section 17
कार्य परिषद् की शक्तियां तथा कृत्य
The Rashtriya Vidhi Sansthan Vishwavidyalaya Adhiniyam, 1997धारा 12 के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कार्य परिषद् की निम्नलिखित शक्तियां ओर कृत्य होंगे:- (एक) विद्या परिषद की सिफारिशों पर विचार करने के पश्चात् संस्थान में अध्यापन पदों को सृजित करना, समाप्त करना या वर्गीकृत करना, और उनसे संलग्न अर्हताएं, उपलब्धियां तथा कर्तव्य अवधारित करना; (दो) समय-समय पर कुलसचिव, पुस्तकालयाध्यक्ष, आचार्य, सह-आचार्य, सहायक आचार्य और अध्यापन कर्मचारीवृन्द के अन्य सदस्य, जैसा कि आवश्यक हो, विनियमों द्वारा इस प्रयोजन के लिए गठित की गई चयन समिति की सिफारिशों पर नियुक्ति करना: परन्तु- (क) किसी अधिसंख्य पद (सुपरन्यूमरी पोस्ट) पर; या (ख) उच्च विद्या संबंधी विशिष्टता, विख्यात तथा वृत्तिक कुशलता प्राप्त व्यक्ति की आचार्य के पद पर, नियुक्ति करने के लिये कोई चयन समिति गठित करना आवश्यक नहीं होगा; (तीन) प्रशासनिक, लिपिकीय तथा अन्य आवश्यक पद सृजित करना, ऐसे पदों की न्यूनतम अर्हताएं तथा उनकी उपलब्धियां अवधारित करना; (चार) संस्थान के वित्त लेखाओं, विनिधानों, संपत्ति कामकाज और अन्य समस्त प्रशासनिक कार्यकलापों की व्यवस्था करना और विनियमित करना और ऐसे प्रयोजन के लिये ऐसे अभिकर्ता नियुक्त करना, जैसा कि वह उचित समझे; (पांच) संस्थान के किसी धन का, जिसके अन्तर्गत कोई अनुपयोजित धन भी आता है ऐसे स्टाक, निधियों, अंशों या प्रतिभूतियों में, जैसा कि वह समय-समय पर उचित समझे या भारत में स्थावर सम्पत्ति के क्रय में विनिधान करना और ऐसे विनिधानों में इसी प्रकार की शक्ति के साथ समय-समय पर फेरफार करना; (छह) संस्थान की ओर से किसी जंगम या स्थावर सम्पत्ति का अन्तरण करना या अन्तरण प्रतिग्रहीत करना; (सात) संस्थान की ओर से संविदाएं करना, उनमें फेरफार करना, उनका कार्यान्वयन करना और उन्हें रद्द करना और उस प्रयोजन के लिये ऐसे अधिकारी नियुक्त करना, जैसा कि वह उचित समझे; (आठ) संस्थान का कार्य क्रियान्वित करने के लिये आवश्यक भवन, परिसर, फर्नीचर तथा उपकरण और अन्य साधन की व्यवस्था करना; (नौ) संस्थान के ऐसे अधिकारियों, अध्यापकों, छात्रों और संस्थान के कर्मचारियों को, जो कि किसी कारण से व्यथित अनुभव करते हैं, उनकी व्यथाएं ग्रहण करना, उन्हें न्यायनिर्णीत करना और उन्हें दूर करना; (दस) विद्या परिषद से परामर्श करके परीक्षक तथा अनुसीमक(मोडरेटर) नियुक्त करना और यदि आवश्यक हो तो उन्हें हटाना ओर उनकी फीस, उपलब्धियां तथा यात्रा और अन्य भत्ते नियत करना; (ग्यारह) संस्थान के लिये सामान्य मुद्रा का चयन करना और उस मुद्रा की अभिरक्षा की व्यवस्था करना; (बारह) अपनी शक्तियों में से किसी शक्ति को, सिवाय विनियम बनाने की शक्ति के, किसी अधिकारी या प्राधिकारी को या तो अस्थायी रूप से या स्थायी रूप से प्रत्यायोजित करना; और (तेरह) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करना और ऐसे अन्य कर्तव्यों का निर्वहन करना जो उसे इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन उसे प्रदत्त की जाएं या उस पर अधिेपित किए जाएं।
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