section 28
कार्य परिषद् की शक्तियां तथा कृत्य
The Sanchi University of Buddhist-Indic studies Act, 2012धारा 23 के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कार्य परिषद् की निम्नलिखित शक्तियां और कृत्य होंगे :-
(एक) विद्या परिषद् की सिफारिशों पर विचार करने के पश्चात् विश्वविद्यालय में अध्यापन पदों को सृजित करना, समाप्त करना या वर्गीकृत करना और उनसे संलग्न अर्हताएं, परिलब्धियां तथा कर्तव्य अवधारित करना :
परन्तु अध्यापन पद राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से सृजित किए जा सकेंगे;
(दो) समय-समय पर पुस्तकालयाध्यक्ष, आचार्य और अध्यापन कर्मचारिवृन्द के अन्य सदस्य, जैसा कि आवश्यक हो, विनियमों द्वारा इस प्रयोजन के लिए गठित की गई चयन समिति की सिफारिशों पर नियुक्त करना :
परन्तु—
(क) किसी अधिसंख्य पद (सुपरन्यूमरेरी पोस्ट) पर; या
(ख) उच्च विद्या संबंधी विशिष्टता, विख्यात तथा कुशलता प्राप्त व्यक्ति के आचार्य के पद पर, नियुक्ति करने के लिये कोई चयन समिति गठित करना आवश्यक नहीं होगा;
(तीन) राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से प्रशासनिक, लिपिकवर्गीय तथा अन्य आवश्यक पद सृजित करना, और ऐसे पदों की न्यूनतम अर्हताएं तथा उनकी परिलब्धियां अवधारित करना;
(चार) विश्वविद्यालय के वित्त, लेखाओं, विनियनों, संपत्ति, कामकाज और अन्य समस्त प्रशासनिक कार्यकलापों की व्यवस्था करना और विनियमित करना और उस प्रयोजन के लिये ऐसे अभिकर्ता नियुक्त करना, जैसा कि वह उचित समझे;
(पांच) विश्वविद्यालय की ओर से, साधारण परिषद् के अनुमोदन के अध्यधीन रहते हुए, किसी जंगम संपत्ति का अन्तरण करना या अन्तरण प्रतिग्रहीत करना;
(छह) विश्वविद्यालय की ओर से, राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से किसी स्थावर सम्पत्ति का अन्तरण करना या अन्तरण प्रतिग्रहीत करना;
(सात) विश्वविद्यालय की ओर से, संविदाएं, उनमें फेरफार करना, उनका कार्यान्वयन करना और उन्हें रद्द करना और उस प्रयोजन के लिये ऐसे अधिकारी नियुक्त करना, जैसे कि वह उचित समझे;
(आठ) विश्वविद्यालय का कार्य क्रियान्वित करने के लिये आवश्यक भवन, परिसर, फर्नीचर तथा उपकरण और अन्य साधनों की व्यवस्था करना.
Study data processing for this section.
PDF: pending for this language.