section 33
कुलसचिव
The Madhya Pradesh National Law Institute University Act, 2018(१) कुलसचिव, विश्वविद्यालय का पूर्णकालिक अधिकारी होगा. (२) कुलसचिव, कार्य परिषद् द्वारा, कुलाधिपति का अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात् प्राचार्यों, सह-प्राचार्यों, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य विश्वविद्यालय सेवा या मध्यप्रदेश उच्च न्यायिक सेवा के संवर्ग में से नियुक्त किया जाएगा. (३) कुलसचिव की पदावधि तथा सेवा-शर्तें ऐसी होंगी, जैसी कि विनियमों द्वारा विहित की जाए. (४) कुलसचिव, कार्य परिषद्, विद्या परिषद्, वित्त समिति तथा संकायों का पदेन सचिव होगा. (५) कुलसचिव,— (एक) कार्य परिषद् तथा कुलपति के समस्त निर्देशों और आदेशों का पालन करेगा; (दो) विश्वविद्यालय के अभिलेखों, सामान्य मुद्रा और ऐसी अन्य संपत्तियों का, जो कि कार्य परिषद् उसके सुपुर्द करे, अभिरक्षक होगा; (तीन) किसी आपात स्थिति में जबकि कुलपति और सम्यकरूप से प्राधिकृत अधिकारी दोनों ही कार्य करने में समर्थ नहीं हैं तो वह तुरन्त कार्य परिषद् का सम्मलेन बुलाएगा और विश्वविद्यालय का कार्य करने हेतु उसके निर्देश प्राप्त करेगा; (चार) अपने कर्तव्यों और कृत्यों के उचित निर्वहन के लिए कुलपति के प्रति सीधे ही उत्तरदायी होगा; (पांच) विश्वविद्यालय द्वारा या उसके विरुद्ध वादों या कार्यवाही में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करेगा, मुख्तारनामें पर हस्ताक्षर करेगा और अभिवचनों को सत्यापित करेगा या इस प्रयोजन के लिए प्रतिनिधियों को प्रतिनियुक्त करेगा; और (छह) ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करेगा जो कार्य परिषद् या कुलपति द्वारा, समय-समय पर उसे समनुदेशित किए जाएं. (६) कुलसचिव का पद किसी कारण से रिक्त रहने की दशा में कुलपति, विश्वविद्यालय की सेवा में किसी अधिकारी को कुलसचिव की ऐसी शक्तियों, कृत्यों तथा कर्तव्यों का जैसा कि कुलपति उचित समझे, प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा. परन्तु ऐसा कोई व्यक्ति छह मास से अधिक की कालावधि के लिए पद धारण नहीं करेगा.
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