section 30
कुलपति की परिलब्धियां तथा सेवा की शर्तें, कुलपति की पदावधि तथा उसके पद में रिक्ति
The Madhya Pradesh National Law Institute University Act, 2018(१) कुलपति, विश्वविद्यालय का पूर्णकालिक वेतनिक अधिकारी होगा और उसकी परिलब्धियां एवं सेवा के अन्य निबंधन तथा शर्तें परिनियमों द्वारा विहित की जाएंगी. (२) कुलपति पांच वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेगा और वह दो से अधिक पदावधियों के लिए नियुक्ति का पात्र नहीं होगा: परन्तु उसकी अवधि का अवसान हो जाने पर भी, वह पद पर तब तक बना रहेगा जब तक कि उसका उत्तराधिकारी नियुक्त न कर दिया जाए और वह अपना पद ग्रहण न कर ले, किन्तु यह कालावधि किसी भी दशा में छह मास से अधिक नहीं होगी. (३) यदि किसी समय अभ्यावेदन किया जाने पर या अन्यथा और ऐसी जांच, जो कि आवश्यक समझी जाए, करने के पश्चात् कुलाधिपति को यह प्रतीत हो कि कुलपति ने— (एक) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उस पर अधिरोपित किए गए किसी कर्तव्य का पालन करने में व्यतिक्रम किया है; या (दो) विश्वविद्यालय के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली रीति में कार्य किया है; या (तीन) विश्वविद्यालय के कार्यकलापों का प्रबंध करने में असमर्थ है, तो कुलाधिपति, इस तथ्य के होते हुए भी कि कुलपति की पदावधि का अवसान नहीं हुआ है, लिखित आदेश द्वारा जिसमें कारणों का विवरण रहेगा, कुलपति से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसी तारीख से, जो कि आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, अपना पद त्याग दे. (४) उपधारा (३) के अधीन कोई आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक कि उन आधारों की विशिष्टियां, जिन पर कि ऐसी कार्रवाई का किया जाना प्रस्तावित है, कुलपति को संसूचित नहीं कर दी गई हों तथा उसे प्रस्तावित आदेश के विरुद्ध कारण दर्शाने का युक्तियुक्त अवसर नहीं दिया गया है. (५) उपधारा (३) के अधीन आदेश में विनिर्दिष्ट की गई तारीख से यह समझा जाएगा कि कुलपति ने पद त्याग दिया है और कुलपति का पद रिक्त हो जाएगा. (६) कुलपति की मृत्यु, पदत्याग, छुट्टी, रूगणता या अन्य कारण से उसका पद रिक्त होने की दशा में जिसमें अस्थायी रिक्ति भी सम्मिलित है, तो कुलाधिपति द्वारा उस प्रयोजन के लिए नामनिर्देशित किया गया किसी भी संकाय का संकायाध्यक्ष या विश्वविद्यालय के अध्यापन विभाग का वरिष्ठतम आचार्य, कुलपति के रूप में उस तारीख तक कार्य करेगा जब तक कि धारा २९ की उपधारा (१) या उपधारा (८) के अधीन नियुक्त किया गया कुलपति अपना पद यथास्थिति, ग्रहण या पुनःग्रहण न कर ले: परन्तु इस उपधारा के अधीन अनुध्यात किया गया इंतजाम छह मास से अधिक की कालावधि के लिए निरन्तर नहीं रहेगा.
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