section 23
विद्या परिषद की शक्तियां तथा कर्तव्य
The Madhya Pradesh National Law Institute University Act, 2018इस अधिनियम के या विनियमों के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, विद्या परिषद को उसमें विनिहित की गई अन्य समस्त शक्तियों के अतिरिक्त निम्नलिखित शक्तियां होंगी, अर्थात् :- (एक) साधारण परिषद या कार्य परिषद द्वारा उसे निर्दिष्ट या प्रत्यायोजित किसी विषय पर, रिपोर्ट करना; (दो) विश्वविद्यालय में अध्यापन पदों के सृजन, समाप्ति या वर्गीकरण और उनसे सम्बद्ध अर्हताओं, उपलब्धियों तथा कर्तव्यों के संबंध में कार्य परिषद को सिफारिशें करना; (तीन) संकायों के गठन के लिये स्कीमें बनाना तथा उनको उपांतरित करना या पुनरीक्षित करना और ऐसे संकायों को उनके अलग-अलग संबंधित विषय सौंपना और किसी संकाय को समाप्त या उपविभाजित करने या एक संकाय को दूसरे संकाय के साथ संयोजित करने की समीचीनता के संबंध में भी कार्य परिषद को रिपोर्ट करना; (चार) विश्वविद्यालय में नामांकित किए गए व्यक्तियों से भिन्न व्यक्तियों के शिक्षण तथा परीक्षा के लिये विनियमों के माध्यम से व्यवस्था करना; (पांच) विश्वविद्यालय के भीतर गवेषणा को प्रोन्नत करना और ऐसी गवेषणा पर, समय-समय पर, रिपोर्ट दिए जाने की अपेक्षा करना; (छह) संकायों द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रस्तावों पर विचार करना; (सात) विश्वविद्यालय में प्रवेश हेतु समितियां नियुक्त करना; (आठ) अन्य विश्वविद्यालयों तथा संस्थाओं के पत्रोपाधियों तथा उपाधियों को मान्यता देना और उनकी समतुल्यता विश्वविद्यालय के पत्रोपाधियों तथा उपाधियों के संबंध में अवधारित करना; (नौ) साधारण परिषद द्वारा स्वीकृत किन्हीं शर्तों के अध्यधीन रहते हुए अध्येतावृत्ति, छात्रवृत्ति तथा अन्य पुरस्कारों के लिये प्रतियोगिता के समय, ढंग तथा शर्तें नियत करना तथा उन्हें प्रदान करना; (दस) परीक्षकों की नियुक्ति तथा यदि आवश्यक हो तो उनके हटाए जाने और उनकी फीस, उपलब्धियां तथा यात्रा तथा अन्य व्यय नियत करने के बारे में कार्य परिषद को सिफारिशें करना; (ग्यारह) परीक्षाएं संचालन करने हेतु व्यवस्था करना और उनके आयोजन के लिये तारीखें नियत करना; (बारह) विभिन्न परीक्षाओं के परिणाम घोषित करना या ऐसा करने के लिये समितियां या अधिकारी नियुक्त करना और उपाधियां, सम्मान, पत्रोपाधियां, अनुज्ञा पत्र (लायसेंस), अभिधान (टाइटल्स) और सम्मान के प्रतीक प्रदान किए जाने के संबंध में सिफारिशें करना; (तेरह) वृत्तिका, छात्रवृत्ति, पदक तथा पुरस्कार देना और अन्य अवार्ड (पुरस्कार) जो विनियमों तथा ऐसी अन्य शर्तों के अनुसार देना जो अवार्ड (पुरस्कार) से सम्बद्ध की जाए, प्रदान करना; (चौदह) विहित की गई या सिफारिश की गई पाठ्य-पुस्तकों की सूची प्रकाशित करना और विहित किए गए अध्ययन पाठ्य-विवरण प्रकाशित करना; (पन्दह) ऐसे प्रारूप तथा रजिस्टर तैयार करना जो विनियमों द्वारा समय-समय पर, विहित किए जाएं, और (सोलह) विद्या संबंधी मामलों के संबंध में समस्त ऐसे कर्तव्यों का पालन करना और ऐसे समस्त कार्य करना जो इस अधिनियम तथा विनियमों के उपबंधों के उचित कार्यान्वयन के लिए आवश्यक हैं.
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