section 12
Removal of persons convicted of certain offences
The Chhattisgarh Rajya Suraksha & Lok Vyavashtha Act, 1980यदद कोई व्यक्तत, (क) (एक) भारतीय दण्ड संदहता, 1860 (1860 का सं. 45) के अध्याय 12, 16 या 17 के या उसकी िारा 506 या 509 के अिीन क्रकसी अपराि का; या (दो) लसविल अधिकार संरिण अधिननयम, 1955 (1955 का सं. 22) के अिीन क्रकसी अपराि का; या (ि) स्त्री तथा लड़की अनैनतक व्यापार दमन अधिननयम, 1956 (1956 सं. 104) के अिीन क्रकसी अपराि का दो र्ार; या (ग) मध्यप्रदेश राज्य में लागू हुए रूप में सािबजननक द्युत अधिननयम, 1867 (1867 का सं. 3) की िारा 3 या 4 के अिीन क्रकसी अपराि का तीन िषब की कालािधि के भीतर तीन र्ार; लसद्िदोष ठहराया गया है तो क्जला मक्जस्रेट यदद उसके पास यह विश्िास करने का कारण हो क्रक ऐसे व्यक्तत के सम्र्न्ि में सम्भािना है क्रक िह उस अपराि क्जसके सम्र्न्ि में िह लसद्िदोष ठहराया गया था, समरूप कोई अपराि करने में स्ियं को पुनःसंलग्न करेगा, ऐसे व्यक्तत को यह ननदेश दे सकेगा क्रक िह क्जले या उसके भाग या ऐसे िेत्र या उसके समीपस्थ क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके/उनके भाग के र्ाहर, ऐसे मागब से तथा ऐसे समय के भीतर, जैसा क्रक क्जला मक्जस्रेट आदेश दे, चला जाय और यथाक्स्थनत उस क्जले या उसके भाग या ऐसे िेत्र तथा ऐसे समीपस्थ क्जलों या उनके भाग में, जहाँ से क्रक हट जाने का उसे ननदेश ददया गया था, प्रिेश न करे या न लौटे । स्पष्टीकरण - - इस िारा के प्रयोजन के ललए, अलभव्यक्तत ''उस अपराि के, क्जसके ललए जो व्यक्तत लसद्िदोष ठहराया गया था, समरूप अपराि'' से अलभप्रेत है - - (एक) िण्ड (क) में िखणबत अपराि के ललए लसद्िदोष ठहराये गये व्यक्तत के मामले में, उस िण्ड में िखणबत भारतीय दण्ड संदहता, 1860 (1860 का सं. 45) के अध्यायों या िाराओं में से क्रकसी के भी अन्तगबत आने िाले अपराि या उस िण्ड के उपिण्ड (2) में िखणबत अधिननयम के उपर्न्िों के अन्तगबत आने िाला अपराि; और (दो) िण्ड (ि) तथा (ग) में िखणबत अपराि के ललए लसद्िदोष ठहराये गये व्यक्तत के मामले में उतत िण्डों में िमश: िखणबत अधिननयमों के उपर्न्िों के अन्तगबत आने िाले अपराि ।
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