section 26
Registrar's power to take possession of records etc.
The Chhattisgarh Societies Registraion Act, 1973(1) जहॉ कक रजजस्रार का यह समाधान हो जाये कक :- (क) ककसी सोसायटी के अलभिेि, रजजस्रार या िेिा पुस्िकों का बबगाड़ा जाना या नष्ट ककया जाना संभाव्य है ििा ककसी सोसायटी की तनथधयों एिं सम्पवि या दुविातनयोजन या दुरूपयोजन ककया जाना संभाव्य है, या (ि) यदद ककसी सोसायटी के र्ासी -तनकाय या सोसायटी के साधारि सम्मेिन में पुनगाठन हुआ हो और उस र्ासी -तनकाय के बदहगामी सदस्यों ने सोसायटी के अलभिेिों ििा सम्पवि का भार उन व्यजतियों को, जजन्हें कक ऐसा भार प्राति होना या जो ऐसा भार प्राति करने के हकदार हो, सौंपने से इंकार कर ददया है, िहॉ रजजस्रार अपने दिारा लिखिि में सम्यक् रूपेि प्राथधकृि ककये गये ककसी व्यजति को यह तनदेलर्ि करिे हुए आदेर् जारी कर सकेगा कक िह उस सोसायटी की ऐसी पुस्िकों ििा अलभिेिों, तनथधयों एिं सम्पवि का अथधद्गहि कर िे, ििा उनका कब्जा िे िे और सोसायटी के िे अथधकारी जजन पर ऐसी पुस्िकों, अलभिेिों, तनथधयों ििा सम्पवि की अलभरक्षा का उिरदातयत्ि हो, इस प्रकार प्राथधकृि ककये गये व्यजति को उनका पररदान करेंगे। (2) उपधारा (1) के अधीन आदेर् का अनुपािन सुतनलर्ि करने के लिये रजजस्रार ऐसी कायािाही कर सकेगा या करिा सकेगा ििा ऐसे न्यूनिम बि का जजसमें पुलिस बि सजम्मलिि है, प्रयोग कर सकेगा या करिा सकेगा, जो कक आिश्यक समझा/समझी जाये।
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