section 32
जाँच तथा विवादों का निपटारा
The Chhattisgarh Societies Registraion Act, 1973(1) रजिस्ट्रार स्वप्रेरणा से, या उपधारा (2) के अधीन किये गये आवेदन पर या तो स्वयं या किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जिसे कि उसने लिखित आदेश द्वारा प्राधिकृत किया हो, किसी सोसायटी के गठन, कार्यकरण तथा वित्तीय स्थिति की जांच कर सकेगा।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट किये गये प्रकार की जांच -
(क) सोसायटी के शासी-निकाय के सदस्यों में से अधिकांश सदस्यों के आवेदन पर से उसकी अनिवार्यता के संबंध में एक ज्ञापपत्र के साथ की जायेगी, या
(ख) सोसायटी की कुल सदस्य संख्या के कम से कम एक तिहाई सदस्यों के आवेदन पर से की जायेगी।
(3) रजिस्ट्रार या उपधारा (1) के अधीन उसके द्वारा प्राधिकृत किये गये व्यक्ति को इस धारा के अधीन जांच के प्रयोजन के लिए निम्नलिखित शक्तियाँ होगी, अर्थात् -
(क) सोसायटी की या उसकी अभिरक्षा में की पुस्तकों, लेखाओं, दस्तावेजों, प्रतिभूतियों, नगदी तथा अन्य संपत्तियों तक उसकी अबाध पहुंच समस्त समयों पर रहेगी और किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जो किन्हीं भी ऐसी पुस्तकों, लेखाओं, दस्तावेजों, प्रतिभूतियों, नगदी या संपत्तियों का कब्जा रखता हो या उनकी अभिरक्षा के लिये उत्तरदायी हों, उक्त पुस्तकें, लेखें, दस्तावेजों, प्रतिभूतियां, नगदी या अन्य संपत्तियां, यदि वे सोसायटी के प्रधान कार्यालय से संबंधित हो, तो उसके मुख्यालय पर किसी भी स्थान पर तथा यदि सोसायटी की किसी शाखा से संबंधित हो तो उस नगर के, जिसमें उसकी शाखा स्थित हो, किसी स्थान पर या अपने स्वयं के कार्यालय में पेश करने के लिये समन कर सकेगा,
(ख) वह किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जिसके कि संबंध में उसके पास यह विश्वास करने का कारण हो, कि उसे सोसायटी के कार्यकलापों में से किसी भी कार्यकलाप की जानकारी है, सोसायटी के मुख्यालय पर के किसी भी स्थान पर या उसकी किसी शाखा में या अपने स्वयं के कार्यालय में अपने समक्ष उपसंजात होने के लिये समन कर सकेगा, और
(ग) (एक) वह, सोसायटी के साधारण सम्मिलन के लिए सूचना की कालावधि विनिविष्ट करने वाले किसी विनियम या उपविधि के होते हुये भी, सोसायटी के अधिकारियों से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वे सोसायटी के प्रधान कार्यालय पर या सोसायटी के मुख्यालय पर के किसी अन्य स्थान पर ऐसे समय पर जैसा कि उसके द्वारा निर्देशित किया जाये, सोसायटी का साधारण सम्मिलन बुलायें तथा ऐसे मामलों का जिनका कि संबंध में उसके द्वारा निर्देशित किया जाये, अवधारण करें और जहाँ सोसायटी के अधिकारी ऐसा सम्मिलन से इंकार करें या बुलाने से चूक जाये वहाँ उसे वह सम्मिलन स्वयं बुलाने की शक्ति होगी।
(दो) उपखंड (1) के अधीन बुलाये गये किसी सम्मिलन को सोसायटी के विनियमों या उपविधियों के अधीन बुलाये गये साधारण सम्मिलन की समस्त शक्तियाँ होंगी तथा उसकी कार्यवाहियां ऐसी उपविधियों द्वारा विनियमित होंगी।
(4) जब इस धारा के अधीन कोई जांच की जाये, तो रजिस्ट्रार जांच का परिणाम सोसायटी को संसूचित करेगा, और सोसायटी को समुचित निर्देश जारी कर सकेगा, जो समस्त संबंधित पक्षकारों पर आबद्धकर होंगे।
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