section 46
मिथ्या शिकायत के लिए अभियोजन और लोक सेवक को प्रतिकर आदि का संदाय
The Uttarakhand Lokayukta Act, 2013Chapter XIV OFFENCES AND PENALTIES
(1) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जो कोई इस अधिनियम के अधीन कोई मिथ्या और क्षुद्र या तंग करने वाली शिकायत करता है, वह दोषसिद्धि पर ऐसी अवधि के कारावास से, जो एक वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो एक लाख रूपए तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा। (2) किसी विशेष न्यायालय के सिवाय, कोई भी न्यायालय उपधारा (1) के अधीन किसी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा। (3) कोई भी विशेष न्यायालय, किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जिसके विरुद्ध मिथ्या, क्षुद्र या तंग करने वाली शिकायत की गई थी, या लोकायुक्त द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा शिकायत किए जाने पर ही उपधारा (1) के अधीन किसी अपराध का संज्ञान लेगा अन्यथा नहीं। (4) उपधारा (1) के अधीन किसी अपराध के संबंध में अभियोजन लोक अभियोजक द्वारा किया जाएगा और ऐसे अभियोजन से संबंधित सभी व्ययों को राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। (5) ऐसे किसी व्यक्ति {कोई व्यष्टि या सोसाइटी या व्यक्ति-संगम या न्यास है (चाहे वह रजिस्ट्रीकृत है अथवा नहीं ) } की, इस अधिनियम के अधीन कोई मिथ्या शिकायत करने के लिए, दोषसिद्धि की दशा में, ऐसा व्यक्ति ऐसे लोक सेवक को, जिसके विरुद्ध उसने मिथ्या शिकायत की थी, ऐसे लोक सेवक द्वारा मुकदमा लड़ने संबंधी विधिक व्ययों के अतिरिक्त, जो विशेष न्यायालय अवधारित करे, प्रतिकर का संदाय करने के लिए दायी होगा। (6) इस धारा में अंतर्विष्ट कोई बात सदभावपूर्वक की गई शिकायतों की दशा में लागू नहीं होगी। स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजन के लिए, "सदभावपूर्वक" पद से किसी व्यक्ति द्वारा किया गया ऐसा कोई कार्य अभिप्रेत है जो भारतीय दंड संहिता की धारा 52 के अधीन उसके द्वारा सम्यक, सतर्कता, सावधानी और उत्तरदायित्व की भावना के साथ सदभावपूर्वक किया गया है या ऐसा विश्वास है कि वह उसके द्वारा किया गया है अथवा तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायनुगत होने का विश्वास करते हुए किया है।
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