section 9
बोर्ड के कृत्य
The Chhattisgarh Gramodyog Adhiniyam, 1978(१) (१) बोर्ड का यह कर्तव्य होगा कि वह ग्रामोद्योगों का संगठन, विकास तथा विनियमन करें। (२) उपधारा (१) के उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड विशिष्टतया निम्नलिखित समस्त कर्तव्यों तथा कृत्यों का या उनमें से किसी भी कर्तव्य एवं कृत्य का निर्वहन तथा पालन भी करेगा, अर्थात् :— (क) ग्रामोद्योगों को प्रारम्भ करना, उन्हें प्रोत्साहन देना, उनकी सहायता करना तथा उन्हें चलाना और ऐसे उद्योगों से सम्बन्धित व्यापार या कारबार करना तथा ऐसे व्यापार या कारबार से आनुषंगिक पदार्थों का व्यापार या कारबार करना, (ख) ग्रामोद्योगों के लिए सहकारी सोसायटियों की स्थापना को प्रोत्साहन देना, (ग) ग्रामोद्योगों को प्रारम्भ करने या चलाने के लिए लोगों को आवश्यक जानकारी जुटाने की दृष्टि से प्रशिक्षण केन्द्रों का संचालन करना और उनमें लोगों को प्रशिक्षित करना या मध्यप्रदेश राज्य के भीतर या बाहर की किसी संस्था में ऐसे प्रशिक्षण की व्यवस्था करना, (घ) (एक) ग्रामोद्योगों को चलाने के लिए अपेक्षित औजारों तथा उपकरणों का विनिर्माण करना तथा ऐसे उद्योगों के उत्पादों का निर्माण करना, और (दो) उक्त प्रयोजन के लिए अपेक्षित कच्चे माल तथा औजारों एवं उपकरणों के लिए व्यवस्था करना, और (तीन) उक्त उद्योगों के उत्पादों का विक्रय करना तथा उनके विक्रय के लिए व्यवस्था करना, (ङ) भंडार, दुकानें, विक्रयलय (एम्पोरियम) खोलकर या प्रदर्शनियां लगाकर ग्रामोद्योगों के तैयार उत्पादों का प्रचार करने तथा उन्हें लोकप्रिय बनाने के लिए व्यवस्था करना तथा इस प्रयोजन के लिए यथोचित उपाय करना, (च) ऐसे उद्योगों के पक्ष लोकमत बनाने के लिए तथा ऐसे उद्योगों के उत्पादों को संरक्षण देने के फायदे जनता के मस्तिष्क में बैठाने के लिए प्रयास करना, (छ) ग्रामोद्योगों की विशेषज्ञों की सलाह तथा मार्गदर्शन चाहना तथा अभिप्राप्त करना, (ज) ग्रामोद्योगों की समुचित योजना से आनुषंगिक सर्वेक्षण करना, सांख्यिकी संग्रहीत करना तथा ठोस योजना से आनुषंगिक समस्त कार्य हाथ में लेना, (झ) ग्रामोद्योगों के क्षेत्रीय तथा अखिल भारतीय सम्मेलनों, सम्मेलनों या प्रदर्शनियों में भाग लेना और राज्य में ऐसे सम्मेलनों, सम्मेलनों या प्रदर्शनियों का आयोजन करना, (ञ) ऐसे अन्य क्रियाकलाप करना जो इस अधिनियम के उद्देश्यों से आनुषंगिक हों, तथा उनके लिए प्रेरक हो, और (ट) ऐसे अन्य कर्तव्यों का निर्वहन करना तथा ऐसे अन्य कृत्यों का पालन करना जैसे कि विहित किये जायें या जैसे कि राज्य सरकार इस अधिनियम के उद्देश्यों को कार्यान्वित करने के प्रयोजनों से निर्दिष्ट करें।
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