section 13
कुलपति
The Sanchi University of Buddhist-Indic studies Act, 2012Education201259 sections
Statutory text
- (1) कुलपति की नियुक्ति कुलाध्यक्ष द्वारा ऐसी परिलब्धियों और अन्य सेवा शर्तों पर, जैसे कि परिनियमों द्वारा विहित की जाए, साधारण परिषद द्वारा अनुशंसा किए गए कम से कम तीन व्यक्तियों के पैनल में से की जाएगी: परन्तु जब साधारण परिषद कुलपति के पद के लिये कुलाध्यक्ष द्वारा अनुशंसा किए गए नामों पर पैनल के लिए विचार करती है, तब पीठासीन कुलपति बैठक में उपस्थित नहीं रहेगा और संस्कृति विभाग का भारसाधक सचिव साधारण परिषद के सदस्य-सचिव के रूप में कार्य करेगा: परन्तु यह और कि प्रथम कुलपति की नियुक्ति कुलाध्यक्ष द्वारा राज्य सरकार की अनुशंसा पर की जाएगी.
- (2) कुलपति, चार वर्षों की अवधि के लिये पद धारण करेगा तथा दो से अधिक पदावधि के लिये नियुक्ति का पात्र नहीं होगा: परन्तु वह सत्तर वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने पर, पद धारण नहीं करेगा: परन्तु यह और कि उसकी पदावधि समाप्त हो जाने के बाद भी वह तब तक पद पर बना रहेगा जब तक कि उसके उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं हो जाती है और वह अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता किन्तु ऐसी कालावधि किसी भी दशा में छह मास से अधिक नहीं होगी.
- (3) कुलपति, विश्वविद्यालय का प्रधान शैक्षणिक, कार्यकारी अधिकारी होगा तथा विश्वविद्यालय के कार्यकलापों पर सामान्य पर्यवेक्षण और नियंत्रण रखेगा तथा विश्वविद्यालय के समस्त प्राधिकारियों के विनिश्चयों को प्रभावी बनाएगा.
- (4) कुलपति, यदि उसकी राय में किसी मामले में तत्काल कार्रवाई आवश्यक हो, इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकारी को प्रदत्त किन्हीं शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा और उसके द्वारा ऐसे मामले पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट ऐसे प्राधिकारी को देगा: परन्तु संबंधित प्राधिकारी की यह राय है कि ऐसी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए थी तो वह मामले को कुलाधिपति को निर्दिष्ट कर सकेगा। जिसका उस पर विनिश्चय अंतिम होगा: परन्तु यह और कि विश्वविद्यालय सेवा के किसी व्यक्ति को, जो इस उपधारा के अधीन कुलपति द्वारा की गई कार्रवाई से व्यथित है ऐसी कार्रवाई के विरुद्ध ऐसी कार्रवाई पर विनिश्चय उसे संसूचित किए जाने की तारीख से नब्बे दिन के भीतर साधारण परिषद को अभ्यावेदन देने का अधिकार होगा और उस पर साधारण परिषद कुलपति द्वारा की गई कार्रवाई की पुष्टि कर सकेगी, उपांतरण कर सकेगी या उसे पलट सकेगी.
- (5) यदि कुलपति की यह राय है कि किसी प्राधिकारी का निर्णय इस अधिनियम, परिनियमों, या अध्यादेश के उपबंधों द्वारा प्राधिकारी को प्रदत्त शक्तियों से परे है या किया गया कोई निर्णय विश्वविद्यालय के हित में नहीं है तो वह संबंधित प्राधिकारी से ऐसे निर्णय के साठ दिन के भीतर पुनर्वालोकन करने के लिये कह सकेगा और यदि प्राधिकारी अपने विनिश्चय का या तो पूर्णतः या अंशतः पुनर्विलोकन करने से इंकार करता है और उक्त साठ दिन की कालावधि के भीतर कोई निर्णय नहीं लिया जाता है तो मामला कुलपति द्वारा कुलाध्यक्ष को निर्दिष्ट कर दिया जाएगा जिस पर उसका विनिश्चय अंतिम होगा.
- (6) कुलपति ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करेगा जो परिनियमों या अध्यादेशों द्वारा विहित किए जाएं.
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