section 14
मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधान सभा सदस्यों, राज्य सरकार के समूह क,ख,ग,घ अधिकारियों और पदाधिकारियों का लोकायुक्त की अधिकारिता के अन्तर्गत होना
The Uttarakhand Lokayukta Act, 2013Chapter VI JURISDICTION IN RESPECT OF INQUIRY
(1) इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए लोकायुक्त निम्नलिखित के सम्बन्ध में किसी शिकायत में किए गए भ्रष्टाचार के किसी अभिकथन में अंतर्वलित या उससे उद्भूत होने वाले या उससे संबद्ध किसी मामले की जांच करेगा या जांच कराएगा, अर्थातः-- (क) कोई ऐसा व्यक्ति जो मुख्यमंत्री है या रहा है; परन्तु यह कि लोकायुक्त मुख्यमंत्री के विरूद्ध भ्रष्टाचार के किसी ऐसे अभिकथन में अंतर्वलित या उससे उद्भूत होने वाले या उससे संबद्ध किसी मामले की उस दशा में जांच नहीं करेगाः-- (एक) जब तक लोकायुक्त के अध्यक्ष और सभी सदस्यों से मिलकर बनी उसकी पूर्ण न्यायपीठ जांच आरम्भ करने के बारे में विचार नहीं करती है और उसके न्यूनतम चार सदस्य ऐसी जांच का अनुमोदन नहीं करते है, परन्तु यह और कि ऐसी कोई जांच बंद कमरे में कराई जाएगी और यदि लोकायुक्त इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि शिकायत को खारिज कर दिया जाए तो जांच के अभिलेख प्रकाशित नहीं किए जाएंगे या किसी को उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे, (ख) कोई व्यक्ति जो राज्य का मंत्री है या रहा है, (ग) कोई व्यक्ति जो राज्य विधान सभा का सदस्य है या रहा है, (घ) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 का धारा 2 के खंड (ग) के उपखण्ड (एक) और उपखण्ड (दो) में परिभाषित लोक सेवकों में से समूह 'क' या समूह 'ख' का कोई अधिकारी या उसके समतुल्य या उससे उच्चतर अधिकारी, जब वह राज्य के कार्यों के सम्बन्ध में सेवारत है या जिसने सेवा की है, (ङ) धारा 20 की उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन रहते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 2 के खंड (ग) के उपखण्ड (एक) और उपखण्ड (दो) में परिभाषित लोक सेवकों में से समूह 'ग' या समूह 'घ' का कोई पदाधिकारी या उसके समतुल्य पदाधिकारी, जब वह राज्य के कार्यों के सम्बन्ध में सेवारत है या जिसने सेवा की है, (च) ऐसा कोई व्यक्ति जो विधानसभा के किसी अधिनियम द्वारा स्थापित या राज्य सरकार द्वारा पूर्णतः या भागतः वित्तपोषित या उसके द्वारा नियन्त्रित किसी निकाय या बोर्ड या निगम या प्राधिकरण या कम्पनी या सोसाइटी या न्यास या स्वायत्त निकाय (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो) का अध्यक्ष या सदस्य या अधिकारी या कर्मचारी है या रहा है। (छ) कोई ऐसा व्यक्ति जो राज्य सरकार द्वारा पूर्णतः या भागतः वित्तपोषित प्रत्येक अन्य सोसाइटी या व्यक्ति-संगम या न्यास (चाहे तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत है या नहीं) को चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, जिसकी वार्षिक आय ऐसी धनराशि से अधिक है, जो राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करें, का निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी है या रहा है, (ज) ऐसा कोई व्यक्ति, जो विदेशी अभिदाय (विनियम), 2010 के अधीन किसी विदेशी स्रोत से एक वर्ष में दस लाख रू0 के आधिक्य में या ऐसी उच्चतर राशि जो राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करें का संदाय प्राप्त करने वाली प्रत्येक अन्य सोसाइटी या न्यास (चाहे तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत है या नहीं) का निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी है या रहा है। स्पष्टीकरण--खण्ड (च) और खण्ड (छ) के प्रयोजन के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि कोई ऐसी इकाई या संस्था चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, निगम, सोसाइटी या न्यास या व्यक्ति संगम, भागीदारी एकल स्वत्वधारिता, परिसीमित दायित्व वाली भागीदारी (चाहे तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत है या नहीं) उन खण्डों के अंतर्गत आने वाली इकाइयां होगी; परन्तु यह कि इस खण्ड में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 2 के खण्ड (ग) के अधीन लोक सेवक समझा जाएगा और उस अधिनियम के उपबंध तदनुसार उस पर लागू होंगे। (2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, लोकायुक्त विधानसभा के किसी सदस्य के विरूद्ध उसके द्वारा विधानसभा में या संविधान के अनुच्छेद 194 के खंड (2) में अंतर्विष्ट उपबंधों के अंतर्गत आने वाली उसकी किसी समिति में कही गई किसी बात या दिए गए किसी मत के संबंध में भ्रष्टाचार के किसी ऐसे अभिकथन में अंतर्वलित या उससे उद्भूत होने वाले या उससे संबद्ध किसी मामले की जांच नहीं करेगा। (3) लोकायुक्त उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्तियों से भिन्न किसी व्यक्ति के किसी कार्य या आचरण के बारे में जांच कर सकेगा, यदि ऐसा व्यक्ति भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अधीन उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति के विरूद्ध भ्रष्टाचार के किसी अभिकथन से संबंधित दुष्प्रेरण करने, रिश्वत देने या रिश्वत लेने या षडयंत्र करने के कार्य में संलिप्त है। (4) ऐसा कोई मामला, जिसकी बाबत इस अधिनियम के अधीन लोकायुक्त को कोई शिकायत की गई है, 'जांच आयोग अधिनियम, 1952' के अधीन जांच के लिए निर्दिष्ट नहीं किया जाएगा। स्पष्टीकरण--शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस अधिनियम के अधीन कोई शिकायत केवल ऐसी अवधि से संबद्ध होगी, जिसके दौरान लोक सेवक उस हैसियत में पद धारण कर रहा था या सेवारत रहा था।
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