकी पुवष्ट की िाए;
(स) “छात्रािास” का अथव विश्वविद्यािय, महाविद्यािय या संस्था के विद्यावथवयों के विए एक वनिास-स्थि
से है, विसे विश्वविद्यािय, महाविद्यािय या संस्था द्वारा स्थावपत, संचावित तथा अनुरवक्षत वकया गया हो; (ह) “संस्थान” का अथव एक िैवक्षक संस्थान से है, िो वकसी महाविद्यािय से वभन्न हो तथा विसे
विश्वविद्यािय के वििेिावधकार प्राप्त हों;
(क्ष) “िे॰सी॰एस॰टी॰आई॰” (JCSTI) का अथव झारखण्ड विज्ञान, प्रौद्योवगकी एिं निाचार पररिि् से है,
िो झारखण्ड सरकार के उच्च एिं तकनीकी विक्षा विभाग का एक स्वायत्त वनकाय है;
(त्र) “िे॰एस॰एफ॰डी॰ए॰” (JSFDA) का अथव झारखण्ड स्टेट फै कल्टी डेििपमेंट एके डमी से है, िो
झारखण्ड सरकार के उच्च एिं तकनीकी विक्षा विभाग का एक स्वायत्त वनकाय है;
(ज्ञ) “िे॰एस॰एच॰ई॰सी॰” (JSHEC) का अथव झारखण्ड राज्य उच्च विक्षा पररिि् से है, िो झारखण्ड
योग्यता रखते हैं; (कग) “एन॰ए॰ए॰सी॰” का अथव राष्ट र ीय मूल्ांकन एिं प्रत्यायन पररिि् से है;
(कघ) “एन॰बी॰ए॰” का अथव राष्ट
र ीय प्रत्यायन मंडि से है; (कङ) “गैर-विश्रामािकािी िैक्षवणक कमी” का अथव उन कवमवयों से है, विन्हें राज्य सरकार द्वारा गैर-
वनिेिक/ प्रधानाचायव एिं अन्य ऐसे सभी कमी िो प्रिासवनक कायों का वनिवहन करते हैं;
परीक्षा वनयंत्रक तथा अन्य हैं ; (कछ) “अन्य वपछड़ा िगव” का अथव उन सामाविक एिं िैवक्षक रूप से वपछड़े िगों से है, विन्हें राज्य सरकार द्वारा इस रूप में घोवित वकया गया हो तथा इसमें िह अन्य वपछड़ा िगव भी सखिवित होंगे, विन्हें
भारत सरकार द्वारा झारखण्ड राज्य के संिभव में घोवित वकया गया हो;
(कि) “वििेि रूप से कमिोर िनिातीय समूह (PVTG)” का अथव उन िनिावतयों से है विन्हें समय- समय पर राज्य सरकार अथिा भारत सरकार द्वारा इस रूप में घोवित वकया गया हो ;
(कझ) “सािविवनक विश्वविद्यािय” का अथव ऐसा विश्वविद्यािय है िो संसि के अवधवनयम द्वारा स्थावपत
वकया गया हो और विसे कें द्र सरकार अथिा राज्य सरकार द्वारा संचावित और अनुरवक्षत वकया िाता हो; (कञ) “स्नातकोत्तर विभाग” का अथव वकसी महाविद्यािय या उच्च विक्षा, अनुसंधान अथिा विविष्ट अध्ययन
(कट) “वनधावररत” का अथव इस अवधवनयम के अंतगवत या इसके अधीन पररवनयमों, विश्वविद्यािय अवधवनयमों, अथिा वनयमों द्वारा वनधावररत होने से है;
(कठ) “प्रधानाचायव” का अथव विश्वविद्यािय के अंगीभूत या संबद्ध महाविद्यािय के प्रमुख से है;
(कड) “प्राध्यापक, “सह-प्राध्यापक” तथा “सहायक प्राध्यापक” का अथव पररवनयमों में विवनविवष्ट या समय-
समय पर राज्य सरकार द्वारा अवधसूवचत संकाय अथिा विक्षक के रूप में होता है;
(कढ) “उपाचायव” का अथव वकसी महाविद्यािय अथिा विश्वविद्यािय में उस विक्षक से है, िो पररवनयमों द्वारा विवनविवष्ट अहवताएँ रखता हो; (कण) “क्षेत्रीय कें द्र” से अवभप्राय विश्वविद्यािय की ऎसी समग्र अन्तवनववहत एिं स्वतंत्र इकाइयों से है, विन्हें इस अवधवनयम की अनुसूची-II में उखिखखत वकया गया है तथा विन्हें वकसी वनवित भौगोविक क्षेत्रावधकार हेतु सक्षम प्रावधकारी द्वारा अनुमोवित वकया गया है। इन के न्द्ों की स्थापना उि
क्षेत्रावधकार में प्रिासवनक तथा विस्तार गवतविवधयों के विकें द्रीकरण के उद्देश्य से की िाती है,
विससे कायवक्षमता एिं प्रभाििीिता में िृखद्ध हो सके;
(कत) “पंिीकृ त स्नातक” का अथव वकसी विश्वविद्यािय का िह स्नातक है, िो इस अवधवनयम के अंतगवत या
अवधवनयम द्वारा पंिीकृ त अथिा पंिीकृ त माना गया हो;
(कि) “अनुसंधान प्रधान एकि विश्वविद्यािय” का अथव इस अवधवनयम के अंतगवत स्थावपत उस विश्वविद्यािय से है, िो एकि प्रकृ वत का हो तथा विसे वकसी महाविद्यािय को संबद्ध करने का अवधकार न हो; (कध) “स्वीकृ त पि” का अथव िह पि हैं, विन्हें राज्य सरकार द्वारा स्वीकृ त वकया गया हो;
मान्यता प्राप्त हो;
अनुसूवचत िनिावत माना िाता है;
द्वारा प्रारम्भ या संचावित वकया िाता है, तथा विन्हें राज्य सरकार से वकसी प्रकार की वित्तीय सहायता या बिटीय समथवन, चाहे िह आित्ती या अनािती हो, प्राप्त नहीं होता। ऐसे पाठ्यिमों का सम्पूणव व्यय विसमें संकाय अथिा कमवचारी का िेतन, उपकरण, प्रिासवनक व्यय तथा संचािन सबंधी िागत सखिवित है (पर सीवमत नहीं है) – छात्रों द्वारा एकवत्रत िुल्क या वकसी अन्य गैर- सरकारी स्रोत से पूरा वकया िाता है, बिते वक िह राज्य सरकार, विश्वविद्यािय अथिा अन्य
विवनयामक वनकायों द्वारा वनधावररत वनयामक स्वीकृ वतयों या पयविेक्षण के अधीन हो;
(कम) “राज्य सरकार” से अवभप्राय झारखण्ड सरकार से है तथा इसमें िह अन्य सक्षम प्रावधकारी या
पिावधकारी भी िावमि हैं विन्हें संबंवधत पररवनयमों के अंतगवत प्रित्त प्रािधानों के अनुसार िखियाँ
प्रिान की गई हों एिं कतवव्यों का वनधावरण वकया गया हो;
(कय) “राज्य आरक्षण नीवत” का अथव झारखण्ड की आरक्षण नीवत से है विसे समय-समय पर अवधसूवचत
एिं संिोवधत वकया गया है; (कर) “पररवनयम”, “ विश्वविद्यािय अवधवनयम”, तथा “वनयमाििी” का िमिः अथव इस अवधवनयम के
(कि) “अध्ययन कें द्र” का अथव विश्वविद्यािय की एक व्यापक, अंतवनववहत, स्वायत्त इकाई से है, विसे वकसी पूिव-वनधावररत भौगोविक क्षेत्रावधकार हेतु सक्षम प्रावधकारी द्वारा अनुमोवित वकया गया हो तथा विसका उद्देश्य उस क्षेत्रावधकार में अकािवमक तथा अनुसंधान गवतविवधयों का विकें द्रीकरण करना हो; (कि) “वसंवडके ट” का अथव विश्वविद्यािय का वसंवडके ट है;
(कि) “विक्षक” का अथव वकसी भी विश्वविद्यािय विभाग, अथिा विश्वविद्यािय के अंगीभूत, संबद्ध अथिा
स्वायत्त महाविद्यािय में पूणवकाविक वनयवमत प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक,
उपाचायव, व्याख्याता, प्रधानाचायव, वकसी संस्थान के वनिेिक, िारीररक विक्षा के वनिेिक या
प्रविक्षक से है;
(कस) “विक्षण प्रधान संबद्धता विश्वविद्यािय” का अथव इस अवधवनयम के अंतगवत स्थावपत उस विश्वविद्यािय
से है, विसे वकसी महाविद्यािय को संबद्ध करने की िखि प्राप्त हो; (कह) “विश्वविद्यािय” का अथव इस अवधवनयम की अनुसूची-I, II एिं III में उखिखखत राज्य विश्वविद्याियों से है; (कक्ष) “विश्वविद्यािय विभाग” का अथव विश्वविद्यािय द्वारा स्थावपत एिं अनुरवक्षत उस विभाग से है, िो
पररवनयमों के अनुसार अनुसंधान, परामिव एिं प्रसार सेिाएँ प्रिान करता हो तथा वकसी विविष्ट
वििय या वििय समूह की विक्षा प्रिान करता हो;
(कत्र) “विश्वविद्यािय वनवध” का अथव इस अवधवनयम की धारा 124 के अंतगवत स्थावपत विश्वविद्यािय की
वनवध से है;
(कज्ञ) “विश्वविद्यािय अनुिान आयोग” का अथव विश्वविद्यािय अनुिान आयोग अवधवनयम, 1956 के अंतगवत
स्थावपत विश्वविद्यािय अनुिान आयोग से है; तथा
(खक) “कु िपवत” एिं “प्रवत-कु िपवत” का अवभप्राय िमिः विश्वविद्यािय के कु िपवत एिं प्रवत-कु िपवत से
है।
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