section 56
कतिपय परिस्थितियों में विश्वविद्यालय के बेहतर प्रशासन के लिये विशेष उपबंध
The Sanchi University of Buddhist-Indic studies Act, 2012Education201259 sections
Statutory text
- (1) यदि राज्य सरकार का किसी रिपोर्ट के प्राप्त होने पर या अन्यथा यह समाधान हो जाए कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें विश्वविद्यालय का प्रशासन विश्वविद्यालय के हितों का अपाय किए बिना, इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता और यह कि ऐसा करना विश्वविद्यालय के हित में समीचीन है, तो वह अधिसूचना द्वारा, उसमें वर्णित किए जाने वाले कारणों से यह निदेश दे सकेगी कि उपधारा (2), (3),
- (4) और
- (5) के उपबंध अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की गई तारीख से (जो इसमें इसके पश्चात् इस धारा में नियत तारीख के रूप में निर्दिष्ट है) विश्वविद्यालय को लागू होंगे.
- (2) उपधारा
- (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना (जो इसमें इसके पश्चात् अधिसूचना के नाम से निर्दिष्ट है), नियत तारीख से एक वर्ष की कालावधि तक के लिये प्रवर्तन में रहेगी और राज्य सरकार, समय-समय पर, उस कालावधि में ऐसी और कालावधि की वृद्धि, जैसा कि वह उचित समझे, इस प्रकार कर सकेगी कि अधिसूचना के प्रवर्तित रहने की कुल कालावधि तीन वर्ष से अधिक न हो.
- (3) नियत तारीख के अव्यवहित पूर्व पद धारित करने वाला कुलपति इस बात के होते हुए भी, कि उसकी पदावधि का अवसान नहीं हुआ है, नियत तारीख से अपना पद रिक्त करेगा और कुलाध्यक्ष, अधिसूचना के जारी होने के साथ-साथ कुलपति को नियुक्त करेगा जो अधिसूचना के प्रवर्तन में रहने की कालावधि के दौरान पद धारण करेगा: परन्तु कुलाध्यक्ष, राज्य सरकार के परामर्श से कुलपति की नियुक्ति करेगा और वैसी ही रीति में कुलाध्यक्ष द्वारा हटाया जा सकेगा: परन्तु यह और कि कुलपति, अधिसूचना के प्रवर्तन की कालावधि का अवसान होने पर भी उसके पश्चात् तब तक पद धारण किये रह सकेगा, जब तक कि उसका उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण न कर ले, किन्तु यह कालावधि एक वर्ष से अधिक नहीं होगी.
- (4) नियत तारीख से निम्नलिखित परिणाम होंगे:-- (एक) प्रत्येक व्यक्ति जो नियत तारीख के अव्यवहित पूर्व यथास्थिति कार्य परिषद या विद्या परिषद के सदस्य के रूप में पद धारण किये हुए हो, उस पद पर नहीं रह जाएगा; (दो) जब तक यथास्थिति, कार्य परिषद या विद्या परिषद का पुनर्गठन न हो जाये तब तक उपधारा
- (3) के अधीन नियुक्त किया गया कुलपति, उन शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा उन कर्तव्यों का पालन करेगा, जो कि कार्य परिषद या विद्या परिषद को इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त की गई हों या उन पर अधिरोपित किये गये हों: परन्तु कुलाध्यक्ष यदि वह वैसा करना आवश्यक समझे, इस प्रकार नियुक्त किये गये कुलपति को ऐसी शक्तियों का प्रयोग करने में तथा ऐसे कर्तव्यों का पालन करने में सहायता देने के लिये एक ऐसी समिति की नियुक्ति कर सकेगा, जिसमें एक शिक्षाविद्, एक प्रशासनिक विशेषज्ञ तथा एक वित्त विशेषज्ञ होंगे.
- (5) अधिसूचना के प्रवर्तन की कालावधि का अवसान होने के पूर्व या उसके अव्यवहित पश्चात् यथासाध्यशीघ्र, कुलपति, अधिनियम के उपबंधों के अनुसार, कार्य परिषद तथा विद्या परिषद का गठन करने के लिये कार्रवाई करेगा और इस प्रकार गठित की गई कार्य परिषद तथा विद्या परिषद अधिसूचना के प्रवर्तन की कालावधि का अवसान होने की तारीख के अव्यवहित पश्चात् आने वाली तारीख को या उस तारीख को, जिसको कि संबंधित निकायों का इस प्रकार गठन हो जाए, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, कार्य करना प्रारंभ कर देगी: परन्तु यदि कार्य परिषद तथा विद्या परिषद अधिसूचना के प्रवर्तन की कालावधि के अवसान होने के पूर्व गठित न की जाए तो कुलपति, ऐसा अवसान हो जाने पर, इन प्राधिकारियों में से प्रत्येक प्राधिकारी की शक्तियों का प्रयोग कुलाध्यक्ष के पूर्व अनुमोदन के अध्यधीन रहते हुए उस समय तक करेगा, जब तक कि यथास्थिति, कार्य परिषद या विद्या परिषद का इस प्रकार गठन न हो जाए.
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