section 28
नियम बनाने की राज्य सरकार की शक्ति
The Chhattisgarh Gramodyog Adhiniyam, 1978General197840 sections
Statutory text
- (1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी। (2) विशिष्टया तथा पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित समस्त विषयों के लिए या उनमें से किसी भी विषय के लिए उपबन्ध हो सकेंगे, अर्थात् :— (क) राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किये गये सदस्यों की पदावधि, रिक्तियों की पूर्ति करने की रीति तथा सदस्यों द्वारा कृत्यों का निर्वहन किया जाने में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया। (ख) वे शक्तियाँ जिनका कि संचालक द्वारा प्रयोग किया जा सकेगा तथा वे कृत्य जिनका कि उसके द्वारा पालन किया जायगा। (ग) वे कर्तव्य जिनका कि बोर्ड द्वारा निर्वहन किया जा सकेगा तथा वे कृत्य जिनका बोर्ड द्वारा पालन किया जायगा। (घ) वे परिस्थितियाँ जिनमें तथा वह प्राधिकारी जिसके द्वारा किसी सदस्य को हटाया जा सकेगा। (ङ) प्रतिवर्ष एक निश्चित न्यूनतम संख्या में बोर्ड के सम्मेलनों का किया जाना। (च) वह प्रक्रिया जिसका बोर्ड के सम्मेलनों में कामकाज के संचालन के लिए अनुसरण किया जायगा तथा सदस्यों की वह संख्या जिससे किसी सम्मेलन में गणपूर्ति होगी। (छ) बोर्ड द्वारा किये गये कामकाज के अभिलेखों का बोर्ड द्वारा रखा जाना तथा उनकी प्रतिलिपियों का राज्य को प्रस्तुत किया जाना। (ज) व्यय ळपगत करने के सम्बन्ध में बोर्ड, उसके अध्यक्ष तथा बोर्ड की समितियों की शक्तियाँ। (झ) वह रीति तथा प्रारूप जिसमें संविदा की जाये। (ञ) वे विशिष्टियाँ जो कार्य के प्रोग्राम में अन्तर्विष्ट होगी। (ट) वह प्रारूप जिनमें तथा वह तारीख किस तक बोर्ड द्वारा राज्य सरकार को अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया जायगा। (ठ) वह रीति जिसमें वार्षिक रिपोर्ट तैयार की जायगी तथा राज्य सरकार को अग्रेषित की जायगी। (ड) वे लेखा-पुस्तकें जो कि बोर्ड द्वारा बनाये रखी जायेंगी। (ढ) वह रीति जिसमें लेखे का वार्षिक विवरण तैयार किया जायगा। (ण) वह प्रारूप तथा रीति जिसमें तथा वह समय जिस तक सांख्यिकी, विवरणियां, विशिष्टियाँ या विवरण प्रस्तुत किये जायेंगे। (त) वे निबन्धन तथा शर्त, जिनके कि अध्यधीन रहते हुए बोर्ड अपनी शक्तियाँ तथा कृत्य बोर्ड के अध्यक्ष, प्रबंध संचालक या अधिकारियों को प्रत्यायोजित कर सकेगा। (थ) वित्तीय सलाहकार की सेवा के निबन्धन तथा शर्तें। (द) वह प्रारूप जिसमें कलेक्टर को बकाया की वसूली के लिए आवेदन किया जायगा। (ध) कोई अन्य विषय जो इस अधिनियम के अधीन के नियमों द्वारा विहित किया जाना हो या विहित किया जाय, या उपबंधित किया जाना हो या उपबंधित किया जाय। (3) इस अधिनियम के अधीन बनाये गये समस्त नियम विधान सभा के पटल पर रखे जायेंगे।
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