section 28
अवचार से सम्बन्धित जांचों की प्रक्रिया
Uttarakhand Para Chikitsa Parishad Adhiniyam, 2009Health200944 sections
Statutory text
- (1) जहां परिषद् की, किसी सूचना की प्राप्ति पर या उसे की गई किसी शिकायत पर प्रथम दृष्टया यह राय है कि कोई परा-चिकित्सा व्यवसायी किसी वृत्तिक या अन्य अवचार का दोषी है, वहां परिषद् मामले को धारा 13 की उपधारा
- (1) के अधीन गठित अनुशासन समिति को निर्दिष्ट करेगी और तदुपरान्त अनुशासन समिति ऐसी जांच ऐसी रीति से करेगी, जो विनियमों द्वारा अवधारित की जाये और ऐसी जांच के परिणाम की परिषद् को रिपोर्ट करेगी।
- (2) यदि ऐसी रिपोर्ट की प्राप्ति पर परिषद् का यह निष्कर्ष है कि परा-चिकित्सा व्यवसायी किसी वृत्तिक या अन्य अवचार का दोषी नहीं है तो वह तदनुसार अपना निष्कर्ष उल्लिखित करेगी और यथास्थिति, कार्यवाही फाइल की जाए या शिकायत खारिज की जाए, के निर्देश देगी।
- (3) यदि परिषद्, ऐसी रिपोर्ट की प्राप्ति पर, यह पाती है कि यथास्थिति, कोई परा-चिकित्सा व्यवसायी अपनी किसी वृत्तिक प्रतिष्ठा में किसी अवचार का दोषी है या उसने वृत्तिक आचरण या शिष्टाचार या इस अधिनियम के अधीन विहित सदाचार संहिता के मानदण्डों का अधिक्रमण किया है, तो वह ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध धारा 27 की उपधारा
- (3) और
- (4) के उपबन्धों के अनुसार कार्यवाही करेगी। स्पष्टीकरण - इस प्रयोजनों के लिए 'परा-चिकित्सा व्यवसायी' के अन्तर्गत वह व्यक्ति भी है, जो अभिकथित अवचार की तारीख को, यथास्थिति, परा-चिकित्सा व्यवसायी था, भले ही वह जांच के समय उस रूप में न रहा हो।
- (4) इस धारा के अधीन किसी जांच के प्रयोजनों के लिए परिषद् और उसकी अनुशासन समिति को निम्नलिखित विषयों की बाबत् वही शक्तियां होगी, जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन सिविल न्यायालय में निहित होती है; अर्थात् :- (क) किसी व्यक्ति को समन करना और उसे हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना; (ख) किसी दस्तावेज की खोज और उसको प्रस्तुत करना; और (ग) शपथ पत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना।
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