section 7
सदस्यता से हटाया जाना और रिक्ति
Uttarakhand Para Chikitsa Parishad Adhiniyam, 2009Health200944 sections
Statutory text
- (1) परिषद उपधारा
- (2) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना उसके कुल सदस्यों के बहुमत और उपस्थित तथा मत देने वाले सदस्यों के दो तिहाई से अन्यून बहुमत द्वारा किसी समय राज्य सरकार को किसी सदस्य को उसके पद से हटाए जाने की सिफारिश कर सकेगी, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि किसी कारण से परिषद में उस सदस्य का बना रहना लोक हित में नहीं है या उक्त व्यक्ति परिषद के हित पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है और इस सम्बन्ध में राज्य सरकार का विनिश्चय अन्तिम होगा।
- (2) राज्य सरकार, परिषद के किसी सदस्य को हटा सकेगी, यदि वह- (क) किसी ऐसे अपराध के लिए सिद्ध दोष ठहराया गया है, जिसमें नैतिक अधमता, अन्तर्वलित हो; या (ख) सक्षम न्यायालय द्वारा अनुमोदि दिवालिया घोषित किया गया है; या (ग) विकृतचित्त का हो जाता है और सक्षम न्यायालय द्वारा ऐसा घोषित कर दिया गया है; या (घ) सदस्य के रूप में कार्य करने से इंकार करता है या कार्य करने के लिए असमर्थ हो गया है; या (ङ) परिषद के लगातार तीन बैठकों में बिना पर्याप्त कारण के अनुपस्थित रहा है; या (च) उसने, यथास्थिति, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्य के रूप में अपने पद का दुरुपयोग किया है, जिससे उसका पद पर बना रहना लोक हित के प्रतिकूल होगा; या (छ) धारा 3 की उपधारा
- (4) के खण्ड (ट) के अधीन चयनित सदस्य का नाम रजिस्टर से निकाल दिया गया हो : परन्तु यह कि कोई व्यक्ति उपधारा
- (2) के खण्ड (घ), खण्ड (ङ) तथा खण्ड (च) के अधीन तब तक नहीं हटाया जायेगा, जब तक सदस्यों को सुनवाई का समुचित अवसर न दे दिया गया हो।
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