section 23
Power to issue detention orders
The Chhattisgarh Rajya Suraksha & Lok Vyavashtha Act, 1980प्रभाि डालने से िाली रीनत से कायब करने से रोकने की दृक्ष्ट से ऐसा करना आिश्यक है, या ननदेलशत करते हुए आदेश कर सकेगी क्रक व्यक्तत को ननरुद्ि क्रकया जाय । स्पष्टीकरि - - इस उपिारा में अलभव्यतत ''लोक व्यिस्था के र्नाये रिने पर प्रनतकूल प्रभाि डालने िाली रीनत से कायब करने'' के अन्तगबत आता है कोई ऐसा कायब क्जससे - - (एक) भारतीय दण्ड संदहता, 1860 (1860 का सं. 45) के अध्याय 16 के अिीन; (दो) उतत संदहता की िारा 506 या 509 के अिीन; और (तीन) लसविल अधिकार संरिा अधिननयम, 1955 (1955 का सं. 22) के अिीन, दण्डनीय कोई अपराि और पूिोतत अपरािों का दुष्प्रेरण गदठत होता है । (2) उपिारा (1) में उपर्ंधित क्रकये गये अनुसार समािान हो जाने पर, ननम्नललखित अधिकाररयों में से कोई अधिकारी भी उतत उपिारा द्िारा प्रदर्त् शक्ततयों का प्रयोग कर सकेगा - - (क) क्जला मक्जस्रेट ; (ि) अपर मक्जस्रेट, जो राज्य सरकार द्िारा इस ननलमर्त् विशेष रूप से सशतत क्रकये गये हो । (3) जर् इस िारा के अिीन कोई आदेश उपिारा (2) में िखणबत क्रकसी अधिकारी द्िारा क्रकया जाता है तर् िह उस तथ्य की ररपोटब राज्य सरकार को तुरन्त भेजेगा और साथ में िे आिार, क्जन पर आदेश क्रकया गया हो, और ऐसी अन्य विलशक्ष्टयों भी, जो उसकी राय में, मामले से सम्र्क्न्ित हों, भेजेगा और कोई ऐसा आदेश, उसके क्रकये जाने के पश्चात्, र्ारह ददन से अधिक के ललए प्रिृर्त् नहीं रहेगा जर् तक क्रक इस र्ीच राज्य सरकपर द्िारा उसे अनुमोददत न कर ददया गया हो: परन्तु जहाँ ननरोि के आिार पर आदेश करने िाले प्राधिकारी द्िारा ननरोि की तारीि से पांच ददन के पश्चात् क्रकन्तु दस ददन के भीतर िारा 41 के अिीन संसूधचत कर ददये जाते हैं, िहाँ यह उपिारा इस उपान्तरण के साथ लागू होगी मानो क्रक शब्द ''र्ारह ददन'' के स्थान पर शब्द ''पन्रह ददन'' स्थावपत कर ददये गये हैं ।
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