section 3
परिषद का गठन
Uttarakhand Para Chikitsa Parishad Adhiniyam, 2009Health200944 sections
Statutory text
- (1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उत्तराखण्ड परा-चिकित्सा परिषद का गठन करेगी।
- (2) उत्तराखण्ड परा-चिकित्सा परिषद एक निगमित निकाय होगी, जिसका पाश्चत उत्तराधिकार और एक सामान्य मुद्रा होगी और उसको जंगम और स्थावर सम्पत्ति को अर्जित करने, धारित करने और उसका निपटारा करने तथा संविदा करने की शक्ति होगी तथा वह उक्त नाम से वाद ला सकेगी या उसके विरुद्ध वाद लाया जा सकेगा।
- (3) परिषद का मुख्यालय ऐसे स्थान पर होगा, जो राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा विनिश्चित किया जाए।
- (4) परिषद निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगी; अर्थात् :- (क) अध्यक्ष, जो राज्य सरकार द्वारा परिषद के सदस्यों में से, नियुक्त किया जाए; (ख) उपाध्यक्ष, जो राज्य सरकार द्वारा परिषद के सदस्यों में से नियुक्त किया जाए; (ग) स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अपर निदेशक स्तर का एक अधिकारी, जो परा-चिकित्सा से सम्बन्धित होगा; (घ) राज्य सरकार का स्वास्थ्य विभाग का एक ऐसा अधिकारी, जो उपसचिव के स्तर से न्यून न हो; (ङ) राज्य सरकार का वित्त विभाग का एक ऐसा अधिकारी, जो उपसचिव के स्तर से न्यून न हो; (च) राज्य सरकार का चिकित्सा शिक्षा विभाग का एक सदस्य, जो उपसचिव के स्तर से न्यून न हो; (छ) तीन सदस्य, जो निम्नलिखित का प्रतिनिधित्व करने के लिए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएं :- (एक) उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद; (दो) उत्तराखण्ड तकनीकी शिक्षा परिषद; और (तीन) उत्तराखण्ड आयुर्विज्ञान परिषद; (ज) राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त परा-चिकित्सा संस्थाओं के अध्यापकों में से राज्य सरकार द्वारा नामित किए जाने वाले चार सदस्य; (झ) परा-चिकित्सा शिक्षा संस्था को सम्बद्धता प्रदान करने वाले प्रत्येक विश्वविद्यालय द्वारा नामित एक-एक सदस्य; (ञ) राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं राज्य के आयुर्विज्ञान के मेडिकल प्रैक्टिशनर्स में से राज्य सरकार द्वारा नामित चार सदस्य, जो परा-चिकित्सा विषय के ज्ञाता हों; (ट) पंजीकृत परा-चिकित्सा व्यवसायियों में से पांच सदस्य, जो आयुर्विज्ञान प्रयोगशाला, प्रौद्योगिकी, विकिरण चिकित्सा प्रौद्योगिकी, भौतिक चिकित्सा व्यवसाय से हो, प्रत्येक से न्यूनतम एक निर्वाचित सदस्य : परन्तु यह कि अधिनियम के प्रारम्भ होने के पश्चात् प्रथम बार परिषद का गठन होने की दशा में इस प्रवर्ग के अंतर्गत सदस्यों को, राज्य सरकार द्वारा तीन वर्ष के लिए नामित किया जाएगा।
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