section 23
विद्या परिषद् की शक्तियां तथा उसके कर्तव्य
The Rashtriya Vidhi Sansthan Vishwavidyalaya Adhiniyam, 1997इस अधिनियम के या विनियमों के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए विद्या परिषद् को उसमें विनहित की गई अन्य समस्त शक्तियों के अतिरिक्त निम्नलिखित शक्तियां होंगी अर्थात:- (एक) ऐसे किसी विषय पर जो साधारण परिषद् या कार्य परिषद् द्वारा उसे निर्दिष्ट या प्रत्यायोजित किया जाए रिपोर्ट करना; (दो) संस्थान में अध्ययन पदों के सृजन, समाप्ति या वर्गीकरण और उनसे संबद्ध अर्हताओं, उपलब्धियों तथा कर्तव्यों के संबंध में कार्य परिषद् को सिफारिशें करना; (तीन) संकायों के गठन के लिये स्कीमें बनाना तथा उनको उपान्तरित करना या पुनरीक्षित करना और ऐसे संकायों को उनके अलग-अलग संबंधित विषय सौंपना और किसी संकाय को समाप्त या उपविभाजित करने या एक संकाय को दूसरे संकाय के साथ संयोजित करने की समीचीनता के संबंध में भी कार्य परिषद् को रिपार्ट करना; (चार) संस्थान में नामांकित किए गए व्यक्तियों से भिन्न व्यक्तियों के शिक्षण तथा परीक्षा के लिये विनियमों के माध्यम से व्यवस्था करना; (पांच) संस्थान के भीतर गवेषणा को प्रोन्नत करना और ऐसी गवेषणा पर, समय-समय पर, रिपोर्ट दिए जाने की अपेक्षा करना; (छह) संकायों द्वारा प्रस्तुत किये गये प्रस्तावों पर विचार करना; (सात) संस्थान में प्रवेश हेतु समितियां नियुक्त करना; (आठ) अन्य विश्वविद्यालयों तथा संस्थाओं के उपाधि-पत्रों तथा उपाधियों को मान्यता देना और उनकी समतुल्यता संस्थान के उपाधि-पत्रों तथा उपाधियों के संबंध में अवधारित करना; (नौ) साधारण परिषद् द्वारा स्वीकृत किन्हीं शर्तों के अध्यधीन रहते हुए अध्येतावृत्ति, छात्रवृत्ति तथा अन्य पुरस्कारों के लिए प्रतियोगिताओं के समय, ढंग तथा शर्तें नियत करना तथा उन्हें प्रदान करना. (दस) परीक्षकों की नियुक्ति हो तथा यदि आवश्यक हो तो उनके हटाए जाने और उनकी फीस, उपलब्धियां तथा यात्रा तथा अन्य व्यय नियत करने के बारे में कार्य परिषद् को सिफारिशें करना; (ग्यारह) परीक्षाएं संचालित करने हेतु व्यवस्था करना ओर उनके आयोजन के लिये तारीखें नियत करना; (बारह) विभिन्न परीक्षाओं के परिणाम घोषित करना या ऐसा करने के लिये समितियां या अधिकारी नियुक्त करना और उपाधियों, सम्मानों, उपाधि-पत्रों, अनुज्ञापत्रों (लाइसेंस), अभिधानों(टाईटल्स) ओर सम्मान के प्रतीकों को प्रदान किए जाने या किए जाने के संबंध में सिफारिशें करना; (तेरह) वृत्तिका, छात्रवृत्ति पदक तथा पुरस्कार देना और अन्य अवार्ड (पुरस्कार) विनियमों या ऐसी अन्य शर्तों के अनुसार देना जो ऐसे अवार्ड (पुरस्कार) से सम्बद्ध की जाए; (चौदह) विहित की गई या सिफारिश की गई पाठ्य-पुस्तकों की सूची प्रकाशित करना और विहित किए गए अध्ययन पाठ्य-विवरण प्रकाशित करना; (पन्द्रह) ऐसे प्रारूप तथा रजिस्टर तैयार करना जो विनियमों द्वारा समय-समय पर, विहित किए जाएं; और (सोलह) विद्या संबंधी मामलों के संबंध में समस्त ऐसे कर्तव्यों का पालन करना और ऐसे समस्त कार्य करना जो इस अधिनियम तथा विनियमों के उपबंधों के उचित कार्यान्वयन के लिये आवश्यक है.
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