section 7
विश्वविद्यालय की शक्तियां और उसके कृत्य
The Sanchi University of Buddhist-Indic studies Act, 2012विश्वविद्यालय की शक्तियां और उसके कृत्य निम्नानुसार होंगे:—
(एक) उद्देश्यों में दिए गए अनुसार सारवान तथा सर्वसमावेशी शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान उपलब्ध करना, विकसित करना तथा प्रोन्नत करना ऐसी शिक्षा की प्राप्ति के लिए सामर्थ्यकारी तथा प्रेरक वातावरण सृजित करना;
(दो) नूतन विषय पाठ्यक्रम तैयार करने तथा उनके अध्ययन का तथा अध्यापन और अध्ययन के प्रभावी तरीकों का प्रबंध करना;
(तीन) विश्वविद्यालय के उद्देश्यों को अग्रसर करने हेतु अंतराष्ट्रीय भागीदारों का सहयोग स्थापित करना;
(चार) परामर्श सेवाएं, सतत् शिक्षा कार्यक्रम, राष्ट्रीय तथा अंतराष्ट्रीय सहयोग तथा बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के माध्यम से संसाधन विकसित करना;
(पांच) विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की जाने वाली उपाधि, उपाधिपत्र या प्रमाण-पत्र के लिए अध्ययन पाठ्यक्रम हेतु अर्हताएं विहित करना और विश्वविद्यालय में छात्रों के प्रवेश को विनियमित करना;
(छह) एक पुस्तकालय की स्थापना एवं विकास करना तथा भौतिक एवं डिजिटल स्वरूप में साहित्य को परिलक्षित करना;
(सात) ऐसी शर्तों के अध्यधीन रहते हुए, जैसी कि विश्वविद्यालय अवधारित करे, परीक्षाएं आयोजित करना तथा व्यक्तियों को उपाधिपत्र या प्रमाण-पत्र देना और उपाधियां तथा विद्या संबंधी अन्य विशिष्टताएं प्रदान करना और ऐसे किन्हीं उपाधिपत्रों, प्रमाण-पत्रों, उपाधियों या विद्या संबंधी अन्य विशिष्टताओं का उचित तथा पर्याप्त कारणों से प्रत्याहरण करना;
(आठ) परिनियमों में अधिकथित रीति में सम्मानिक उपाधियां या अन्य विशिष्टताएं प्रदान करना;
(नौ) फीस तथा अन्य प्रभार नियत करना, उनकी मांग करना और प्राप्त करना;
(दस) छात्रावास एवं निवास कक्ष (हाल) स्थापित करना तथा विश्वविद्यालय द्वारा प्रबंधित नहीं किए जा रहे छात्र निवासों तथा अन्य स्थानों को मान्यता प्रदान करना तथा उनका नियंत्रण तथा ऐसे किसी निवास स्थान को दी गई ऐसी मान्यता का प्रत्याहरण करना;
(ग्यारह) आचार्य, सह आचार्य, सहायक आचार्य, उपाचार्य एवं व्याख्याता के पदों और विश्वविद्यालय द्वारा अपेक्षित कोई अन्य अध्यापन, विद्या संबंधी या गवेषणा पदों को संस्थित करना और उन पर नियुक्तियां करना;
(बारह) तकनीकी, प्रशासनिक, लिपिकीय तथा अन्य पदों का सृजन करना और उन पर नियुक्तियां करना;
(तेरह) विश्वविद्यालय के छात्रों तथा कर्मचारियों में अनुशासन विनियमित करना तथा उसका पालन करवाना और ऐसे अनुशासनात्मक उपाय करना, जो आवश्यक समझे जाएं;
(चौदह) अध्येतावृत्तियां, छात्रवृत्तियां, पुरस्कार तथा पदक संस्थित करना तथा प्रदान करना;
(पंद्रह) विश्वविद्यालय की किन्हीं कक्षाओं या विभागों को समाप्त करना या उनका चलाना बंद करना;
(सोलह) ऐसे प्रयोजनों के लिए, जिन पर परस्पर सहमति हो, ऐसे निबंधन तथा शर्तों पर, जो कि विश्वविद्यालय समय-समय पर अवधारित करें, बौद्ध धर्म की शिक्षा, प्रशिक्षण तथा गवेषणा और सहायक विषयों के संबंध में किसी अन्य संगठन के साथ सहयोग करना;
(सत्रह) विश्वविद्यालय के व्ययों का विनियमन करना तथा उसके लेखाओं का प्रबंध करना;
(अठारह) ऐसे अनुदान, आर्थिक सहायता, अभिदान, संदान तथा दान प्राप्त करना, जो विश्वविद्यालय के प्रयोजनों के लिए हों तथा जो उन उद्देश्यों से संगत हों, जिनके लिये विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है;
(उन्नीस) कोई ऐसी भूमि या भवन या संकर्म, जो विश्वविद्यालय के प्रयोजन के लिये आवश्यक या सुविधाजनक हो, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो कि विश्वविद्यालय ठीक तथा उचित समझे, क्रय करना, पट्टे पर प्राप्त करना या दान के रूप में या अन्यथा स्वीकार करना और ऐसे किसी भवन या संकर्म का सन्निर्माण करना या उसमें परिवर्तन करना और उसे बनाए रखना;
(बीस) विश्वविद्यालय की जंगम या स्थावर समस्त सम्पत्तियों या उनके किसी भाग का, ऐसे निबंधनों पर, जो वह ठीक तथा उचित समझे, तथा जो विश्वविद्यालय के हित तथा कार्यकलापों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालते हैं, विक्रय करना या उनका अन्यथा व्ययन करना;
(इक्कीस) राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से विश्वविद्यालय की स्थावर सम्पत्तियों या उनके किसी भाग का, विश्वविद्यालय के हितों तथा कार्यकलापों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे निबंधनों पर, जो वह ठीक तथा उचित समझे, विक्रय करना, या उनका अन्यथा व्ययन करना;
(बाईस) वचन-पत्रों (प्रामिसरी नोट), विनिमय-पत्रों, चैकों या अन्य परक्राम्य लिखतों का परक्रामण (नैटोशिएट) करना;
(तेईस) जंगम या स्थावर सम्पत्ति के संबंध में, जिसमें विश्वविद्यालय की या विश्वविद्यालय के प्रयोजन के लिये अपेक्षित सरकारी प्रतिभूतियां (गवर्नमेंट सिक्योरिटीज़) सम्मिलित हैं, हस्तांतरण पत्र, अन्तरण, पुनर्हस्तांतरण पत्र, बंधक, पट्टे तथा करार निष्पादित करना;
(चौबीस) विश्वविद्यालय की ओर से कोई लिखत निष्पादित करने या उसका कोई कामकाज करने या उपर्युक्त खण्ड (अठारह), (उन्नीस), (बीस) तथा (इक्कीस) के अधीन विश्वविद्यालय के कृत्यों का निर्वहन करने हेतु किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसे वह उचित समझे, नियुक्त करना;
(पच्चीस) केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकारों, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या अन्य प्राधिकारियों के साथ अनुदान प्राप्त करने के लिये कोई करार करना;
(छब्बीस) विश्वविद्यालय की समस्त या किन्हीं भी सम्पत्तियों या आस्तियों के आधार पर या उन पर आधारित बंध-पत्रों, बंधकों, वचन-पत्रों या अन्य बाध्यताओं अथवा प्रतिभूतियों पर या किन्हीं प्रतिभूतियों के बिना ऐसे निबंधनों तथा शर्तों पर, जैसे कि वह उचित समझे, धन प्राप्त करना तथा उधार लेना और धन प्राप्त करने से आनुषंगिक समस्त व्ययों का भुगतान विश्वविद्यालय की निधियों में से करना और उधार लिये गये किसी धन का प्रतिदाय तथा मोचन करना;
(सत्ताईस) विश्वविद्यालय की निधियां या विश्वविद्यालय को सौंपी गई निधि, ऐसी प्रतिभूतियों में या तथा ऐसी रीति में, जो वह उचित समझे, विनिहित करना और किसी विनिधान का, समय-समय पर, अंतर्विनिमय (ट्रांसपोज) करना;
(अठ्ठाईस) ऐसे विनियम बनाना, जो समय-समय पर, विश्वविद्यालय के कार्यकलापों तथा प्रबंध का विनियमन करने के लिये आवश्यक समझे जाएं और उनमें परिवर्तन करना, उपांतरण करना तथा उन्हें विखंडित करना;
(उन्नीस) विद्या संबंधी, तकनीकी, प्रशासनिक और अन्य कर्मचारिवृन्द के फायदे के लिये, ऐसी रीति में और ऐसी शर्तों के अध्यधीन रहते हुए, जो परिनियमों द्वारा विहित किए जाएं, पेंशन, बीमा और उपदान जैसा कि वह उचित समझे, निधि गठित करना और विश्वविद्यालय के किन्हीं कर्मचारिवृन्द के फायदे के लिये ऐसा अनुदान देना, जैसा कि वह उचित समझे और ऐसी संस्थाओं, संस्थाओं, निधियों, न्यासों और कन्वेयंस के स्थापित किये जाने में सहायता करना और उनका समर्थन करना, जो कि विश्वविद्यालय के कर्मचारिवृन्द तथा छात्रों के फायदे के लिये आशयित हों;
(तीस) समस्त ऐसे कार्य तथा बातें करना, जो विश्वविद्यालय अपने समस्त या उनमें से किसी उद्देश्य को प्राप्त करने या उनमें अभिवृद्धि करने के लिये आवश्यक, सहायक या आनुषंगिक समझे.
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