section 28
Audit and inspection
The Chhattisgarh Societies Registraion Act, 1973(1) प्रत्येक सोसायटी, सोसायटी के िावषाक साधारि सजम्मिन की िारीि से या जहां वितनयम में ककसी िावषाक साधारि सजम्मिन के लिए उपबंध नहीं है िहॉ प्रत्येक िषा अप्रेि माह की 30 िारीि से नब्बे ददन के भीिर संपरीक्षकों दिारा सम्यक् रूपेि संपरीक्षक्षि पूिा विलर्जष्ठयों सदहि आय ििा व्यय का वििरि, पूिाििी िषा की संपरीक्षा ररपोटा ििा िुिना-पत्र (बैिेन्स र्ीट) समस्ि वििीय कक्रयाकिापों के साि ििा ऐसी फीस सदहि जैसी कक विदहि की जाए, रजजस्रार को भेजेगी। यदद सोसायटी उपयुाति वििरि तनयि समय के भीिर भेजने में असफि रहिी है िो सोसायटी ऐसी वििम्ब फीस संदि करने की दायी होगी जैसी कक विदहि की जाए। रजजस्रार, ऐसे वििरि के प्राति होने पर, वििरि का सत्यापन करेगा और यह सुतनलर्ि करेगा कक तनथधयों का उपयोग सोसायटी और उददेश्य की अलभिृदथध के लिये ककया गया है और ि तनथधयों के उपयोग के संबंध में ऐसे अनुदेर् भी जारी कर सकेगा, जैसा कक िह उथचि समझे : परन्िु एक िाि से अथधक संव्यिहार करने िािी सोसायटी के िेिे चाटाडा एकाउंटेंट दिारा सम्यक रूपेि संपरीक्षक्षि रूप में रजजस्रार को प्रस्िुि ककए जाएंगे। (2) यदद रजजस्रार विर्ेष संपरीक्षा करना आियर्क समझे, िह ककसी भी सोसायटी के िेिाओं की संपरीक्षा स्ियं कर सकेगा या उसके दिारा इस संबंध में लिखिि संधारि या विर्ेष आदेर् दिारा प्राथधकृि ककये गये ककसी भी व्यजति से करिा सकेगा। (3) रजजस्रार दिारा लिखिि साधारि या विर्ेष आदेर् दिारा इस संबंध में प्राथधकृि ककये गये ककसी भी व्यजति की, सोसायटी की समस्ि िेिा पुस्िकों ििा अन्य कागज पत्रों िक समस्ि समयों पर (1) प्रत्येक सोसायटी, सोसायटी के वार्षिक साधारण सम्मिलन की तारीख से या जहां विनियम में किसी वार्षिक साधारण सम्मिलन के लिए उपबंध नहीं है वहाँ प्रत्येक वर्ष अप्रैल माह की 30 तारीख से नब्बे दिन के भीतर संपरीक्षकों द्वारा सम्यक् रूपेण संपरीक्षित पूर्ण विशिष्टयों सहित आय तथा व्यय का विवरण, पूर्ववर्ती वर्ष की संपरीक्षा रिपोर्ट तथा तुलन-पत्र (बैलेंस शीट) समस्त वित्तीय क्रियाकलापों के साथ तथा ऐसी फीस सहित जैसी कि विहित की जाए, रजिस्ट्रार को भेजेगी। यदि सोसायटी उपयुक्त विवरण नियत समय के भीतर भेजने में असफल रहती है तो सोसायटी ऐसी विलम्ब फीस संदाय करने की दायी होगी जैसी कि विहित की जाए। रजिस्ट्रार, ऐसे विवरण के प्राप्ति होने पर, विवरण का सत्यापन करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि निधियों का उपयोग सोसायटी और उद्देश्य की अभिवृद्धि के लिये किया गया है और न निधियों के उपयोग के संबंध में ऐसे अनुदेश भी जारी कर सकेगा, जैसा कि वह उचित समझे :
परन्तु एक लाख से अधिक संव्यवहार करने वाली सोसायटी के लेखे चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा सम्यक रूपेण संपरीक्षित रूप में रजिस्ट्रार को प्रस्तुत किए जाएंगे।
(2) यदि रजिस्ट्रार विशेष संपरीक्षा करना आवश्यक समझे, वह किसी भी सोसायटी के लेखाओं की संपरीक्षा स्वयं कर सकेगा या उसके द्वारा इस संबंध में लिखित संधारित या विशेष आदेश द्वारा प्राधिकृत किये गये किसी भी व्यक्ति से करा सकेगा।
(3) रजिस्ट्रार द्वारा लिखित साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत किये गये किसी भी व्यक्ति की, सोसायटी की समस्त लेखा पुस्तकों तथा अन्य कागज पत्रों तक समस्त समयों पर पहुंच होगी और सोसायटी का प्रत्येक अधिकारी सोसायटी के लेखाओं तथा उसके कार्यकरण के बारे में ऐसी जानकारी देगा, जो कि ऐसा निरीक्षण करने वाला व्यक्ति अपेक्षित करे।
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