Uttarakhand Rajya Vidhan Sabha Act, 2008
Uttarakhand Rajya Vidhan Sabha Act, 2008
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ
- (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम उत्तराखण्ड राज्य विधान सभा (सदस्यों की उपलब्धियां और पेंशन) अधिनियम, 2008 है।
- (2) यह तुरन्त प्रवृत्त होगा, सिवाय खण्ड 20 के, जो कि सन् 2007 के दिसम्बर माह के प्रथम दिन को प्रवृत्त होगा।
2. परिभाषायें
इस अधिनियम में- (क) "सभा" से उत्तराखण्ड की विधान सभा अभिप्रेत है; (ख) "अध्यक्ष" से उत्तराखण्ड विधान सभा का अध्यक्ष अभिप्रेत है; (ग) "उपाध्यक्ष" से सभा का उपाध्यक्ष अभिप्रेत है; (घ) सदस्यता की अवधि से, किसी सदस्य के सम्बन्ध में- (एक) यथास्थिति, उसके निर्वाचन या नाम-निर्देशन की अधिसूचना के सरकारी गजट में प्रकाशन के दिनांक से, या भारत के संविधान के अनुच्छेद 188 के अनुसार शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने के दिनांक से, इनमें जो भी पहले हो, प्रारम्भ होने वाली, और (दो) उस दिनांक को, जब वह मृत्यु या पद-त्याग के कारण अन्यथा ऐसा सदस्य न रह जाय, समाप्त होने वाली अवधि अभिप्रेत है; (ङ) "नेता विरोधी दल" से सभा का वह सदस्य अभिप्रेत है, जिसे, यथास्थिति, अध्यक्ष द्वारा तत्समय इस रूप में अभिज्ञात किया गया हो; (च) "सदस्य" से सभा का ऐसा सदस्य अभिप्रेत है, जो मंत्री, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के पद पर आसीन न हो; (छ) "परिवार का सदस्य" से, सभा के किसी सदस्य के संबंध में, चाहे वह खण्ड (च) में निर्दिष्ट किसी पद पर आसीन हो या नही, उसके पति या उसकी पत्नी, पुत्र, पुत्री, पिता, माता, भाई या बहिन अभिप्रेत है, जो ऐसे सदस्य के साथ निवास करता हो और उस पर पूर्णतया आश्रित हो; (ज) "मंत्री" से मुख्य मंत्री, राज्य मंत्री और उप मंत्री अभिप्रेत है; (झ) "निवास स्थान" से किसी सदस्य के संबंध में ऐसा स्थान अभिप्रेत है, जिसका किसी सभा या, निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक नामावली की प्रविष्टि के अनुसार, सदस्य समानतः निवासी है, और यदि सदस्य ऐसे स्थान में परिवर्तन कर दे, तो उत्तराखण्ड में ऐसा स्थान अभिप्रेत है, जिसे सदस्य के अनुरोध पर सचिव द्वारा ऐसा स्थान अधिसूचित किया जाय; परन्तु यह कि कोई ऐसी अधिसूचना, यथास्थिति, निर्वाचन के पश्चात् या इस खंड के अधीन जारी की गयी पूर्व अधिसूचना जारी किये जाने के पश्चात् छः मास की अवधि की समाप्ति के पूर्व जारी नही की जायेगी; (ञ) "रेल कूपन" से, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिये, रेलवे बोर्ड के प्राधिकार से जारी किये गये निःशुल्क असंक्रमणीय रेल यात्रा कूपन अभिप्रेत है; (ट) "आनुषंगिक व्यय" से- (एक) रेल द्वारा की गयी यात्रा की दशा में, एक व्यक्ति के लिए प्रथम श्रेणी में ऐसी यात्रा के रेल किराये के बराबर धनराशि अभिप्रेत है, एवं (दो) अन्य दशा में, विहित दर से इस रूप में देय धनराशि अभिप्रेत है; (ठ) "सचिव/प्रमुख सचिव" से, सभा के सदस्यों के संबंध में, सभा का सचिव/प्रमुख सचिव अभिप्रेत है; (ड) "वर्ष" से पहली जून को प्रारम्भ होने वाली और अनुवर्ती इकतीस मई को समाप्त होने वाली बारह मास की अवधि अभिप्रेत है।
3. वेतन
- (1) सभा के, नेता विरोधी दल से भिन्न, प्रत्येक सदस्य अपनी सदस्यता की अवधि के लिए तीन हजार रूपये प्रतिमास वेतन पाने का हकदार होगा।
- (2) उपधारा
- (1) में निर्दिष्ट वेतन का भुगतान निम्नलिखित शंतों के अधीन होगा, अर्थात- (क) वेतन में अनुपस्थिति या अन्य कारण के आधार पर ऐसी कटौतियां की जा सकेंगी, जैसी विहित की जायें, (ख) किसी सदस्य को उस अवधि के लिए, जिसमें वह किसी न्यायालय या अधिकरण के किसी विनिश्चय के फलस्वरुप, यथास्थिति, सभा में बैठने के लिए अक्षम हो जाय, कोई वेतन देय नही होगा, (ग) सभा के किसी सदस्य को सभा के गठन के दिनांक की पूर्ववर्ती अवधि के लिये कोई वेतन देय न होगा।
4. निर्वाचन क्षेत्र भत्ता
सभा का प्रत्येक सदस्य, चाहे वह धारा 2 के खण्ड (च) में निर्दिष्ट किसी पद पर आसीन हो या न हो, अपनी सदस्यता की अवधि में पन्द्रह हजार रूपये प्रतिमास का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता पाने का हकदार होगा।
5. रेल कूपन
- (1) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, सभा के प्रत्येक सदस्य को, चाहे वह धारा 2 के खण्ड (च) में निर्दिष्ट किसी पद पर आसीन हो या नही प्रतिवर्ष एक लाख अस्सी हजार रूपये के रेलवे कूपन के बराबर की धनराशि डीजल व्यय हेतु तथा शेष धनराशि बीस हजार रूपये के रेलवे कूपन विहित रीति से दिये जायेंगे, जो ऐसे सदस्य के द्वारा अपने लिए और अपने परिवार के सदस्यों के लिए किसी रेल से, किसी श्रेणी में, किसी समय, उत्तराखण्ड के भीतर या बाहर यात्रा के लिए ऐसे सिद्धांतों के अनुसार, जो विहित किये जांय, उपयोग में लाए जा सकते हैं।
- (2) इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक भूतपूर्व सदस्य को प्रतिवर्ष पचास हजार रूपये के रेलवे कूपन के बराबर की धनराशि में से तीस हजार रूपये डीजल, पेट्रोल व्यय हेतु तथा शेष बीस हजार रूपये के रेलवे कूपन विहित रीति से दिये जायेंगे, जो ऐसे भूतपूर्व सदस्य द्वारा अपने लिये और अपने परिवार के सदस्यों के लिये उपयोग में लाये जा सकते हैं। स्पष्टीकरण- इस धारा में निर्दिष्ट रेल यात्रा के लिये रेल कूपन का मूल्य राज्य सरकार द्वारा रेलवे बोर्ड के परामर्श से समय-समय पर निर्धारित किया जायेगा; परन्तु किसी सदस्य को इस धारा के अधीन दिये जाने वाले रेल कूपनों में से, उसके विकल्प पर, उतने मूल्य के रेल कूपन के बजाय, जितने वह चाहे समान मूल्य के कूपन, ऐसे सिद्धांतों के अनुसार, जो विहित किये जांय, उत्तराखण्ड के भीतर या बाहर किसी समय वायुयान द्वारा यात्रा के लिये उसे दिये जायेंगे; "परन्तु यह और कि जब कभी भी प्रथम श्रेणी के रेल किराये में वृद्धि होगी, राज्य सरकार, अधिसूचित आदेश द्वारा, रेल कूपन के मूल्य में अनुपातिक वृद्धि कर सकती है।"
6. सहवर्ती के साथ यात्रा
किसी सदस्य द्वारा अपने साथ रेल यात्रा में, निम्नलिखित दशाओं में, एक सहवर्ती ले जाने के लिए भी धारा 5 में निर्दिष्ट रेल कूपन का प्रयोग किया जा सकता है, अर्थात- (क) "सभा के प्रत्येक सत्र में अधिक से अधिक दो बार अपने निवास स्थान के निकटतम रेलवे स्टेशन से देहरादून तक आने और देहरादून से ऐसे रेलवे स्टेशन तक वापस जाने के लिए; (ख) किसी महिला सदस्य की स्थिति में, ऐसी यात्रा के लिये, जो उसके द्वारा ऐसा सदस्य होने के नाते अपने कर्तव्यों और कृत्यों के सम्बन्ध में अपनी अपेक्षित उपस्थिति के लिए और ऐसी उपस्थिति के पश्चात अपने निवास स्थान को वापस जाने के लिए;
7. मंत्री अध्यक्ष आदि द्वारा यात्रा
धारा 5 में निर्दिष्ट रेल कूपन का उपयोग प्रत्येक सदस्य द्वारा, जो धारा 2 के खण्ड (च) में उल्लिखित किसी पद पर आसीन है, अपने लिए और अपने परिवार के सदस्यों के लिये, शासकीय कर्तव्यों के पालन से भिन्न प्रयोजनों के लिये उत्तराखण्ड के भीतर या बाहर किसी भी समय किसी रेल द्वारा किसी श्रेणी में यात्रा के लिये विहित रीति से किया जा सकता है।
8. रेल कूपन की विधि मान्यता
इस अध्याय के अधीन जारी किया गया रेल कूपन ऐसी अवधि के लिए विधिमान्य होगा, और प्रत्येक अप्रयुक्त कूपन सचिव / प्रमुख सचिव को, ऐसी रीति से लौटा दिया जायेगा, जो विहित की जाय।
9. बस द्वारा यात्रा
- (1) प्रत्येक सदस्य उत्तराखण्ड परिवहन निगम की बस जिसके अन्तर्गत वातानुकूलित या डीलक्स बस भी है, के द्वारा, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन देय यात्री कर भुगतान किये बिना, किसी भी समय यात्रा करने के लिए विहित रीति से निःशुल्क असंक्रमणीय बस पास का हकदार होगा।
- (2) उपधारा
- (1) में निर्दिष्ट सुविधा का उपयोग सदस्य द्वारा बस में अपने साथ एक सहवर्ती को ले जाने के लिए भी किया जा सकता है;
- (3) प्रत्येक व्यक्ति, जो अध्याय ग्यारह के अधीन पेंशन का हकदार है, उत्तराखण्ड परिवहन निगम की बस द्वारा, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन देय यात्री कर का भुगतान किये बिना, किसी भी समय यात्रा करने के लिए विहित रीति से निःशुल्क असंक्रमणीय बस पास का भी हकदार होगा; परन्तु यह कि यदि उक्त में निर्दिष्ट व्यक्ति किसी वातानुकूलित या डीलक्स बस में यात्रा करता है, तो उसे किराये की अधिक धनराशि का वहन स्वयं करना होगा।
- (4) उपधारा
- (3) में निर्दिष्ट पास का उपयोग ऐसे व्यक्ति द्वारा बस में अपने साथ एक सहवर्ती को ले जाने के लिए भी किया जा सकता है।
10. आनुषंगिक व्यय
प्रत्येक सदस्य को, ऐसे सदस्य के रूप में, अपने कर्तव्यों या कृत्यों के सम्बन्ध में अपनी उपस्थिति के लिए, ऐसी दरों पर और ऐसी शर्तों तथा निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए, जैसी विहित की जाय, निम्नलिखित दशाओं में आनुषंगिक व्यय देय होगा, अर्थात् - (क) यथास्थिति, सभा के प्रत्येक सत्र में या उसकी किसी समिति के किसी उपवेशन में उपस्थिति होने के लिए किसी कलेण्डर मास में अधिक से अधिक दो बार, केवल उपवेशन के स्थान पर आने के लिए और अपने निवास स्थान को वापस जाने के लिए की गयी यात्रा के लिए; परन्तु यह कि यदि कोई सदस्य एक ही कलेण्डर मास में दो या अधिक समितियों के उपवेशन में भाग लेता है तो इस खण्ड के अधीन आनुषंगिक व्यय, किसी भी दशा में, ऐसे मास में चार से अधिक बार देय होंग (ख) अध्यक्ष द्वारा बुलाई गई किसी बैठक में उपस्थित होने के लिये, बैठक के स्थान पर आने के लिये और अपने निवास स्थान को वापस जाने के लिये की गयी यात्रा के लिये; (ग) समिति के ऐसे कार्य के संबंध में, जो समिति की बैठक से भिन्न हो, किसी समिति के सभापति के रूप में, उसके द्वारा किसी कलेण्डर मास में अधिक से अधिक दो बार देहरादून आने के लिये और अपने निवास स्थान को वापस जाने के लिये की गयी यात्राओं के लिये; (घ) संवैधानिक अध्ययन या किसी सेमिनार या पाठ्यक्रम के संबंध में लोक सभा के अध्यक्ष द्वारा या राज्य सभा के सभापति या किसी अन्य राज्य की विधान सभा के अध्यक्ष या उसके प्राधिकार से या भारतीय संसदीय अध्ययन संस्थान के द्वारा बुलाई गयी या किसी अन्य प्रकार से आयोजित किसी बैठक में उपस्थित होने के लिये की गयी यात्राओं के लिये; परन्तु ऐसा सदस्य धारा 2 के खण्ड (ख) में यथा परिभाषित अध्यक्ष द्वारा ऐसी बैठक में उपस्थित होने के लिये नाम-निर्दिष्ट किया गया हो; परन्तु यह और कि ऐसी किसी बैठक में भाग लेने के लिये पाँच से अधिक सदस्य नाम निर्दिष्ट नही किये जायेंगे और कोई ऐसा नाम-निर्देशन एक वर्ष में दो बार से अधिक के लिये नहीं किया जायेगा।
11. दैनिक भत्ता
- (1) प्रत्येक सदस्य, चाहे वह धारा 2 के खण्ड (च) में निर्दिष्ट किसी पद पर आसीन हो या न हो, पाँच सौ रूपये प्रतिदिन की दर से दैनिक भत्ता का हकदार होगा, जिसकी संगणना निम्नलिखित सिद्धान्तों के अनुसार की जायेगी, अर्थात- (एक) उक्त भत्ता, सभा के सत्र के दौरान या उसकी किसी समिति के किन्ही उपवेशनों में, प्रत्येक दिन की उपस्थिति के लिये देय होगा; (दो) उक्त भत्ता, यथास्थिति, सभा के लगातार उपवेशन के एक दिन पूर्व और एक दिन पश्चात के लिये भी देय होगा यदि सदस्य, उन दिनों में ऐसे लगातार उपवेशन के स्थान पर उपस्थित हो; (तीन) उक्त भत्ता, यथास्थिति, सभा के या समिति के किसी लगातार उपवेशन के दौरान स्थगन के दिनों के लिये और ऐसे लगातार उपवेशनों के बीच पड़ने वाली छुट्टी के दिनों के लिये भी देय होगा, यदि सदस्य ऐसे सभी दिनों में उपवेशन के स्थान पर उपस्थित हो; (चार) उक्त भत्ता चार से अनधिक ऐसे दिनों के लिये भी देय होगा, जो सभा के या उसकी समिति के किसी उपवेशन के अन्तिम दिन और उसी या किसी अन्य समिति के या सभा के उपवेशन के प्रथम दिन के बीच पड़े, यदि सदस्य ऐसे सभी दिनों उपवेशन के स्थान पर उपस्थित हो; (पाँच) जहाँ खण्ड (तीन) या खण्ड (चार) के अधीन आने वाली किसी स्थिति में, कोई सदस्य उपवेशन के स्थान से अपने निवास स्थान या अपने निर्वाचन क्षेत्र को चला जाए, वहां वह धारा 10 में किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के उपबन्धों के अनुसार दैनिक भत्ता का, या धारा 10 के अनुसार आनुषंगिक व्यय का इनमें जो भी कम हो, हकदार होगा। (छ) उक्त भत्ता किसी सदस्य को किसी समिति के सभापति के रूप में, समिति की बैठक से भिन्न ऐसी समिति के कार्य के संबंध में भी देहरादून आने पर यदि इस धारा के किसी अन्य उपबन्ध के अधीन उसे कोई ऐसा भत्ता अन्यथा देय नहीं है, देय होगा, परन्तु कोई ऐसा भत्ता एक कलेण्डर मास में अधिक से अधिक दो बार आने पर और एक बार के लिए अधिक से अधिक दो दिन के लिए देय होगा। (सात) उक्त भत्ता धारा 10 के खण्ड (घ) में निर्दिष्ट किसी बैठक, सेमिनार या अध्ययन पाठ्यक्रम में उपस्थिति के लिये भी देय होगा।
- (2) प्रत्येक सदस्य उन दिनों के लिये भी जिनमें वह जनसेवा के कार्यों के लिये दौरा करें और जिसके लिये उपधारा
- (1) के अधीन दैनिक भत्ता या धारा 10 के अधीन आनुषंगिक व्यय अनुमन्य न हो या न सकता हो, दो सौ पचास रूपये प्रतिदिन की दर से दैनिक भत्ते का हकदार होगा।
- (3) उपधारा
- (1) में दी गयी किसी बात के होते हुए भी धारा 2 के खण्ड (च) में निर्दिष्ट किसी पद पर आसीन सदस्य और नेता विरोधी दल को उसके सम्पूर्ण कार्यकाल में, जिसमें वह ऐसे पद पर आसीन है; प्रत्येक दिन के लिये दो सौ पचास रूपये प्रतिदिन की दर से दैनिक भत्ता देय होगा, सिवाय उन दिनों के, जिनके लिये वह उपधारा
- (1) के अधीन दैनिक भत्ता का दावा करें। स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए किसी उपवेशन को लगातार समझा जायेगा, यदि किसी बैठक के अन्तिम दिन और दूसरी बैठक के प्रथम दिन के बीच दिनों की संख्या चार से अधिक न हो।
12. सचिवीय भत्ता
सभा का प्रत्येक सदस्य, चाहे वह धारा 2 के खण्ड (च) में निर्दिष्ट किसी पर आसीन हो या न हो, जिसमें नेता दल विरोधी भी सम्मिलित है, अपनी सदस्यता की अवधि में या, यथास्थिति, अपने सम्पूर्ण कार्यकाल में, जिसमें वह ऐसे पद पर आसीन है, छः हजार रूपये प्रतिमास की दर से सचिवीय भत्ता पाने का हकदार होगा।
13. आवास की व्यवस्था
- (1) प्रत्येक सदस्य (जिसके अन्तर्गत संसदीय सचिव भी है) अपनी सदस्यता की अवधि और ऐसी अग्रेतर अवधि, जैसी विहित की जाय, के लिए देहरादून में ऐसे आवास का किराये का भुगतान किये बिना, उपयोग करने का हकदार होगा, जिसकी उसके लिये व्यवस्था की जाय।
- (2) प्रत्येक सदस्य जिसके उपयोग के लिए उपधारा
- (1) के अधीन देहरादून में आवास की व्यवस्था की गयी हो, उक्त उपधारा में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के ठीक पश्चात ऐसे आवास को रिक्त कर देगा और राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी इस आवास का कब्जा ले सकेगा और इस प्रयोजन के लिए ऐसे बल का भी प्रयोग कर सकेगा, जो उन परिस्थितियों में आवश्यक हो। स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए सदस्य के अन्तर्गत ऐसा व्यक्ति भी है जो सदस्य न रह गया हो।
- (3) जहां किसी सदस्य के लिए किसी आवास की व्यवस्था न की गयी हो, वहां वह तीन सौ रूपये प्रति मास की दर से आवास भत्ता पाने का हकदार होगा; परन्तु सरकारी आवास सदस्य को आवंटित होने की दशा में यह धनराशि देय नहीं होगी।
- (4) जहां किसी सदस्य के लिए ऐसे आवास की व्यवस्था की जाय, जिनका मानक किराया तीन सौ रूपये प्रतिमास से कम हो, वहां किराये के अन्तर का भुगतान ऐसे सदस्य को प्रतिकर आवास भत्ता के रूप में किया जायेगा और जहां इस प्रकार व्यवस्थित आवास का मानक किराया उक्त धनराशि से अधिक हो, वहां किराये के अन्तर को सदस्य से वसूल किया जा सकेगा। स्पष्टीकरण- किसी सदस्य के लिए आवास की व्यवस्था उस दिनांक को की गयी समझी जायेगी, जब उसके पक्ष में उसे प्रदिष्ट करने की सूचना उसे दे दी जाय, चाहे ऐसा सदस्य प्रदेषण को स्वीकार करे या न करें या आवास पर अध्यासन करें या न करें।
14. आवास व्यवस्था के संबंध में राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति
- (1) धारा 13 के अधीन आवास के प्रदेशन के प्रयोजनों के लिये राज्य सरकार नियम बना सकती है, जिनमें निम्नलिखित बातों की व्यवस्था की जायेगी, अर्थात- (क) आवास का, जिसके लिये कोई सदस्य हकदार होगा, मानक निर्धारित करना, (ख) ऐसे प्रत्येक आवास को सुसज्जित करने के मानक निर्धारित करना, (ग) किसी आवास का मानक किराया नियत करना, एवं (घ) राज्य सरकार द्वारा समस्त व्यय का जिसके अन्तर्गत विद्युत और जल का व्यय भी है, भुगतान किये जाने के लिये और ऐसे आवास में जल और विद्युत के सम्भरण को विनियमित करने के लिये उपबन्ध बनाना।
- (2) उपधारा
- (1) में निर्दिष्ट नियम उन सदस्यों के संबंध में भी बनाये जा सकते हैं, जो धारा 2 के खण्ड (च) में निर्दिष्ट किसी पद पर आसीन हों।
15. सदस्यों को अग्रिम
राज्य सरकार किसी व्यक्ति को, जो सदस्य है, चाहे वह धारा 2 के खण्ड (च) में निर्दिष्ट किसी पद पर आसीन हो या न हो, या जो सभा के सदस्य के रूप में पद पर आसीन रहा हो, निवास स्थान का निर्माण या क्रय करने के लिये या वाहन क्रय करने के लिये ऐसे निबन्धन और शर्तों के अनुसार, जैसी विहित की जाय, पाँच लाख रूपये से अनधिक प्रतिसंदेय अग्रिम ऋण स्वीकृत किये जाने की व्यवस्था कर सकती है।
16. सदस्यों को टेलीफोन सुविधा
"प्रत्येक सदस्य देहरादून में और अपने सामान्य निवास स्थान पर या अपने निर्वाचन क्षेत्र में टेलीफोन (मोबाईल फोन तथा बेसिक फोन) सम्बन्धी ऐसी सुविधाओं का हकदार होगा, जैसी विहित की जायें।"
17. चिकित्सा सुविधायें
सभा का प्रत्येक सदस्य, चाहे वह धारा 2 के खण्ड (च) में उल्लिखित किसी पद पर आसीन हो या न हो, ऐसे सिद्वान्तों के अनुसार, जो विहित किये जायें, निम्नलिखित चिकित्सा सुविधा (सुविधाओं) का हकदार होगा, अर्थात- (क) राज्य सरकार द्वारा स्थापित या अनुरक्षित किसी अस्पताल या औषधालय में प्रदान की जाने वाली वाह्य चिकित्सा और सुविधाओं के बदले में जिसके अन्तर्गत औषधियां भी हैं, छ: हजार रूपये, प्रतिमास की धनराशि का दिया जाना, (ख) ऐसे अस्पताल में अपने लिये और अपने परिवार के सदस्यों के लिये, जिन्हें अस्पताल में चिकित्सा के लिये भर्ती करना अपेक्षित हो, निःशुल्क स्थान और चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराया जाना।
18. नेता विरोधी दल को वेतन, आवास, सवारी तथा अन्य सुविधायें
नेता विरोधी दल ऐसे वेतन, आवास, सवारी तथा ऐसी अन्य सुविधायें पाने का हकदार होगा, जो मन्त्रिमण्डल के किसी सदस्य को उत्तर प्रदेश मंत्री (वेतन भत्ता और प्रकीर्ण उपबन्ध) अधिनियम, 1981 (उत्तराखण्ड राज्य में यथा प्रवृत्त) की धारा 3,4,5,6,7 और 8 के उपबन्धों के अधीन अनुमन्य है और उक्त धाराओं के और उनसे सम्बन्धित नियमों के उपबन्ध, यथावश्यक परिवर्तनों सहित, नेता विरोधी दल के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे, जैसे वे मन्त्रिमण्डल के किसी सदस्य के संबंध में लागू होते हैं।
19. कतिपय पदो का अर्थ
इस अध्याय के प्रयोजनार्थ- (क) पद 'सभा' के अन्तर्गत यूनाइटेड प्राविन्सेंस लेजिस्लेटिव असेम्बली भी है- (एक) जिसने इस रूप में, इंडियन इंडिपेंडेन्स एक्ट, 1947 के, प्रारम्भ होने के पूर्व या पश्चात, गवर्नमेंट आफ इंडिया एक्ट, 1935 के अधीन गठन के पश्चात कार्य किया, या (दो) जिसने 'भारत का संविधान' के अधीन राज्य के लिये अस्थायी विधान मण्डल के रूप में कार्य किया। (ख) 'एक वर्ष', से बारह कलेण्डर मास की अवधि अभिप्रेत है, (ग) जिस अवधि मे कोई व्यक्ति सभा में अपनी सदस्यता के आधार पर धारा 2 के खण्ड (च) में उल्लिखित किसी पद पर आसीन रहा हो, उस अवधि की भी गणना, ऐसी सदस्यता की अवधि अवधारित करने के लिये, की जायेगी।
20. भूतपूर्व सदस्यों को पेंशन
- (1) प्रत्येक व्यक्ति जिसने सभा के सदस्य के रूप में किसी भी अवधि के लिये कार्य किया हो, अपने जीवनपर्यन्त छ: हजार रूपये प्रतिमास की दर से पेंशन का हकदार होगा; परन्तु जहाँ किसी व्यक्ति ने, उपर्युक्तानुसार, एक वर्ष से अधिक अवधि के लिये कार्य किया हो, वहाँ वह एक वर्ष से अधिक प्रत्येक पूर्ण वर्ष के लिये पाँच सौ रूपये प्रतिमास की दर से अतिरिक्त पेंशन पाने का हकदार होगा; परन्तु यह और कि विधान सभा भंग होने की स्थिति में, विधान सभा के भंग होने की तिथि से नयी विधान सभा के प्रथम उपवेशन तक की अवधि की गणना ऐसे सदस्य के पेंशन प्रयोजनों के लिये की जायेगी, जो भंग विधान सभा का अध्यक्ष रहा हो और उक्त अवधि के दौरान इस रूप में अपने पद पर आसीन रहा हो। स्पष्टीकरण- जहाँ किसी व्यक्ति ने सभा के सदस्य के रूप में छ: माह या उससे अधिक किन्तु एक वर्ष से कम अवधि के लिये कार्य किया हो, वहाँ इस धारा के प्रयोजनार्थ यह समझा जायेगा कि उस व्यक्ति ने एक वर्ष के लिये सदस्य के रूप में कार्य किया है।
- (2) जहाँ उपधारा
- (1) के अधीन पेंशन का हकदार कोई व्यक्ति किसी अन्य पेंशन का भी हकदार हो, वहाँ ऐसा व्यक्ति, ऐसी पेंशन के साथ-साथ, उपधारा
- (1) के अधीन पेंशन पाने का हकदार होगा।
21. कतिपय व्यक्तियों को पेंशन की सुविधायें
जहाँ कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन पेंशन या अतिरिक्त पेंशन का इस आधार पर हकदार हो जाता है कि उसने पहली जनवरी, 1946 के पूर्व गठित या विद्यमान सभा के सदस्य के रूप में कार्य किया है, वहाँ ऐसी पेंशन या अतिरिक्त पेंशन, ऐसे व्यक्ति को दिनांक पहली जनवरी, 1977 से देय समझी जायेगी।
22. पेंशन कब देय नही होगी
धारा 20 में किसी बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति, निम्नलिखित स्थिति में, इस अध्याय के अधीन कोई पेंशन पाने का हकदार न होगा, अर्थात- (क) जहां कोई व्यक्ति केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी के अधीन सवेतन नियोजित हो, या ऐसी सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण के अधीन किसी निगम से या किसी स्थानीय प्राधिकारी से कोई पारिश्रमिक पाने का अन्यथा हकदार हो जाय और ऐसा वेतन या पारिश्रमिक प्रतिमास, धारा 20 के अधीन अनुमन्य पेंशन की धनराशि के बराबर या इससे अधिक, हो और वह इस प्रकार नियोजित या ऐसा पारिश्रमिक पाने का हकदार बना रहे; (ख) जहां कोई व्यक्ति राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के पद पर निर्वाचित किया जाय या किसी राज्य के राज्यपाल या किसी संघ राज्य क्षेत्र के प्रशासक के पद पर नियुक्त किया जाय और ऐसे पद पर आसीन रहे; (ग) किसी राज्य की विधान सभा या संसद के किसी भी सदन के सदस्य के रूप में निर्वाचित या नाम निर्दिष्ट किया जाय और ऐसा सदस्य बना रहे; (घ) जहां कोई व्यक्ति भारत का नागरिक न रह जाय।
23. कतिपय मामलों में पेंशन की धनराशि
जहां धारा 22 के खण्ड (क) में उल्लिखित परिस्थितियों में, कोई व्यक्ति धारा 20 के अधीन अनुमन्य पेंशन की धनराशि से कम धनराशि की कोई पेंशन, वेतन या पारिश्रमिक का हकदार हो, वहाँ धारा 20 के अधीन ऐसे व्यक्ति को देय पेंशन उतनी धनराशि की होगी, जितनी से ऐसी पेंशन, वेतन या पारिश्रमिक धारा 20 के अधीन अनुमन्य पेंशन की धनराशि से कम पड़ती हो।
24. वेतन आदि का त्याग
कोई व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन किसी वेतन, भत्ता या अन्य सुविधाओं का हकदार है; ऐसा सम्पूर्ण वेतन, भत्ता या सुविधा या उसके किसी भाग को, अध्यक्ष को लिखित सूचना देकर त्याग सकता है; परन्तु ऐसी किसी त्यजन को वह किसी भी समय, अध्यक्ष को लिखित सूचना देकर भविष्यलक्षी प्रभाव से रदद कर सकता है।
25. सदस्यों के वेतन बिल से सरकारी एवं अन्य देयों की वसूली
- (1) जब कभी किसी सदस्य पर किसी सरकारी देय (जैसे आवास किराया या प्रभार, टेलीफोन देय-इत्यादि) के बकाया होने की सूचना दी जाय और उसके समर्थन में सम्बद्ध अधिकारी से समुचित मांग या बिल प्राप्त हो, और ऐसा सदस्य, ऎसे देय का भुगतान न करें, तब ऎसे देय के बराबर धनराशि, या जहां सरकार द्वारा किसी सदस्य को प्रति सन्देह अग्रिम की व्यवस्था की गयी हो, वहां ऎसे सदस्य द्वारा देय ऎसे अग्रिम या उसकी किन्हीं किस्त के बराबर धनराशि ब्याज सहित, यदि कोई हो, सचिव द्वारा ऎसे सदस्य के वेतन या यात्रा या दैनिक या प्रतिकर आवास या किसी अन्य भत्ता बिल से काट ली जायेगी;
- (2) ऎसे किसी व्यक्ति की दशा में, जो सदस्य न रह जाय या जो उस समय सदस्य न हो, तब उसे सरकार द्वारा कोई प्रतिसंदेय अग्रिम दिया गया हो, उपधारा
- (1) में निर्दिष्ट धनराशि, उस व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन देय पेंशन की धनराशि से किसी अन्य धनराशि से काट ली जायेगी; परन्तु यह कि यदि ऎसे व्यक्ति के विरुद्ध कोई सरकारी धन या सामान हो, चाहे वह उसके सदस्य रहने की अवधि का हो या उसके सदस्य न रह जाने की अवधि का हो, तो उसकी कटौती ऎसे व्यक्ति के पेंशन की जायेगी।
- (3) . साधारनतया, किसी सदस्य पर बकाया किन्ही गैर सरकारी देयों की वसूली, उसके वेतन या भत्तों से नही की जायेगी किन्तु जहां ऎसी देय धनराशि उसके संसदीय कर्तव्यों के दौरान उसको दी गयी किन्ही सेवाओं के कारण हो, जैसे जब वह किसी समिति के साथ दौरे पर हो, और ऎसी सेवाओं के लिए व्यवस्था राज्य विधान सभा के अधिकारियों के अनुरोध पर अर्ध सरकारी संस्थाओं, या निजी पार्टियों या उनके अनुरोध पर की गयी हो, और ऎसा सदस्य ऎसे देयों का भुगतान नही करता है, वहां उसकी वसूली ऎसे सदस्य के वेतन या यात्राओं या दैनिक भत्ता बिलों से की जा सकती है।
26. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति
- (1) राज्य सरकार, किसी कठिनाई, विशेष रूप से धारा 28 द्वारा निरसित अधिनियमित के उपबन्धों से इस अधिनियम के उपबन्धों के संक्रमण से सम्बन्धित कठिनाइयों को दूर करने के प्रयोजनार्थ, सरकारी गजट में प्रकाशित आदेश द्वारा निर्देश दे सकती है कि इस अधिनियम के उपबन्ध ऎसी अवधि में जैसी आदेश में विनिर्दिष्ट की जाय, ऎसे अनुकूलनों के अधीन रहते हुए, चाहे वे उपान्तर, परिवर्द्धन या लोप के रूप में हो, जिन्हें वह आवश्यक या समीचीन समझे, प्रभावी होंगे; परन्तु ऎसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारम्भ से दो वर्ष की समाप्ति के पश्चात नही दिया जायेगा।
- (2) . उपधारा
- (1) के अधीन दिया गया प्रत्येक आदेश, राज्य विधान सभा के समक्ष रखा जायेगा।
- (3) . उपधारा
- (1) के अधीन किसी आदेश पर किसी न्यायालय में इस आधार पर आपत्ति नही की जायेगी कि उपधारा
- (1) में यथानिविष्ट कोई कठिनाई विद्यमान नही थी या उसे दूर करना अपेक्षित नही था।
27. नियम बनाने की शक्ति
राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है।
28. निरसन एवं व्यावृत्ति
- (1) उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश विधान सभा (सदस्यों की उपलब्धियां और पेंशन) अधिनियम, 1980) अनुकूलन एवं उपान्तरण आदेश, 2007 एतदद्वार निरसित किया जाता है।
- (2) ऎसे निरसन के होते हुए भी, उपधारा
- (1) में निर्दिष्ट अधिनियम, यथा संशोधित मूल अधिनियम के उपबन्धों के अधीन कृत कोई कार्य या कार्यवाही, इस अधिनियम द्वारा तत्समान उपबन्धों के अधीन कृत कार्य या कार्यवाही समझी जायेगी मानों ऎस अधिनियम के सभी उपबन्ध सारवान समय पर प्रवृत्त थे।
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