section 29
कुलपति
The Madhya Pradesh National Law Institute University Act, 2018(१) कुलाधिपति द्वारा कुलपति की नियुक्ति चयन समिति की अनुशंसाओं पर की जाएगी: परन्तु राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय अधिनियम, १९९७ (क्रमांक ४१ सन् १९९७) के अधीन नियुक्ति की प्रक्रिया पूर्व में गठित चयन समिति की अनुशंसाओं के आधार पर जारी रहेगी, विश्वविद्यालय का कुलपति, ऐसे निबंधन और शर्तों पर जैसी कि विनिर्दिष्ट की जाएं, कुलाधिपति द्वारा, आदेश द्वारा नियुक्त किया जाएगा. (२) कुलपति, विधि के क्षेत्र में विख्यात शिक्षाविद् जिसके पास विश्वविद्यालय प्रणाली में विधि के आचार्य के रूप में न्यूनतम १० वर्षों का अनुभव हो या प्रख्यात न्यायविद जो जिला न्यायाधीश से निम्न श्रेणी का न हो या कोई प्रशासक, जो भारत सरकार के सचिव से निम्न श्रेणी का न हो, और जो ७० वर्ष की आयु से अधिक का नहीं होगा, कुलाधिपति द्वारा उसकी नियुक्ति, उपधारा (३) तथा (७) के अधीन गठित चयन समिति द्वारा अनुशंसित तीन व्यक्तियों से अनिम्न व्यक्तियों के पैनल में से की जाएगी: परन्तु यदि चयन समिति द्वारा अनुशंसित किए गए व्यक्तियों में से कुलाधिपति द्वारा अनुमोदित किए गए व्यक्ति या व्यक्तिगण नियुक्ति स्वीकार करने के इच्छुक नहीं हैं तो कुलाधिपति ऐसी समिति से नई अनुशंसाएं मंगा सकेगा. (३) कुलाधिपति एक चयन समिति नियुक्त करेगा, जिसमें निम्नलिखित व्यक्ति होंगे, अर्थात्ः— (एक) कार्य परिषद् द्वारा निर्वाचित किया गया एक व्यक्ति; (दो) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशित किया गया एक व्यक्ति; (तीन) कुलाधिपति द्वारा विख्यात विद्वान या न्यायविद के साथ ही मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पीठासीन न्यायाधीश या सर्वोच्च न्यायालय या मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश में से नामनिर्देशित एक व्यक्ति, कुलाधिपति इन तीन व्यक्तियों में से एक को समिति का अध्यक्ष नियुक्त करेगा. (४) उपधारा (३) के अधीन समिति गठित करने के लिए कुलाधिपति, कुलपति की अवधि का अवसान होने के छह मास पूर्व, कार्य परिषद् तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष को अपने-अपने नामनिर्देशितियों को चुनने के लिए अपेक्षा करेगा और यदि उनमें से कोई एक या दोनों इस बारे में कुलाधिपति की संसूचना प्राप्त होने के एक मास के भीतर ऐसा करने में असफल रहते हैं, तो कुलाधिपति, यथास्थिति, किसी एक या दोनों व्यक्तियों को आगे नामनिर्देशित कर सकेगा. (५) किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जो विश्वविद्यालय का कर्मचारी हो, उपधारा (३) के अधीन गठित समिति के लिए निर्वाचित या नामनिर्देशित नहीं किया जाएगा. (६) समिति अपने गठन की तारीख से छह सप्ताह के भीतर या चार सप्ताह से अनधिक ऐसे और समय के भीतर, जो कि कुलाधिपति द्वारा बढ़ाया जाए, तालिका (पैनल) प्रस्तुत करेगी. (७) यदि किसी कारण से उपधारा (३) के अधीन गठित की गई समिति उपधारा (६) में विनिर्दिष्ट की गई कालावधि के भीतर तालिका (पैनल) प्रस्तुत करने में असफल रहे, तो कुलाधिपति एक अन्य समिति गठित करेगा जिसमें ऐसे तीन व्यक्ति होंगे, जो विश्वविद्यालय से संसक्त न हों, जिनमें से एक को अध्यक्ष के रूप में पदाभिहित किया जाएगा और इस प्रकार गठित की गई समिति, अपने गठन की तारीख से छह सप्ताह की कालावधि के भीतर या ऐसी लघुतर कालावधि, जैसी कि विनिर्दिष्ट की जाए, के भीतर तीन व्यक्तियों की तालिका (पैनल) प्रस्तुत करेगी. (८) यदि उपधारा (७) के अधीन गठित समिति, उसमें विनिर्दिष्ट की गई कालावधि के भीतर तालिका (पैनल) प्रस्तुत करने में असफल रहे, तो कुलाधिपति किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जिसे वह उपयुक्त समझे, कुलपति नियुक्त कर सकेगा.
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