section 20
शिकायतों और प्रारम्भिक जाँच तथा अन्वेषण से सम्बन्धित उपबन्ध
The Uttarakhand Lokayukta Act, 2013Chapter VI JURISDICTION IN RESPECT OF INQUIRY
(1) लोकायुक्त कोई शिकायत प्राप्त करने पर सर्वप्रथम यह तय करेगा कि मामले में अग्रतर कार्यवाही की जाए अथवा इसे बंद किया जाए और यदि वह आगे कार्यवाही करने का विनिश्चय करता है तो; वह (क) अपने जांच प्रकोष्ठ या किसी अभिकरण द्वारा यह अभिनिश्चित करने के संबंध में कि क्या मामले में कार्यवाही किए जाने के लिए कोई प्रथमदृष्टया मामला विद्यमान है, किसी लोक सेवक के विरूद्ध प्रारंभिक जांच करने का आदेश देगा; या (ख) यदि लोकायुक्त ने प्रारंभिक जांच में अग्रतर कार्यवाही का विनिश्चय किया हो तो वह किसी साधारण या विशेष आदेश द्वारा समूह 'क' या समूह 'ख' या समूह 'ग' या समूह 'घ' के किन्हीं लोक सेवकों के संबंध में उसके द्वारा प्राप्त की गई शिकायतों या शिकायतों के किसी वर्ग या किसी शिकायत को राज्य सतर्कता आयोग को निर्दिष्ट करेगा। राज्य सतर्कता आयोग उसे निर्दिष्ट की गई शिकायतों के संबंध में, समूह 'क' और 'ख' के लोक सेवकों की बाबत उपधारा (2) और उपधारा (4) में अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार प्रारंभिक जांच करने के पश्चात लोकायुक्त को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा और समूह 'ग' और समूह 'घ' के लोक सेवकों के मामले में राज्य सतर्कता आयोग जांचकर यदि कार्यवाही प्रस्तावित हो तो सक्षम प्राधिकारी को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। सक्षम प्राधिकारी 6 माह के भीतर कार्यवाही कर अवगत कराएगा। (2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रारंभिक जांच के दौरान, जांच प्रकोष्ठ या कोई अभिकरण, शिकायत में किए गए अभिकथन पर प्रारंभिक जांच करेगा और उसमें संगृहीत सामग्री, सूचना और दस्तावेजों के आधार पर लोक सेवक और सक्षम प्राधिकारी से टिप्पणियों की ईप्सा करेगा और संबंधित लोक सेवक तथा सक्षम प्राधिकारी से टिप्पणी अभिप्राप्त करने के पश्चात, निर्देश की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन के भीतर लोकायुक्त को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। (3) लोकायुक्त के दो से अन्यून सदस्यों से मिलकर बनने वाली एक न्यायपीठ जांच प्रकोष्ठ या किसी अभिकरण से उपधारा (2) के अधीन प्राप्त प्रत्येक रिपोर्ट पर इस बात का विनिश्चय करने के लिए विचार करेगी कि क्या प्रथमदृष्टया कोई मामला बनता है और लोक सेवक को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात निम्नलिखित कार्यवाहियों में से एक या अधिक के संबंध में निर्णय लेगी, अर्थात- (क) यथास्थिति किसी अभिकरण द्वारा अन्वेषण। (ख) सक्षम प्राधिकारी द्वारा संबंधित लोक सेवकों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाहियां या कोई अन्य समुचित कार्यवाही का आरंभ किया जाना। (ग) लोक सेवक के विरूद्ध कार्यवाहियों को बंद किया जाना और धारा 46 के अधीन शिकायतकर्ता के विरूद्ध कार्यवाही किया जाना। (4) उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक प्रारंभिक जांच साधारणतया शिकायत की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन की अवधि के भीतर और लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से 90 दिन की अवधि के भीतर पूरी की जाएगी। (5) यदि लोकायुक्त शिकायत का अन्वेषण करने की कार्यवाही करने का विनिश्चय करता है तो वह किसी अभिकरण को यथासाध्य शीघ्र अन्वेषण करने का निदेश देगा और अपने आदेश की तारीख से छ: मास की अवधि के भीतर अन्वेषण पूरा करने का निदेश देगा। परंतु यह कि लोकायुक्त लेखबद्ध किए जाने वाले से उक्त अवधि को एक बार में, छह मास से अनधिक की और अवधि तक बढ़ा सकेगा। (6) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 173 में किसी बात के होते भी, कोई अभिकरण लोकायुक्त द्वारा उसे निर्दिष्ट किए गए मामलों के संबंध मे अन्वेषण रिपोर्ट लोकायुक्त को प्रेषित करेगा। (7) लोकायुक्त के दो से अन्यून सदस्यों से मिलकर बनने वाली एक न्यायपीठ उसके द्वारा उपधारा (6) के अधीन किसी अभिकरण से प्राप्त प्रत्येक रिपोर्ट पर विचार करने के पश्चात- (क) अपने अभियोजन प्रकोष्ठ या अन्वेषण अभिकरण को लोक सेवक के विरूद्ध विशेष न्यायालय के समक्ष आरोपपत्र फाइल किए जाने या मामला बंद किए जाने की रिपोर्ट फाइल करने का निदेश दे सकेगी। (ख) सक्षम प्राधिकारी को संबंधित लोक सेवक के विरूद्ध विभागीय कार्यवाहियां या कोई अन्य समुचित कार्यवाही प्रारंभ किए जाने का निदेश दे सकेगी। (8) लोकायुक्त आरोप-पत्र फाइल किए जाने पर उपधारा (7) के अधीन कोई विनिश्चय करने के पश्चात, अपने अभियोजन प्रकोष्ठ या किसी अन्वेषण अभिकरण को अभिकरण द्वारा अन्वेषण किए गए मामलों के संबंध में विशेष न्यायालय में अभियोजन आरंभ करने का निदेश दे सकेगा। (9) लोकायुक्त यथास्थिति, प्रारंभिक जांच या अन्वेषण के दौरान, यथास्थिति, प्रारंभिक जांच या अन्वेषण से सुसंगत दस्तावेजों की सुरक्षित अभिरक्षा संबंधी ऐसे समुचित आदेश पारित कर सकेगा, जो वह ठीक समझे। (10) लोकायुक्त की वेबसाइट पर समय-समय पर और ऐसी रीति में, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, उसके समक्ष लंबित शिकायतों या उसके द्वारा निपटाई गई शिकायतों की प्रास्थिति जनता के लिए प्रदर्शित की जाएगी। (11) लोकायुक्त ऐसे मूल अभिलेखों और साक्ष्यों को प्रतिधारित सकेगा, जिनकी उसके द्वारा या विशेष न्यायालय द्वारा मामले की प्रारंभिक जांच या अन्वेषण या संचालन की प्रक्रिया में आवश्यकता पड़ने की संभावना है।
Study data processing for this section.
PDF: pending for this language.