section 17
Members may be sued as strangers
The Chhattisgarh Societies Registraion Act, 1973(1) रजजस्रीकृि सोसायटी के ककसी भी ऐसे सदस्य के विरूदध, जजस पर कोई अलभदान, जजसका कक संदाय करने के लिये िह सोसायटी के वितनयमों के अनुसार आबदध हो, बकाया हो या जो सोसायटी की कोई सम्पवि, ऐसी रीति में या ऐसे समय के लिये,, जो ऐसे वितनयमों के प्रतिकूि हो, अपने कब्जे में रिेगा या तनरूदध करेगा या सोसायटी की ककसी सम्पवि को क्षति पहुंचायेगा या उसे नष्ट करेगा, ऐसे बकाया के लिये या सम्पति के ऐसे तनरोध, क्षति या विनार् से प्रोद भूि होने िािी नुकसानी के लिये इस अथधतनयम के उपबन्ध केअनुसार िाद चिाया जा सकेगा। (2) यदद प्रतििादी ककसी ऐसे िाद या अन्य कायािाही में जो कक सोसायटी की प्रेरिा पर उसके विरूदध प्रस्िुि की गई हो, ककया गया हो, सफि हो जाये और अपना िचा िसूि करने के लिये न्याय तनखिाि ककया जाये, िो िह इस बाि का चुनाि कर सकेगा कक उस िचा की उस अथधकारी से, जजसके कक नाम से िाद चिाया जायेगा या सोसायटी से, िसूि करने की कायािाही करे, और पश्चाि् कथिि मामिले में उति सोसायटी की सम्पवि के विरूदध इस अथधतनयम के उपबन्ध के अनुसार कायािाही करेगा।
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