section 31
विद्या परिषद्
The Sanchi University of Buddhist-Indic studies Act, 2012Education201259 sections
Statutory text
- (1) विद्या परिषद् विश्वविद्यालय की विद्या संबंधी निकाय होगी और इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए परिनियमों, अध्यादेशों और विनियमों के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, उसे विश्वविद्यालय के शिक्षण, शिक्षा और परीक्षा मानकों पर नियंत्रण रखने तथा सामान्य विनियमन करने की शक्ति होगी और वह इन मानकों को बनाए रखने के लिये भी उत्तरदायी होगी और वह ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगी, जो उसे इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए परिनियमों, अध्यादेशों और विनियमों द्वारा प्रदत्त की जाएं या उस पर अधिरोपित किए जाएं और उसे यह अधिकार होगा कि वह विद्या संबंधी समस्त मामलों पर साधारण परिषद् को सलाह दे.
- (2) विद्या परिषद् निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगी, अर्थात्:- (एक) कुलपति, जो उसका अध्यक्ष होगा; (दो) कुलपति द्वारा नामनिर्दिष्ट तीन विशेषज्ञ, जो अन्य विश्वविद्यालयों में कार्य कर रहे हों; (तीन) समस्त संकायाध्यक्ष और विभागाध्यक्ष तथा कुलपति द्वारा नामनिर्दिष्ट दो आचार्य; और (चार) कुलपति द्वारा नामनिर्दिष्ट अध्यापन कर्मचारिवृन्द का एक सदस्य, जो विश्वविद्यालय के सह आचार्य तथा सहायक आचार्य का प्रतिनिधित्व करता हो: परन्तु विश्वविद्यालय का कोई कर्मचारी उपरोक्त खण्ड (दो) के अधीन नामांकन के लिए पात्र नहीं होगा.
- (3) पदेन सदस्यों से भिन्न सदस्यों की पदावधि तीन वर्ष होगी: परन्तु प्रथम विद्या परिषद् की कालावधि पांच वर्ष होगी, किन्तु द्वितीय और तृतीय विद्या परिषद् की कालावधि तीन वर्ष होगी.
- (4) कुल सचिव, विद्या परिषद् का सचिव होगा.
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